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Magazine - Year 1943 - Version 2

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आश्चर्य पूर्ण भविष्यवाणियाँ

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(लेखक- विद्याभूषण पं.मोहन शर्मा, विषारद, पूर्व सम्पादक ‘मोहिनी’)

आज का संसार हाहाकारमयी अवस्था में से गुजर रहा है, उसको देखते और अनुभव करते हुये मानव ने अन्तिम परिणाम के सम्बन्ध में बड़ी-बड़ी अटकलें लगाई हैं, इस एक बात के निर्णय के लिये विविध खोजों और भविष्य वाणियों के आधार पर आज नाना प्रकार की आश्चर्यमय और दिल दहला देने वाली बातें नित्य कही, सुनी और पढ़ी जा रही हैं। इन सब में सत्याँश और यथार्थता कहाँ तक कितनी है- इसका ठीक-ठीक जवाब तो आने वाला भविष्य और उसकी घटनाएं ही देंगी, परन्तु वर्षों से इस विषय में आशक्ति और दिलचस्पी रखने वाले जो सुनते और पढ़ते आ रहे थे उसका एक जीवित प्रमाण “वर्तमान महायुद्ध का तांडव नृत्य” आज हमारे सामने ही है और यह खण्डप्रलय जैसी दुर्घटना से कुछ कम नहीं है। अब तक करोड़ों मनुष्यों की इस महासंग्राम में आहुति पड़ चुकी है और इसके साथ ही साथ समग्र संसार में कठिनाइयों और दुखों का वेग उत्तरोत्तर वृद्धि ही पा रहा है। अतः आस्तिक मात्र के लिये यह मानने से कदापि इन्कार नहीं हो सकता कि इस भयंकर उथल पुथल के अनुष्ठान में विधातृ पुरुष! का अवश्य ही हाथ है और ऐसे दुर्निवार्य योग संसार में जीव मात्र के किसी भावी कल्याण को लेकर ही उपस्थित होते हैं। असत और कदाचार की बढ़ोत्तरी जब अपनी सीमा पार कर जाती है तब ही प्रसत रूपी अन्धकार को चीर कर सत्य सूर्य का दिव्यं लोक पृथ्वी भर में परिव्याप्त हो जाता है। प्रत्येक धर्म का प्राचीन इतिहास गौरव इसकी साक्षी करता है। इस भावी सत्योदय का आभास हमें संसार प्रसिद्ध ज्योतिविंदो की ज्योतिषक भविष्यवाणियों पर से भी कुछ-कुछ मिलता है, जिनमें से कुछ एक के आश्चर्यजनक उदाहरण पाठकों के लाभार्थ नीचे दिये जा रहे है। यद्यपि इनमें केवल युद्ध और खण्ड प्रलय जैसी भावी घटनाओं का उल्लेख आया है पर उनसे अन्तिम सुन्दर परिणाम की भी झलक मिलती है।

1-जगद्विख्यात श्वेताँग भविष्यवेत्ता नौस्ट्राडम का भविष्य कथन।

पंद्रहवीं शताब्दी के लगभग यूरोप में नौस्ट्राडम नामक एक महान ज्योतिष विज्ञानी पण्डित हो गया है, जिसने आगामी 7000 वर्षों के सम्बन्ध में प्रायः 100 भविष्यवाणियाँ की थी और जो प्रायः अब तक कालक्रम की कसौटी पर सत्य सिद्ध होती आ रही है। नौस्ट्राडम ने नैपोलियन बोनापार्ट महान के अभ्युदय और पतन का जैसा संकेत किया था, कालान्तर में वैसा ही हुआ। हिटलर के आगमन से संसार में महा विग्रह की ज्वालाएं फटने, फ्रान्स की मेजीनाट लाईन (किलाबन्दी) का असमय विध्वंस होने, बृद्धपेंता के आगमन और पुनः उनकी सत्ता लोप होने का उसका भविष्य कथन भी एक के बाद एक, सत्य होता चला आ रहा है वृद्धपेंता के आगमन की बात संसार के सामने ही है- अब इसके आगे क्या होगा- उसे भी दुनिया नौस्ट्राडम के इस भविष्य कथन से तौलकर देखेगी।

