धर्म और विज्ञान को मिलकर चलना होगा...

धर्म को पूजा-प्रक्रिया तक और विज्ञान को शिल्प व्यवसाय तक सीमित रखा जाए, तो दोनों की गरिमा बढ़ेगी नहीं, गिरेगी ही। दोनों अपंग-अधूरे रह जाएँगे। इन दोनों का परस्पर पूरक होकर रहना उचित ही नहीं, आवश्यक है। पदार्थ में सौंदर्य निखारने का यही तरीका है। कारीगर कलाकार तब बनता है, जब अपने क्रियाकलाप में भावपूर...

April 19, 2026, 3:48 p.m.

धर्म और विज्ञान के समन्वय में ही कल्याण ...

नर और नारी का कार्यक्षेत्र भिन्न है। नारी गृह-व्यवस्था में संलग्न रहती है। गर्भधारण और शिशुपालन यह दोनों काम उसी को करने होते हैं। नर का कार्यक्षेत्र भिन्न है। वह खेत, दफ्तर, कारखाने आदि में काम करता है और उस उपार्जन से गृह-व्यवस्था के लिए नारी की आवश्यकताएँ पूरी करता है। देखने में दोनों के बीच भारी...

April 19, 2026, 3:36 p.m.

ज्ञान ही नहीं, मनुष्य को धर्म भी चाहिए...

आत्मा है या नहीं? इसका उत्तर हाँ और ना में दोनों ही तरह दिया जा सकता है। हाँ, उनके लिए ठीक है, जो ज्ञान के आधार पर सूक्ष्म विषयों पर विचार कर सकने और निष्कर्ष निकाल सकने में समर्थ हैं। ना, उनके लिए जो मात्र इंद्रियों के सहारे ही चेतनसत्ता का दर्शन करना चाहते हैं। चेतन सूक्ष्म है। वह चेतनसत्ता की ज्ञ...

April 19, 2026, 3:06 p.m.

बुद्धि पर धर्म का अंकुश रखा जाए...

चेतना के क्षेत्र में मन और बुद्धि का एक क्षेत्र है और श्रद्धा एवं सुसंस्कारिता का दूसरा। मन भौतिक साधनों के सहारे इंद्रियतृप्ति तथा अहंता की पूर्ति चाहता है। अर्थसंचय तथा बड़प्पन प्रदर्शित करने वाले दूसरे प्रसंग मन के प्रिय विषय हैं। बुद्धि यदि सामान्य स्तर की है और नरपशुओं जैसी है तो फिर उसे मन की ...

April 19, 2026, 3:03 p.m.

विज्ञान और अध्यात्म को साथ-साथ चलना होगा...

विज्ञान और अध्यात्म अन्योन्याश्रित हैं। एकदूसरे के पूरक हैं। एक के बिना दूसरे की गति नहीं। विज्ञान हमारे साधनों को बढ़ाता है और अध्यात्म आत्मा को। आत्मा को खोकर साधनों की मात्रा कितनी ही बढ़ी-चढ़ी क्यों न हो, उनसे मनुष्य भोगी, व्यसनी, अहंकारी और स्वार्थी ही बनेगा। महत्त्वाकांक्षाएँ मनुष्य को नीति तक...

April 19, 2026, 3 p.m.

धर्म व विज्ञान में सामंजस्य अनिवार्य...

धर्म और विज्ञान में क्या संबंध है? अथवा क्या विरोध है? इस विषय पर जब भी कुछ सोचते हैं, तो ऐसा लगता है कि शताब्दी के प्रारंभ से ही विज्ञान के परिणाम और धार्मिक विश्वासों में परस्पर स्पष्ट असहमति रही है। तुलना में— परिणामों में— पूर्णतया विरोधाभास पाया गया। हम इस बात को सोचने के लिए विवश हैं कि या तो ...

April 19, 2026, 2:53 p.m.

गायत्री शक्तिपीठ पचपेड़वा बलरामपुर में न...

गायत्री शक्तिपीठ पचपेड़वा में नवरात्रि की पूर्णाहुति संपन्न नौ दिवसीय साधना के पश्चात श्रद्धालुओं ने यज्ञ हवन करके की पूर्णाहुति जन्म शताब्दी समारोह में भागीदारी का किया गया आवाहन पचपेड़वा- गायत्री मंदिर पचपेड़वा के यज्ञशाला के पावन प्रागंण में चैत्र नवरात्रि की साधना के पश्चात आज श्रद्धालुओं, साधको...

