अखिल विश्व गायत्री परिवार के आवाहन पर घर...

घर घर में में हम यज्ञ रचाएं, आओ भारत सबल बनाएं  इसी कामना से आज बुद्ध पूर्णिमा के पावन पर्व पर अखिल विश्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज (हरिद्वार) के दिशा निर्देश पर जनपद बलरामपुर के पचपेड़वा, गैंसड़ी और तुलसीपुर क्षेत्र में मानव में देवत्व का उदय, धरती पर स्वर्ग का अवतरण और विश्वव्यापी संकट निवारण हेतु...

May 3, 2026, 3 p.m.

अब दर्शन की बारी है, उसे कुछ करने दिया ज...

विज्ञान का तात्पर्य— “प्रकृति के कुछ रहस्यों का उद्घाटन अथवा कुछ उपकरणों का निर्माण कर लेना मात्र नहीं है, वरन् उसकी व्यापकता मानवी दृष्टिकोण को अधिक सुविस्तृत, तथ्यपूर्ण एवं सत्यनिष्ठ बनाने तक चली जाती है।” विज्ञान का उपयोग भौतिक सुख-सुविधाओं के संवर्द्धन अथवा जानकारियों का क्षेत्र बढ़ाने तक सीमित ...

April 19, 2026, 5:07 p.m.

धर्म और दर्शन की उत्क्रांति भी आवश्यक...

भावी पीढ़ी को मानसिक दिग्भ्रांति से बचाने के लिए यह प्रश्न सुलझाना आवश्यक है। धर्म के गिरते हुए मूल्य को देखकर ऐसा लगता है कि कहीं आने वाली पीढ़ियाँ पूर्णतया पदार्थवादी होकर अपनी आध्यात्मिक शक्तियाँ नष्ट न कर डालें। हमारी तरह से ऐसे विचार दुनिया के अनेक मनीषियों के मस्तिष्क में आए और उन्होंने अपनी-अ...

April 19, 2026, 4:59 p.m.

धर्म और विज्ञान जुड़वाँ भाई...

पिछले दिनों धर्म और विज्ञान को विरोधी माना जाता रहा है। दोनों के तर्क, प्रतिपादन और आधार एकदूसरे से भिन्न समझे जाते रहे हैं। एक को प्रत्यक्षवादी और दूसरे को परोक्षवादी कहकर उन्हें असंबद्ध कहा जाता रहा है। इसलिए दोनों की दिशा विपरीत मान ली गई और माना गया कि किसी धार्मिक के लिए विज्ञान को समझना एवं कि...

April 19, 2026, 4:54 p.m.

विज्ञान और धर्म में समन्वय अनिवार्य...

पदार्थ के रूप में विज्ञान भी आंतरिक सत्ता का ही तो उद्घाटन करता है। धर्म के क्षेत्र में परमात्मा एक विश्वव्यापक शक्ति है और पदार्थ भी शक्ति के ही कण हैं। सच तो यह है कि शक्ति के अतिरिक्त संसार में और कुछ है ही नहीं। धर्म उसे अंतर्चेतना के रूप में देखता है। वह उदाहरण देता है कि गांधी जी का आत्मबल ही ...

April 19, 2026, 4:40 p.m.

धर्म की उपेक्षा से पछतावा ही हाथ लगेगा...

जीवन उतना जटिल नहीं है, जितना कि बन गया है या बना दिया गया है। हँसी-खुशी की संभावनाओं से वह भरा-पूरा है। शरीर और मन की संरचना इस प्रकार हुई है कि वह बाहर के तनिक से साधनों की सुविधा प्राप्त हो जाने पर सहज ही स्वस्थ और सुखी रह सकता है। अति स्वल्प साधनों से अन्य जीवधारी अपना संतोषपूर्ण व्यवस्थाक्रम चल...

April 19, 2026, 4:30 p.m.

धर्म और विज्ञान को मिलकर चलना होगा...

धर्म को पूजा-प्रक्रिया तक और विज्ञान को शिल्प व्यवसाय तक सीमित रखा जाए, तो दोनों की गरिमा बढ़ेगी नहीं, गिरेगी ही। दोनों अपंग-अधूरे रह जाएँगे। इन दोनों का परस्पर पूरक होकर रहना उचित ही नहीं, आवश्यक है। पदार्थ में सौंदर्य निखारने का यही तरीका है। कारीगर कलाकार तब बनता है, जब अपने क्रियाकलाप में भावपूर...

