• News
  • Blogs
  • Gurukulam
English हिंदी
×

My Notes


  • TOC
    • खीर में मिला महाप्रसाद का स्वाद
    • पंगुं लङ्घयते गिरिं
    • ऐसा तो भगवान से ही संभव है!
    • चौथे ऑपरेशन में सूक्ष्म सत्ता का संरक्षण
    • मनुष्य में हुआ देवत्व का उदय
    • नजान रास्ते में मिले आत्मीय बंधु
    • वो कौन थी?
    • संजीवनी ने किया नवचेतना का संचार
    • छूट गयी कमर की बेल्ट और बैसाखी
    • सब कुछ करता तू ही...
    • ...और मुझे भगवान के दर्शन हो गये
    • तस्वीर ने जगायी अन्तश्चेतना
    • सिद्ध हुआ माँ का आशीर्वाद
    • सर्वसमर्थ गायत्री माता
    • आत्माभिव्यक्ति
    • पूज्यवर का अनुरोध एवं आश्वासन
  • My Note
  • Books
    • SPIRITUALITY
    • Meditation
    • EMOTIONS
    • AMRITVANI
    • PERSONAL TRANSFORMATION
    • SOCIAL IMPROVEMENT
    • SELF HELP
    • INDIAN CULTURE
    • SCIENCE AND SPIRITUALITY
    • GAYATRI
    • LIFE MANAGEMENT
    • PERSONALITY REFINEMENT
    • UPASANA SADHANA
    • CONSTRUCTING ERA
    • STRESS MANAGEMENT
    • HEALTH AND FITNESS
    • FAMILY RELATIONSHIPS
    • TEEN AND STUDENTS
    • ART OF LIVING
    • INDIAN CULTURE PHILOSOPHY
    • THOUGHT REVOLUTION
    • TRANSFORMING ERA
    • PEACE AND HAPPINESS
    • INNER POTENTIALS
    • STUDENT LIFE
    • SCIENTIFIC SPIRITUALITY
    • HUMAN DIGNITY
    • WILL POWER MIND POWER
    • SCIENCE AND RELIGION
    • WOMEN EMPOWERMENT
  • Akhandjyoti
  • Login





Books - अदभुत, आश्चर्यजनक किन्तु सत्य -3

Media: TEXT
Language: HINDI
TEXT TEXT TEXT


खीर में मिला महाप्रसाद का स्वाद

Listen online

View page note

Please go to your device settings and ensure that the Text-to-Speech engine is configured properly. Download the language data for Hindi or any other languages you prefer for the best experience.
×

Add Note


2 Last
        यह जमशेदपुर की कहानी है। सन् १९६९ई. में वर्मा माइन्स में महायज्ञ का आयोजन किया गया था। निर्धारित तिथि को पूज्य गुरुदेव का आगमन हुआ। उन्हें टाटा कम्पनी के भव्य गेस्ट हाउस में ठहराया गया। रात्रि विश्राम से पहले पूज्य गुरुदेव ने वाचमैन से कहा- मथुरा से एक पण्डित जी रात के डेढ़- दो बजे आने वाले हैं। लीलापत नाम है उनका। उन्हें मेरे पास ही ठहरा देना।

        उस वाचमैन की ड्यूटी बदल गई थी और वह साथी वाचमैन को लीलापत जी के बारे में बताना भूल गया था। लीलापत जी पहुँचे। बोले- पूज्य गुरुदेव जहाँ हैं, मुझे वहीं ठहराया जाए। वाचमैन ने कहा- आपकी व्यवस्था कहीं और की गई है, मैं आपको वहीं ले चलता हूँ। पण्डित जी को बात पसंद नहीं आई। उन्होंने कहा- सत्यानन्द या गायत्री का घर जानते हो? मुझे वहीं ले चलो।

        लड़का उन्हें मेरे घर ले आया। लीलापत जी के घर पर आने से हमारी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। आनन- फानन में उनके विश्राम की व्यवस्था की गई।
लीलापत जी बिस्तर पर लेटे ही थे कि एक बार फिर दरवाजा खटखटाया गया। दरवाजा खोलते ही मैंने देखा- सामने पूज्य गुरुदेव खड़े हैं, एक हाथ में लोहे की पेटी लेकर। साथ में एक लड़का सिर पर बेडिंग लिए खड़ा था। एक- एक घर के सभी लोग दरवाजे पर आ गये। हम सब- की हालत ठीक वैसी ही थी, जैसी भगवान श्रीकृष्ण के पहुँचने पर विदुर की हुई होगी। हमने सपने में भी कल्पना नहीं की थी कि पूज्य गुरुदेव के चरण हमारे घर पर पड़ेंगे। गायत्री दीदी तो इतना विभोर हो गई थीं कि उनकी आँखों से आँसू निकल पड़े। उन्होंने कहा- हमारे घर का तो कोना- कोना अपवित्र है, गुरुदेव! आप यहाँ कैसे आ गए?

