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घर घर में में हम यज्ञ रचाएं, आओ भारत सबल बनाएं इसी कामना से आज बुद्ध पूर्णिमा के पावन पर्व पर अखिल विश्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज (हरिद्वार) के दिशा निर्देश पर जनपद बलरामपुर के पचपेड़वा, गैंसड़ी और तुलसीपुर क्षेत्र में मानव में देवत्व का उदय, धरती पर स्वर्ग का अवतरण और विश्वव्यापी संकट निवारण हेतु...
विज्ञान का तात्पर्य— “प्रकृति के कुछ रहस्यों का उद्घाटन अथवा कुछ उपकरणों का निर्माण कर लेना मात्र नहीं है, वरन् उसकी व्यापकता मानवी दृष्टिकोण को अधिक सुविस्तृत, तथ्यपूर्ण एवं सत्यनिष्ठ बनाने तक चली जाती है।” विज्ञान का उपयोग भौतिक सुख-सुविधाओं के संवर्द्धन अथवा जानकारियों का क्षेत्र बढ़ाने तक सीमित ...
भावी पीढ़ी को मानसिक दिग्भ्रांति से बचाने के लिए यह प्रश्न सुलझाना आवश्यक है। धर्म के गिरते हुए मूल्य को देखकर ऐसा लगता है कि कहीं आने वाली पीढ़ियाँ पूर्णतया पदार्थवादी होकर अपनी आध्यात्मिक शक्तियाँ नष्ट न कर डालें। हमारी तरह से ऐसे विचार दुनिया के अनेक मनीषियों के मस्तिष्क में आए और उन्होंने अपनी-अ...
पिछले दिनों धर्म और विज्ञान को विरोधी माना जाता रहा है। दोनों के तर्क, प्रतिपादन और आधार एकदूसरे से भिन्न समझे जाते रहे हैं। एक को प्रत्यक्षवादी और दूसरे को परोक्षवादी कहकर उन्हें असंबद्ध कहा जाता रहा है। इसलिए दोनों की दिशा विपरीत मान ली गई और माना गया कि किसी धार्मिक के लिए विज्ञान को समझना एवं कि...
पदार्थ के रूप में विज्ञान भी आंतरिक सत्ता का ही तो उद्घाटन करता है। धर्म के क्षेत्र में परमात्मा एक विश्वव्यापक शक्ति है और पदार्थ भी शक्ति के ही कण हैं। सच तो यह है कि शक्ति के अतिरिक्त संसार में और कुछ है ही नहीं। धर्म उसे अंतर्चेतना के रूप में देखता है। वह उदाहरण देता है कि गांधी जी का आत्मबल ही ...
जीवन उतना जटिल नहीं है, जितना कि बन गया है या बना दिया गया है। हँसी-खुशी की संभावनाओं से वह भरा-पूरा है। शरीर और मन की संरचना इस प्रकार हुई है कि वह बाहर के तनिक से साधनों की सुविधा प्राप्त हो जाने पर सहज ही स्वस्थ और सुखी रह सकता है। अति स्वल्प साधनों से अन्य जीवधारी अपना संतोषपूर्ण व्यवस्थाक्रम चल...
धर्म को पूजा-प्रक्रिया तक और विज्ञान को शिल्प व्यवसाय तक सीमित रखा जाए, तो दोनों की गरिमा बढ़ेगी नहीं, गिरेगी ही। दोनों अपंग-अधूरे रह जाएँगे। इन दोनों का परस्पर पूरक होकर रहना उचित ही नहीं, आवश्यक है। पदार्थ में सौंदर्य निखारने का यही तरीका है। कारीगर कलाकार तब बनता है, जब अपने क्रियाकलाप में भावपूर...
नर और नारी का कार्यक्षेत्र भिन्न है। नारी गृह-व्यवस्था में संलग्न रहती है। गर्भधारण और शिशुपालन यह दोनों काम उसी को करने होते हैं। नर का कार्यक्षेत्र भिन्न है। वह खेत, दफ्तर, कारखाने आदि में काम करता है और उस उपार्जन से गृह-व्यवस्था के लिए नारी की आवश्यकताएँ पूरी करता है। देखने में दोनों के बीच भारी...
