कृपा-कथा : एक शिष्य की कलम से परम वंदनीय...

परम वंदनीया माता जी मेरे लिए केवल एक श्रद्धेय व्यक्तित्व नहीं, बल्कि साक्षात् जगन्नमाता—मां जगदंबा की अवतारी चेतना हैं। यह मेरा अटूट, अडिग और जीवनानुभव से उपजा विश्वास है। हमारा विराट गायत्री परिवार परम वंदनीया माता जी की ममत्वमयी गोद और वात्सल्यपूर्ण छाया में ही पला-बढ़ा है। उन्हीं के करुणामय प्रेम...

Jan. 17, 2026, 11:54 a.m.

कृपा-कथा : एक शिष्य की कलम से | गुरु ने ...

गुरुदेव ने कहा - तुम्हारी कई पीढ़ियाँ मेरा कार्य करेगी। से आगे .....       किसी संत ने कहा है— जिसकी उँगली गुरु ने पकड़ ली, उसके लिए लोक और परलोक दोनों सुरक्षित हो जाते हैं। यह कथन हमने केवल सुना नहीं, बल्कि हमारे परिवार ने जिया है।      पूज्य गुरुदेव ने आसनसोल जेल में मेरे नाना जी से कहा था— “तुम्ह...

Jan. 17, 2026, 9:28 a.m.

कृपया कथा : एक शिष्य की कलम से गुरुदेव ...

मेरे नाना जी स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाते थे, जिसके कारण उन्हें गिरफ्तार कर आसनसोल जेल में बंदी बना दिया गया। जेल के बैरक में प्रवेश करते ही एक दुबला-पतला किंतु ऊँची कद-काठी वाला तेजस्वी युवक उनके पास आया। उसके चेहरे पर अद्भुत शांति और नेत्रों में विलक्षण तेज था। वह हाथ में पानी का ग...

Jan. 15, 2026, 12:33 p.m.

शताब्दी नगर से पाषाणों का मौन संदेश...

अवतारी सत्ता जब धरती पर अवतरित होती है, तब सृष्टि के जड़–चेतन सभी उसके सहयोगी और अनुयायी बनकर अपने सौभाग्य को उससे जोड़ लेते हैं। ऐसा ही एक अद्भुत दृश्य इन दिनों हरिद्वार के वैरागी द्वीप पर, गायत्री परिवार के युग-सृजन सैनिकों के भागीरथ पुरुषार्थ से आकार ले रहे शताब्दी नगर में देखने को मिल रहा है। एक...

Jan. 14, 2026, 12:23 p.m.

कृपा कथा : एक शिष्य की कलम से । भक्ति की...

"मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई.." — मीराबाई की ये अमर पंक्तियाँ अनन्य कृष्ण-भक्ति, विरह और आत्मविसर्जन का साक्षात प्रतीक हैं। कहा जाता है कि मीरा जब गाती थीं, तो उनके भावों के वशीभूत होकर स्वयं नटवर नागर थिरकने लगते थे। युग बीत गए, आज भी ये भजन गाए जाते हैं, किंतु वह 'मीरा सा अंतस' और वह 'अगाध भा...

Jan. 14, 2026, 10:55 a.m.

कृपा कथा : एक शिष्य की कलम से चिकित्सा व...

वर्ष 1994 के आरंभ का समय था। शांतिकुंज के कैंटीन के समीप स्थित खुले मैदान में समयदानी भाई पूरे उत्साह से कबड्डी खेल रहे थे। वातावरण में युवापन, ऊर्जा और आत्मीयता घुली हुई थी। उन्हें खेलते देख मेरा मन भी उमंग से भर उठा और मैं भी सहज भाव से खेल में सम्मिलित हो गया। प्रारंभ में खेल आनंदपूर्वक चलता रहा,...

Jan. 13, 2026, 10:47 a.m.

दिव्य अखंड दीप शताब्दी समारोह: शताब्दी न...

दिव्य अखंड दीप शताब्दी समारोह की मौन तैयारी परम वंदनीया माता जी एवं दिव्य अखंड दीप शताब्दी समारोह में पधारने वाली विभूतियों के स्वागत हेतु जिस पथ का निर्माण हो रहा है, वह केवल पत्थर और रेत से बना एक साधारण मार्ग नहीं है। यह पथ श्रद्धा, तप और समर्पण से सुसंस्कृत एक ऐसा जीवंत साधना-पथ है, जिस पर चलते ...

Jan. 12, 2026, 2:27 p.m.

कृपा कथा: एक शिष्य की कलम से वंदनीया मात...