फ्रान्स की काया पलट के सम्बन्ध में उसने स्वलिखित भविष्यवाणियों में जिन घटनाओं का चित्रण किया था, वे आजतक बराबर घटित होती आई हैं, नौस्ट्राडम ने संसार के सुदूर भविष्य के सम्बन्ध में जो फलादेश वर्णन किया है, वह और भी आश्चर्यजनक तथा हृदय को कंपा देने वाला है। नौस्ट्राडम के कथनानुसार ‘सन् 1999 में एक भयंकर शत्रु उत्तर देशों का सम्राट आकाश मार्ग से योग्य रूप की धरणी पर अवतीर्ण होगा। इसकी भाषा, में सब ही विचित्र होंगे। हथियार आदि भी महाभयानक और संहारकारी होंगे। यह सम्राट उत्तर साइबीरिया की ओर से आवेगा। इसके बाद ही नौस्ट्राडम ने पेरिस के सर्वनाश और पतन की भी बात लिखी है। सन् 700 से संसार की पीठ पर महाप्रलय का ताण्डव नृत्य होगा और यह किसी महायुद्ध से नहीं वरन् भयंकर जल प्रलय से संसार का अन्त हो जायेगा। गोची का रेणु स्थल पुनः महा प्रशान्त समुद्र का रूप धारण करेगा। संसार का मानचित्र एकदम तब्दील हो जायेगा। आज जहाँ द्वीप समूह हैं, वहाँ समुद्र की लहरें गरजती लरजती दिखाई देंगी। जल के स्थान पर पृथ्वी और पृथ्वी के स्थान पर भयंकर जल पला वन का दुर्द्रश्य देखा जायेगा, परन्तु, नौस्ट्राडम ने यह कहा कि मानव जाति एकदम लुप्त प्रायः हो जायेगी बल्कि कुछ पुरुष इस महाप्रलय से भी जीते बचे रहेंगे और जो दुनिया को फिर से आबाद बनावेंगे।

2-हंगेरियन महिला ज्योतिषी बोरिस्का सिलवियर की भविष्यवाणी।

एक हंगेरियन महिला ज्योतिषी की, जिसने की सम्राट पच्चमजाँर्ज की मृत्यु और सम्राट अष्टम एडवर्ड के सिंहासन परित्याग की बिल्कुल ठीक भविष्यवाणी की थी, भविष्यवाणी है कि यूरोप की राजनैतिक अशान्ति शीघ्र ही परिसीमा पर पहुँच जायेगी और ऐसा महायुद्ध छिड़ेगा जो 1942 तक चलेगा। यह महिला मृत्यु, विनाश तथा दुनिया के रद्दोबदल की ऐसी भविष्यवाणी करती है कि दर्शकों और श्रोताओं को पूरा विश्वास हो जाता है हालांकि खुद उसे अपनी इस शक्ति का कोई मान नहीं है, वह तो केवल इतना जानती है कि किसी अद्भुत अज्ञात शक्ति के द्वारा वह भविष्य को जान जाती है। उसकी भविष्यवाणियाँ अक्सर कितनी सच होती हैं, यह सिद्ध करने के लिये वह संवाद पत्रों की कतरनों की एक बड़ी फाइल अपने पास रखती है।

3- प्रसिद्ध यूरोपीय दैवज्ञशीरो की भविष्यवाणी

“यूरोप की ईसाई जाति यहूदियों को पेलिस्टाईन में आबाद करेंगी जिसके कारण इस्लाम के रहनुमाँ ईसाइयों के सख्त खिलाफ हो जायेंगे। टर्की, रूस की सहायता से पैलिस्टाइन को पुनः अधिकृत कर लेगा। ईसाई और यहुदी कौमें एक होंगी और फिर आपस में जोरों से लड़ बैठेंगी। यह लड़ाई महायुद्ध का भयंकर रूप धारण करेगी। ब्रिटिश साम्राज्य पर जगह-जगह आक्रमण शुरू हो जायेंगे। इंग्लैण्ड भारत को स्वतन्त्र कर देगा पर मजहबी फिसाद तथा युद्ध से भारत तबाह हो जायेगा यहाँ तक कि हिन्दू, बौद्ध और मुसलमानों में बराबर-बराबर विभक्त हो जायेगा। इटली जर्मनी मिलकर फ्रान्स के विरुद्ध युद्ध का दावानल प्रज्वलित करेंगे। अन्त में इंग्लैण्ड और जर्मनी मित्र बन जायेंगे। रूस, चीन, और तातारी लोगों की विशाल रण वाहिनी तैयार करेगा। अमेरिका जापान और मेक्सिकों के युद्ध में जूझेगा। लम्बी जंग में ब्रिटेन को भारी से भारी क्षति होगी। लन्दन का बहुत सारा भाग और पूर्वी तट के अनेकानेक सुन्दर नगर हवाई आक्रमण से तहस नहस हो जायेंगे। ‘शीरो’ ने पृथ्वी के अंग भंग हो जाने के विषय में भी अत्यन्त विस्मय पूर्ण भविष्यवाणी की है। सन्-1965 के भीतर ही यह महान दुर्घटना होने का योग बताया है। प्रशान्त महासागर से लेकर पनामा, मेक्सिको, संयुक्त राज्य तथा केनेडा आदि भूभागों में भूकम्प का दौर शुरू होगा। इससे मार्किन संयुक्त राज्य अमेरिका के कई बड़े शहर जमींदोज हो जायेंगे।

