कृपा कथा : एक शिष्य की कलम से चिकित्सा व...

वर्ष 1994 के आरंभ का समय था। शांतिकुंज के कैंटीन के समीप स्थित खुले मैदान में समयदानी भाई पूरे उत्साह से कबड्डी खेल रहे थे। वातावरण में युवापन, ऊर्जा और आत्मीयता घुली हुई थी। उन्हें खेलते देख मेरा मन भी उमंग से भर उठा और मैं भी सहज भाव से खेल में सम्मिलित हो गया। प्रारंभ में खेल आनंदपूर्वक चलता रहा,...

Jan. 13, 2026, 10:47 a.m.

दिव्य अखंड दीप शताब्दी समारोह: शताब्दी न...

दिव्य अखंड दीप शताब्दी समारोह की मौन तैयारी परम वंदनीया माता जी एवं दिव्य अखंड दीप शताब्दी समारोह में पधारने वाली विभूतियों के स्वागत हेतु जिस पथ का निर्माण हो रहा है, वह केवल पत्थर और रेत से बना एक साधारण मार्ग नहीं है। यह पथ श्रद्धा, तप और समर्पण से सुसंस्कृत एक ऐसा जीवंत साधना-पथ है, जिस पर चलते ...

Jan. 12, 2026, 2:27 p.m.

कृपा कथा: एक शिष्य की कलम से वंदनीया मात...

परम वंदनीया माता जी की दिव्य वाणी से उद्घोषित देवसंस्कृति दिग्विजय अभियान के अंतर्गत चलाए जा रहे अश्वमेध महायज्ञों की शृंखला गुजरात के वरोडा तक पहुँच गई। मैं और मेरे जैसे हजारों कार्यकर्ता इस महायज्ञ में सेवा को अपना सौभाग्य मानकर, अपनी नौकरी से छुट्टी लेकर तत्परता से जुटे हुए थे। महायज्ञ हेतु साधन ...

Jan. 12, 2026, 11:24 a.m.

जब नेतृत्व स्नेह बनकर सामने आता है शताब्...

जब नेतृत्वकर्ता अपने सहयोगियों और साधकों के सुख–दुःख, सुविधा–अभाव तथा गर्मी–सर्दी की चिंता करते हुए अचानक उनके बीच उपस्थित हो जाएँ, तो थकान स्वतः ही विलीन हो जाती है और चेहरे पर सहज मुस्कान खिल उठती है। ऐसा सान्निध्य मन को नई ऊर्जा देता है और अगले दिन दुगुने उत्साह व संकल्प के साथ कार्य करने की प्रे...

Jan. 12, 2026, 10:31 a.m.

पूज्य गुरुदेव की लेखनी साहित्य ही नहीं भ...

कुछ व्यक्तित्व केवल इतिहास नहीं रचते, वे जीवन गढ़ते हैं। पूज्य गुरुदेव पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी ऐसे ही दिव्य अवतारी पुरुष थे, जिनकी लेखनी, दृष्टि और आशीर्वाद से असंख्य जीवनों की धारा बदल गई। यह कथा मेरे जीवन की एक ऐसी ही अनुभूति है, जो आज भी श्रद्धा और कृतज्ञता से हृदय को भर देती है। मेरे पति पहल...

Jan. 11, 2026, 11:18 a.m.

हमारी वसीयत और विरासत (भाग 130): स्थूल क...

सूक्ष्मशरीरधारियों का वर्णन और विवरण पुरातन ग्रंथों में विस्तारपूर्वक मिलता है। यक्ष और युधिष्ठिर के मध्य विग्रह तथा विवाद का महाभारत में विस्तारपूर्वक वर्णन है। यक्ष, गंधर्व, ब्रह्मराक्षस जैसे कई वर्ग सूक्ष्मशरीरधारियों के थे। विक्रमादित्य के साथ पाँच ‘वीर’ रहते थे। शिव जी के गण ‘वीरभद्र’ कहलाते थे...

Nov. 17, 2025, 11:03 a.m.

हमारी वसीयत और विरासत (भाग 129): स्थूल क...

यह स्थिति शरीर त्यागते ही हर किसी को उपलब्ध हो जाए, यह संभव नहीं। भूत-प्रेत चले तो सूक्ष्मशरीर में जाते हैं, पर वे बहुत ही अनगढ़ स्थिति में रहते हैं। मात्र संबंधित लोगों को ही अपनी आवश्यकताएँ बताने भर के कुछ दृश्य कठिनाई से दिखा सकते हैं। पितरस्तर की आत्माएँ उनसे कहीं अधिक सक्षम होती हैं। उनका विवेक ...