परम वंदनीया माता जी की दिव्य वाणी से उद्घोषित देवसंस्कृति दिग्विजय अभियान के अंतर्गत चलाए जा रहे अश्वमेध महायज्ञों की शृंखला गुजरात के वरोडा तक पहुँच गई। मैं और मेरे जैसे हजारों कार्यकर्ता इस महायज्ञ में सेवा को अपना सौभाग्य मानकर, अपनी नौकरी से छुट्टी लेकर तत्परता से जुटे हुए थे। महायज्ञ हेतु साधन ...

Jan. 12, 2026, 11:24 a.m.

जब नेतृत्व स्नेह बनकर सामने आता है शताब्...

जब नेतृत्वकर्ता अपने सहयोगियों और साधकों के सुख–दुःख, सुविधा–अभाव तथा गर्मी–सर्दी की चिंता करते हुए अचानक उनके बीच उपस्थित हो जाएँ, तो थकान स्वतः ही विलीन हो जाती है और चेहरे पर सहज मुस्कान खिल उठती है। ऐसा सान्निध्य मन को नई ऊर्जा देता है और अगले दिन दुगुने उत्साह व संकल्प के साथ कार्य करने की प्रे...

Jan. 12, 2026, 10:31 a.m.

पूज्य गुरुदेव की लेखनी साहित्य ही नहीं भ...

कुछ व्यक्तित्व केवल इतिहास नहीं रचते, वे जीवन गढ़ते हैं। पूज्य गुरुदेव पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी ऐसे ही दिव्य अवतारी पुरुष थे, जिनकी लेखनी, दृष्टि और आशीर्वाद से असंख्य जीवनों की धारा बदल गई। यह कथा मेरे जीवन की एक ऐसी ही अनुभूति है, जो आज भी श्रद्धा और कृतज्ञता से हृदय को भर देती है। मेरे पति पहल...

Jan. 11, 2026, 11:18 a.m.

शताब्दी समारोह के क्रम में ज्योति कलश या...

अखिल विश्व गायत्री परिवार के शताब्दी समारोह के पावन क्रम में आज ज्योति कलश यात्रा का शुभारंभ अत्यंत श्रद्धा, उल्लास एवं आध्यात्मिक भावनाओं के मध्य सम्पन्न हुआ। यह यात्रा युगऋषि परम् पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी की तपःप्रज्वलित चेतना एवं परम वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा जी के अवतरण शत...

Jan. 20, 2026, 4:15 p.m.

गायत्री परिवार के शताब्दी वर्ष कार्यक्रम...

गायत्री परिवार की संस्थापिका परम् वंदनीया माताजी के अवतरण के 100 वर्ष तथा परम् पूज्य गुरुदेव द्वारा प्रज्वलित अखंड दीपक की शताब्दी वर्ष के पावन उपलक्ष्य में आज हरिद्वार में गायत्री परिवार के युवा प्रतिनिधि एवं देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी एवं आदरणीय शेफाली जी...

Jan. 20, 2026, 10:33 a.m.

देव संस्कृति विश्वविद्यालय में शताब्दी व...

अखिल विश्व गायत्री परिवार की संस्थापिका वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा जी के अवतरण शताब्दी वर्ष तथा अखंड दीपक के प्राकट्य के शताब्दी वर्ष के पावन अवसर पर, राजा दक्ष की नगरी हरिद्वार स्थित देव संस्कृति विश्वविद्यालय में आज सातवाँ दीक्षांत समारोह अत्यंत गरिमामय, प्रेरणादायी एवं भावविभोर वातावरण में सम्...

Jan. 19, 2026, 4:17 p.m.

श्रद्धा, प्रज्ञा और संकल्प का भावपूर्ण स...

हरिद्वार | 18 जनवरी 2026 *वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा जी एवं अखण्ड दीपक शताब्दी वर्ष–2026* परम वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा जी एवं अखण्ड दीपक शताब्दी वर्ष–2026 के एजल चरण में आज विचार-मंथन सत्र कार्यक्रम का शुभारंभ आदरणीया श्रद्धेया जीजी के पावन एवं स्नेहिल शुभ आगमन के साथ हुआ। उनके आगमन के साथ ह...

Jan. 19, 2026, 11:18 a.m.

भाग–3 | जन्मशताब्दी वर्ष समारोह में गरिम...

समारोह के दौरान आदिवासी समाज के सैकड़ों कलाकारों द्वारा प्रस्तुत पारंपरिक नृत्य ने सांस्कृतिक चेतना और लोक-आत्मा का जीवंत चित्र उपस्थित किया। इस अवसर पर स्वामी सतपाल महाराज जी, आदरणीय श्री सुरेश चव्हाणके जी, आदरणीय श्री राजेश्वर सिंह जी, भारतीय अंतरिक्ष यात्री आदरणीय श्री शुभांशु शुक्ला जी तथा राज्य...

