पूर्णाहुति एवं पुण्य-प्रतिष्ठा
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आगामी गायत्री जयंती (जे. सुदी 10 सं. 2010) गायत्री संस्था के सदस्यों के लिए बहुत ही प्रसन्नता एवं सफलता का शुभ दिन होगा। उस दिन कई महान कार्यों की पूर्णाहुति होगी। उस दिन निम्नलिखित आयोजन होंगे।
(1) सहस्रांशु गायत्री ब्रह्म यज्ञ जो गत वर्ष प्रारम्भ हुआ था उसकी पूर्णाहुति होगी। 125 करोड़ गायत्री महामन्त्रों का जप, 125 लाख आहुतियों का हवन, 125 हजार उपवास यह तीनों ही कार्यों का अधिकाँश भाग पूरा हो चुका है। जो थोड़ा सा शेष रहा है वह भी आगामी गायत्री जयन्ती तक निश्चित रूप से पूरा हो जायगा।
(2) गायत्री मन्त्र लेखन यज्ञ के लिए 24 लक्ष मन्त्रों का संकल्प था वह बहुत पहले ही पूरा हो चुका है। आगामी गायत्री जयन्ती तक 125 लाख (सवा करोड़) मन्त्र लिख जाने की सम्भावना है। इसकी भी तभी पूर्णाहुति होगी।
(3) हमारे अपने 24-24 लक्ष के 24 पुरश्चरण पूरे हो गए हैं उनकी पूर्णाहुति भी उसी समय होगी।
(4) तब तक गायत्री मन्दिर बन चुकेगा और गायत्री माता की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा भी उसी पुण्य पर्व पर होगी।
यह चारों ही कार्य परम सात्विकता विशिष्ट तपश्चर्या, ब्रह्म परायणता एवं शिव संकल्प से परिपूर्ण हैं। इसकी पूर्णाहुति भी तदनुरूप ही होगी। इनमें न तो तामसिक अपव्यय एवं जमघट होंगे और न राजसिक उत्सव एवं प्रदर्शनों के लिये विशेष स्थान होगा। इस आयोजन में ऋषि कल्प सात्विकता की ही प्रधानता रहेगी क्योंकि आध्यात्मिकता, तपस्या और ब्रह्मवर्चस् का केन्द्र यही है। इस अवसर पर निम्न आयोजन होंगे।
(1) हमारा 24 दिन का पूर्ण निराहार उपवास होगा। वैशाख सुदी 15 से लेकर जेष्ठ सुदी 10 तक 24 दिन केवल गंगाजल पीकर रहेंगे तथा ऐसी विशिष्ट साधना करेंगे जिससे आत्मशुद्धि एवं लोक सेवा की दिशा में हमारी और अधिक प्रगति हो। इस 24 दिनों का जो विशेष कार्यक्रम है वह सार्वजनिक न होगा।
(2) सार्वजनिक यज्ञ, वेद पाठ, प्राण प्रतिष्ठा, मूर्ति स्थापना, रुद्राभिषेक, प्रवचन, सत्संग, कीर्तन आदि अनेक आयोजन अधिकारी विद्वानों द्वारा अन्तिम तीन दिन होंगे।
(3) भारतवर्ष के प्रायः सभी प्रमुख तीर्थों का जल एवं प्रायः सभी सिद्धि पीठों की रज एकत्रित करके सभी तीर्थों एवं सिद्ध पीठों का प्रतिनिधित्व इस उत्सव में अवस्थित रहेगा।
(4) विश्वव्यापी महात्माओं एवं महापुरुषों के आन्तरिक आशीर्वाद प्राप्त करके इस पूर्णाहुति को सफल बनाया जायगा।
(5) इस युग के एक महान सिद्धि पुरुष की धूनी की अग्नि की यहाँ स्थापना होगी। यह अग्नि सात सौ वर्ष से अखण्ड रूप से जलती आ रही है। इस पर अनेक महात्मा तप चुके हैं।
(6) इस महा सत्र की सात्विकता एवं महानता सुरक्षित रहे इसलिए इस आयोजन में केवल वे ही व्यक्ति सम्मिलित किये जायेंगे जिनकी पिछली गायत्री उपासना सन्तोषजनक होगी। ऐसे व्यक्ति भी 125 से अधिक सम्मिलित न किये जावेंगे।