April 19, 2026, 3:48 p.m.

धर्म और विज्ञान के समन्वय में ही कल्याण ...

नर और नारी का कार्यक्षेत्र भिन्न है। नारी गृह-व्यवस्था में संलग्न रहती है। गर्भधारण और शिशुपालन यह दोनों काम उसी को करने होते हैं। नर का कार्यक्षेत्र भिन्न है। वह खेत, दफ्तर, कारखाने आदि में काम करता है और उस उपार्जन से गृह-व्यवस्था के लिए नारी की आवश्यकताएँ पूरी करता है। देखने में दोनों के बीच भारी...

April 19, 2026, 3:36 p.m.

ज्ञान ही नहीं, मनुष्य को धर्म भी चाहिए...

आत्मा है या नहीं? इसका उत्तर हाँ और ना में दोनों ही तरह दिया जा सकता है। हाँ, उनके लिए ठीक है, जो ज्ञान के आधार पर सूक्ष्म विषयों पर विचार कर सकने और निष्कर्ष निकाल सकने में समर्थ हैं। ना, उनके लिए जो मात्र इंद्रियों के सहारे ही चेतनसत्ता का दर्शन करना चाहते हैं। चेतन सूक्ष्म है। वह चेतनसत्ता की ज्ञ...

April 19, 2026, 3:06 p.m.

बुद्धि पर धर्म का अंकुश रखा जाए...

चेतना के क्षेत्र में मन और बुद्धि का एक क्षेत्र है और श्रद्धा एवं सुसंस्कारिता का दूसरा। मन भौतिक साधनों के सहारे इंद्रियतृप्ति तथा अहंता की पूर्ति चाहता है। अर्थसंचय तथा बड़प्पन प्रदर्शित करने वाले दूसरे प्रसंग मन के प्रिय विषय हैं। बुद्धि यदि सामान्य स्तर की है और नरपशुओं जैसी है तो फिर उसे मन की ...

April 19, 2026, 3:03 p.m.

अल्बर्टा की संसद में पहुँचे परम आदरणीय ड...

एडमोंटन, अल्बर्टा (कनाडा)। जन्म शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में चल रहे उत्तर अमेरिका प्रवास के क्रम में परम आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी ने अल्बर्टा प्रांत की संसद का दौरा किया। इस अवसर पर संसद के अधिकारियों ने उनका आत्मीय स्वागत करते हुए उन्हें संसद परिसर का भ्रमण कराया तथा प्रांत की प्रशासनिक एवं सांस...

June 5, 2026, 1:45 p.m.

एडमोंटन के प्रज्ञाकुंज केंद्र का अवलोकन,...

एडमोंटन, अल्बर्टा (कनाडा)। जन्म शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में चल रहे उत्तर अमेरिका प्रवास के क्रम में परम आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी ने गायत्री परिवार एडमोंटन द्वारा विकसित किए जा रहे प्रज्ञाकुंज केंद्र का अवलोकन किया। पश्चिमी कनाडा में स्थित यह विशाल परिसर आने वाले समय में साधना, संस्कार एवं आध्यात...

June 5, 2026, 11:54 a.m.

World Environment Day: Nurturing Nature,...

World Environment Day reminds us that nature is not separate from us — it is the very foundation of our existence. The balance of the environment directly impacts the balance of human life. Respected Gurudev Pt. Shri Ram Sharma Acharya emphasized that respecting and protecting nature is a form of hi...

June 5, 2026, 10:48 a.m.

शताब्दी वर्ष विशेष : एडमोंटन के हिंदू हे...

एडमोंटन, अल्बर्टा (कनाडा)। जन्म शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में चल रहे उत्तर अमेरिका प्रवास के क्रम में परम आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी एडमोंटन स्थित हिंदू हेरिटेज मंदिर पहुँचे। इस अवसर पर स्थानीय परिजनों द्वारा एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालु, भारतीय मूल के नागरिक एवं गाय...

June 5, 2026, 10:41 a.m.

शताब्दी वर्ष विशेष : अल्बर्टा की संसद ने...

एडमोंटन, अल्बर्टा (कनाडा)। जन्म शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में चल रहे उत्तर अमेरिका प्रवास के दौरान परम आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी को कनाडा के पश्चिमी प्रांत अल्बर्टा में विशेष सम्मान से नवाज़ा गया। उनके सामाजिक, शैक्षिक एवं सांस्कृतिक योगदानों को सम्मानित करते हुए अल्बर्टा की संसद द्वारा उन्हें विशे...