Jan. 19, 2026, 11:09 a.m.

भाग–2 | अखण्ड दीपक—सतत चेतना का प्रतीक...

शताब्दी समारोह के दलनायक एवं देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि अखण्ड दीपक पूज्य गुरुदेव की सतत उपस्थिति का जीवंत प्रतीक है, जहाँ साधक उनकी चेतना में सान्निध्य का अनुभव करता है। उत्तराखण्ड के माननीय मुख्यमंत्री आदरणीय पुष्कर सिंह धामी जी ...

Jan. 19, 2026, 10:56 a.m.

भाग–1 | शताब्दी समारोह का दिव्य शुभारंभ...

|| हरिद्वार, 18 जनवरी 2026 || राजा दक्ष की नगरी कनखल स्थित वैरागी द्वीप में अखिल विश्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज के तत्वावधान में परम वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा जी एवं अखण्ड दीपक के शताब्दी समारोह का शुभारंभ श्रद्धा और चेतना से परिपूर्ण ध्वज वंदन के साथ हुआ। यह पावन अवसर केवल एक समारोह का प्रारंभ...

Jan. 19, 2026, 9:45 a.m.

जन्मशताब्दी नगर में तैयारियाँ निर्णायक च...

जन्मशताब्दी समारोह की तैयारियाँ अब अपने निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुकी हैं। इसी क्रम में जन्मशताब्दी नगर में आज व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करते हुए शताब्दी समारोह के दलनायक एवं देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति आदरणीय डॉ चिन्मय पंड्या जी द्वारा वाहन पार्किंग एवं Abroad Cell (विदेश विभाग) का विधिव...

Jan. 19, 2026, 9:32 a.m.

जन्मशताब्दी वर्ष 2026 की तैयारियाँ अंतिम...

जन्मशताब्दी वर्ष 2026 समारोह की तैयारियाँ पूर्णता की ओर, आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी का जन्मशताब्दी नगर में शुभागमन, मुख्य कार्यालय उद्घाटन एवं सुरक्षा व्यवस्था हेतु अग्निशमन वाहन का लोकार्पण आज दिनांक 16 जनवरी 2026 को गायत्री परिवार द्वारा बैरागी दीप, हरिद्वार में आयोजित होने जा रहे ऐतिहासिक जन्मशत...

Jan. 17, 2026, 9:31 a.m.

ज्योति कलशों का दिव्य भावों के साथ स्वाग...

परम पूज्य गुरुदेव एवं परम वंदनीया माताजी की चेतना का प्रत्यक्ष स्वरूप अखंड दीप हैं। उसकी दिव्य ज्योति को श्रद्धेयद्वय के मार्गदर्शन में जन-जन तक पहुँचाकर ज्योति कलशो का जन्मशताब्दी महोत्सव हेतु शांतिकुंज में आगमन हुआ। मध्यप्रदेश, राजस्थान, पूर्वोत्तर भारत – बंगाल एवं नेपाल से आए कुल 15 ज्योति कलशों ...

Jan. 16, 2026, 3:48 p.m.
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गुरुदेव से प्रथम भेंट

15 वर्ष की आयु में— बसंत पंचमी पर्व सन् 1926 को स्वगृह— आँवलखेड़ा (आगरा, उत्तर प्रदेश, भारत) में पूजास्थल में ही दादागुरु स्वामी सर्वेश्वरानन्द जी के दर्शन एवं मार्गदर्शन के साथ-ही-साथ आत्मसाक्षात्कार हुआ।

अखण्ड दीपक

सन् 1926 से निरंतर प्रज्वलित दीपक, जिसके सान्निध्य में परम पूज्य गुरुदेव श्रीराम शर्मा आचार्य जी ने 24-24 लक्ष के चौबीस गायत्री महापुरश्चरण संपन्न किए, आज भी इसके बस एक झलक भर प्राप्त कर लेने से ही लोगों को दैवीय प्रेरणा और आंतरिक शक्ति प्राप्त होती है। इसके सान्निध्य में अब तक 2400 करोड़ से भी अधिक गायत्री मंत्र का जप किया जा चुका है।

अखण्ड ज्योति पत्रिका

इसका आरंभ सन् 1938 में पं. श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा किया गया था। पत्रिका का मुख्य उद्देश्य— वैज्ञानिक आध्यात्मिकता और 21वीं शताब्दी के धर्म, अर्थात वैज्ञानिक धर्म को बढ़ावा देना है।

