• News
  • Blogs
  • Gurukulam
English हिंदी
×

My Notes


  • TOC
    • ईश्वर को खोजें नहीं, स्वयं में खोदे
    • अगस्त-सितंबर 2002 के पर्व-त्योहार
    • ब्रह्मांड की टोह हेतु चल रहे दुरसाहसी प्रयास
    • Quotation
    • उसी के अनुरूप (kahani)
    • सँभालो जीवन की जागीर को
    • ड्यूटी से न हटा (kahani)
    • तिलक का विज्ञान एवं दर्शन
    • Quotation
    • रूप में ढला (kahani)
    • पर्व ब्रह्ममयं जगत्
    • श्री अरविंद का ‘अतिमानसिक रूपांतरण’
    • सर्वत्र पूजे जाते हैं (kahani)
    • अविज्ञात का अद्भुत संसार
    • पाश्चात्य जगत् भी चमत्कृत रहा है आर्ष वाङ्मय से
    • VigyapanSuchana
    • श्रम-उपार्जन के सहारे (kahani)
    • स्वप्नों की रोमाँचकारी-रहस्यमयी दुनिया
    • धर्म का पर्यायवाची (kahani)
    • भारतीय ही थे विश्व के प्रथम उपदेष्टा
    • Quotation
    • न प्यार पाने की शिकायत (kahani)
    • महत्व विद्वता का नहीं, पवित्र भावनाओं का
    • दैवी वातावरण का विस्तार (kahani)
    • मन एवं मनुष्याणां कारणं बंधमोक्षयोः
    • सच्चे धर्मावलंबी (kahani)
    • विनाश से सबक लें, - प्रकृति को माता मानें
    • धर्म को हराने की चेष्टा (kahani)
    • भगवान की लाठी
    • संस्कारों की प्रबला (kahani)
    • सनकों और बेवकूफियों के कीर्तिमान
    • बड़ा प्रयोजन (kahani)
    • सत्य का बोध कराए, ऐसी शिक्षा प्रचलित हो
    • रक्ष पर सवार होकर जाना (kahani)
    • हिंदी पत्रकारिता आदर्शोन्मुखी बने
    • VigyapanSuchana
    • सबके लिए बहुमूल्य (kahani)
    • श्रावणी पर्व पर कार्यकर्ताओं की रीति-नीति - परमपूज्य गुरुदेव की अमृतवाणी
    • VigyapanSuchana
    • श्रयरोग-उन्मूलन की विशिष्ट यज्ञोपचार प्रक्रिया-(7)
    • श्रावणी उपाकर्म के मूल में छिपा दर्शन
    • VigyapanSuchana
    • गहना कर्मणोगति
    • Quotation
    • गुरुकथामृत-25 - व्यावहारिक जीवन का शिक्षण देती मार्गदर्शक पाती
    • अपनों से अपनी बात - हीरक जयंती वर्ष की हमारी साधना और सेवा-आराधना
    • संगठन की याचना
    • संगठन की याचना (kavita)
  • My Note
  • Books
    • SPIRITUALITY
    • Meditation
    • EMOTIONS
    • AMRITVANI
    • PERSONAL TRANSFORMATION
    • SOCIAL IMPROVEMENT
    • SELF HELP
    • INDIAN CULTURE
    • SCIENCE AND SPIRITUALITY
    • GAYATRI
    • LIFE MANAGEMENT
    • PERSONALITY REFINEMENT
    • UPASANA SADHANA
    • CONSTRUCTING ERA
    • STRESS MANAGEMENT
    • HEALTH AND FITNESS
    • FAMILY RELATIONSHIPS
    • TEEN AND STUDENTS
    • ART OF LIVING
    • INDIAN CULTURE PHILOSOPHY
    • THOUGHT REVOLUTION
    • TRANSFORMING ERA
    • PEACE AND HAPPINESS
    • INNER POTENTIALS
    • STUDENT LIFE
    • SCIENTIFIC SPIRITUALITY
    • HUMAN DIGNITY
    • WILL POWER MIND POWER
    • SCIENCE AND RELIGION
    • WOMEN EMPOWERMENT
  • Akhandjyoti
  • Login


Back to Books

Magazine - Year 2001 - Version 2

Media: TEXT
Language: HINDI
TEXT SCAN EPUB KINDLE


ईश्वर को खोजें नहीं, स्वयं में खोदे

Listen online

View page note

Please go to your device settings and ensure that the Text-to-Speech engine is configured properly. Download the language data for Hindi or any other languages you prefer for the best experience.
×

Add Note


2 Last
ईश्वर को जो किसी वस्तु की भाँति खोजते हैं, वे नासमझ हैं। वह तो वस्तु है ही नहीं। वह तो आलोक, आनंद और अमृत के परम अनुभव का नाम है। ईश्वर न तो विषय है, न वस्तु और न ही व्यक्ति कि जिसे कहीं बाहर खोजा या पाया जा सके। वह तो अपनी ही चेतना का आत्यंतिक परिष्कार है।