उत्तरी अटलाँटिक महासागर में एक विशाल टुकड़ा निकल कर उत्तप्त जल धाराओं में परिणत हो जायेगा। अमेरिका के दीप समूह शीत प्रधान हो उठेंगे। इंग्लैण्ड, आयरलैण्ड, डेनमार्क, नार्वे, रूस, जर्मनी आदि में शीत का इतना प्रलय होगा कि इन देशों में मनुष्य जाति आबाद न रह सकेंगी। ‘शीरो’ ने अमेरिका और जापान के युद्ध के सम्बन्ध में भी लिखा है कि अमेरिका और जापान में ऐसा महासंग्राम छिड़ेगा जो वर्षों पर्यन्त जारी रहकर जन धन की अपार हानि का कारण होगा। अन्त में अमेरिका इधर मेक्सिकों पर कब्जा जमा लेगा और जापान के हाथ में सुदूर पूर्वी एशिया के गर्म मुल्क आ जायेंगे। बाद में चीन और जापान एक होकर पूर्व से सारी विदेशी कौमों को निकाल बाहर करेंगे, एशिया महाद्वीप का अधिक से अधिक भाग इन्हीं दो जातियों का भोग थल बन जायेगा।

4-मिश्र देश की प्राचीन मीनार पर लिखी हुई भविष्यवाणी

पदरी वाल्टरबेन ने इस भविष्यवाणी को पढ़कर एक लेख में खुलासा दिया है कि “शीघ्र ही सत्य के प्रचार और अभ्युदय का युग आने वाला है। इसके पहले एक संसारव्यापी महायुद्ध होगा जिसमें सारी दुनिया सम्मिलित हो जायेगी। मीनार पर यह भी लेख है कि यह युद्ध 1936 में आरम्भ होगा।”

5- वेजीलटिन की भविष्यवाणी।

स्पेन के एक साइन्स वेश्रामिस्टर जी वेजीलेटिन कहते हैं अब से छप्पन वर्ष में पृथ्वी समीपवर्ती ग्रहों से भिड़ जायेगी और इनके इतने पास पास हो जाने का फल यह होगा कि वह उन गैसों को जिन पर हमारे जीवन का आधार है नष्ट कर देंगे और लाखों जीव जन्तु कुछ ही घन्टों में मृत्यु का ग्रास हो जावेंगे और बाकी उन्मत अवस्था में जीवित रहेंगे।

6- स्वामी विवेकानन्द की भविष्यवाणी

श्री स्व स्वामी विवेकानन्द जी महाराज ने कुछ काल पूर्व निम्न आशय की भविष्यवाणी की थी -

मित्रों! मैं आपको यह शुभ संवाद सुनाता हूँ, इसे ध्यान पूर्वक सुनो तथा औरों को सुनाओ कि शीघ्र ही शुभ समय का आगमन होने वाला है। लोगों के दिल आशाओं से परिपूर्ण हो जायेंगे, द्वेष, विरोध, छल, कपट, स्वार्थ के स्थान पर, प्रेम मुहब्बत, त्याग, ईमानदारी, परोपकार, भाईचारे का बाहुल्य होगा। सद्ज्ञान की ऐसी उत्तम वर्षा होगी कि जनता के कुम्हलाये हुए दिल हरे हो जायेंगे। जब वर्षा होती है तो गंदे नदी नाले भी नवीन जल से भर जाते हैं। इसी प्रकार शान्ति युग में जो प्रेम धर्म की बाढ़ आवेंगी उसमें अधर्मी, अज्ञानी, अपराधी, स्वभाव के मनुष्य भी अपने दुर्गुणों को छोड़कर सद्गुणों को अपने अन्दर प्रसन्नता पूर्वक धारण करेंगे।

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