गायत्री मन्त्र

दृढ़ निष्ठा से सतत गायत्री साधना करने से मन (अंतःकरण) तीव्र गति और चामत्कारिक प्रकार से पवित्र, निर्मल, व्यवस्थित और स्थिर होता है, जिससे साधक अपने बाह्य भौतिक जीवन की गंभीर परीक्षाओं एवं समस्याओं से जूझते हुए भी अटल आतंरिक शांति और आनंद की अनुभूति करता है।

आचार्य जी ने सिद्धांत और साधना को आधुनिक युग के अनुकूल तर्क व शब्द देकर सामाजिक परिवर्तन का जो मार्ग दिखाया है, उसके लिए आने वाली पीढ़ियाँ युगों-युगों तक कृतज्ञ रहेंगी।

डॉ. शंकर दयाल शर्मा (पूर्व राष्ट्रपति)

मुझे ज्ञात है कि इस विश्वविद्यालय ने स्वतंत्रता सेनानी और लगभग ३००० पुस्तकों के लेखक पंडित श्रीराम शर्मा आचार्यजी के स्वप्न को साकार रूप दिया है। इन्हें भारत में ज्ञान क्रांति का प्रवर्तक कहना उपयुक्त होगा। आचार्यश्री का विचार था कि अज्ञानता ही निर्धनता और बीमारी आदि सभी समस्याओं की जड़ है।

डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम (पूर्व राष्ट्रपति एवं वैज्ञानिक)

आचार्य जी का एकाकी पुरुषार्थ सारे संत समाज की सम्मिलित शक्ति के स्तर का है, उनने गायत्री व यज्ञ को प्रतिबंध रहित करने निमित्त जो कुछ भी किया वह शास्त्रों के अनुसार ही था। मेरा उन्हें बारम्बार नमन है।

स्वामी जयेन्द्रतीर्थ सरस्वती (शंकराचार्य कांची कामकोटि पीठ)

श्रद्धेय आचार्य श्रीराम शर्मा जी ने जो कार्य कर दिखाया वह अद्भुत है, युग के लिए नितांत आवश्यक है। आचार्य जी के साहित्य से मैं बहुत प्रभावित हूँ। प्रज्ञा पुराण ने विशेष रूप से मुझे अपने कार्यों में बहुत बल प्रदान किया है। उनका चिंतन राष्ट्र को शक्तिशाली बनाता और मानव मात्र को सही दिशा प्रदान करता है।

श्री नानाजी देशमुख (संस्थापक ग्रामोदय विश्वविद्यालय)

आचार्य जी द्वारा भाष्य किए गए उपनिषदों का स्वाध्याय करने के बाद उन्होंने कहा कि- ‘‘काश! यह साहित्य मुझे जवानी में मिल गया होता तो मेरे जीवन की दिशाधारा कुछ और ही होती; मैं राजनीति में न जाकर आचार्य श्री के चरणों में बैठा अध्यात्म का ज्ञान ले रहा होता।’’

सर्वपल्ली डॉ. राधाकृष्णन्

विनोबा जी ने वेदों के पूज्यवर द्वारा किए गए भाष्य को ग्वालियर मेंं एक सार्वजनिक सभा में अपने सिर पर धारण करते हुए कहा- "ये ग्रन्थ किसी व्यक्ति द्वारा नहीं, शक्ति द्वारा लिखे गये हैं।"

आचार्य विनोबा भावे

सुप्रसिद्ध सन्त देवरहा बाबा एक सिद्ध पुरुष थे। उनने एक परिजन से कहा- ‘‘बेटा! उनके बारे में मैं क्या कहूँ? यह समझो कि मैं हृदय से सतत उनका स्मरण करता रहता हूँ। गायत्री उनमें पूर्णतः समा गयी है एवं वे साक्षात् सविता स्वरूप हैं।’’

देवरहा बाबा

‘‘आचार्यश्री ने गायत्री को जन-जन की बनाकर महर्षि दयानन्द के कार्यों को आगे बढ़ाया है। गायत्री और ये एकरूप हो गये हैं।’’

महात्मा आनन्द स्वामी

अपने भावभरे उद्गार पूज्यवर के सम्बन्ध में इस रूप में व्यक्त किए थे- ‘‘आचार्य जी इस युग में गायत्री के जनक हैं। उनने गायत्री को सबकी बना दिया। यदि इसे मात्र ब्राह्मणों की मानकर उन्हीं के भरोसे छोड़ दिया होता तो अब तक गायत्री महाविद्या सम्भवतः लुप्त हो गयी होती।’’

करपात्री जी महाराज