Nov. 16, 2025, 11:22 a.m.

हमारी वसीयत और विरासत (भाग 128): स्थूल क...

हमें अपनी प्रवृत्तियाँ बहुमुखी बढ़ा लेने के लिए कहा गया है। इसमें सबसे बड़ी कठिनाई स्थूलशरीर का सीमा-बंधन है। यह सीमित है। सीमित क्षेत्र में ही काम कर सकता है। सीमित ही वजन उठा सकता है। काम असीम क्षेत्र से संबंधित हैं और ऐसे हैं, जिनमें एक साथ कितनों से ही वास्ता पड़ना चाहिए। यह कैसे बने? इसके लिए एक त...

Nov. 15, 2025, 9:52 a.m.

हमारी वसीयत और विरासत (भाग 127): स्थूल क...

युग-परिवर्तन की यह एक ऐतिहासिक वेला है। इन बीस वर्षों में हमें जमकर काम करने की ड्यूटी सौंपी गई थी। सन् 1980 से लेकर अब तक के पाँच वर्षों में जो काम हुआ है, पिछले 30 वर्षों की तुलना में कहीं अधिक है। समय की आवश्यकता के अनुरूप तत्परता बरती गई और खपत को ध्यान में रखते हुए तदनुरूप शक्ति उपार्जित की गई ...

Nov. 14, 2025, 9:30 a.m.

हमारी वसीयत और विरासत (भाग 126): तपश्चर्...

रामकृष्ण परमहंस के सामने यही स्थिति आई थी। उन्हें व्यापक काम करने के लिए बुलाया गया। योजना के अनुसार उनने अपनी क्षमता विवेकानंद को सौंप दी तथा उनने कार्यक्षेत्र को सरल और सफल बनाने के लिए आवश्यक ताना-बाना बुन देने का कार्य सँभाला। इतना बड़ा काम वे मात्र स्थूलशरीर के सहारे कर नहीं पा रहे थे। सो उनने उ...

Nov. 13, 2025, 11:03 a.m.

कृपा कथा : एक शिष्य की कलम से चिकित्सा व...

वर्ष 1994 के आरंभ का समय था। शांतिकुंज के कैंटीन के समीप स्थित खुले मैदान में समयदानी भाई पूरे उत्साह से कबड्डी खेल रहे थे। वातावरण में युवापन, ऊर्जा और आत्मीयता घुली हुई थी। उन्हें खेलते देख मेरा मन भी उमंग से भर उठा और मैं भी सहज भाव से खेल में सम्मिलित हो गया। प्रारंभ में खेल आनंदपूर्वक चलता रहा,...

Jan. 13, 2026, 10:47 a.m.

माननीय सांसद श्री प्रताप सारंगी जी का दे...

बालासोर (ओडिशा) से माननीय सांसद, आदरणीय श्री प्रताप सारंगी जी का देव संस्कृति विश्वविद्यालय के दिव्य परिसर में गरिमामय आगमन हुआ। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी से उनकी शिष्टाचार भेंट संपन्न हुई। इस भेंट के दौरान शताब्दी समारोह की वैचारिक दिशा, वैश्विक सहभागिता, स...

Jan. 13, 2026, 9:51 a.m.

स्वामी विवेकानंद जयंती: राष्ट्र निर्माण ...

स्वामी विवेकानंद—वह तेजस्वी चेतना, जिन्होंने भारत की आत्मा को विश्वमंच पर प्रतिष्ठित किया और युवाओंको आत्मबल, सेवा एवं चरित्र निर्माण का मंत्र दिया। उनके अनुसार युवा केवल आयु नहीं, बल्कि साहस, संकल्प और आदर्शों से पहचाने जाते हैं। राष्ट्रीय युवा दिवस हमें स्मरण कराता है कि राष्ट्र निर्माण का दायित्व...

Jan. 12, 2026, 2:32 p.m.

शताब्दी नगर, बैरागी द्वीप में भोजन पकाने...

शताब्दी नगर, बैरागी द्वीप में 10 जनवरी सायं भोजन पकाने वाली भट्टी का विधिवत उद्घाटन शताब्दी समारोह के दल नायक आदरणीय डॉ चिन्मय पंड्या जी के कर कमलों द्वारा श्रद्धा एवं उत्साह के वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर शांतिकुंज के वरिष्ठ कार्यकर्ता एवं परिजन उपस्थित थे। उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए...

Jan. 12, 2026, 9:48 a.m.

Visit of German Delegation to Dev Sanskr...

