शांति और सौंदर्य को अपने अंदर खोजो ...

उनसे प्यार करो, जिन्हें लोग पतित, गर्हित और हेय समझते हैं। जिन्हें केवल निंदा और भर्त्सना ही मिलती है। जो अपने ऊपर लदे हुए पिछड़ेपन के कारण न किसी के मित्र बन पाते हैं और न जिन्हें कोई प्यार करता है। प्यार करने योग्य वही लोग हैं, जिन्हें स्नेह-सद्भाव देकर तुम अपने को गौरवान्वित करोगे। माँगो मत। चाहो...

June 7, 2026, 2:29 p.m.

समूचा ब्रह्मांड एक चैतन्य शरीर...

प्रौढ़ता को प्राप्त करता हुआ विज्ञान अब उन्हीं निष्कर्षों पर पहुँच रहा है, जिन पर सदियों पूर्व भारतीय तत्त्ववेत्ता ज्योतिर्विद् पहुँच चुके थे। समूचा ब्रह्मांड एक चैतन्य शरीर है, जिसका प्रत्येक स्पंदन हर घटक को प्रभावित करता है, जिसमें पृथ्वी और संबंधित वातावरण, वनस्पति एवं जीवधारी भी सम्मिलित हैं। प...

June 7, 2026, 2:02 p.m.

संवेदना की समस्या को कौन सुलझाएगा?...

ज्ञान के दो पक्ष हैं— एक विचारणा, दूसरा संवेदना। विचार मस्तिष्क की देन हैं। वे बाहर से होते हैं; प्रशिक्षण एवं अनुभव के सहारे। भाव भीतर से उठते हैं। वे अंतःकरण के उत्पादन हैं। विचारों से जानकारी तो बढ़ती है और बुद्धि में परिपक्वता आती है, पर उनका प्रभाव अंतस् पर नहीं के बराबर पड़ता है। बहुत पढ़ने और ब...

June 7, 2026, 12:58 p.m.

विज्ञान और अध्यात्म का समन्वय निश्चित...

अध्यात्म और विज्ञान को पिछले दिनों परस्पर विरोधी माना जाता रहा है। नवीनतम शोधें उन्हें पूरक ही नहीं, एकीभूत भी सिद्ध कर रही हैं। चेतना के क्षेत्र में वैज्ञानिक चिंतन का योग अगले दिनों शोध के नए आधार प्रस्तुत करेगा। यह विश्वास किया जाना चाहिए, विज्ञान के बढ़ते हुए चरण पदार्थ की मूलसत्ता की नवीन व्याख्...

June 7, 2026, 12:42 p.m.

असीम पर निर्भर ससीम जीवन...

“धरती पर जीवनोपयोगी परिस्थितियों का आधार जिन रासायनिक हलचलों और आणविक गतिविधियों पर निर्भर है, वे अंतरिक्ष से आने वाले रेडियो-तरंगों पर अवलंबित हैं। शक्ति के स्रोत उन्हीं में हैं। विविध विधि हलचलों की अधिष्ठात्री इन्हीं को कहना चाहिए। हमारा परिवार— हमारा शरीर— हमारा अस्तित्व सब कुछ प्रकारांतर से इन ...

June 7, 2026, 12:19 p.m.

धरती माँ को ओढ़ाई हरी चादर | विश्व पर्या...

जमालपुर, 5 जून 2026। विश्व पर्यावरण दिवस के पावन अवसर पर प्रज्ञा युवा प्रकोष्ठ, जमालपुर द्वारा महिला मंडल के सहयोग से काली पहाड़ी, छठ पूजा घाट (नहर परिसर) में एक विशाल वृक्षारोपण अभियान का आयोजन किया गया। पर्यावरण संरक्षण एवं हरित भविष्य के संकल्प के साथ आयोजित इस अभियान में कुल 101 पौधों का रोपण कि...

June 5, 2026, 10:31 p.m.

अखिल विश्व गायत्री परिवार के आवाहन पर घर...

घर घर में में हम यज्ञ रचाएं, आओ भारत सबल बनाएं  इसी कामना से आज बुद्ध पूर्णिमा के पावन पर्व पर अखिल विश्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज (हरिद्वार) के दिशा निर्देश पर जनपद बलरामपुर के पचपेड़वा, गैंसड़ी और तुलसीपुर क्षेत्र में मानव में देवत्व का उदय, धरती पर स्वर्ग का अवतरण और विश्वव्यापी संकट निवारण हेतु...

May 3, 2026, 3 p.m.

अब दर्शन की बारी है, उसे कुछ करने दिया ज...

