विरोध न करना पाप का परोक्ष समर...

संसार में अवाँछनीयता कम और उत्कृष्टता अधिक है। तभी तो यह संसार अब तक जीवित है। यदि पाप अधिक और पुण्य...

July 14, 2024, 10:45 a.m.

विरोध न करना पाप का परोक्ष समर...

दिन-दहाड़े सरे-बाजार गुण्डागर्दी होती रहती है और यह भले बनने वाले लोग चुपचाप उस तमाशे को देखते रहते ...

July 14, 2024, 10:30 a.m.

विरोध न करना पाप का परोक्ष समर...

भगवान बुद्ध ने तत्कालीन अनाचारों के- मूढ़ मान्यताओं के विरुद्ध प्रचण्ड क्रान्ति खड़ी की थी, इसी संघर...

July 14, 2024, 10:28 a.m.

विरोध न करना पाप का परोक्ष समर...

यज्ञ सन्दर्भ में एक श्रुति वचन प्रयोग होता है- ‘‘मन्यु रसि मन्यु मे दहि’’ हे भगवान् आप ‘मन्यु’ हैं ह...

July 14, 2024, 10:27 a.m.

विरोध न करना पाप का परोक्ष समर...

“चोर-चोर मौसेरे भाई” की उक्ति हर क्षेत्र में लागू होते देखते हैं। एक का पर्दाफाश होते ही-दूसरे अन्य ...

July 14, 2024, 10:25 a.m.

चाहिए साहसी, जिम्मेदार:-...

युग निर्माण योजना, शतसूत्री कार्यक्रमों में बँटी हुई है। वे यथास्थान, यथास्थिति, यथासंभव कार्यान्वित...

July 14, 2024, 10:23 a.m.

उपहासास्पद ओछे दृष्टिकोण-...

यों ऐसे भी लोग हमारे संपर्क में आते हैं जो ऋद्धि-सिद्धि प्राप्त करने के लिए कुण्डलिनी जागरण, चक्र जा...

July 14, 2024, 10:21 a.m.

जिनमें साहस हो आगे आवें...

हमारा निज का कुछ भी कार्य या प्रयोजन नहीं है। मानवता का पुनरुत्थान होने जा रहा है। ईश्वर उसे पूरा कर...

July 14, 2024, 10:20 a.m.

उत्थान और आनन्द का मार्ग...

इन थोड़ी सी पंक्तियों में यह विस्तारपूर्वक नहीं बताया जा सकता कि मन की मलीनता को हटा देने पर हम पतन ...

July 14, 2024, 10:19 a.m.

सामाजिक कुरीतियों की जंजीर सत...

हम अपनी सामाजिक कुरीतियों पर ध्यान दें तो लगता है कि लोहे की गरम सलाखों से बनी हुई जंजीरों की तरह वे...

July 14, 2024, 10:17 a.m.

एक पेड़ मां के नाम...

गायत्री परिवार मनासा जिला नीमच द्वारा पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से नगर से दूर गांव चौकड़ी के वन वि...

July 14, 2024, 11:48 p.m.

महिला सशक्तिकरण हेतु टाटानगर म...

गायत्री ज्ञान मंदिर भालूबासा टाटानगर में प्रज्ञा महिला मंडल और नवयुग दल युवा प्रकोष्ठ के द्वारा एक म...

July 14, 2024, 11:37 p.m.

आद. डॉ. चिन्मय पंड्या जी दो दि...

औरों के हित जो जीता है औरों के हित जो मरता है, उसका हर आंसू रामायण प्रत्येक कर्म ही गीता है। ॥ जबलपु...

July 14, 2024, 11:55 a.m.

पंचवटी रोपण अभियान आरंभ...

जतारा, टीकमगढ़। मध्य प्रदेश गायत्री परिवार युवा प्रकोष्ठ जतारा ने विश्व पर्यावरण दिवस से पंचवटी रोपण ...

July 13, 2024, 5:19 p.m.

महाविद्यालय में तुलसी वितरण का...

खारघर, मुंबई। महाराष्ट्र विश्व पर्यावरण दिवस के दिन गायत्री परिवार खारघर ने भारती विद्यापीठ कॉलेज ऑफ...

July 13, 2024, 5:16 p.m.

इस वर्ष लगाएँगे 5,100 पौधे ...

जमशेदपुर। झारखण्ड 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में, गायत्री परिवार टाटानगर के प्रज्ञा मह...

July 13, 2024, 5:13 p.m.

गाय माता को है बचाना, पॉलीथीन ...

जूट की थैलियों का वितरण किया सुल्ताना, जैसलमेर। राजस्थान गायत्री परिवार सुल्ताना ने विश्व पर्यावरण द...

July 13, 2024, 5:11 p.m.

विविध स्थानों पर हुआ वृक्षारोप...

मुक्तिधाम में पेण्ड्रा मरवाही गौरेला। छत्तीसगढ़ गायत्री परिवार पेण्ड्रा के तेंदूपारा में स्थित मुक्ति...

July 13, 2024, 5:06 p.m.

वृक्ष काँवड़ यात्रा निकाली...

प्लास्टिक का उपयोग नहीं करने का संकल्प लिया सागर। मध्य प्रदेश विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर गायत्री...

July 13, 2024, 4:55 p.m.