April 7, 2026, 3:52 p.m.

विज्ञान ने समस्याएँ सुलझाई कम, उलझाईं अध...

विज्ञान की एक शाखा रसायनशास्त्र ने लाखों-करोड़ों कार्बनिक और अकार्बनिक पदार्थों की खोज कर ली। इतनी औषधियाँ बन चुकी हैं कि डॉक्टर उन सबको याद भी नहीं रख सकता। जीव विज्ञान ने यहाँ तक पहल की कि सूक्ष्मतम जीवाणु (बैक्टीरिया) और विषाणु (वायरस) की सैकड़ों जातियों तक का पता लगा लिया। एनाटॉमी और फिजियोलॉजी ...

March 31, 2026, 11:32 a.m.

विज्ञान और उसकी अस्थिरता...

ईसा से 200 वर्ष पूर्व नीसिया के वैज्ञानिक ‘हिप्पार्कस’ ने बताया कि, “ब्रह्मांड का केंद्र पृथ्वी है। अन्य ग्रह-उपग्रह उसके चारों ओर केंद्रीय शक्ति (एक्सेंट्रिक) कक्षाओं में— अधिचक्रों (एपिसाइकिल्स) में घूमते हैं।” प्रसिद्ध यूनानी वैज्ञानिक ‘टालेमियस’ (संक्षिप्त नाम टालेमी) ने इसी सिद्धांत को स्वीकार ...

March 31, 2026, 10:41 a.m.

विज्ञान की अपूर्णताएँ...

विज्ञान की अधिकांश उपलब्धियाँ जड़ प्रकृति के क्षेत्र में हैं। पृथ्वी में पाए जाने वाले सभी कार्बनिक (आर्गेनिक) और अकार्बनिक (इन आर्गेनिक) धातुओं, खनिजों, गैसों और इन सबके द्वारा बनने वाले यंत्रों, प्रकाश, विद्युत्, ताप, चुंबक आदि से संबंधित अनेक महत्त्वपूर्ण जानकारियाँ विज्ञान देता है, उसमें कामवासन...

March 30, 2026, 12:26 p.m.

अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव में शामिल हुए...

योगनगरी ऋषिकेश में आयोजित हुए विश्व प्रसिद्ध अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव, में देव संस्कृति विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। इस अवसर पर प्रतिभागी विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय के अखिल विश्व गायत्री परिवार के युवा प्रतिनिधि एवं देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रति-कुलपति आदरण...

April 19, 2026, 4:03 p.m.

“स्क्रीन से संतुलन तक: बच्चों के समग्र व...

“नन्हें बच्चों के लिए डिजिटल वेलबीइंग: स्वस्थ, सुरक्षित और सम्पूर्ण बचपन” – जागरूकता एवं प्रेरणादायक कार्यक्रम का वंदनीया माताजी इंटरनेशनल सेंटर (VMIC), कंप्यूटर विज्ञान विभाग एवं ‘दिशा’ (Psychological, Spiritual & Career Counselling Club) – देव संस्कृति स्टूडेंट्स क्लब द्वारा संयुक्त आयोजन देव संस्...

April 19, 2026, 3:55 p.m.

गायत्री शक्तिपीठ पचपेड़वा बलरामपुर में न...

गायत्री शक्तिपीठ पचपेड़वा में नवरात्रि की पूर्णाहुति संपन्न नौ दिवसीय साधना के पश्चात श्रद्धालुओं ने यज्ञ हवन करके की पूर्णाहुति जन्म शताब्दी समारोह में भागीदारी का किया गया आवाहन पचपेड़वा- गायत्री मंदिर पचपेड़वा के यज्ञशाला के पावन प्रागंण में चैत्र नवरात्रि की साधना के पश्चात आज श्रद्धालुओं, साधको...

April 7, 2026, 3:52 p.m.

देव संस्कृति विश्वविद्यालय में कैबिनेट म...

उत्तराखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री बनने के उपरांत हरिद्वार से लगातार पाँचवीं बार विधायक माननीय श्री मदन कौशिक जी ने देव संस्कृति विश्वविद्यालय पहुंचकर आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी से सौहार्दपूर्ण भेंट की। इस अवसर पर आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी ने विश्वविद्यालय परिसर में मंत्री जी का आत्मीय स्वागत एवं...

March 31, 2026, 12:04 p.m.

