विश्व योग दिवस पर शिविर का आयोजन ...

विश्व योग दिवस पर गायत्री शक्तिपीठ जमालपुर में योग शिविर का आयोजन जमालपुर, 21 जून। विश्व योग दिवस के अवसर पर गायत्री परिवार ट्रस्ट एवं प्रज्ञा युवा प्रकोष्ठ, जमालपुर के संयुक्त तत्वावधान में गायत्री शक्तिपीठ, जमालपुर परिसर में भव्य योग शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य जनसामान्य को योग,...

June 23, 2026, 4:22 p.m.

शांति और सौंदर्य को अपने अंदर खोजो ...

उनसे प्यार करो, जिन्हें लोग पतित, गर्हित और हेय समझते हैं। जिन्हें केवल निंदा और भर्त्सना ही मिलती है। जो अपने ऊपर लदे हुए पिछड़ेपन के कारण न किसी के मित्र बन पाते हैं और न जिन्हें कोई प्यार करता है। प्यार करने योग्य वही लोग हैं, जिन्हें स्नेह-सद्भाव देकर तुम अपने को गौरवान्वित करोगे। माँगो मत। चाहो...

June 7, 2026, 2:29 p.m.

समूचा ब्रह्मांड एक चैतन्य शरीर...

प्रौढ़ता को प्राप्त करता हुआ विज्ञान अब उन्हीं निष्कर्षों पर पहुँच रहा है, जिन पर सदियों पूर्व भारतीय तत्त्ववेत्ता ज्योतिर्विद् पहुँच चुके थे। समूचा ब्रह्मांड एक चैतन्य शरीर है, जिसका प्रत्येक स्पंदन हर घटक को प्रभावित करता है, जिसमें पृथ्वी और संबंधित वातावरण, वनस्पति एवं जीवधारी भी सम्मिलित हैं। प...

June 7, 2026, 2:02 p.m.

संवेदना की समस्या को कौन सुलझाएगा?...

ज्ञान के दो पक्ष हैं— एक विचारणा, दूसरा संवेदना। विचार मस्तिष्क की देन हैं। वे बाहर से होते हैं; प्रशिक्षण एवं अनुभव के सहारे। भाव भीतर से उठते हैं। वे अंतःकरण के उत्पादन हैं। विचारों से जानकारी तो बढ़ती है और बुद्धि में परिपक्वता आती है, पर उनका प्रभाव अंतस् पर नहीं के बराबर पड़ता है। बहुत पढ़ने और ब...

June 7, 2026, 12:58 p.m.

विज्ञान और अध्यात्म का समन्वय निश्चित...

अध्यात्म और विज्ञान को पिछले दिनों परस्पर विरोधी माना जाता रहा है। नवीनतम शोधें उन्हें पूरक ही नहीं, एकीभूत भी सिद्ध कर रही हैं। चेतना के क्षेत्र में वैज्ञानिक चिंतन का योग अगले दिनों शोध के नए आधार प्रस्तुत करेगा। यह विश्वास किया जाना चाहिए, विज्ञान के बढ़ते हुए चरण पदार्थ की मूलसत्ता की नवीन व्याख्...

June 7, 2026, 12:42 p.m.

असीम पर निर्भर ससीम जीवन...

“धरती पर जीवनोपयोगी परिस्थितियों का आधार जिन रासायनिक हलचलों और आणविक गतिविधियों पर निर्भर है, वे अंतरिक्ष से आने वाले रेडियो-तरंगों पर अवलंबित हैं। शक्ति के स्रोत उन्हीं में हैं। विविध विधि हलचलों की अधिष्ठात्री इन्हीं को कहना चाहिए। हमारा परिवार— हमारा शरीर— हमारा अस्तित्व सब कुछ प्रकारांतर से इन ...

June 7, 2026, 12:19 p.m.

धरती माँ को ओढ़ाई हरी चादर | विश्व पर्या...

जमालपुर, 5 जून 2026। विश्व पर्यावरण दिवस के पावन अवसर पर प्रज्ञा युवा प्रकोष्ठ, जमालपुर द्वारा महिला मंडल के सहयोग से काली पहाड़ी, छठ पूजा घाट (नहर परिसर) में एक विशाल वृक्षारोपण अभियान का आयोजन किया गया। पर्यावरण संरक्षण एवं हरित भविष्य के संकल्प के साथ आयोजित इस अभियान में कुल 101 पौधों का रोपण कि...

