कृपा-कथा : एक शिष्य की कलम से | गुरु ने ...

गुरुदेव ने कहा - तुम्हारी कई पीढ़ियाँ मेरा कार्य करेगी। से आगे .....       किसी संत ने कहा है— जिसकी उँगली गुरु ने पकड़ ली, उसके लिए लोक और परलोक दोनों सुरक्षित हो जाते हैं। यह कथन हमने केवल सुना नहीं, बल्कि हमारे परिवार ने जिया है।      पूज्य गुरुदेव ने आसनसोल जेल में मेरे नाना जी से कहा था— “तुम्ह...

Jan. 17, 2026, 9:28 a.m.

कृपया कथा : एक शिष्य की कलम से गुरुदेव ...

मेरे नाना जी स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाते थे, जिसके कारण उन्हें गिरफ्तार कर आसनसोल जेल में बंदी बना दिया गया। जेल के बैरक में प्रवेश करते ही एक दुबला-पतला किंतु ऊँची कद-काठी वाला तेजस्वी युवक उनके पास आया। उसके चेहरे पर अद्भुत शांति और नेत्रों में विलक्षण तेज था। वह हाथ में पानी का ग...

Jan. 15, 2026, 12:33 p.m.

शताब्दी नगर से पाषाणों का मौन संदेश...

अवतारी सत्ता जब धरती पर अवतरित होती है, तब सृष्टि के जड़–चेतन सभी उसके सहयोगी और अनुयायी बनकर अपने सौभाग्य को उससे जोड़ लेते हैं। ऐसा ही एक अद्भुत दृश्य इन दिनों हरिद्वार के वैरागी द्वीप पर, गायत्री परिवार के युग-सृजन सैनिकों के भागीरथ पुरुषार्थ से आकार ले रहे शताब्दी नगर में देखने को मिल रहा है। एक...

Jan. 14, 2026, 12:23 p.m.

कृपा कथा : एक शिष्य की कलम से । भक्ति की...

"मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई.." — मीराबाई की ये अमर पंक्तियाँ अनन्य कृष्ण-भक्ति, विरह और आत्मविसर्जन का साक्षात प्रतीक हैं। कहा जाता है कि मीरा जब गाती थीं, तो उनके भावों के वशीभूत होकर स्वयं नटवर नागर थिरकने लगते थे। युग बीत गए, आज भी ये भजन गाए जाते हैं, किंतु वह 'मीरा सा अंतस' और वह 'अगाध भा...

Jan. 14, 2026, 10:55 a.m.

कृपा कथा : एक शिष्य की कलम से चिकित्सा व...

वर्ष 1994 के आरंभ का समय था। शांतिकुंज के कैंटीन के समीप स्थित खुले मैदान में समयदानी भाई पूरे उत्साह से कबड्डी खेल रहे थे। वातावरण में युवापन, ऊर्जा और आत्मीयता घुली हुई थी। उन्हें खेलते देख मेरा मन भी उमंग से भर उठा और मैं भी सहज भाव से खेल में सम्मिलित हो गया। प्रारंभ में खेल आनंदपूर्वक चलता रहा,...

Jan. 13, 2026, 10:47 a.m.

दिव्य अखंड दीप शताब्दी समारोह: शताब्दी न...

दिव्य अखंड दीप शताब्दी समारोह की मौन तैयारी परम वंदनीया माता जी एवं दिव्य अखंड दीप शताब्दी समारोह में पधारने वाली विभूतियों के स्वागत हेतु जिस पथ का निर्माण हो रहा है, वह केवल पत्थर और रेत से बना एक साधारण मार्ग नहीं है। यह पथ श्रद्धा, तप और समर्पण से सुसंस्कृत एक ऐसा जीवंत साधना-पथ है, जिस पर चलते ...

Jan. 12, 2026, 2:27 p.m.

कृपा कथा: एक शिष्य की कलम से वंदनीया मात...

परम वंदनीया माता जी की दिव्य वाणी से उद्घोषित देवसंस्कृति दिग्विजय अभियान के अंतर्गत चलाए जा रहे अश्वमेध महायज्ञों की शृंखला गुजरात के वरोडा तक पहुँच गई। मैं और मेरे जैसे हजारों कार्यकर्ता इस महायज्ञ में सेवा को अपना सौभाग्य मानकर, अपनी नौकरी से छुट्टी लेकर तत्परता से जुटे हुए थे। महायज्ञ हेतु साधन ...

Jan. 12, 2026, 11:24 a.m.

जब नेतृत्व स्नेह बनकर सामने आता है शताब्...

