विज्ञान ने समस्याएँ सुलझाई कम, उलझाईं अध...

विज्ञान की एक शाखा रसायनशास्त्र ने लाखों-करोड़ों कार्बनिक और अकार्बनिक पदार्थों की खोज कर ली। इतनी औषधियाँ बन चुकी हैं कि डॉक्टर उन सबको याद भी नहीं रख सकता। जीव विज्ञान ने यहाँ तक पहल की कि सूक्ष्मतम जीवाणु (बैक्टीरिया) और विषाणु (वायरस) की सैकड़ों जातियों तक का पता लगा लिया। एनाटॉमी और फिजियोलॉजी ...

March 31, 2026, 11:32 a.m.

विज्ञान और उसकी अस्थिरता...

ईसा से 200 वर्ष पूर्व नीसिया के वैज्ञानिक ‘हिप्पार्कस’ ने बताया कि, “ब्रह्मांड का केंद्र पृथ्वी है। अन्य ग्रह-उपग्रह उसके चारों ओर केंद्रीय शक्ति (एक्सेंट्रिक) कक्षाओं में— अधिचक्रों (एपिसाइकिल्स) में घूमते हैं।” प्रसिद्ध यूनानी वैज्ञानिक ‘टालेमियस’ (संक्षिप्त नाम टालेमी) ने इसी सिद्धांत को स्वीकार ...

March 31, 2026, 10:41 a.m.

विज्ञान की अपूर्णताएँ...

विज्ञान की अधिकांश उपलब्धियाँ जड़ प्रकृति के क्षेत्र में हैं। पृथ्वी में पाए जाने वाले सभी कार्बनिक (आर्गेनिक) और अकार्बनिक (इन आर्गेनिक) धातुओं, खनिजों, गैसों और इन सबके द्वारा बनने वाले यंत्रों, प्रकाश, विद्युत्, ताप, चुंबक आदि से संबंधित अनेक महत्त्वपूर्ण जानकारियाँ विज्ञान देता है, उसमें कामवासन...

March 30, 2026, 12:26 p.m.

विज्ञान की अपूर्णता और स्थिरता...

भौतिक तथ्यों की जानकारी देना और पदार्थ की शक्ति का सुविधाजनक उपयोग सिखाना— विज्ञान का क्षेत्र इतना ही है। हर बात की एक सीमा होती है। विज्ञान की सीमा भी इतनी ही है। इस परिधि को किसी प्रकार कम महत्त्व का नहीं माना जा सकता। अन्य सभी प्राणी अपनी शारीरिक क्षमता भार से निर्वाह के साधन जुटाते रहने भर में स...

March 27, 2026, 4:09 p.m.

नवरात्रि में घर घर चल रहे विभिन्न संस्का...

*नवरात्रि में घर घर चल रहे विभिन्न संस्कार*    *गायत्री मंदिर पर रामनवमी को होगा पूर्णाहुति और भंडारे का आयोजन*   संवाद सूत्र: पचपेड़वा/गैंसड़ी        राष्ट्र जागरण, मानव में देवत्व के उदय और धरती पर स्वर्ग के अवतरण को लेकर गायत्री परिवार पचपेड़वा और गैंसडी संयुक्त रूप से आगामी 27 मार्च 2026 को गायत...

March 24, 2026, 1:16 a.m.

हमारी वसीयत और विरासत (भाग 157):आत्मीयजन...

कहने को गायत्री परिवार, प्रज्ञा परिवार आदि नाम रखे गए हैं और उनकी सदस्यता का रजिस्टर तथा समयदान-अंशदान का अनुबंध भी है, पर वास्तविकता दूसरी ही है, जिसे हम सब भली भाँति अनुभव भी करते हैं। वह है— जन्म-जन्मांतरों से संग्रहीत आत्मीयता। जिसके पीछे जुड़ी हुई अनेकानेक गुदगुदी उत्पन्न करने वाली घटनाएँ हमें स...

March 10, 2026, 11:35 a.m.

हमारी वसीयत और विरासत (भाग 156):आत्मीयज...

साधना से उपलब्ध अतिरिक्त सामर्थ्य को विश्व के मूर्द्धन्य वर्गों को हिलाने-उलटने में लगाने का हमारा मन है। अच्छा होता सुई और धागे को आपस में पिरो देने वाले कोई सूत्र मिल जाते; अन्यथा सर्वथा अपरिचित रहने की स्थिति में तारतम्य बैठने में कठिनाई होगी। मूर्द्धन्यों में सत्ताधीश, धनाध्यक्ष, वैज्ञानिक और मन...