आत्मा है या नहीं? इसका उत्तर हाँ और ना में दोनों ही तरह दिया जा सकता है। हाँ, उनके लिए ठीक है, जो ज्ञान के आधार पर सूक्ष्म विषयों पर विचार कर सकने और निष्कर्ष निकाल सकने में समर्थ हैं। ना, उनके लिए जो मात्र इंद्रियों के सहारे ही चेतनसत्ता का दर्शन करना चाहते हैं। चेतन सूक्ष्म है। वह चेतनसत्ता की ज्ञ...
चेतना के क्षेत्र में मन और बुद्धि का एक क्षेत्र है और श्रद्धा एवं सुसंस्कारिता का दूसरा। मन भौतिक साधनों के सहारे इंद्रियतृप्ति तथा अहंता की पूर्ति चाहता है। अर्थसंचय तथा बड़प्पन प्रदर्शित करने वाले दूसरे प्रसंग मन के प्रिय विषय हैं। बुद्धि यदि सामान्य स्तर की है और नरपशुओं जैसी है तो फिर उसे मन की ...
।। हरिद्वार | 21 मई, 2026 ।। गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में 21 से 22 मई तक आयोजित दो दिवसीय “शिक्षक गरिमा शिविर” का शुभारंभ मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र एवं झारखंड से पधारे शिक्षकों की गरिमामयी उपस्थिति में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. चिन्मय पंड्या ने दीप प्रज्वलित कर किया। शिविर का वातावरण श्रद्ध...
देव संस्कृति विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस-2026 के अंतर्गत आयोजित “प्रज्ञा योग - रखे निरोग” प्रोटोकॉल काउंटडाउन कार्यक्रम का आज सफलतापूर्वक समापन किया गया। कार्यक्रम में प्रतिकुलपति आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों, शिक्षकों ...
।। हरिद्वार ।। देव संस्कृति विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय महासचिव अविनाश पाण्डेय एवं प्रदेश अध्यक्ष अजय राय का आगमन हुआ। इस अवसर पर दोनों अतिथियों ने अखिल विश्व गायत्री परिवार के युवा प्रतिनिधि एवं देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पंड्या से आत्मीय भेंट की। इस दौरान भारतीय संस्कृति,...
भास्कर हरिद्वार। गायत्री विद्यापीठ शांतिकुंज के कक्षा 12वीं के छात्र-छात्राओं ने इस बार फिर दबदबा बनाए रखा। कला संकाय के रक्षक सैनी ने 96.8 प्रतिशत अंक लेकर विद्यापीठ टॉपर होने का गौरव हासिल किया, तो वहीं कॉमर्स ग्रुप की टॉपर रिया सैनी ने 94.5 प्रतिशत लेकर द्वितीय स्थान पर रही। कॉमर्स ग्रुप की ऋषिका...
।। रेवाड़ी (हरियाणा) ।। हरियाणा के रेवाड़ी जिले के बोलानी स्थित स्वामी दयानंद सरस्वती स्कूल में एक सराहनीय पहल के अंतर्गत कक्षा तीसरी से बारहवीं तक के विद्यार्थियों के लिए पूज्य गुरुदेव पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी के साहित्य को पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। विद्यालय प्रशासन द्वारा लिया गया यह निर...
।। Haridwar ।। Dev Sanskriti Vishwavidyalaya successfully conducted a three-day awareness and capacity-building programme under the April 2026 activity of the UGC’s NEP SAARTHI Initiative on the theme “Digital Literacy and Innovation,” focusing on ABC ID, SWAYAM, and the ethical use of Artificial In...
A dignified certificate distribution ceremony was organized at Dev Sanskriti Vishwavidyalaya for students who successfully completed the special training course in the Lithuanian language. On this occasion, the young representative of the All World Gayatri Pariwar and Pro Vice-Chancellor of the univ...
।। हरिद्वार ।। भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के अंतर्गत गुजरात, हरियाणा एवं दिल्ली प्रांत के प्रवीण विद्यार्थियों को सम्मानित करने हेतु गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में विशेष पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में अखिल विश्व गायत्री परिवार के युवा प्रतिनिधि एवं देव संस्कृति विश्वविद्यालय ...
गया। यह क्षण सभी प्रतिभागियों के लिए अत्यंत प्रेरणादायी एवं भावनात्मक रहा। ज्ञातव्य है कि अखिल विश्व गायत्री परिवार विगत अनेक दशकों से भारत की नैतिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक चेतना के जागरण हेतु विविध स्तरों पर सतत कार्यरत है। इसी क्रम में “भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा” जैसे अभिनव अभियानों के माध्यम ...
