हर चीज अपने स्थान पर उपयोगी है...

प्रार्थना, दया, विनय, भलमनसाहत बहुत अच्छी वस्तु है, इनसे वे लोग सहज ही झुक जाते हैं जिनमें कुछ अधिक ...

June 12, 2024, 11:17 a.m.

आकांक्षाओं का परिष्कार...

आंतरिक और बाह्य जीवन में एक रसता - क्षमता न होने के कारण भी ऊल-जलूल आकांक्षाएँ तथा असंतोष की भावनाएँ...

June 12, 2024, 10:01 a.m.

मृदुता...

स्वभाव की मृदुलता ग्रहण करें। मृदुल स्वभाव उस व्यक्ति का है जिसे देख कर स्वतः मन में उसके प्रति आकर्...

June 12, 2024, 9:59 a.m.

जाग्रत आत्माओं में सबसे पहले ...

सबसे पहले जाग्रत आत्माओं के भीतर आत्मपरिवर्तन की तिलमिलाहट पैदा होगी। वे गइराई से आत्म-निरीक्षण करें...

June 12, 2024, 9:57 a.m.

साहित्यकार बहेलियों के कुत्तों...

बहेलियों के पास शिकारी कुत्ते होते हैं। खरगोश, लोमड़ी, हिरन, आदि जानवरों के पीछे उन्हें दौड़ाते हैं। ...

June 9, 2024, 10:21 a.m.

तृष्णा...

एक व्यापारी था, वह ट्रक में चावल के बोरे लिए जा रहा था। एक बोरा खिसक कर गिर गया। कुछ चीटियां आयीं 10...

June 9, 2024, 10:18 a.m.

चापलूसी नही, अच्छी सलाह दे!!...

किसी की झूठी प्रशंसा करके उसका अहंकार बढा देने की गलती हमें नहीं करनी चाहिए! क्योकि अहंकार बढने से न...

June 9, 2024, 10:16 a.m.

दुर्भावों का उन्मूलन...

कई बार सदाचारी समझे जाने वाले लोग आश्चर्यजनक दुष्कर्म करते पाए जाते हैं। उसका कारण यही है कि उनके भी...

June 9, 2024, 10:13 a.m.

धीरे-धीरे सीख...

मैं धीरे-धीरे सीख रहा हूँ कि... मुझे हर उस बात पर प्रतिक्रिया नहीं देना चाहिए जो मुझे चिंतित करती है...

June 9, 2024, 10:10 a.m.

परिस्थितियों का रोना न रोयें...

लंबी-चौड़ी योजनाएँ बनाने की अपेक्षा अपने पास मौजूद साधनों को लेकर ही छोटे-मोटे कार्यों में जुट जाया ...

June 9, 2024, 10:09 a.m.

जन्मशताब्दी वर्ष तक सतत ज्ञानय...

तखतपुर, बिलासपुर। छत्तीसगढ़ * प्रतिदिन टोली द्वारा 6 घंटे समयदान * एक दिन में 250 घरों से करते हैं सं...

June 12, 2024, 12:26 p.m.

वद्यार्थियों की सहायतार्थ पाठ्...

पोर्ट ब्लेयर। अण्डमान निकोबार चेतना केन्द्र कालीकट, पोर्ट ब्लेयर ने जरूरतमंद वनवासी विद्यार्थियों मे...

June 12, 2024, 12:19 p.m.

24 गाँवों में 24-24 घरों में ह...

महासमुंद। छत्तीसगढ़ गायत्री शक्तिपीठ महासमुंद द्वारा ‘विजन 2026’ के अंतर्गत सिरपुर क्षेत्र के 24 गाँव...

June 12, 2024, 12:17 p.m.

बुद्ध पूर्णिमा-23 मई 2024 : बड़...

धमतरी : 10 हजार परिवार भोपाल : 11 हजार परिवार उज्जैन : 25 हजार परिवार धमतरी। छत्तीसगढ़ :  बुद्ध पूर्ण...

June 12, 2024, 12:15 p.m.

सवा करोड़ गायत्री महामंत्र लेखन...

खंडवा। मध्य प्रदेश ओंकारेश्वर उप जोन में खंडवा जिले के सिरसौद ग्राम में आगामी 28 नवंबर से 2 दिसंबर क...

June 12, 2024, 12:09 p.m.

गुरूस्मारकों में भाव प्रतिष्ठा...

कुरूक्षेत्र। हरियाणा गायत्री शक्तिपीठ कुरूक्षेत्र में पितृवत मार्गदर्शक परम पूज्य गुरूदेव एवं मातृवत...

June 12, 2024, 12:06 p.m.

देश के शिक्षाविदों की कार्यशाल...

देसंविवि की उदात्त परंपराओं का परिचय दिया नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र  नई दिल्ली में दिनांक...

June 12, 2024, 11:47 a.m.

अत्यंत आकर्षक व प्रभावशाली अभि...

जयपुर। राजस्थान में विगत पाँच वर्षों से चल रहे गृहे-गृहे यज्ञ अभियान के अन्तर्गत 12 मई 2024 को सेक्ट...

June 12, 2024, 11:44 a.m.

गृहे-गृहे गायत्री उपासना-यज्ञ ...

45वें स्थापना दिवस पर 127 परिवारों में हुआ यज्ञ जोबट, अलीराजपुर। मध्य प्रदेश गायत्री शक्तिपीठ जोबट क...