शीलनाथ धूनी टेकरी परिसर से पॉल...

पॉलीथीन मुक्ति के लिए चलाया अभियान  देवास। मध्य प्रदेश  गायत्री शक्तिपीठ की टीम ने 5 जून को विश्व पर...

July 13, 2024, 4:53 p.m.
as

First Meeting With Guru

At the age of 15- Self-realization on Basant Panchanmi Parva 1926 at Anwalkheda (Agra, UP, India), with darshan and guidance from Swami Sarveshwaranandaji.

Akhand Deep

More than 2400 crore Gayatri Mantra have been chanted so far in its presence. Just by taking a glimpse of this eternal flame, people receive divine inspirations and inner strength.

Akhand Jyoti Magazine

It was started in 1938 by Pt. Shriram Sharma Acharya. The main objective of the magazine is to promote scientific spirituality and the religion of 21st century, that is, scientific religion.

Gayatri Mantra

The effect of sincere and steadfast Gayatri Sadhana is swift and miraculous in purifying, harmonizing and steadying the mind and thus establishing unshakable inner peace and a sense of joy filled calm even in the face of grave trials and tribulations in the outer life of the Sadhak.

आचार्य जी ने सिद्धांत और साधना को आधुनिक युग के अनुकूल तर्क व शब्द देकर सामाजिक परिवर्तन का जो मार्ग दिखाया है, उसके लिए आने वाली पीढ़ियाँ युगों-युगों तक कृतज्ञ रहेंगी।

डॉ. शंकर दयाल शर्मा (पूर्व राष्ट्रपति)

 

मुझे ज्ञात है कि इस विश्वविद्यालय ने स्वतंत्रता सेनानी और लगभग ३००० पुस्तकों के लेखक पंडित श्रीराम शर्मा आचार्यजी के स्वप्न को साकार रूप दिया है। इन्हें भारत में ज्ञान क्रांति का प्रवर्तक कहना उपयुक्त होगा। आचार्यश्री का विचार था कि अज्ञानता ही निर्धनता और बीमारी आदि सभी समस्याओं की जड़ है।

डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम (पूर्व राष्ट्रपति एवं वैज्ञानिक)

 

आचार्य जी का एकाकी पुरुषार्थ सारे संत समाज की सम्मिलित शक्ति के स्तर का है, उनने गायत्री व यज्ञ को प्रतिबंध रहित करने निमित्त जो कुछ भी किया वह शास्त्रों के अनुसार ही था। मेरा उन्हें बारम्बार नमन है।

स्वामी जयेन्द्रतीर्थ सरस्वती (शंकराचार्य कांची कामकोटि पीठ)

 

श्रद्धेय आचार्य श्रीराम शर्मा जी ने जो कार्य कर दिखाया वह अद्भुत है, युग के लिए नितांत आवश्यक है। आचार्य जी के साहित्य से मैं बहुत प्रभावित हूँ। प्रज्ञा पुराण ने विशेष रूप से मुझे अपने कार्यों में बहुत बल प्रदान किया है। उनका चिंतन राष्ट्र को शक्तिशाली बनाता और मानव मात्र को सही दिशा प्रदान करता है।

श्री नानाजी देशमुख (संस्थापक ग्रामोदय विश्वविद्यालय)

 

आचार्य जी द्वारा भाष्य किए गए उपनिषदों का स्वाध्याय करने के बाद उन्होंने कहा कि- ‘‘काश! यह साहित्य मुझे जवानी में मिल गया होता तो मेरे जीवन की दिशाधारा कुछ और ही होती; मैं राजनीति में न जाकर आचार्य श्री के चरणों में बैठा अध्यात्म का ज्ञान ले रहा होता।’’

सर्वपल्ली डॉ. राधाकृष्णन्

 

विनोबा जी ने वेदों के पूज्यवर द्वारा किए गए भाष्य को ग्वालियर मेंं एक सार्वजनिक सभा में अपने सिर पर धारण करते हुए कहा- "ये ग्रन्थ किसी व्यक्ति द्वारा नहीं, शक्ति द्वारा लिखे गये हैं।"

आचार्य विनोबा भावे

 

सुप्रसिद्ध सन्त देवरहा बाबा एक सिद्ध पुरुष थे। उनने एक परिजन से कहा- ‘‘बेटा! उनके बारे में मैं क्या कहूँ? यह समझो कि मैं हृदय से सतत उनका स्मरण करता रहता हूँ। गायत्री उनमें पूर्णतः समा गयी है एवं वे साक्षात् सविता स्वरूप हैं।’’

देवरहा बाबा

 

‘‘आचार्यश्री ने गायत्री को जन-जन की बनाकर महर्षि दयानन्द के कार्यों को आगे बढ़ाया है। गायत्री और ये एकरूप हो गये हैं।’’

महात्मा आनन्द स्वामी

 

अपने भावभरे उद्गार पूज्यवर के सम्बन्ध में इस रूप में व्यक्त किए थे- ‘‘आचार्य जी इस युग में गायत्री के जनक हैं। उनने गायत्री को सबकी बना दिया। यदि इसे मात्र ब्राह्मणों की मानकर उन्हीं के भरोसे छोड़ दिया होता तो अब तक गायत्री महाविद्या सम्भवतः लुप्त हो गयी होती।’’

करपात्री जी महाराज