।। हरिद्वार | 11 मई, 2026 ।। जन्मशताब्दी कार्यक्रम के सफल आयोजन के उपरांत आज अखिल विश्व गायत्री परिवार के प्रमुख केंद्र शांतिकुंज में हरिद्वार जिले के सम्माननीय पत्रकारों एवं मीडिया प्रतिनिधियों के साथ विशेष भेंट एवं धन्यवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर श्रद्धेया जीजी एवं डॉ. चिन्मय पंड्या ...
विचार क्रांति अभियान
चेतना के उच्च स्तर पर दिव्य उत्कर्ष की ओर प्रेरित करने वाले सामाजिक परिवर्तन, समय की धारा में व्यापक परिवर्तन करके
एक बेहतर विश्व का निर्माण कर रहा है।
नवयुग की गंगोत्री
वेदमूर्ति तपोनिष्ठ पं. श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा लिखित।
एक व्यक्ति द्वारा रचित 3200 पुस्तकें
क्रांतिकारी पुस्तकें आपके जीवन में परिवर्तन लाएंगी।
आपके सम्बन्धों में कायाकल्प स्तर का परिवर्तन
आत्म निर्माण एवं परिवार निर्माण
नये संस्कारों के कर्मकाण्ड द्वारा शिक्षण
जन्म दिवस, विवाह दिवस एवं दीप यज्ञ
सादा जीवन - उच्च विचार . दूसरों के लिए अधिक अपने लिए कम, यही भारतीय संस्कृति की विशेषता रही है.
शान्तिकुंज समयदान और प्रतिभादान की अवधारणा का आदर्श मॉडल है.
समग्र स्वास्थ्य प्रबन्धन पद्धतियाँ
वैकल्पिक चिकित्सा प्राकृतिक आरोग्य प्रदान करती हैं.
स्वस्थ जीवन के वैदिक सूत्र
समग्र स्वास्थ्य - शारीरिक, मानसिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक स्वास्थ्य
गायत्री जप एवं ध्यान के प्रारंभिक चरण द्वारा शुरुआत
गायत्री साधना की ऊर्जा आत्मसात करना
आत्म अनुभूति के लक्ष्य तक पहुँचना
जीवन का परिष्कार - चार अनुशासन आत्मसात करना
साधना (उपासना - जीवन साधना), स्वाध्याय, संयम और सेवा
सामान्य किन्तु प्रभावी 5 चरण
दुष्प्रवृत्तियों के उन्मूलन हेतु और उत्थान के सही चरण (भौतिक एवं आध्यात्मिक उत्थान)
व्यक्तित्व परिष्कार हेतु विभिन्न साधना तथा शिविर
अन्तर्निहित प्रवृत्तियों का शुद्धिकरण। शांतिकुंज में वैज्ञानिक तरीके से प्रदर्शन और व्याख्या की गई।
आध्यात्मिक विकास और आत्मशोधन के लिए व्यक्तिगत मार्गदर्शन। अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न देखें
वैदिक ऋषियों की जीवन परिवर्तनकारी परंपराएँ यहाँ पुनर्जीवित हैं।
1926 से अखंड दीपक के साथ निरंतर गायत्री मंत्र जाप। हजारों लोगों द्वारा दैनिक यज्ञ सुबह के समय एक यादगार दृश्य प्रस्तुत करता है।
गायत्री मंत्र एवं यज्ञ के वैज्ञानिक प्रभावों पर उच्च स्तरीय शोध।
एक स्वतंत्र आध्यात्मिक पत्रिका 1940 से लाखों लोगों के दिमाग को रोशन कर रहा हूँ
DIYA - डिवाइन इंडिया यूथ एसोसिएशन युवा और कॉर्पोरेट कार्यक्रमों के लिए
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15 वर्ष की आयु में— बसंत पंचमी पर्व सन् 1926 को स्वगृह— आँवलखेड़ा (आगरा, उत्तर प्रदेश, भारत) में पूजास्थल में ही दादागुरु स्वामी सर्वेश्वरानन्द जी के दर्शन एवं मार्गदर्शन के साथ-ही-साथ आत्मसाक्षात्कार हुआ।

सन् 1926 से निरंतर प्रज्वलित दीपक, जिसके सान्निध्य में परम पूज्य गुरुदेव श्रीराम शर्मा आचार्य जी ने 24-24 लक्ष के चौबीस गायत्री महापुरश्चरण संपन्न किए, आज भी इसके बस एक झलक भर प्राप्त कर लेने से ही लोगों को दैवीय प्रेरणा और आंतरिक शक्ति प्राप्त होती है। इसके सान्निध्य में अब तक 2400 करोड़ से भी अधिक गायत्री मंत्र का जप किया जा चुका है।

