अब दर्शन की बारी है, उसे कुछ करने दिया ज...

विज्ञान का तात्पर्य— “प्रकृति के कुछ रहस्यों का उद्घाटन अथवा कुछ उपकरणों का निर्माण कर लेना मात्र नहीं है, वरन् उसकी व्यापकता मानवी दृष्टिकोण को अधिक सुविस्तृत, तथ्यपूर्ण एवं सत्यनिष्ठ बनाने तक चली जाती है।” विज्ञान का उपयोग भौतिक सुख-सुविधाओं के संवर्द्धन अथवा जानकारियों का क्षेत्र बढ़ाने तक सीमित ...

April 19, 2026, 5:07 p.m.

धर्म और दर्शन की उत्क्रांति भी आवश्यक...

भावी पीढ़ी को मानसिक दिग्भ्रांति से बचाने के लिए यह प्रश्न सुलझाना आवश्यक है। धर्म के गिरते हुए मूल्य को देखकर ऐसा लगता है कि कहीं आने वाली पीढ़ियाँ पूर्णतया पदार्थवादी होकर अपनी आध्यात्मिक शक्तियाँ नष्ट न कर डालें। हमारी तरह से ऐसे विचार दुनिया के अनेक मनीषियों के मस्तिष्क में आए और उन्होंने अपनी-अ...

April 19, 2026, 4:59 p.m.

धर्म और विज्ञान जुड़वाँ भाई...

पिछले दिनों धर्म और विज्ञान को विरोधी माना जाता रहा है। दोनों के तर्क, प्रतिपादन और आधार एकदूसरे से भिन्न समझे जाते रहे हैं। एक को प्रत्यक्षवादी और दूसरे को परोक्षवादी कहकर उन्हें असंबद्ध कहा जाता रहा है। इसलिए दोनों की दिशा विपरीत मान ली गई और माना गया कि किसी धार्मिक के लिए विज्ञान को समझना एवं कि...

April 19, 2026, 4:54 p.m.

विज्ञान और धर्म में समन्वय अनिवार्य...

पदार्थ के रूप में विज्ञान भी आंतरिक सत्ता का ही तो उद्घाटन करता है। धर्म के क्षेत्र में परमात्मा एक विश्वव्यापक शक्ति है और पदार्थ भी शक्ति के ही कण हैं। सच तो यह है कि शक्ति के अतिरिक्त संसार में और कुछ है ही नहीं। धर्म उसे अंतर्चेतना के रूप में देखता है। वह उदाहरण देता है कि गांधी जी का आत्मबल ही ...

April 19, 2026, 4:40 p.m.

धर्म की उपेक्षा से पछतावा ही हाथ लगेगा...

जीवन उतना जटिल नहीं है, जितना कि बन गया है या बना दिया गया है। हँसी-खुशी की संभावनाओं से वह भरा-पूरा है। शरीर और मन की संरचना इस प्रकार हुई है कि वह बाहर के तनिक से साधनों की सुविधा प्राप्त हो जाने पर सहज ही स्वस्थ और सुखी रह सकता है। अति स्वल्प साधनों से अन्य जीवधारी अपना संतोषपूर्ण व्यवस्थाक्रम चल...

April 19, 2026, 4:30 p.m.

धर्म और विज्ञान को मिलकर चलना होगा...

धर्म को पूजा-प्रक्रिया तक और विज्ञान को शिल्प व्यवसाय तक सीमित रखा जाए, तो दोनों की गरिमा बढ़ेगी नहीं, गिरेगी ही। दोनों अपंग-अधूरे रह जाएँगे। इन दोनों का परस्पर पूरक होकर रहना उचित ही नहीं, आवश्यक है। पदार्थ में सौंदर्य निखारने का यही तरीका है। कारीगर कलाकार तब बनता है, जब अपने क्रियाकलाप में भावपूर...

April 19, 2026, 3:48 p.m.

धर्म और विज्ञान के समन्वय में ही कल्याण ...

नर और नारी का कार्यक्षेत्र भिन्न है। नारी गृह-व्यवस्था में संलग्न रहती है। गर्भधारण और शिशुपालन यह दोनों काम उसी को करने होते हैं। नर का कार्यक्षेत्र भिन्न है। वह खेत, दफ्तर, कारखाने आदि में काम करता है और उस उपार्जन से गृह-व्यवस्था के लिए नारी की आवश्यकताएँ पूरी करता है। देखने में दोनों के बीच भारी...

April 19, 2026, 3:36 p.m.

