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लोकसेवा की प्रवृत्तियों के केंद्र हों मंदिर
अनाचार एवं अज्ञान के केंद्र हैं ये
जनश्रद्धा का दुरुपयोग न हो
प्रगतिशील मंदिरों की आवश्यकता
अध्यात्म-चेतना के विस्तार में नियोजन हो
यह सोच भी बदलें
राष्ट्र का कायाकल्प कर सकते हैं ये देवालय
मंदिर जन-जागरण के केंद्र बनें
विशाल जनशक्ति और विपुल धनशक्ति
यह सामर्थ्य व्यर्थ नष्ट न हो
मंदिर और उनका मूल प्रयोजन
रचनात्मक प्रवृत्तियों का केंद्र
विद्या और ज्ञान का प्रकाश
शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य
सुधार की नितांत आवश्यकता
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लोकसेवा की प्रवृत्तियों के केन्द्र हों मंदिर
Media: SCAN
Language: HINDI
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सुधार की नितांत आवश्यकता
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लोकसेवा की प्रवृत्तियों के केन्द्र हों मंदिर
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