विज्ञान का तात्पर्य— “प्रकृति के कुछ रहस्यों का उद्घाटन अथवा कुछ उपकरणों का निर्माण कर लेना मात्र नहीं है, वरन् उसकी व्यापकता मानवी दृष्टिकोण को अधिक सुविस्तृत, तथ्यपूर्ण एवं सत्यनिष्ठ बनाने तक चली जाती है।” विज्ञान का उपयोग भौतिक सुख-सुविधाओं के संवर्द्धन अथवा जानकारियों का क्षेत्र बढ़ाने तक सीमित ...

April 19, 2026, 5:07 p.m.

धर्म और दर्शन की उत्क्रांति भी आवश्यक...

भावी पीढ़ी को मानसिक दिग्भ्रांति से बचाने के लिए यह प्रश्न सुलझाना आवश्यक है। धर्म के गिरते हुए मूल्य को देखकर ऐसा लगता है कि कहीं आने वाली पीढ़ियाँ पूर्णतया पदार्थवादी होकर अपनी आध्यात्मिक शक्तियाँ नष्ट न कर डालें। हमारी तरह से ऐसे विचार दुनिया के अनेक मनीषियों के मस्तिष्क में आए और उन्होंने अपनी-अ...

April 19, 2026, 4:59 p.m.

धर्म और विज्ञान जुड़वाँ भाई...

पिछले दिनों धर्म और विज्ञान को विरोधी माना जाता रहा है। दोनों के तर्क, प्रतिपादन और आधार एकदूसरे से भिन्न समझे जाते रहे हैं। एक को प्रत्यक्षवादी और दूसरे को परोक्षवादी कहकर उन्हें असंबद्ध कहा जाता रहा है। इसलिए दोनों की दिशा विपरीत मान ली गई और माना गया कि किसी धार्मिक के लिए विज्ञान को समझना एवं कि...

April 19, 2026, 4:54 p.m.

10 डाउनिंग स्ट्रीट, लंदन, यूनाइटेड किंगड...

अपने इंग्लैंड-प्रवास के अंतिम चरण में, परम आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी, यूनाइटेड किंगडम के प्रधान मंत्री निवास पहुँचे। इस अवसर पर उन्होंने परम पूज्य गुरुदेव के विचारों, अंतर्धार्मिक संवाद एवं विश्व शांति जैसे विषयों पर चर्चा की। 10 डाउनिंग स्ट्रीट, लंदन में स्थित, यूनाइटेड किंगडम के प्रधान मंत्री का...

June 17, 2026, 10:24 a.m.

ब्रिटिश संसद (हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स), यूनाइटे...

हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स में ब्रिटिश-भारतीय युवाओं की एक विशेष सभा आयोजित की गई। इस आयोजन में परम आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए। इस अवसर पर इन्वेस्टमेंट बैंकर्स, कम्युनिटी लीडर्स, चिकित्सकों तथा विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने सहभागिता करते हुए गायत्री मंत्र एवं भारतीय स...

June 17, 2026, 10:15 a.m.

ब्रिटिश संसद (हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स) में परम ...

लंदन, यूनाइटेड किंगडम। अपने अंतरराष्ट्रीय प्रवास के क्रम में परम आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी ने ब्रिटिश संसद (हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स) का दौरा किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रतिष्ठित ब्रिटिश-भारतीय उद्यमी एवं राजनेता लॉर्ड करन फरीदून बिलिमोरिया से शिष्टाचार भेंट की तथा शिक्षा, उद्योग, नवाचार एवं वैश्विक सहयोग...

June 16, 2026, 5:54 p.m.

देव संस्कृति विश्वविद्यालय में यज्ञोपैथी...

हरिद्वार। भारतीय ज्ञान परंपरा एवं वैदिक चिकित्सा विज्ञान के पुनर्जागरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार के आयुर्वेद एवं समग्र स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत संचालित यज्ञवल्क्य योग एवं यज्ञ अनुसंधान केंद्र द्वारा यज्ञोपैथी कार्यशाला एवं यज्ञोपैथी थेरेपी कैंप क...

June 16, 2026, 10:27 a.m.

ब्रिटिश संसद (हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स), यूनाइटे...

अपने कार्यक्रम-प्रवास के अगले चरण में परम आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी यूनाइटेड किंगडम की संसद (हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स) पहुँचे। इस अवसर पर उन्होंने लॉर्ड मॉरिस ग्लासमैन जी से शिष्टाचार भेंट कर पूज्य गुरुदेव एवं देव संस्कृति विश्वविद्यालय के विज़न को साझा किया। लॉर्ड ग्लासमैन एक प्रसिद्ध ब्रिटिश राजनेता, शि...

