• News
  • Blogs
  • Gurukulam
English हिंदी
×

My Notes


  • TOC
    • ज्ञान ही नहीं, मनुष्य को धर्म भी चाहिए
    • धर्म बनाम समाजवाद
    • नीति- अनीति का भेद और सफलता
    • पाप और पुण्य का रहस्य
    • नैतिकता की खरी कसौटी
    • प्रेय के साथ श्रेय भी जुड़ा है
    • कल्याण का मार्ग
    • बहुमत की अपेक्षा धर्म श्रेष्ठ है
    • शास्त्रवाद और बुद्धिवाद का समन्वय
    • धर्म- धारणा का लक्ष्य और उद्देश्य
    • युंग- धर्म के दस लक्षण
    • धर्म युद्ध-महान तप
    • धर्म तर्कसंगत होता है
    • धर्म को दिमागी बीमारी बताने वाली भ्रान्त मनोवृत्ति
    • धर्म के नाम पर मानवता का पतन
    • धर्म एक स्वरूप-सम्प्रदाय अनेक
    • धर्म और संप्रदाय का अंतर समझा जाए
    • धर्म को सम्प्रदायवाद के कुचक्र से उबारा जाय
    • नीर- क्षीर की विवेक-बुद्धि अपनायें
    • जितना उचित है उतना अंगीकार करें
    • धर्म को व्यावहारिक-युगानुकूल
    • सर्वधर्म समन्वय क्यों और कैसे?
    • सब धर्मों में मौलिक एकता
    • सब धमों का एक ही मर्म -उच्च आदर्शों का परिपालन
    • एकता और समता
    • विश्व-वसुधा एकत्व के सूत्र में बँधे
    • विश्व-शांति का एकमेव आधार- अपनत्व का विस्तार
    • हम पुरखों से हर क्षेत्र में पिछड़े ही नहीं रहें
    • विस्तार को नहीं, स्तर को महत्व दिया जाय
    • शक्ति-संचय के पथ पर
    • अंधी दौड़ धर्म की ओर मुड़े
    • परम्पराओं में घुसी हुई अवांछनीयता
    • बिना सद्ज्ञान के अधूरा है भौतिक ज्ञान
    • विज्ञान की अपूर्णताएँ और उनका विकल्प
    • विज्ञान का अधूरापन दूर किया जाय
    • समझदारी विभाजन में नहीं, एकीकरण में
    • दर्शन बदलता है युग की परिस्थितियों को
    • वेदान्त पलायनवादी दर्शन नहीं है
    • समस्त विचारधाराओं का सार-वेदान्त
    • उच्चतम ज्ञान का उद्गम स्रोत वेदान्त
    • सम दर्शन और व्यवहार-कौशल
    • दर्शन को भ्रष्ट न किया जाय
    • आदेश बनाम विवेक
    • धर्म और दर्शन को अलग- अलग रखिए
    • जीवन-दर्शन के तीन स्वर्णिम सूत्र
    • यह अकथ कथा है, कहता कही न जाई
    • प्रतिपादन और उसका प्रभाव
    • तस्य वाचक : प्रणव
    • सत्कार्यों के लिए साधन-सहयोग
    • पुरातन गरिमा को भुलाएँ नहीं
    • मानवी गरिमा की दो मूलभूत कसौटियाँ
    • हम माया-मूढ़ होकर भ्रम जंजाल में भटक रहे है
    • समय और चेतना से उठकर आत्म-चेतना के दर्शन
    • भ्रम-जंजाल में उलझे हुए हम सब
    • क्या सत्य, क्या असत्य?
    • सत्य- असत्य की विवेचना
    • सत्य की स्वीकृति
    • सत्य के प्रकाश को हृदयंगम करें
    • सत्य में हजार हाथियों का बल
    • गरिमा सत्य-वचन की नहीं सत्य-निष्ठा की है
    • सत्य हमारे आचरण में उतरे
    • सत्य को विवेक की कसौटी पर कसा जाय
    • अन्तत : सत्य ही जीतता है
    • सत्य और अहिंसा के परिपालन की सीमा
    • सुखद और सरल तो सत्य ही है
    • आस्था कीं ज्योति बुझने न पाये
    • मानवी तत्त्वदर्शन का शिलान्यास हो
    • इन्द्रो: मायाभि : पुरुरूप ईयते
    • आत्मकल्याण की समग्र साधना और उसका स्वरूप
    • वैराग्य और जीवन-लक्ष्य
    • बुद्धि क्षेत्र से परे अपरोक्षानुभूति
    • अमृत और उसकी प्राप्ति
    • धर्म- धारणा द्वारा ईश्वर का साक्षात्कार
    • स्वर्ग की प्राप्ति और बन्धन-मुक्ति
    • भौतिक ही नहीं, आत्मिक उन्नति का भी ध्यान रहे
    • समग्रता धर्मतन्त्र और राजतन्त्र के समन्वय से
    • धर्मतन्त्र को वर्तमान विकृतियों से उबारा जाय
    • संसार की सर्वोपरि शक्ति- धर्म
    • सतवृत्तियों की स्थापना
    • धर्मतन्त्र की शक्ति पंगु न बने
    • राष्ट्रीय चरित्र-निर्माण का दायित्व जनता पर
  • My Note
  • Books
    • SPIRITUALITY
    • Meditation
    • EMOTIONS
    • AMRITVANI
    • PERSONAL TRANSFORMATION
    • SOCIAL IMPROVEMENT
    • SELF HELP
    • INDIAN CULTURE
    • SCIENCE AND SPIRITUALITY
    • GAYATRI
    • LIFE MANAGEMENT
    • PERSONALITY REFINEMENT
    • UPASANA SADHANA
    • CONSTRUCTING ERA
    • STRESS MANAGEMENT
    • HEALTH AND FITNESS
    • FAMILY RELATIONSHIPS
    • TEEN AND STUDENTS
    • ART OF LIVING
    • INDIAN CULTURE PHILOSOPHY
    • THOUGHT REVOLUTION
    • TRANSFORMING ERA
    • PEACE AND HAPPINESS
    • INNER POTENTIALS
    • STUDENT LIFE
    • SCIENTIFIC SPIRITUALITY
    • HUMAN DIGNITY
    • WILL POWER MIND POWER
    • SCIENCE AND RELIGION
    • WOMEN EMPOWERMENT
  • Akhandjyoti
  • Login