March 10, 2026, 11:18 a.m.

हमारी वसीयत और विरासत (भाग 155):तीन संकल...

हमने जैसा कि इस पुस्तक में समय-समय पर संकेत किया है। जैसे हमारे बॉस के आदेश मिलते रहे हैं, वैसे ही हमारे संकल्प बनते, पकते व फलित होते गए हैं। सन् 1986 वर्ष का उत्तरार्द्ध हमारे जीवन का महत्त्वपूर्ण सोपान है। इस वर्ष के समापन के साथ हमारे पचहत्तरवें वर्ष की हीरक जयंती का वह अध्याय पूरा होता है, जिनक...

March 10, 2026, 11:04 a.m.

हमारी वसीयत और विरासत (भाग 154): जीवन के...

परिवर्तन और निर्माण दोनों ही कष्टसाध्य हैं। भ्रूण जब शिशुरूप में धरती पर आता है, तो प्रसवपीड़ा के साथ होने वाला खून-खच्चर दिल दहला देता है। प्रस्तुत परिस्थितियों के दृश्य और अदृश्य दोनों ही पक्ष ऐसे हैं, जिनके कण-कण से महाविनाश का परिचय मिलता है। समय की आवश्यकताएँ इतनी बड़ी हैं, जिन्हें पूरा करने के ल...

March 9, 2026, 12:26 p.m.

विशिष्ट सामायिक चिंतन: कृत्रिम बुद्धिमत्...

आज जीवन के हर क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता अर्थात ए०आई० (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) का बोलबाला है। ए०आई० समाचार की सुर्खियों से आगे जीवन के हर पक्ष का हिस्सा बनती जा रही है। स्वास्थ्य, कृषि, बैंकिंग, यातायात, सुरक्षा, अनुवाद, भविष्यकथन, सर्च इंजन, हर क्षेत्र में इसकी सशक्त उपस्थिति दर्ज हो रही है। श...

March 8, 2026, 12:01 p.m.

देव संस्कृति विश्वविद्यालय में कैबिनेट म...

उत्तराखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री बनने के उपरांत हरिद्वार से लगातार पाँचवीं बार विधायक माननीय श्री मदन कौशिक जी ने देव संस्कृति विश्वविद्यालय पहुंचकर आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी से सौहार्दपूर्ण भेंट की। इस अवसर पर आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी ने विश्वविद्यालय परिसर में मंत्री जी का आत्मीय स्वागत एवं...

March 31, 2026, 12:04 p.m.

शहीद दिवस पर “एक शाम शहीदों के नाम” : सृ...

देव संस्कृति विश्वविद्यालय में शहीद दिवस के अवसर पर “एक शाम शहीदों के नाम” कार्यक्रम का भावपूर्ण आयोजन किया गया। यह आयोजन देव संस्कृति स्टूडेंट्स क्लब (Social Outreach Club – सृजन शिल्पी) द्वारा किया गया, जिसका उद्देश्य अमर शहीदों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करना एवं युवाओं में राष्ट्र के प्रति जागर...

March 31, 2026, 11:54 a.m.

शहीद दिवस के पावन अवसर पर अमर शहीद भगत स...

यह दिवस केवल इतिहास का स्मरण नहीं, अपितु स्वतंत्रता के लिए दिए गए महान बलिदानों की अमर चेतना का उत्सव है। यह हमें प्रेरित करता है कि सच्ची आज़ादी विचारों की दृढ़ता, साहस और कर्तव्यनिष्ठ कर्म से साकार होती है। इन वीर सपूतों का त्याग हमें भयमुक्त, न्यायपूर्ण एवं समरस समाज के निर्माण हेतु सतत अग्रसर रह...

March 31, 2026, 11:47 a.m.

Erasmus+ Faculty Mobility | Dev Sanskrit...

Under the Erasmus+ Staff Mobility for Teaching Programme, Dev Sanskriti Vishwavidyalaya, Haridwar had the privilege of hosting Rev. Dr. Filip Jozef Krauze for an academic engagement focused on interfaith dialogue and value-based education. During his visit, Respected Dr. Chinmay Pandya interacted wi...

March 31, 2026, 11:42 a.m.

देव संस्कृति विश्वविद्यालय की छात्रा अंश...