शहीद दिवस पर “एक शाम शहीदों के नाम” : सृ...

देव संस्कृति विश्वविद्यालय में शहीद दिवस के अवसर पर “एक शाम शहीदों के नाम” कार्यक्रम का भावपूर्ण आयोजन किया गया। यह आयोजन देव संस्कृति स्टूडेंट्स क्लब (Social Outreach Club – सृजन शिल्पी) द्वारा किया गया, जिसका उद्देश्य अमर शहीदों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करना एवं युवाओं में राष्ट्र के प्रति जागर...

March 31, 2026, 11:54 a.m.

शहीद दिवस के पावन अवसर पर अमर शहीद भगत स...

यह दिवस केवल इतिहास का स्मरण नहीं, अपितु स्वतंत्रता के लिए दिए गए महान बलिदानों की अमर चेतना का उत्सव है। यह हमें प्रेरित करता है कि सच्ची आज़ादी विचारों की दृढ़ता, साहस और कर्तव्यनिष्ठ कर्म से साकार होती है। इन वीर सपूतों का त्याग हमें भयमुक्त, न्यायपूर्ण एवं समरस समाज के निर्माण हेतु सतत अग्रसर रह...

March 31, 2026, 11:47 a.m.

Erasmus+ Faculty Mobility | Dev Sanskrit...

Under the Erasmus+ Staff Mobility for Teaching Programme, Dev Sanskriti Vishwavidyalaya, Haridwar had the privilege of hosting Rev. Dr. Filip Jozef Krauze for an academic engagement focused on interfaith dialogue and value-based education. During his visit, Respected Dr. Chinmay Pandya interacted wi...

March 31, 2026, 11:42 a.m.

देव संस्कृति विश्वविद्यालय की छात्रा अंश...

देव संस्कृति विश्वविद्यालय की बीएससी योग की छात्रा अंशिका रेवानी ने ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी स्तर की प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक प्राप्त कर विश्वविद्यालय का गौरव बढ़ाया है। इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर विश्वविद्यालय परिवार में हर्ष का वातावरण है। अंशिका ने अपनी सफलता का श्रेय अपने ...

March 31, 2026, 11:38 a.m.

देव संस्कृति विश्वविद्यालय में केन्द्रीय...

DSVV, हरिद्वार। देव संस्कृति विश्वविद्यालय में केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय (CSU) के श्री सदाशिव परिसर, पुरी (ओडिशा) से आए स्नातकोत्तर विद्यार्थियों का शैक्षणिक भ्रमण सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिवार द्वारा सभी विद्यार्थियों का आत्मीय स्वागत किया गया। भ्रमण के दौरान विद्यार...

March 31, 2026, 11:32 a.m.

देव संस्कृति विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय...

देव संस्कृति विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष श्री किशोर मकावाना जी का गरिमामय आगमन हुआ, जहाँ विश्वविद्यालय के प्रति-कुलपति एवं अखिल विश्व गायत्री परिवार के युवा प्रतिनिधि आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी ने उनका आत्मीय स्वागत किया। इस अवसर पर दोनों के बीच सौहार्दपूर्ण भेंट हुई, ...

March 31, 2026, 11:27 a.m.
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First Meeting With Guru

At the age of 15- Self-realization on Basant Panchanmi Parva 1926 at Anwalkheda (Agra, UP, India), with darshan and guidance from Swami Sarveshwaranandaji.

Akhand Deep

More than 2400 crore Gayatri Mantra have been chanted so far in its presence. Just by taking a glimpse of this eternal flame, people receive divine inspirations and inner strength.

Akhand Jyoti Magazine

It was started in 1938 by Pt. Shriram Sharma Acharya. The main objective of the magazine is to promote scientific spirituality and the religion of 21st century, that is, scientific religion.

Gayatri Mantra

The effect of sincere and steadfast Gayatri Sadhana is swift and miraculous in purifying, harmonizing and steadying the mind and thus establishing unshakable inner peace and a sense of joy filled calm even in the face of grave trials and tribulations in the outer life of the Sadhak.

डॉ. शंकर दयाल शर्मा (पूर्व राष्ट्रपति)

आचार्य जी ने सिद्धांत और साधना को आधुनिक युग के अनुकूल तर्क व शब्द देकर सामाजिक परिवर्तन का जो मार्ग दिखाया है, उसके लिए आने वाली पीढ़ियाँ युगों-युगों तक कृतज्ञ रहेंगी।