June 5, 2026, 10:32 a.m.

एडमोंटन में युवाओं से संवाद, काउंसिल ऑफ ...

एडमोंटन, अल्बर्टा (कनाडा)। जन्म शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में चल रहे उत्तर अमेरिका प्रवास के क्रम में परम आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी अल्बर्टा प्रांत के एडमोंटन नगर स्थित काउंसिल ऑफ इंडिया पहुँचे। इस अवसर पर स्थानीय परिजनों एवं युवाओं ने उनका हार्दिक एवं आत्मीय स्वागत किया। अल्बर्टा प्रवास के दौरान आ...

June 5, 2026, 10:15 a.m.

शताब्दी वर्ष विशेष : उत्तर अमेरिका प्रवा...

एडमोंटन, अल्बर्टा (कनाडा)। जन्म शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में चल रहे उत्तर अमेरिका प्रवास के क्रम में परम आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी पश्चिमी कनाडा के अपने दौरे के अगले चरण में अल्बर्टा प्रांत के एडमोंटन नगर पहुँचे। उनके आगमन पर स्थानीय कार्यकर्ताओं एवं परिजनों ने एयरपोर्ट पर आत्मीय स्वागत कर अपनी श्...

June 5, 2026, 10:07 a.m.

शताब्दी वर्ष विशेष: उत्तर अमेरिका प्रवास...

मात्र एक दिवसीय रेजाइना प्रवास में तीसरे आयोजन में पहुँचे परम आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी। गुरुसत्ता के संदेश, प्रेरणा एवं कार्यों को पूर्ण समर्पण एवं गति के साथ परम आदरणीय डॉ पंड्या जी रेजाइना के हिंदू हेरिटेज मंदिर पहुँचे। इस अवसर पर उन्होंने “मानव जीवन की गौरव-गरिमा” विषय पर प्रकाश डालकर आत्म-परि...

June 4, 2026, 2:01 p.m.

शताब्दी वर्ष विशेष : उत्तर अमेरिका प्रवा...

रेजाइना, सास्केचेवान (कनाडा)। जन्म शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में चल रहे उत्तर अमेरिका प्रवास के क्रम में परम आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी ने कनाडा के रेजाइना नगर में स्थानीय परिजनों एवं कार्यकर्ताओं से आत्मीय भेंट की। इस अवसर पर उन्होंने गुरुसत्ता के विचारों को जन-जन तक पहुँचाने तथा मिशन की गतिविधियों...

June 4, 2026, 10:40 a.m.

शताब्दी वर्ष विशेष : उत्तर अमेरिका प्रवा...

रेजाइना, सास्केचेवान (कनाडा)। जन्म शताब्दी वर्ष के अवसर पर सत्प्रवृत्ति संवर्धन, भारतीय संस्कृति के प्रसार एवं मानवता के उत्कर्ष के उद्देश्य से चल रहे उत्तर अमेरिका प्रवास के क्रम में परम आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी ने पश्चिम कनाडा का दौरा प्रारंभ किया। इस यात्रा के अंतर्गत वे सास्केचेवान प्रांत के ...

June 4, 2026, 10:13 a.m.
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First Meeting With Guru

At the age of 15- Self-realization on Basant Panchanmi Parva 1926 at Anwalkheda (Agra, UP, India), with darshan and guidance from Swami Sarveshwaranandaji.

Akhand Deep

More than 2400 crore Gayatri Mantra have been chanted so far in its presence. Just by taking a glimpse of this eternal flame, people receive divine inspirations and inner strength.

Akhand Jyoti Magazine

It was started in 1938 by Pt. Shriram Sharma Acharya. The main objective of the magazine is to promote scientific spirituality and the religion of 21st century, that is, scientific religion.

Gayatri Mantra

The effect of sincere and steadfast Gayatri Sadhana is swift and miraculous in purifying, harmonizing and steadying the mind and thus establishing unshakable inner peace and a sense of joy filled calm even in the face of grave trials and tribulations in the outer life of the Sadhak.

डॉ. शंकर दयाल शर्मा (पूर्व राष्ट्रपति)

आचार्य जी ने सिद्धांत और साधना को आधुनिक युग के अनुकूल तर्क व शब्द देकर सामाजिक परिवर्तन का जो मार्ग दिखाया है, उसके लिए आने वाली पीढ़ियाँ युगों-युगों तक कृतज्ञ रहेंगी।