June 5, 2026, 10:31 p.m.

अखिल विश्व गायत्री परिवार के आवाहन पर घर...

घर घर में में हम यज्ञ रचाएं, आओ भारत सबल बनाएं  इसी कामना से आज बुद्ध पूर्णिमा के पावन पर्व पर अखिल विश्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज (हरिद्वार) के दिशा निर्देश पर जनपद बलरामपुर के पचपेड़वा, गैंसड़ी और तुलसीपुर क्षेत्र में मानव में देवत्व का उदय, धरती पर स्वर्ग का अवतरण और विश्वव्यापी संकट निवारण हेतु...

May 3, 2026, 3 p.m.

अब दर्शन की बारी है, उसे कुछ करने दिया ज...

विज्ञान का तात्पर्य— “प्रकृति के कुछ रहस्यों का उद्घाटन अथवा कुछ उपकरणों का निर्माण कर लेना मात्र नहीं है, वरन् उसकी व्यापकता मानवी दृष्टिकोण को अधिक सुविस्तृत, तथ्यपूर्ण एवं सत्यनिष्ठ बनाने तक चली जाती है।” विज्ञान का उपयोग भौतिक सुख-सुविधाओं के संवर्द्धन अथवा जानकारियों का क्षेत्र बढ़ाने तक सीमित ...

April 19, 2026, 5:07 p.m.

धर्म और दर्शन की उत्क्रांति भी आवश्यक...

भावी पीढ़ी को मानसिक दिग्भ्रांति से बचाने के लिए यह प्रश्न सुलझाना आवश्यक है। धर्म के गिरते हुए मूल्य को देखकर ऐसा लगता है कि कहीं आने वाली पीढ़ियाँ पूर्णतया पदार्थवादी होकर अपनी आध्यात्मिक शक्तियाँ नष्ट न कर डालें। हमारी तरह से ऐसे विचार दुनिया के अनेक मनीषियों के मस्तिष्क में आए और उन्होंने अपनी-अ...

April 19, 2026, 4:59 p.m.

अखिल विश्व गायत्री परिवार के जन्मशताब्दी...

कार्यक्रम के अंतर्गत रामकृष्ण मिशन, हरिद्वार के सचिव स्वामी दयामृतानन्द ने सारस्वत उद्बोधन देते हुए कहा कि मानव जीवन का सर्वोच्च उद्देश्य परोपकार और लोकमंगल है। महर्षि दधीचि का त्याग भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है, जो हमें अपने जीवन को समाज और मानवता के कल्याण के लिए समर्पित करने की प्रेरणा देता...

June 28, 2026, 10:45 a.m.

गायत्री परिवार के जन्मशताब्दी वर्ष के अं...

अखिल विश्व गायत्री परिवार के जन्मशताब्दी वर्ष के अंतर्गत देव संस्कृति विश्वविद्यालय, शांतिकुंज में आज ‘दधीचि अंगदान संकल्प अभियान’ के तहत एक गरिमामय एवं प्रेरणादायी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं देवपूजन के साथ हुआ। कार्यक्रम में अंगदान के प्रति जन-जागरूकता बढ़ा...

June 28, 2026, 10:38 a.m.

देव संस्कृति विश्वविद्यालय में ‘दधीचि अं...

हरिद्वार। अखिल विश्व गायत्री परिवार के जन्मशताब्दी वर्ष के अंतर्गत देव संस्कृति विश्वविद्यालय, शांतिकुंज में आज ‘दधीचि अंगदान संकल्प अभियान’ के तहत एक गरिमामय एवं प्रेरणादायी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या ने की...

June 28, 2026, 10:28 a.m.

Russian Delegation Explores India’s Spir...

A delegation of 19 members from Russia visited Gayatri Teerth Shantikunj to experience and understand its unique spiritual atmosphere, values, and way of life. During their visit, the delegates observed various spiritual and cultural activities and gained insights into the mission of promoting human...

June 27, 2026, 3:05 p.m.

देव संस्कृति विश्वविद्यालय में भारत सरका...

विश्व नशा निषेध दिवस के अवसर पर अखिल विश्व गायत्री परिवार के तत्वावधान में 26 जून 2026 को देव संस्कृति विश्वविद्यालय, शांतिकुंज के मृत्युंजय सभागार में “नशा मुक्त भारत सप्ताह” के अंतर्गत एक विशाल जनजागरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह भारत सरकार का प्रमुख राष्ट्रीय कार्यक्रम था, जिसके अंतर्गत केंद्...

