दीप महायज्ञ के माध्यम से युवा चेतना, संस्कृति और सनातन मूल्यों का वैश्विक संगम
अपने अंतरराष्ट्रीय प्रवास के अंतर्गत युवा आइकन, अखिल विश्व गायत्री परिवार एवं देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रति-कुलपति, आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी, ने बर्लिन में आयोजित यज्ञीय समारोह में मार्गदर्शन किया, जिसमें भारतीय एवं जर्मन युवाओं की उत्साहपूर्ण सहभागिता देखने को मिली।
युगऋषि परम पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी की तपःप्रज्वलित चेतना एवं वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा जी के अवतरण शताब्दी वर्ष के महोत्सव को समर्पित इस कार्यक्रम में अपने विचारपूर्ण उद्बोधन में डॉ. पंड्या जी ने उनके जीवन-दर्शन को रेखांकित करते हुए चरित्र निर्माण, आत्म-परिष्कार और मानव-सेवा के आदर्शों को आधुनिक जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया।
अपने संबोधन में उन्होंने गायत्री उपासना के महत्व पर प्रकाश डालते हुए नित्य उपासना, साधना एवं आराधना को संतुलित, उद्देश्यपूर्ण एवं आध्यात्मिक रूप से समृद्ध जीवन की अनिवार्य आधारशिला बताया।
यह यज्ञ सभी सहभागियों के लिए आस्था का पुनर्जागरण, चेतन जीवन की प्रेरणा और आत्म-परिष्कार के पथ पर अग्रसर होने का सशक्त संकल्प बनकर उभरा।
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