सूफी फकीर जुन्नैद से किसी ने पूछा, ‘ईश्वर है तो दिखाई क्यों नहीं देता?’ जुन्नैद ने कहा, ‘ईश्वर कोई वस्तु तो है नहीं, वह तो अनुभूति है। उसे देखने का कोई उपाय नहीं । हाँ, अनुभव करने का अवश्य है।’ फकीर जुन्नैद की ये बातें प्रश्नकर्ता को संतुष्ट न कर सकीं। तब उन्होंने पास में ही पड़ा एक पत्थर उठाया और अपने पाँव पर पटक लिया उनके पाँव को गहरी चोट आई और उससे खून की धारा बहने लगी। प्रश्नकर्ता व्यक्ति इसे देखकर हैरान हो गया और बोला, ‘यह क्या किया आपने? इससे क्या आपको पीड़ा नहीं होगी? ‘फकीर जुन्नैद हँसते हुए बोले, ‘पीड़ा दिखती नहीं, फिर भी है। ऐसे ही ईश्वर भी है।’

जीवन में जो दिखाई पड़ता है, उसकी ही नहीं, उसकी भी सत्ता है, जो नहीं दिखाई पड़ता। दृश्य से उस अदृश्य की सत्ता बहुत गहरी है। क्योंकि उसे अनुभव करने के लिए स्वयं के अस्तित्व की गहराई में उतरना जरूरी होता है। तभी वह पात्रता उपलब्ध होती है, जो उसे छू सके, देख सके और जान सके। साधारण इंद्रियाँ नहीं, उसे पाने के लिए तो अनुभूति की गहरी संवेदनशीलता अर्जित करनी पड़ती है। तभी उसका साक्षात्कार होता है और तभी मालूम पड़ता है कि वह कहीं बाहर नहीं, जो उसे देखा जा सके, वह तो भीतर है, वह तो देखने वाले में ही छिपा है।

सच तो यह है कि ईश्वर को खोजना नहीं, खोदना होता है। जो स्वयं में ही उसे खोदते चले जाते हैं, अंत में वे अपने अस्तित्व के मूल स्रोत और चरम विकास के रूप में अनुभव करते हैं। तो बस सार यही है कि ईश्वर को बाहर नहीं खोजें, स्वयं में खोदें।

2 Last


Other Version of this book



Version 2
Type: TEXT
Language: HINDI
...

Version 1
Type: SCAN
Language: HINDI
...


Releted Books


Articles of Books

  • ईश्वर को खोजें नहीं, स्वयं में खोदे
  • अगस्त-सितंबर 2002 के पर्व-त्योहार
  • ब्रह्मांड की टोह हेतु चल रहे दुरसाहसी प्रयास
  • Quotation
  • उसी के अनुरूप (kahani)
  • सँभालो जीवन की जागीर को
  • ड्यूटी से न हटा (kahani)
  • तिलक का विज्ञान एवं दर्शन
  • Quotation
  • रूप में ढला (kahani)
  • पर्व ब्रह्ममयं जगत्
  • श्री अरविंद का ‘अतिमानसिक रूपांतरण’
  • सर्वत्र पूजे जाते हैं (kahani)
  • अविज्ञात का अद्भुत संसार
  • पाश्चात्य जगत् भी चमत्कृत रहा है आर्ष वाङ्मय से
  • VigyapanSuchana
  • श्रम-उपार्जन के सहारे (kahani)
  • स्वप्नों की रोमाँचकारी-रहस्यमयी दुनिया
  • धर्म का पर्यायवाची (kahani)
  • भारतीय ही थे विश्व के प्रथम उपदेष्टा
  • Quotation
  • न प्यार पाने की शिकायत (kahani)
  • महत्व विद्वता का नहीं, पवित्र भावनाओं का
  • दैवी वातावरण का विस्तार (kahani)
  • मन एवं मनुष्याणां कारणं बंधमोक्षयोः
  • सच्चे धर्मावलंबी (kahani)
  • विनाश से सबक लें, - प्रकृति को माता मानें
  • धर्म को हराने की चेष्टा (kahani)
  • भगवान की लाठी
  • संस्कारों की प्रबला (kahani)
  • सनकों और बेवकूफियों के कीर्तिमान
  • बड़ा प्रयोजन (kahani)
  • सत्य का बोध कराए, ऐसी शिक्षा प्रचलित हो
  • रक्ष पर सवार होकर जाना (kahani)
  • हिंदी पत्रकारिता आदर्शोन्मुखी बने
  • VigyapanSuchana
  • सबके लिए बहुमूल्य (kahani)
  • श्रावणी पर्व पर कार्यकर्ताओं की रीति-नीति - परमपूज्य गुरुदेव की अमृतवाणी
  • VigyapanSuchana
  • श्रयरोग-उन्मूलन की विशिष्ट यज्ञोपचार प्रक्रिया-(7)
  • श्रावणी उपाकर्म के मूल में छिपा दर्शन
  • VigyapanSuchana
  • गहना कर्मणोगति
  • Quotation
  • गुरुकथामृत-25 - व्यावहारिक जीवन का शिक्षण देती मार्गदर्शक पाती
  • अपनों से अपनी बात - हीरक जयंती वर्ष की हमारी साधना और सेवा-आराधना
  • संगठन की याचना
  • संगठन की याचना (kavita)
Shantikunj, Haridwar

About Shantikunj

Shantikunj has emerged over the years as a unique centre and fountain-head of the global Yug Nirman Yojna—a movement for moral and spiritual regeneration inspired by India’s timeless heritage.

Discover Shantikunj
Discover

Mission

  • Home
  • News & Activities
  • Join Us
  • Contact
Knowledge

Resources

  • Literature
  • Videos & More
  • Audio
  • Quotes & Thoughts
We value your thoughts

Write to Us

Share your suggestions, feedback, questions, or experiences with us.

Write to us

Copyright © 2026 SRI VEDMATA GAYATRI TRUST (TMD). All rights reserved.

Designed by IT Cell Shantikunj