देव संस्कृति विश्वविद्यालय की बीएससी योग की छात्रा अंशिका रेवानी ने ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी स्तर की प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक प्राप्त कर विश्वविद्यालय का गौरव बढ़ाया है। इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर विश्वविद्यालय परिवार में हर्ष का वातावरण है। अंशिका ने अपनी सफलता का श्रेय अपने ...

March 31, 2026, 11:38 a.m.

देव संस्कृति विश्वविद्यालय में केन्द्रीय...

DSVV, हरिद्वार। देव संस्कृति विश्वविद्यालय में केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय (CSU) के श्री सदाशिव परिसर, पुरी (ओडिशा) से आए स्नातकोत्तर विद्यार्थियों का शैक्षणिक भ्रमण सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिवार द्वारा सभी विद्यार्थियों का आत्मीय स्वागत किया गया। भ्रमण के दौरान विद्यार...

March 31, 2026, 11:32 a.m.

देव संस्कृति विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय...

देव संस्कृति विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष श्री किशोर मकावाना जी का गरिमामय आगमन हुआ, जहाँ विश्वविद्यालय के प्रति-कुलपति एवं अखिल विश्व गायत्री परिवार के युवा प्रतिनिधि आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी ने उनका आत्मीय स्वागत किया। इस अवसर पर दोनों के बीच सौहार्दपूर्ण भेंट हुई, ...

March 31, 2026, 11:27 a.m.

“हिंडन नदी शोध यात्रा” का प्रेरणादायी सम...

हिंडन नदी के संरक्षण, संवर्धन एवं जन-जागरूकता के उद्देश्य से संचालित “ हिंडन नदी शोध यात्रा” का समापन समारोह आज आईआईएमटी कॉलेज, गौतमबुद्धनगर के सभागार में अत्यंत गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में विविध क्षेत्रों से जुड़े बुद्धिजीवियों, गायत्री परिवार के परिजनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं ...

March 31, 2026, 11:17 a.m.

माननीय केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मे...

नई दिल्ली में देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार के प्रतिकुलपति आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी ने माननीय केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान जी से शिष्टाचार भेंट की। माननीय मंत्री जी का गायत्री परिवार के साथ तीन दशक से अधिक का घनिष्ठ संबंध रहा है। इस अवसर पर डॉ पंड्या जी ने उन्हें जुलाई 2026...

March 31, 2026, 11:10 a.m.

माननीय केंद्रीय गृह राज्य मंत्री श्री नि...

नई दिल्ली प्रवास के दौरान देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार के प्रतिकुलपति आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी ने माननीय केंद्रीय गृह राज्य मंत्री श्री नित्यानंद राय जी से आत्मीय भेंट की। इस अवसर पर राष्ट्र निर्माण में अनुशासन, युवाशक्ति एवं चरित्र निर्माण के महत्व पर सार्थक चर्चा हुई। साथ ही विश्व मानवत...

March 31, 2026, 11:02 a.m.
as

गुरुदेव से प्रथम भेंट

15 वर्ष की आयु में— बसंत पंचमी पर्व सन् 1926 को स्वगृह— आँवलखेड़ा (आगरा, उत्तर प्रदेश, भारत) में पूजास्थल में ही दादागुरु स्वामी सर्वेश्वरानन्द जी के दर्शन एवं मार्गदर्शन के साथ-ही-साथ आत्मसाक्षात्कार हुआ।

अखण्ड दीपक

सन् 1926 से निरंतर प्रज्वलित दीपक, जिसके सान्निध्य में परम पूज्य गुरुदेव श्रीराम शर्मा आचार्य जी ने 24-24 लक्ष के चौबीस गायत्री महापुरश्चरण संपन्न किए, आज भी इसके बस एक झलक भर प्राप्त कर लेने से ही लोगों को दैवीय प्रेरणा और आंतरिक शक्ति प्राप्त होती है। इसके सान्निध्य में अब तक 2400 करोड़ से भी अधिक गायत्री मंत्र का जप किया जा चुका है।

अखण्ड ज्योति पत्रिका

इसका आरंभ सन् 1938 में पं. श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा किया गया था। पत्रिका का मुख्य उद्देश्य— वैज्ञानिक आध्यात्मिकता और 21वीं शताब्दी के धर्म, अर्थात वैज्ञानिक धर्म को बढ़ावा देना है।