ज्ञान ही नहीं, मनुष्य को धर्म भी चाहिए...

आत्मा है या नहीं? इसका उत्तर हाँ और ना में दोनों ही तरह दिया जा सकता है। हाँ, उनके लिए ठीक है, जो ज्ञान के आधार पर सूक्ष्म विषयों पर विचार कर सकने और निष्कर्ष निकाल सकने में समर्थ हैं। ना, उनके लिए जो मात्र इंद्रियों के सहारे ही चेतनसत्ता का दर्शन करना चाहते हैं। चेतन सूक्ष्म है। वह चेतनसत्ता की ज्ञ...

April 19, 2026, 3:06 p.m.

बुद्धि पर धर्म का अंकुश रखा जाए...

चेतना के क्षेत्र में मन और बुद्धि का एक क्षेत्र है और श्रद्धा एवं सुसंस्कारिता का दूसरा। मन भौतिक साधनों के सहारे इंद्रियतृप्ति तथा अहंता की पूर्ति चाहता है। अर्थसंचय तथा बड़प्पन प्रदर्शित करने वाले दूसरे प्रसंग मन के प्रिय विषय हैं। बुद्धि यदि सामान्य स्तर की है और नरपशुओं जैसी है तो फिर उसे मन की ...

April 19, 2026, 3:03 p.m.

विज्ञान और अध्यात्म को साथ-साथ चलना होगा...

विज्ञान और अध्यात्म अन्योन्याश्रित हैं। एकदूसरे के पूरक हैं। एक के बिना दूसरे की गति नहीं। विज्ञान हमारे साधनों को बढ़ाता है और अध्यात्म आत्मा को। आत्मा को खोकर साधनों की मात्रा कितनी ही बढ़ी-चढ़ी क्यों न हो, उनसे मनुष्य भोगी, व्यसनी, अहंकारी और स्वार्थी ही बनेगा। महत्त्वाकांक्षाएँ मनुष्य को नीति तक...

April 19, 2026, 3 p.m.

चेतना जागरण एवं जनसंपर्क से सशक्त होता ज...

देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार के प्रतिकुलपति आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी व गायत्री तपोभूमि, मथुरा के प्रमुख तथा अखण्ड ज्योति पत्रिका के प्रकाशक आदरणीय श्री मृत्युंजय शर्मा जी के साथ अपने आगरा प्रवास के अगले चरण में जवाहर नगर स्थित गायत्री चेतना केंद्र पर पधारे। यहाँ आदरणीय डॉ. पंड्या जी ने पू...

April 25, 2026, 4:39 p.m.

जन्मशताब्दी वर्ष–2026 के अंतर्गत श्रद्धा...

देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार के प्रतिकुलपति आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी व गायत्री तपोभूमि, मथुरा के प्रमुख तथा अखण्ड ज्योति पत्रिका के प्रकाशक आदरणीय श्री मृत्युंजय शर्मा जी के साथ, अपने आगरा (उ.प्र.) प्रवास के क्रम में मानस नगर स्थित गायत्री शक्तिपीठ पर पधारे। इस अवसर पर आदरणीय डॉ. पंड्या ज...

April 25, 2026, 4:34 p.m.

प्रयाग संगीत समिति की 63वीं अखिल भारतीय ...

प्रयाग संगीत समिति, इलाहाबाद द्वारा प्रतिवर्ष आयोजित की जाने वाली अखिल भारतीय संगीत प्रतियोगिता के अंतर्गत इस वर्ष 63वीं प्रतियोगिता का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें देव संस्कृति विश्वविद्यालय को भी सहभागिता हेतु आमंत्रित किया गया। इस प्रतिष्ठित आयोजन में भाग लेने के लिए विश्वविद्यालय के संगीत वाद्य अ...

April 25, 2026, 4:14 p.m.

आध्यात्मिक चेतना एवं सनातन मूल्यों के सं...

श्रीअरविंद सोसायटी, उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड राज्य समिति द्वारा Aurovalley Ashram में आयोजित वार्षिक सम्मेलन-2026 के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष ऊर्जा प्रदान की। इस पावन अवसर पर श्री अरुण व्यास, डॉ. एम. के. झा, श्री...

April 25, 2026, 2:24 p.m.

माननीय केंद्रीय गृह राज्य मंत्री श्री नि...