जब नेतृत्वकर्ता अपने सहयोगियों और साधकों के सुख–दुःख, सुविधा–अभाव तथा गर्मी–सर्दी की चिंता करते हुए अचानक उनके बीच उपस्थित हो जाएँ, तो थकान स्वतः ही विलीन हो जाती है और चेहरे पर सहज मुस्कान खिल उठती है। ऐसा सान्निध्य मन को नई ऊर्जा देता है और अगले दिन दुगुने उत्साह व संकल्प के साथ कार्य करने की प्रे...

Jan. 12, 2026, 10:31 a.m.

पूज्य गुरुदेव की लेखनी साहित्य ही नहीं भ...

कुछ व्यक्तित्व केवल इतिहास नहीं रचते, वे जीवन गढ़ते हैं। पूज्य गुरुदेव पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी ऐसे ही दिव्य अवतारी पुरुष थे, जिनकी लेखनी, दृष्टि और आशीर्वाद से असंख्य जीवनों की धारा बदल गई। यह कथा मेरे जीवन की एक ऐसी ही अनुभूति है, जो आज भी श्रद्धा और कृतज्ञता से हृदय को भर देती है। मेरे पति पहल...

Jan. 11, 2026, 11:18 a.m.

हमारी वसीयत और विरासत (भाग 130): स्थूल क...

सूक्ष्मशरीरधारियों का वर्णन और विवरण पुरातन ग्रंथों में विस्तारपूर्वक मिलता है। यक्ष और युधिष्ठिर के मध्य विग्रह तथा विवाद का महाभारत में विस्तारपूर्वक वर्णन है। यक्ष, गंधर्व, ब्रह्मराक्षस जैसे कई वर्ग सूक्ष्मशरीरधारियों के थे। विक्रमादित्य के साथ पाँच ‘वीर’ रहते थे। शिव जी के गण ‘वीरभद्र’ कहलाते थे...

Nov. 17, 2025, 11:03 a.m.

जन्मशताब्दी वर्ष 2026 की तैयारियाँ अंतिम...

जन्मशताब्दी वर्ष 2026 समारोह की तैयारियाँ पूर्णता की ओर, आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी का जन्मशताब्दी नगर में शुभागमन, मुख्य कार्यालय उद्घाटन एवं सुरक्षा व्यवस्था हेतु अग्निशमन वाहन का लोकार्पण आज दिनांक 16 जनवरी 2026 को गायत्री परिवार द्वारा बैरागी दीप, हरिद्वार में आयोजित होने जा रहे ऐतिहासिक जन्मशत...

Jan. 17, 2026, 9:31 a.m.

ज्योति कलशों का दिव्य भावों के साथ स्वाग...

परम पूज्य गुरुदेव एवं परम वंदनीया माताजी की चेतना का प्रत्यक्ष स्वरूप अखंड दीप हैं। उसकी दिव्य ज्योति को श्रद्धेयद्वय के मार्गदर्शन में जन-जन तक पहुँचाकर ज्योति कलशो का जन्मशताब्दी महोत्सव हेतु शांतिकुंज में आगमन हुआ। मध्यप्रदेश, राजस्थान, पूर्वोत्तर भारत – बंगाल एवं नेपाल से आए कुल 15 ज्योति कलशों ...

Jan. 16, 2026, 3:48 p.m.

ज्योति कलश यात्रा के अंतर्गत श्रद्धेयद्व...

14 जनवरी तक ऑस्ट्रेलिया, पूर्वी अफ्रीका, दक्षिण अफ्रीका, गुजरात, आंध्रप्रदेश–तेलंगाना, बिहार, झारखंड, पश्चिमोत्तर भारत, छत्तीसगढ़ एवं उड़ीसा से आए कुल 18 ज्योति कलश आज शांतिकुंज पहुँचे। इस अवसर पर जन्मशताब्दी समारोह के दलनायक आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी एवं आदरणीया शेफाली दीदी द्वारा प्रखर प्रज्ञा–स...

Jan. 15, 2026, 9:32 a.m.

जन्म शताब्दी नगर, बैरागी दीप में सेवा, व...

जन्म शताब्दी नगर, बैरागी दीप में आज रजिस्ट्रेशन विभाग, विद्युत् विभाग, जोनल कार्यालय, मीडिया सेंटर, संगीत विभाग, सांस्कृतिक विभाग एवं महिला सुरक्षा विभाग का विधिवत उद्घाटन संपन्न हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में अखिल विश्व गायत्री परिवार के युवा प्रतिनिधि, जन्म शताब्दी कार्यक्रम के दलनायक एवं ...

Jan. 14, 2026, 4:58 p.m.

कृपा कथा : एक शिष्य की कलम से । भक्ति की...

"मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई.." — मीराबाई की ये अमर पंक्तियाँ अनन्य कृष्ण-भक्ति, विरह और आत्मविसर्जन का साक्षात प्रतीक हैं। कहा जाता है कि मीरा जब गाती थीं, तो उनके भावों के वशीभूत होकर स्वयं नटवर नागर थिरकने लगते थे। युग बीत गए, आज भी ये भजन गाए जाते हैं, किंतु वह 'मीरा सा अंतस' और वह 'अगाध भा...

Jan. 14, 2026, 10:55 a.m.

मकर संक्रांति: कृतज्ञता, संतुलन और नवजीव...

भारत के विभिन्न प्रांतों में मनाया जाने वाला यह उत्सव केवल फसल कटाई या सूर्य की उत्तरायण यात्रा का प्रतीक नहीं है, बल्कि जीवन में संतुलन, कृतज्ञता और नवजीवन के संदेश को उजागर करता है। परम पूज्य गुरुदेव पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी के अनुसार, सूर्य और प्रकृति के प्रतिकृतज्ञता प्रकट करना, आत्मबल और पर...

Jan. 14, 2026, 10:01 a.m.

कृपा कथा : एक शिष्य की कलम से चिकित्सा व...

वर्ष 1994 के आरंभ का समय था। शांतिकुंज के कैंटीन के समीप स्थित खुले मैदान में समयदानी भाई पूरे उत्साह से कबड्डी खेल रहे थे। वातावरण में युवापन, ऊर्जा और आत्मीयता घुली हुई थी। उन्हें खेलते देख मेरा मन भी उमंग से भर उठा और मैं भी सहज भाव से खेल में सम्मिलित हो गया। प्रारंभ में खेल आनंदपूर्वक चलता रहा,...

Jan. 13, 2026, 10:47 a.m.

माननीय सांसद श्री प्रताप सारंगी जी का दे...

बालासोर (ओडिशा) से माननीय सांसद, आदरणीय श्री प्रताप सारंगी जी का देव संस्कृति विश्वविद्यालय के दिव्य परिसर में गरिमामय आगमन हुआ। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी से उनकी शिष्टाचार भेंट संपन्न हुई। इस भेंट के दौरान शताब्दी समारोह की वैचारिक दिशा, वैश्विक सहभागिता, स...

Jan. 13, 2026, 9:51 a.m.

स्वामी विवेकानंद जयंती: राष्ट्र निर्माण ...

स्वामी विवेकानंद—वह तेजस्वी चेतना, जिन्होंने भारत की आत्मा को विश्वमंच पर प्रतिष्ठित किया और युवाओंको आत्मबल, सेवा एवं चरित्र निर्माण का मंत्र दिया। उनके अनुसार युवा केवल आयु नहीं, बल्कि साहस, संकल्प और आदर्शों से पहचाने जाते हैं। राष्ट्रीय युवा दिवस हमें स्मरण कराता है कि राष्ट्र निर्माण का दायित्व...

Jan. 12, 2026, 2:32 p.m.

शताब्दी नगर, बैरागी द्वीप में भोजन पकाने...

शताब्दी नगर, बैरागी द्वीप में 10 जनवरी सायं भोजन पकाने वाली भट्टी का विधिवत उद्घाटन शताब्दी समारोह के दल नायक आदरणीय डॉ चिन्मय पंड्या जी के कर कमलों द्वारा श्रद्धा एवं उत्साह के वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर शांतिकुंज के वरिष्ठ कार्यकर्ता एवं परिजन उपस्थित थे। उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए...

Jan. 12, 2026, 9:48 a.m.
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First Meeting With Guru

At the age of 15- Self-realization on Basant Panchanmi Parva 1926 at Anwalkheda (Agra, UP, India), with darshan and guidance from Swami Sarveshwaranandaji.

Akhand Deep

More than 2400 crore Gayatri Mantra have been chanted so far in its presence. Just by taking a glimpse of this eternal flame, people receive divine inspirations and inner strength.

Akhand Jyoti Magazine

It was started in 1938 by Pt. Shriram Sharma Acharya. The main objective of the magazine is to promote scientific spirituality and the religion of 21st century, that is, scientific religion.

Gayatri Mantra

The effect of sincere and steadfast Gayatri Sadhana is swift and miraculous in purifying, harmonizing and steadying the mind and thus establishing unshakable inner peace and a sense of joy filled calm even in the face of grave trials and tribulations in the outer life of the Sadhak.

डॉ. शंकर दयाल शर्मा (पूर्व राष्ट्रपति)

आचार्य जी ने सिद्धांत और साधना को आधुनिक युग के अनुकूल तर्क व शब्द देकर सामाजिक परिवर्तन का जो मार्ग दिखाया है, उसके लिए आने वाली पीढ़ियाँ युगों-युगों तक कृतज्ञ रहेंगी।