June 12, 2024, 11:39 a.m.

तुलसी वृंदावन की स्थापना की, प...

गोंदिया। महाराष्ट्र दिव्य भारत युवा संघ गोंदिया ने दिनांक 9 मई 2024 को जिला अस्पताल भंडारा में तुलसी...

June 9, 2024, 10:29 a.m.
as

First Meeting With Guru

At the age of 15- Self-realization on Basant Panchanmi Parva 1926 at Anwalkheda (Agra, UP, India), with darshan and guidance from Swami Sarveshwaranandaji.

Akhand Deep

More than 2400 crore Gayatri Mantra have been chanted so far in its presence. Just by taking a glimpse of this eternal flame, people receive divine inspirations and inner strength.

Akhand Jyoti Magazine

It was started in 1938 by Pt. Shriram Sharma Acharya. The main objective of the magazine is to promote scientific spirituality and the religion of 21st century, that is, scientific religion.

Gayatri Mantra

The effect of sincere and steadfast Gayatri Sadhana is swift and miraculous in purifying, harmonizing and steadying the mind and thus establishing unshakable inner peace and a sense of joy filled calm even in the face of grave trials and tribulations in the outer life of the Sadhak.

आचार्य जी ने सिद्धांत और साधना को आधुनिक युग के अनुकूल तर्क व शब्द देकर सामाजिक परिवर्तन का जो मार्ग दिखाया है, उसके लिए आने वाली पीढ़ियाँ युगों-युगों तक कृतज्ञ रहेंगी।

डॉ. शंकर दयाल शर्मा (पूर्व राष्ट्रपति)

 

मुझे ज्ञात है कि इस विश्वविद्यालय ने स्वतंत्रता सेनानी और लगभग ३००० पुस्तकों के लेखक पंडित श्रीराम शर्मा आचार्यजी के स्वप्न को साकार रूप दिया है। इन्हें भारत में ज्ञान क्रांति का प्रवर्तक कहना उपयुक्त होगा। आचार्यश्री का विचार था कि अज्ञानता ही निर्धनता और बीमारी आदि सभी समस्याओं की जड़ है।

डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम (पूर्व राष्ट्रपति एवं वैज्ञानिक)

 

आचार्य जी का एकाकी पुरुषार्थ सारे संत समाज की सम्मिलित शक्ति के स्तर का है, उनने गायत्री व यज्ञ को प्रतिबंध रहित करने निमित्त जो कुछ भी किया वह शास्त्रों के अनुसार ही था। मेरा उन्हें बारम्बार नमन है।

स्वामी जयेन्द्रतीर्थ सरस्वती (शंकराचार्य कांची कामकोटि पीठ)

 

श्रद्धेय आचार्य श्रीराम शर्मा जी ने जो कार्य कर दिखाया वह अद्भुत है, युग के लिए नितांत आवश्यक है। आचार्य जी के साहित्य से मैं बहुत प्रभावित हूँ। प्रज्ञा पुराण ने विशेष रूप से मुझे अपने कार्यों में बहुत बल प्रदान किया है। उनका चिंतन राष्ट्र को शक्तिशाली बनाता और मानव मात्र को सही दिशा प्रदान करता है।

श्री नानाजी देशमुख (संस्थापक ग्रामोदय विश्वविद्यालय)

 

आचार्य जी द्वारा भाष्य किए गए उपनिषदों का स्वाध्याय करने के बाद उन्होंने कहा कि- ‘‘काश! यह साहित्य मुझे जवानी में मिल गया होता तो मेरे जीवन की दिशाधारा कुछ और ही होती; मैं राजनीति में न जाकर आचार्य श्री के चरणों में बैठा अध्यात्म का ज्ञान ले रहा होता।’’

सर्वपल्ली डॉ. राधाकृष्णन्

 

विनोबा जी ने वेदों के पूज्यवर द्वारा किए गए भाष्य को ग्वालियर मेंं एक सार्वजनिक सभा में अपने सिर पर धारण करते हुए कहा- "ये ग्रन्थ किसी व्यक्ति द्वारा नहीं, शक्ति द्वारा लिखे गये हैं।"

आचार्य विनोबा भावे

 

सुप्रसिद्ध सन्त देवरहा बाबा एक सिद्ध पुरुष थे। उनने एक परिजन से कहा- ‘‘बेटा! उनके बारे में मैं क्या कहूँ? यह समझो कि मैं हृदय से सतत उनका स्मरण करता रहता हूँ। गायत्री उनमें पूर्णतः समा गयी है एवं वे साक्षात् सविता स्वरूप हैं।’’

देवरहा बाबा

 

‘‘आचार्यश्री ने गायत्री को जन-जन की बनाकर महर्षि दयानन्द के कार्यों को आगे बढ़ाया है। गायत्री और ये एकरूप हो गये हैं।’’

महात्मा आनन्द स्वामी

 

अपने भावभरे उद्गार पूज्यवर के सम्बन्ध में इस रूप में व्यक्त किए थे- ‘‘आचार्य जी इस युग में गायत्री के जनक हैं। उनने गायत्री को सबकी बना दिया। यदि इसे मात्र ब्राह्मणों की मानकर उन्हीं के भरोसे छोड़ दिया होता तो अब तक गायत्री महाविद्या सम्भवतः लुप्त हो गयी होती।’’

करपात्री जी महाराज