Dev Sanskriti Vishwavidyalaya had the pleasure of welcoming an eight-member delegation from Germany to the university campus. During their visit, the delegation had the opportunity to meet the Pro Vice Chancellor, Respected Dr. Chinmay Pandya. The interaction focused on the university’s philosophy o...

Jan. 10, 2026, 9:42 a.m.

शताब्दी समारोह स्थल पर परिवहन, कैंटीन, फ...

वैरागी कैंप स्थित शताब्दी समारोह स्थल पर आज व्यवस्थागत सुदृढ़ीकरण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। यहाँ परिवहन विभाग, कैंटीन, फोटोग्राफी विभाग तथा महिला मंडल कैंप का विधिवत शुभारंभ देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति एवं शताब्दी समारोह के दलनायक आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी एवं आदरणी...

Jan. 9, 2026, 9:56 a.m.

शताब्दी समारोह स्थल पर अत्याधुनिक इलेक्ट...

वैरागी द्वीप स्थित शताब्दी समारोह स्थल पर आज संचार क्रांति के एक नए अध्याय का शुभारंभ हुआ। अत्याधुनिक तकनीकी सुविधाओं से सुसज्जित इलेक्ट्रॉनिक मीडिया विभाग का विधिवत अनावरण गढ़वाल कमिश्नर श्री विनय शंकर पांडे जी, आईजी गढ़वाल श्री राजीव स्वरूप जी तथा देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति एवं शताब...

Jan. 8, 2026, 9:46 a.m.

251 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ में आदरणीय ड...

उत्तर प्रदेश के निघासन (लखीमपुर-खीरी) क्षेत्र में 1 से 5 जनवरी 2026 तक 251 कुण्डीय विराट गायत्री महायज्ञ के दीपयज्ञ कार्यक्रम में आदरणीय डॉक्टर चिन्मय पंड्या जी, प्रतिनिधि अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार, प्रतिकुलपति देव संस्कृति विश्वविद्यालय का आगमन हुआ। उन्होंने युगऋषि पं. श्रीराम शर...

Jan. 6, 2026, 3:24 p.m.

पौष पूर्णिमा व कुम्भ स्नान प्रथम दिवस : ...

पौष पूर्णिमा के पुण्य अवसर से कुम्भ स्नान के प्रथम दिवस का शुभारम्भ भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में आत्मशुद्धि, तप और साधना का महापर्व माना गया है। यह पावन तिथि मानव को बाह्य शुद्धि के साथ-साथ आंतरिक परिष्कार का संदेश देती है। कुम्भ स्नान केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि चेतना के जागरण और आत्म विस्...

Jan. 6, 2026, 12:39 p.m.

माँ सावित्रीबाई फुले जयंती : शिक्षा, नार...

भारतीय समाज में शिक्षा के माध्यम से चेतना का दीप प्रज्वलित करने वाली तथा नारी सशक्तिकरण की अग्रदूत माँ सावित्रीबाई फुले जी को उनकी जयंती पर श्रद्धापूर्वक नमन वंदन। सामाजिक विषमताओं के बीच उन्होंने ज्ञान, करुणा और साहस का मार्ग चुना तथा शिक्षा को केवल अध्ययन तक सीमित न रखकर उसे मानव गरिमा, समानता और ...

Jan. 6, 2026, 12:34 p.m.
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गुरुदेव से प्रथम भेंट

15 वर्ष की आयु में— बसंत पंचमी पर्व सन् 1926 को स्वगृह— आँवलखेड़ा (आगरा, उत्तर प्रदेश, भारत) में पूजास्थल में ही दादागुरु स्वामी सर्वेश्वरानन्द जी के दर्शन एवं मार्गदर्शन के साथ-ही-साथ आत्मसाक्षात्कार हुआ।

अखण्ड दीपक

सन् 1926 से निरंतर प्रज्वलित दीपक, जिसके सान्निध्य में परम पूज्य गुरुदेव श्रीराम शर्मा आचार्य जी ने 24-24 लक्ष के चौबीस गायत्री महापुरश्चरण संपन्न किए, आज भी इसके बस एक झलक भर प्राप्त कर लेने से ही लोगों को दैवीय प्रेरणा और आंतरिक शक्ति प्राप्त होती है। इसके सान्निध्य में अब तक 2400 करोड़ से भी अधिक गायत्री मंत्र का जप किया जा चुका है।

अखण्ड ज्योति पत्रिका

इसका आरंभ सन् 1938 में पं. श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा किया गया था। पत्रिका का मुख्य उद्देश्य— वैज्ञानिक आध्यात्मिकता और 21वीं शताब्दी के धर्म, अर्थात वैज्ञानिक धर्म को बढ़ावा देना है।