June 27, 2026, 10:21 a.m.

गायत्री-तीर्थ, शांतिकुंज से निकली नशामुक...

हरिद्वार। विश्व नशा निषेध दिवस के अवसर पर अखिल विश्व गायत्री परिवार के तत्वावधान में आज 26 जून 2026 को देव संस्कृति विश्वविद्यालय, शांतिकुंज के मृत्युंजय सभागार में “नशा मुक्त भारत सप्ताह” के अंतर्गत एक विशाल जनजागरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह भारत सरकार का प्रमुख राष्ट्रीय कार्यक्रम था, जिसके ...

June 26, 2026, 4:13 p.m.

देव संस्कृति विश्वविद्यालय पहुंचे केंद्र...

देव संस्कृति विश्वविद्यालय, शांतिकुंज में आज सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री माननीय श्री वीरेंद्र कुमार जी का आगमन हुआ। उनके विश्वविद्यालय पहुंचने पर अखिल विश्व गायत्री परिवार के युवा प्रतिनिधि एवं देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी ने आत्मीय एवं भावपूर्ण स्वागत...

June 26, 2026, 11:57 a.m.

विश्व नशा निषेध दिवस पर देव संस्कृति विश...

नशा केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को ही नहीं, बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र की चेतना एवं ऊर्जा को भी प्रभावित करता है। देव संस्कृति विश्वविद्यालय सदैव युवा शक्ति को नैतिक मूल्यों, योग, साधना, सकारात्मक चिंतन एवं संस्कारित जीवनशैली से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। विश्व नशा निषेध दिवस के अवसर पर आइए, हम सभ...

June 26, 2026, 10:31 a.m.

गायत्री जयंती महापर्व पर मुख्य सभागार, श...

गायत्री जयंती महापर्व के पावन अवसर पर मुख्य सभागार, शांतिकुंज में ब्रह्मवादिनी बहनों द्वारा श्रद्धा, भक्ति एवं उत्साह के साथ दीप महायज्ञ सम्पन्न कराया गया। हजारों दीपों की दिव्य आभा से सभागार आलोकित हो उठा तथा उपस्थित साधक-परिजनों ने युगऋषि के विचारों को आत्मसात करते हुए सद्भावना, संस्कार एवं लोकमंग...

June 25, 2026, 10:26 a.m.

‘जीवन संग्राम है अध्यात्म’ विषय पर आदरणी...

गायत्री जयंती महापर्व-2026 के द्वितीय दिवस की संध्यावेला में देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी ने कहा कि आज हम सभी गायत्री जयंती के उस परम पावन पर्व पर एकत्रित हैं, जिसका चयन परम पूज्य गुरुदेव ने अपने महाप्रयाण के लिए किया था। गायत्री जयंती पर्व की पूर्व संध्या प...

June 25, 2026, 10:16 a.m.
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गुरुदेव से प्रथम भेंट

15 वर्ष की आयु में— बसंत पंचमी पर्व सन् 1926 को स्वगृह— आँवलखेड़ा (आगरा, उत्तर प्रदेश, भारत) में पूजास्थल में ही दादागुरु स्वामी सर्वेश्वरानन्द जी के दर्शन एवं मार्गदर्शन के साथ-ही-साथ आत्मसाक्षात्कार हुआ।

अखण्ड दीपक

सन् 1926 से निरंतर प्रज्वलित दीपक, जिसके सान्निध्य में परम पूज्य गुरुदेव श्रीराम शर्मा आचार्य जी ने 24-24 लक्ष के चौबीस गायत्री महापुरश्चरण संपन्न किए, आज भी इसके बस एक झलक भर प्राप्त कर लेने से ही लोगों को दैवीय प्रेरणा और आंतरिक शक्ति प्राप्त होती है। इसके सान्निध्य में अब तक 2400 करोड़ से भी अधिक गायत्री मंत्र का जप किया जा चुका है।

अखण्ड ज्योति पत्रिका

इसका आरंभ सन् 1938 में पं. श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा किया गया था। पत्रिका का मुख्य उद्देश्य— वैज्ञानिक आध्यात्मिकता और 21वीं शताब्दी के धर्म, अर्थात वैज्ञानिक धर्म को बढ़ावा देना है।