        दीदी की बात सुनकर गुरुदेव मुस्कराते हुए अन्दर आए। एक- एक कर हर कमरे में जाकर बैठे और बोलते गए- लो, तुम्हारा घर पवित्र हो गया। सुबह होते- होते श्री रमेश चन्द्र शुक्ला तथा श्री हेमानन्द जी भी पूरे कुनबे के साथ आ गए। घर पर उत्सव जैसा माहौल बन गया।

        सबके लिए खीर बनाकर परोसी गई। पहले गुरुदेव ने चखा, फिर शुक्ला जी ने चखते ही अजीब- सा मुँह बनाया। हम शंकित हुए। अचानक दीदी को याद आया कि डालडा के उस डिब्बे में नमक रखा था और उन्होंने अतिउत्साह में खीर में चीनी की जगह नमक डाल दिया था। उनके उड़ें हुए चेहरे को देखकर गुरुदेव ने पूछा- क्या बात है? दीदी ने अटकते हुए कहा- खीर में नमक....। गुरुदेव बोले- बेटी, कहाँ है नमक? ठीक तो है। तुम लोग भी चख कर देखो। एक- एक कर सबने खीर चखी। ...और आश्चर्य खीर में माँ जगदम्बा को अर्पित किए गए भोग जैसा अलौकिक स्वाद था।

प्रस्तुतिः भास्कर प्रसाद सिन्हा,
        पूर्वजोन, शांतिकुंज, हरिद्वार (उत्तराखण्ड)
2 Last


Other Version of this book



अदभुत, आश्चर्यजनक किन्तु सत्य -1
Type: TEXT
Language: HINDI
...

अदभुत, आश्चर्यजनक किन्तु सत्य -2
Type: TEXT
Language: HINDI
...

अदभुत, आश्चर्यजनक किन्तु सत्य -3
Type: TEXT
Language: HINDI
...


Releted Books



Religion and Science
Type: SCAN
Language: ENGLISH
...

యుగ ఋషి జన్మశతాబ్ది
Type: SCAN
Language: TELUGU
...

The Legend of a Divine Campaign
Type: SCAN
Language: ENGLISH
...

प्रज्ञावतार का स्वरूप और क्रिया-कलाप
Type: SCAN
Language: HINDI
...

મારી વસીયત અને વિરાસત
Type: SCAN
Language: GUJRATI
...

हमारी वसीयत और विरासत
Type: TEXT
Language: EN
...

My Life - Its Legacy and Message
Type: SCAN
Language: ENGLISH
...

हमारी वसीयत और विरासत
Type: SCAN
Language: EN
...

Spectrum of Knowledge
Type: SCAN
Language: ENGLISH
...

प्रज्ञावतार की विस्तार प्रक्रिया
Type: TEXT
Language: EN
...

प्रज्ञावतार की विस्तार प्रक्रिया
Type: SCAN
Language: EN
...

सुनसान के सहचर
Type: TEXT
Language: HINDI
...

Companions in Solitude
Type: TEXT
Language: ENGLISH
...

Companion in Solitude
Type: SCAN
Language: ENGLISH
...

सुनसान के सहचर
Type: SCAN
Language: EN
...

नव सृजन के निमित्त महाकाल की तैयारी
Type: SCAN
Language: EN
...

નવસર્જન નિમિત્તે મહાકાળની તૈયારી
Type: SCAN
Language: GUJRATI
...

नवसृजन के निमित्त महाकाल की तैयारी
Type: TEXT
Language: EN
...

दीक्षित -नैष्ठिक
Type: TEXT
Language: EN
...

पत्र पाथेय
Type: SCAN
Language: HINDI
...

चेतना की शिखर यात्रा-२
Type: SCAN
Language: EN
...

चेतना की शिखर यात्रा-१
Type: SCAN
Language: EN
...

ચેતનાની શિખરયાત્રા ભાગ - ૧
Type: SCAN
Language: EN
...

प्रज्ञावतार का कथामृत
Type: SCAN
Language: HINDI
...

Articles of Books

  • खीर में मिला महाप्रसाद का स्वाद
  • पंगुं लङ्घयते गिरिं
  • ऐसा तो भगवान से ही संभव है!
  • चौथे ऑपरेशन में सूक्ष्म सत्ता का संरक्षण
  • मनुष्य में हुआ देवत्व का उदय
  • नजान रास्ते में मिले आत्मीय बंधु
  • वो कौन थी?
  • संजीवनी ने किया नवचेतना का संचार
  • छूट गयी कमर की बेल्ट और बैसाखी
  • सब कुछ करता तू ही...
  • ...और मुझे भगवान के दर्शन हो गये
  • तस्वीर ने जगायी अन्तश्चेतना
  • सिद्ध हुआ माँ का आशीर्वाद
  • सर्वसमर्थ गायत्री माता
  • आत्माभिव्यक्ति
  • पूज्यवर का अनुरोध एवं आश्वासन
About Shantikunj

Shantikunj has emerged over the years as a unique center and fountain-head of a global movement of Yug Nirman Yojna (Movement for the Reconstruction of the Era) for moral-spiritual regeneration in the light of hoary Indian heritage.

Navigation Links
  • Home
  • Literature
  • News and Activities
  • Quotes and Thoughts
  • Videos and more
  • Audio
  • Join Us
  • Contact
Write to us

Click below and write to us your commenct and input.

Go

Copyright © SRI VEDMATA GAYATRI TRUST (TMD). All rights reserved. | Design by IT Cell Shantikunj