नई दिल्ली प्रवास के दौरान देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार के प्रतिकुलपति आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी ने माननीय केंद्रीय गृह राज्य मंत्री श्री नित्यानंद राय जी से आत्मीय भेंट की। इस अवसर पर राष्ट्र निर्माण में अनुशासन, युवाशक्ति एवं चरित्र निर्माण के महत्व पर सार्थक चर्चा हुई। साथ ही विश्व मानवत...

April 25, 2026, 1:38 p.m.

अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव में शामिल हुए...

योगनगरी ऋषिकेश में आयोजित हुए विश्व प्रसिद्ध अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव, में देव संस्कृति विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। इस अवसर पर प्रतिभागी विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय के अखिल विश्व गायत्री परिवार के युवा प्रतिनिधि एवं देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रति-कुलपति आदरण...

April 19, 2026, 4:03 p.m.

“स्क्रीन से संतुलन तक: बच्चों के समग्र व...

“नन्हें बच्चों के लिए डिजिटल वेलबीइंग: स्वस्थ, सुरक्षित और सम्पूर्ण बचपन” – जागरूकता एवं प्रेरणादायक कार्यक्रम का वंदनीया माताजी इंटरनेशनल सेंटर (VMIC), कंप्यूटर विज्ञान विभाग एवं ‘दिशा’ (Psychological, Spiritual & Career Counselling Club) – देव संस्कृति स्टूडेंट्स क्लब द्वारा संयुक्त आयोजन देव संस्...

April 19, 2026, 3:55 p.m.

गायत्री शक्तिपीठ पचपेड़वा बलरामपुर में न...

गायत्री शक्तिपीठ पचपेड़वा में नवरात्रि की पूर्णाहुति संपन्न नौ दिवसीय साधना के पश्चात श्रद्धालुओं ने यज्ञ हवन करके की पूर्णाहुति जन्म शताब्दी समारोह में भागीदारी का किया गया आवाहन पचपेड़वा- गायत्री मंदिर पचपेड़वा के यज्ञशाला के पावन प्रागंण में चैत्र नवरात्रि की साधना के पश्चात आज श्रद्धालुओं, साधको...

April 7, 2026, 3:52 p.m.

देव संस्कृति विश्वविद्यालय में कैबिनेट म...

उत्तराखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री बनने के उपरांत हरिद्वार से लगातार पाँचवीं बार विधायक माननीय श्री मदन कौशिक जी ने देव संस्कृति विश्वविद्यालय पहुंचकर आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी से सौहार्दपूर्ण भेंट की। इस अवसर पर आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी ने विश्वविद्यालय परिसर में मंत्री जी का आत्मीय स्वागत एवं...

March 31, 2026, 12:04 p.m.

शहीद दिवस पर “एक शाम शहीदों के नाम” : सृ...

देव संस्कृति विश्वविद्यालय में शहीद दिवस के अवसर पर “एक शाम शहीदों के नाम” कार्यक्रम का भावपूर्ण आयोजन किया गया। यह आयोजन देव संस्कृति स्टूडेंट्स क्लब (Social Outreach Club – सृजन शिल्पी) द्वारा किया गया, जिसका उद्देश्य अमर शहीदों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करना एवं युवाओं में राष्ट्र के प्रति जागर...

March 31, 2026, 11:54 a.m.
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First Meeting With Guru

At the age of 15- Self-realization on Basant Panchanmi Parva 1926 at Anwalkheda (Agra, UP, India), with darshan and guidance from Swami Sarveshwaranandaji.

Akhand Deep

More than 2400 crore Gayatri Mantra have been chanted so far in its presence. Just by taking a glimpse of this eternal flame, people receive divine inspirations and inner strength.

Akhand Jyoti Magazine

It was started in 1938 by Pt. Shriram Sharma Acharya. The main objective of the magazine is to promote scientific spirituality and the religion of 21st century, that is, scientific religion.

Gayatri Mantra

The effect of sincere and steadfast Gayatri Sadhana is swift and miraculous in purifying, harmonizing and steadying the mind and thus establishing unshakable inner peace and a sense of joy filled calm even in the face of grave trials and tribulations in the outer life of the Sadhak.

डॉ. शंकर दयाल शर्मा (पूर्व राष्ट्रपति)

आचार्य जी ने सिद्धांत और साधना को आधुनिक युग के अनुकूल तर्क व शब्द देकर सामाजिक परिवर्तन का जो मार्ग दिखाया है, उसके लिए आने वाली पीढ़ियाँ युगों-युगों तक कृतज्ञ रहेंगी।