गायत्री मन्त्र

दृढ़ निष्ठा से सतत गायत्री साधना करने से मन (अंतःकरण) तीव्र गति और चामत्कारिक प्रकार से पवित्र, निर्मल, व्यवस्थित और स्थिर होता है, जिससे साधक अपने बाह्य भौतिक जीवन की गंभीर परीक्षाओं एवं समस्याओं से जूझते हुए भी अटल आतंरिक शांति और आनंद की अनुभूति करता है।

आचार्य जी ने सिद्धांत और साधना को आधुनिक युग के अनुकूल तर्क व शब्द देकर सामाजिक परिवर्तन का जो मार्ग दिखाया है, उसके लिए आने वाली पीढ़ियाँ युगों-युगों तक कृतज्ञ रहेंगी।

डॉ. शंकर दयाल शर्मा (पूर्व राष्ट्रपति)

मुझे ज्ञात है कि इस विश्वविद्यालय ने स्वतंत्रता सेनानी और लगभग ३००० पुस्तकों के लेखक पंडित श्रीराम शर्मा आचार्यजी के स्वप्न को साकार रूप दिया है। इन्हें भारत में ज्ञान क्रांति का प्रवर्तक कहना उपयुक्त होगा। आचार्यश्री का विचार था कि अज्ञानता ही निर्धनता और बीमारी आदि सभी समस्याओं की जड़ है।

डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम (पूर्व राष्ट्रपति एवं वैज्ञानिक)

आचार्य जी का एकाकी पुरुषार्थ सारे संत समाज की सम्मिलित शक्ति के स्तर का है, उनने गायत्री व यज्ञ को प्रतिबंध रहित करने निमित्त जो कुछ भी किया वह शास्त्रों के अनुसार ही था। मेरा उन्हें बारम्बार नमन है।

स्वामी जयेन्द्रतीर्थ सरस्वती (शंकराचार्य कांची कामकोटि पीठ)

श्रद्धेय आचार्य श्रीराम शर्मा जी ने जो कार्य कर दिखाया वह अद्भुत है, युग के लिए नितांत आवश्यक है। आचार्य जी के साहित्य से मैं बहुत प्रभावित हूँ। प्रज्ञा पुराण ने विशेष रूप से मुझे अपने कार्यों में बहुत बल प्रदान किया है। उनका चिंतन राष्ट्र को शक्तिशाली बनाता और मानव मात्र को सही दिशा प्रदान करता है।

श्री नानाजी देशमुख (संस्थापक ग्रामोदय विश्वविद्यालय)

आचार्य जी द्वारा भाष्य किए गए उपनिषदों का स्वाध्याय करने के बाद उन्होंने कहा कि- ‘‘काश! यह साहित्य मुझे जवानी में मिल गया होता तो मेरे जीवन की दिशाधारा कुछ और ही होती; मैं राजनीति में न जाकर आचार्य श्री के चरणों में बैठा अध्यात्म का ज्ञान ले रहा होता।’’

सर्वपल्ली डॉ. राधाकृष्णन्

विनोबा जी ने वेदों के पूज्यवर द्वारा किए गए भाष्य को ग्वालियर मेंं एक सार्वजनिक सभा में अपने सिर पर धारण करते हुए कहा- "ये ग्रन्थ किसी व्यक्ति द्वारा नहीं, शक्ति द्वारा लिखे गये हैं।"

आचार्य विनोबा भावे

सुप्रसिद्ध सन्त देवरहा बाबा एक सिद्ध पुरुष थे। उनने एक परिजन से कहा- ‘‘बेटा! उनके बारे में मैं क्या कहूँ? यह समझो कि मैं हृदय से सतत उनका स्मरण करता रहता हूँ। गायत्री उनमें पूर्णतः समा गयी है एवं वे साक्षात् सविता स्वरूप हैं।’’

देवरहा बाबा

‘‘आचार्यश्री ने गायत्री को जन-जन की बनाकर महर्षि दयानन्द के कार्यों को आगे बढ़ाया है। गायत्री और ये एकरूप हो गये हैं।’’

महात्मा आनन्द स्वामी

अपने भावभरे उद्गार पूज्यवर के सम्बन्ध में इस रूप में व्यक्त किए थे- ‘‘आचार्य जी इस युग में गायत्री के जनक हैं। उनने गायत्री को सबकी बना दिया। यदि इसे मात्र ब्राह्मणों की मानकर उन्हीं के भरोसे छोड़ दिया होता तो अब तक गायत्री महाविद्या सम्भवतः लुप्त हो गयी होती।’’

करपात्री जी महाराज