June 16, 2026, 10:19 a.m.

देव संस्कृति विश्वविद्यालय में अंतर्राष्...

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस-2026 के उपलक्ष्य में आयुष मंत्रालय के तत्वावधान में देव संस्कृति विश्वविद्यालय, शांतिकुंज में 15 जून को “गंगोत्री से गंगासागर” थीम पर विशेष योग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य योग के माध्यम से स्वास्थ्य, संतुलन एवं भारतीय संस्कृति के प्रति जनजागरण का संदेश ...

June 15, 2026, 5:12 p.m.

अय्यप्पा मंदिर, हैरो एवं वील्डस्टोन में ...

हैरो एवं वील्डस्टोन, यूनाइटेड किंगडम। जन्म शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में चल रहे कार्यक्रम-प्रवास के क्रम में परम आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी इंग्लैंड के हैरो एवं वील्डस्टोन क्षेत्र स्थित अय्यप्पा मंदिर पहुँचे। इस अवसर पर स्थानीय परिजनों एवं श्रद्धालुओं द्वारा आयोजित विशेष यज्ञ कार्यक्रम में उन्होंने ...

June 15, 2026, 3:49 p.m.

शताब्दी वर्ष विशेष : लंदन में गायत्री पर...

लंदन, यूनाइटेड किंगडम। जन्म शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में चल रहे अंतरराष्ट्रीय प्रवास के क्रम में परम आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी यूनाइटेड किंगडम की राजधानी लंदन पहुँचे। उनके आगमन पर स्थानीय गायत्री परिवार के परिजनों एवं कार्यकर्ताओं ने आत्मीय स्वागत किया। इस अवसर पर आयोजित विशेष बैठक में परम आदरणीय ...

June 15, 2026, 10:34 a.m.

उत्तर फ़्रांस के नॉर्मंडी में “Thanh An ...

नॉर्मंडी, फ़्रांस। यूरोप प्रवास के क्रम में परम आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी उत्तरी फ़्रांस के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र नॉर्मंडी पहुँचे। इस अवसर पर उन्होंने नवस्थापित “Thanh An Yoga” केंद्र का शुभारंभ किया, जो भारतीय योग, अध्यात्म एवं मानवीय मूल्यों के प्रसार हेतु समर्पित रहेगा। केंद्र के उद्घ...

June 14, 2026, 11:26 a.m.

फ़्रांस, यूरोप...

फ़्रांस, यूरोप उत्तर अमेरिका एवं यूरोप प्रवास के क्रम में परम आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी ने फ़्रांस के सुप्रसिद्ध कैथोलिक तीर्थस्थल Le Mont-Saint-Michel का भ्रमण किया। इस अवसर पर उन्होंने स्थानीय अंतरधार्मिक समुदाय के प्रतिनिधियों से आत्मीय भेंट कर मानव एकता, नैतिक जागरण एवं विश्वशांति जैसे विषयों ...

June 14, 2026, 10:41 a.m.
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गुरुदेव से प्रथम भेंट

15 वर्ष की आयु में— बसंत पंचमी पर्व सन् 1926 को स्वगृह— आँवलखेड़ा (आगरा, उत्तर प्रदेश, भारत) में पूजास्थल में ही दादागुरु स्वामी सर्वेश्वरानन्द जी के दर्शन एवं मार्गदर्शन के साथ-ही-साथ आत्मसाक्षात्कार हुआ।

अखण्ड दीपक

सन् 1926 से निरंतर प्रज्वलित दीपक, जिसके सान्निध्य में परम पूज्य गुरुदेव श्रीराम शर्मा आचार्य जी ने 24-24 लक्ष के चौबीस गायत्री महापुरश्चरण संपन्न किए, आज भी इसके बस एक झलक भर प्राप्त कर लेने से ही लोगों को दैवीय प्रेरणा और आंतरिक शक्ति प्राप्त होती है। इसके सान्निध्य में अब तक 2400 करोड़ से भी अधिक गायत्री मंत्र का जप किया जा चुका है।

अखण्ड ज्योति पत्रिका

इसका आरंभ सन् 1938 में पं. श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा किया गया था। पत्रिका का मुख्य उद्देश्य— वैज्ञानिक आध्यात्मिकता और 21वीं शताब्दी के धर्म, अर्थात वैज्ञानिक धर्म को बढ़ावा देना है।