इसका आरंभ सन् 1938 में पं. श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा किया गया था। पत्रिका का मुख्य उद्देश्य— वैज्ञानिक आध्यात्मिकता और 21वीं शताब्दी के धर्म, अर्थात वैज्ञानिक धर्म को बढ़ावा देना है।

दृढ़ निष्ठा से सतत गायत्री साधना करने से मन (अंतःकरण) तीव्र गति और चामत्कारिक प्रकार से पवित्र, निर्मल, व्यवस्थित और स्थिर होता है, जिससे साधक अपने बाह्य भौतिक जीवन की गंभीर परीक्षाओं एवं समस्याओं से जूझते हुए भी अटल आतंरिक शांति और आनंद की अनुभूति करता है।
आचार्य जी ने सिद्धांत और साधना को आधुनिक युग के अनुकूल तर्क व शब्द देकर सामाजिक परिवर्तन का जो मार्ग दिखाया है, उसके लिए आने वाली पीढ़ियाँ युगों-युगों तक कृतज्ञ रहेंगी।
मुझे ज्ञात है कि इस विश्वविद्यालय ने स्वतंत्रता सेनानी और लगभग ३००० पुस्तकों के लेखक पंडित श्रीराम शर्मा आचार्यजी के स्वप्न को साकार रूप दिया है। इन्हें भारत में ज्ञान क्रांति का प्रवर्तक कहना उपयुक्त होगा। आचार्यश्री का विचार था कि अज्ञानता ही निर्धनता और बीमारी आदि सभी समस्याओं की जड़ है।
आचार्य जी का एकाकी पुरुषार्थ सारे संत समाज की सम्मिलित शक्ति के स्तर का है, उनने गायत्री व यज्ञ को प्रतिबंध रहित करने निमित्त जो कुछ भी किया वह शास्त्रों के अनुसार ही था। मेरा उन्हें बारम्बार नमन है।
श्रद्धेय आचार्य श्रीराम शर्मा जी ने जो कार्य कर दिखाया वह अद्भुत है, युग के लिए नितांत आवश्यक है। आचार्य जी के साहित्य से मैं बहुत प्रभावित हूँ। प्रज्ञा पुराण ने विशेष रूप से मुझे अपने कार्यों में बहुत बल प्रदान किया है। उनका चिंतन राष्ट्र को शक्तिशाली बनाता और मानव मात्र को सही दिशा प्रदान करता है।
आचार्य जी द्वारा भाष्य किए गए उपनिषदों का स्वाध्याय करने के बाद उन्होंने कहा कि- ‘‘काश! यह साहित्य मुझे जवानी में मिल गया होता तो मेरे जीवन की दिशाधारा कुछ और ही होती; मैं राजनीति में न जाकर आचार्य श्री के चरणों में बैठा अध्यात्म का ज्ञान ले रहा होता।’’
विनोबा जी ने वेदों के पूज्यवर द्वारा किए गए भाष्य को ग्वालियर मेंं एक सार्वजनिक सभा में अपने सिर पर धारण करते हुए कहा- "ये ग्रन्थ किसी व्यक्ति द्वारा नहीं, शक्ति द्वारा लिखे गये हैं।"
सुप्रसिद्ध सन्त देवरहा बाबा एक सिद्ध पुरुष थे। उनने एक परिजन से कहा- ‘‘बेटा! उनके बारे में मैं क्या कहूँ? यह समझो कि मैं हृदय से सतत उनका स्मरण करता रहता हूँ। गायत्री उनमें पूर्णतः समा गयी है एवं वे साक्षात् सविता स्वरूप हैं।’’
‘‘आचार्यश्री ने गायत्री को जन-जन की बनाकर महर्षि दयानन्द के कार्यों को आगे बढ़ाया है। गायत्री और ये एकरूप हो गये हैं।’’
अपने भावभरे उद्गार पूज्यवर के सम्बन्ध में इस रूप में व्यक्त किए थे- ‘‘आचार्य जी इस युग में गायत्री के जनक हैं। उनने गायत्री को सबकी बना दिया। यदि इसे मात्र ब्राह्मणों की मानकर उन्हीं के भरोसे छोड़ दिया होता तो अब तक गायत्री महाविद्या सम्भवतः लुप्त हो गयी होती।’’