गायत्री मन्त्र

दृढ़ निष्ठा से सतत गायत्री साधना करने से मन (अंतःकरण) तीव्र गति और चामत्कारिक प्रकार से पवित्र, निर्मल, व्यवस्थित और स्थिर होता है, जिससे साधक अपने बाह्य भौतिक जीवन की गंभीर परीक्षाओं एवं समस्याओं से जूझते हुए भी अटल आतंरिक शांति और आनंद की अनुभूति करता है।

आचार्य जी ने सिद्धांत और साधना को आधुनिक युग के अनुकूल तर्क व शब्द देकर सामाजिक परिवर्तन का जो मार्ग दिखाया है, उसके लिए आने वाली पीढ़ियाँ युगों-युगों तक कृतज्ञ रहेंगी।

डॉ. शंकर दयाल शर्मा (पूर्व राष्ट्रपति)

मुझे ज्ञात है कि इस विश्वविद्यालय ने स्वतंत्रता सेनानी और लगभग ३००० पुस्तकों के लेखक पंडित श्रीराम शर्मा आचार्यजी के स्वप्न को साकार रूप दिया है। इन्हें भारत में ज्ञान क्रांति का प्रवर्तक कहना उपयुक्त होगा। आचार्यश्री का विचार था कि अज्ञानता ही निर्धनता और बीमारी आदि सभी समस्याओं की जड़ है।

डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम (पूर्व राष्ट्रपति एवं वैज्ञानिक)

आचार्य जी का एकाकी पुरुषार्थ सारे संत समाज की सम्मिलित शक्ति के स्तर का है, उनने गायत्री व यज्ञ को प्रतिबंध रहित करने निमित्त जो कुछ भी किया वह शास्त्रों के अनुसार ही था। मेरा उन्हें बारम्बार नमन है।

स्वामी जयेन्द्रतीर्थ सरस्वती (शंकराचार्य कांची कामकोटि पीठ)

श्रद्धेय आचार्य श्रीराम शर्मा जी ने जो कार्य कर दिखाया वह अद्भुत है, युग के लिए नितांत आवश्यक है। आचार्य जी के साहित्य से मैं बहुत प्रभावित हूँ। प्रज्ञा पुराण ने विशेष रूप से मुझे अपने कार्यों में बहुत बल प्रदान किया है। उनका चिंतन राष्ट्र को शक्तिशाली बनाता और मानव मात्र को सही दिशा प्रदान करता है।

श्री नानाजी देशमुख (संस्थापक ग्रामोदय विश्वविद्यालय)

आचार्य जी द्वारा भाष्य किए गए उपनिषदों का स्वाध्याय करने के बाद उन्होंने कहा कि- ‘‘काश! यह साहित्य मुझे जवानी में मिल गया होता तो मेरे जीवन की दिशाधारा कुछ और ही होती; मैं राजनीति में न जाकर आचार्य श्री के चरणों में बैठा अध्यात्म का ज्ञान ले रहा होता।’’

सर्वपल्ली डॉ. राधाकृष्णन्

विनोबा जी ने वेदों के पूज्यवर द्वारा किए गए भाष्य को ग्वालियर मेंं एक सार्वजनिक सभा में अपने सिर पर धारण करते हुए कहा- "ये ग्रन्थ किसी व्यक्ति द्वारा नहीं, शक्ति द्वारा लिखे गये हैं।"

आचार्य विनोबा भावे

सुप्रसिद्ध सन्त देवरहा बाबा एक सिद्ध पुरुष थे। उनने एक परिजन से कहा- ‘‘बेटा! उनके बारे में मैं क्या कहूँ? यह समझो कि मैं हृदय से सतत उनका स्मरण करता रहता हूँ। गायत्री उनमें पूर्णतः समा गयी है एवं वे साक्षात् सविता स्वरूप हैं।’’

देवरहा बाबा

‘‘आचार्यश्री ने गायत्री को जन-जन की बनाकर महर्षि दयानन्द के कार्यों को आगे बढ़ाया है। गायत्री और ये एकरूप हो गये हैं।’’

महात्मा आनन्द स्वामी

अपने भावभरे उद्गार पूज्यवर के सम्बन्ध में इस रूप में व्यक्त किए थे- ‘‘आचार्य जी इस युग में गायत्री के जनक हैं। उनने गायत्री को सबकी बना दिया। यदि इसे मात्र ब्राह्मणों की मानकर उन्हीं के भरोसे छोड़ दिया होता तो अब तक गायत्री महाविद्या सम्भवतः लुप्त हो गयी होती।’’

करपात्री जी महाराज