बिना पूर्व स्वीकृति प्राप्त किये कोई सज्जन इस आयोजन में सम्मिलित न हो सकेंगे। इच्छुकों की संख्या निश्चय ही, निर्धारित संख्या की अपेक्षा कई गुनी अधिक होगी। पर उपयुक्त व्यक्तियों को ही स्वीकृति मिलेगी। इसलिए जिन्हें उस आयोजन में सम्मिलित होने के लिए मथुरा आना हो वे अपने साधना सम्बन्धी परिचय के साथ पत्र लिख कर स्वीकृति प्राप्त कर लें। संख्या पूरी हो जाने के पश्चात् किसी को स्वीकृति न मिल सकेगी।
यह उत्सव प्रदर्शनों से रहित होगा, परन्तु तात्विक दृष्टि से यह बहुत ही महत्वपूर्ण होगा, इसकी सूक्ष्म शक्ति अत्याधिक होगी और इसके परिणाम भी असाधारण ही होंगे। आडम्बरों की दुनिया से बचते हुए ही ब्रह्म शक्ति की साधना हो सकती है इस तथ्य को हमें भली प्रकार समझ लेना है।
जिस साधना एवं तपश्चर्या के प्रति फलस्वरूप यह गायत्री तीर्थ बनने जा रहा है यह आध्यात्मिक जगत के लिए एक शुभ सन्देश है। गायत्री संस्था के सदस्यों के लिए तो यह विशेष प्रसन्नता की बात है कि उनने, उनकी सम्मिलित भावना ने, एक ऐसा केन्द्र स्थान विनिर्मित किया है जो असंख्यों आत्माओं को शान्ति देने में समर्थ हो सकेगा। जहाँ इसकी शीतल छाया से हजारों वर्षों तक असंख्य लोगों को सत्परिणाम प्राप्त होंगे वहाँ इस संस्था के सदस्य भी लाभ से वंचित न रहेंगे।
इस पूर्णाहुति पर्व के आयोजन में अभिरुचि रखने वाले सज्जनों से हमारी निम्न प्रार्थनाएं हैं-
(1) अपने समीपवर्ती तीर्थों का जल एवं जिन स्थानों में किन्हीं विशिष्ट आत्माओं ने तपस्या की हो उन स्थानों की मिट्टी थोड़ी मात्रा में हमारे लिए भिजवाने का प्रयत्न करें या जब यहाँ पधारें तब साथ लावें। इसकी पूर्व सूचना हमें पहले से ही दे दें। ताकि उन स्थानों के सम्बन्ध में हम निश्चिन्त हो जावें।
(2) अपने क्षेत्र के ऐसे ज्ञानवृद्ध, आयुवृद्ध, लोक सेवी एवं पुण्यात्मा सत्पुरुषों के पते हमें लिखें जिनसे इस पूर्णाहुति के लिए आशीर्वाद प्राप्त किया जाना उचित हो।
(3) यदि आप इस आयोजन में सम्मिलित होना चाहते हों तो अपने लिए समय रहते स्वीकृति प्राप्त कर लें ताकि पीछे पश्चाताप न करना पड़े।
(4) अभी से लेकर आगामी गायत्री जयन्ती तक के समय में लगभग 6 मास है। इस बीच में आप (अ) गायत्री मन्त्र लेखन यज्ञ में अधिक व्यक्तियों को सम्मिलित करने, (ब) गायत्री साहित्य के अधिक पाठक बढ़ाने, (स) अधिक गायत्री उपासक बनाने, (द) स्वयं अपनी साधना तथा तपश्चर्या पर अधिक ध्यान दें।
आपके सहयोग से गायत्री संस्था द्वारा अब तक महत्वपूर्ण कार्य हुए हैं। आगामी गायत्री जयन्ती की आयोजन की महानता भी असाधारण है। उसके लिए सभी सदस्यों तथा सहयोगियों की सक्रिय सहायता आवश्यक है। आशा है आप सब लोग अपना भाग एवं उत्तरदायित्व उत्साहपूर्वक पूरा करेंगे।
-श्रीराम शर्मा आचार्य।