गायत्री मन्त्र

दृढ़ निष्ठा से सतत गायत्री साधना करने से मन (अंतःकरण) तीव्र गति और चामत्कारिक प्रकार से पवित्र, निर्मल, व्यवस्थित और स्थिर होता है, जिससे साधक अपने बाह्य भौतिक जीवन की गंभीर परीक्षाओं एवं समस्याओं से जूझते हुए भी अटल आतंरिक शांति और आनंद की अनुभूति करता है।

आचार्य जी ने सिद्धांत और साधना को आधुनिक युग के अनुकूल तर्क व शब्द देकर सामाजिक परिवर्तन का जो मार्ग दिखाया है, उसके लिए आने वाली पीढ़ियाँ युगों-युगों तक कृतज्ञ रहेंगी।

डॉ. शंकर दयाल शर्मा (पूर्व राष्ट्रपति)

मुझे ज्ञात है कि इस विश्वविद्यालय ने स्वतंत्रता सेनानी और लगभग ३००० पुस्तकों के लेखक पंडित श्रीराम शर्मा आचार्यजी के स्वप्न को साकार रूप दिया है। इन्हें भारत में ज्ञान क्रांति का प्रवर्तक कहना उपयुक्त होगा। आचार्यश्री का विचार था कि अज्ञानता ही निर्धनता और बीमारी आदि सभी समस्याओं की जड़ है।

डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम (पूर्व राष्ट्रपति एवं वैज्ञानिक)

आचार्य जी का एकाकी पुरुषार्थ सारे संत समाज की सम्मिलित शक्ति के स्तर का है, उनने गायत्री व यज्ञ को प्रतिबंध रहित करने निमित्त जो कुछ भी किया वह शास्त्रों के अनुसार ही था। मेरा उन्हें बारम्बार नमन है।

स्वामी जयेन्द्रतीर्थ सरस्वती (शंकराचार्य कांची कामकोटि पीठ)

श्रद्धेय आचार्य श्रीराम शर्मा जी ने जो कार्य कर दिखाया वह अद्भुत है, युग के लिए नितांत आवश्यक है। आचार्य जी के साहित्य से मैं बहुत प्रभावित हूँ। प्रज्ञा पुराण ने विशेष रूप से मुझे अपने कार्यों में बहुत बल प्रदान किया है। उनका चिंतन राष्ट्र को शक्तिशाली बनाता और मानव मात्र को सही दिशा प्रदान करता है।

श्री नानाजी देशमुख (संस्थापक ग्रामोदय विश्वविद्यालय)

आचार्य जी द्वारा भाष्य किए गए उपनिषदों का स्वाध्याय करने के बाद उन्होंने कहा कि- ‘‘काश! यह साहित्य मुझे जवानी में मिल गया होता तो मेरे जीवन की दिशाधारा कुछ और ही होती; मैं राजनीति में न जाकर आचार्य श्री के चरणों में बैठा अध्यात्म का ज्ञान ले रहा होता।’’

सर्वपल्ली डॉ. राधाकृष्णन्

विनोबा जी ने वेदों के पूज्यवर द्वारा किए गए भाष्य को ग्वालियर मेंं एक सार्वजनिक सभा में अपने सिर पर धारण करते हुए कहा- "ये ग्रन्थ किसी व्यक्ति द्वारा नहीं, शक्ति द्वारा लिखे गये हैं।"

आचार्य विनोबा भावे

सुप्रसिद्ध सन्त देवरहा बाबा एक सिद्ध पुरुष थे। उनने एक परिजन से कहा- ‘‘बेटा! उनके बारे में मैं क्या कहूँ? यह समझो कि मैं हृदय से सतत उनका स्मरण करता रहता हूँ। गायत्री उनमें पूर्णतः समा गयी है एवं वे साक्षात् सविता स्वरूप हैं।’’

देवरहा बाबा

‘‘आचार्यश्री ने गायत्री को जन-जन की बनाकर महर्षि दयानन्द के कार्यों को आगे बढ़ाया है। गायत्री और ये एकरूप हो गये हैं।’’

महात्मा आनन्द स्वामी

अपने भावभरे उद्गार पूज्यवर के सम्बन्ध में इस रूप में व्यक्त किए थे- ‘‘आचार्य जी इस युग में गायत्री के जनक हैं। उनने गायत्री को सबकी बना दिया। यदि इसे मात्र ब्राह्मणों की मानकर उन्हीं के भरोसे छोड़ दिया होता तो अब तक गायत्री महाविद्या सम्भवतः लुप्त हो गयी होती।’’

करपात्री जी महाराज