गायत्री मन्त्र

दृढ़ निष्ठा से सतत गायत्री साधना करने से मन (अंतःकरण) तीव्र गति और चामत्कारिक प्रकार से पवित्र, निर्मल, व्यवस्थित और स्थिर होता है, जिससे साधक अपने बाह्य भौतिक जीवन की गंभीर परीक्षाओं एवं समस्याओं से जूझते हुए भी अटल आतंरिक शांति और आनंद की अनुभूति करता है।

आचार्य जी ने सिद्धांत और साधना को आधुनिक युग के अनुकूल तर्क व शब्द देकर सामाजिक परिवर्तन का जो मार्ग दिखाया है, उसके लिए आने वाली पीढ़ियाँ युगों-युगों तक कृतज्ञ रहेंगी।

डॉ. शंकर दयाल शर्मा (पूर्व राष्ट्रपति)

मुझे ज्ञात है कि इस विश्वविद्यालय ने स्वतंत्रता सेनानी और लगभग ३००० पुस्तकों के लेखक पंडित श्रीराम शर्मा आचार्यजी के स्वप्न को साकार रूप दिया है। इन्हें भारत में ज्ञान क्रांति का प्रवर्तक कहना उपयुक्त होगा। आचार्यश्री का विचार था कि अज्ञानता ही निर्धनता और बीमारी आदि सभी समस्याओं की जड़ है।

डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम (पूर्व राष्ट्रपति एवं वैज्ञानिक)

आचार्य जी का एकाकी पुरुषार्थ सारे संत समाज की सम्मिलित शक्ति के स्तर का है, उनने गायत्री व यज्ञ को प्रतिबंध रहित करने निमित्त जो कुछ भी किया वह शास्त्रों के अनुसार ही था। मेरा उन्हें बारम्बार नमन है।

स्वामी जयेन्द्रतीर्थ सरस्वती (शंकराचार्य कांची कामकोटि पीठ)

श्रद्धेय आचार्य श्रीराम शर्मा जी ने जो कार्य कर दिखाया वह अद्भुत है, युग के लिए नितांत आवश्यक है। आचार्य जी के साहित्य से मैं बहुत प्रभावित हूँ। प्रज्ञा पुराण ने विशेष रूप से मुझे अपने कार्यों में बहुत बल प्रदान किया है। उनका चिंतन राष्ट्र को शक्तिशाली बनाता और मानव मात्र को सही दिशा प्रदान करता है।

श्री नानाजी देशमुख (संस्थापक ग्रामोदय विश्वविद्यालय)

आचार्य जी द्वारा भाष्य किए गए उपनिषदों का स्वाध्याय करने के बाद उन्होंने कहा कि- ‘‘काश! यह साहित्य मुझे जवानी में मिल गया होता तो मेरे जीवन की दिशाधारा कुछ और ही होती; मैं राजनीति में न जाकर आचार्य श्री के चरणों में बैठा अध्यात्म का ज्ञान ले रहा होता।’’

सर्वपल्ली डॉ. राधाकृष्णन्

विनोबा जी ने वेदों के पूज्यवर द्वारा किए गए भाष्य को ग्वालियर मेंं एक सार्वजनिक सभा में अपने सिर पर धारण करते हुए कहा- "ये ग्रन्थ किसी व्यक्ति द्वारा नहीं, शक्ति द्वारा लिखे गये हैं।"

आचार्य विनोबा भावे

सुप्रसिद्ध सन्त देवरहा बाबा एक सिद्ध पुरुष थे। उनने एक परिजन से कहा- ‘‘बेटा! उनके बारे में मैं क्या कहूँ? यह समझो कि मैं हृदय से सतत उनका स्मरण करता रहता हूँ। गायत्री उनमें पूर्णतः समा गयी है एवं वे साक्षात् सविता स्वरूप हैं।’’

देवरहा बाबा

‘‘आचार्यश्री ने गायत्री को जन-जन की बनाकर महर्षि दयानन्द के कार्यों को आगे बढ़ाया है। गायत्री और ये एकरूप हो गये हैं।’’

महात्मा आनन्द स्वामी

अपने भावभरे उद्गार पूज्यवर के सम्बन्ध में इस रूप में व्यक्त किए थे- ‘‘आचार्य जी इस युग में गायत्री के जनक हैं। उनने गायत्री को सबकी बना दिया। यदि इसे मात्र ब्राह्मणों की मानकर उन्हीं के भरोसे छोड़ दिया होता तो अब तक गायत्री महाविद्या सम्भवतः लुप्त हो गयी होती।’’

करपात्री जी महाराज