Impact Summit Sessions at Various Locations





Books - धर्म तत्त्व का दर्शन और मर्म भाग 2

Media: SCAN
Language: HINDI
SCAN SCAN SCAN SCAN SCAN SCAN


धर्मतन्त्र की शक्ति पंगु न बने

First 119 121 Last
First 119 121 Last


Other Version of this book



धर्म तत्त्व का दर्शन और मर्म भाग 1
Type: SCAN
Language: HINDI
...

धर्म तत्त्व का दर्शन और मर्म भाग 4
Type: SCAN
Language: HINDI
...

धर्म तत्त्व का दर्शन और मर्म भाग 2
Type: SCAN
Language: HINDI
...

धर्म तत्त्व का दर्शन और मर्म भाग 3
Type: SCAN
Language: HINDI
...

धर्म तत्त्व का दर्शन और मर्म भाग 5
Type: SCAN
Language: HINDI
...

धर्म तत्त्व का दर्शन और मर्म भाग 6
Type: SCAN
Language: HINDI
...


Releted Books


Articles of Books

  • ज्ञान ही नहीं, मनुष्य को धर्म भी चाहिए
  • धर्म बनाम समाजवाद
  • नीति- अनीति का भेद और सफलता
  • पाप और पुण्य का रहस्य
  • नैतिकता की खरी कसौटी
  • प्रेय के साथ श्रेय भी जुड़ा है
  • कल्याण का मार्ग
  • बहुमत की अपेक्षा धर्म श्रेष्ठ है
  • शास्त्रवाद और बुद्धिवाद का समन्वय
  • धर्म- धारणा का लक्ष्य और उद्देश्य
  • युंग- धर्म के दस लक्षण
  • धर्म युद्ध-महान तप
  • धर्म तर्कसंगत होता है
  • धर्म को दिमागी बीमारी बताने वाली भ्रान्त मनोवृत्ति
  • धर्म के नाम पर मानवता का पतन
  • धर्म एक स्वरूप-सम्प्रदाय अनेक
  • धर्म और संप्रदाय का अंतर समझा जाए
  • धर्म को सम्प्रदायवाद के कुचक्र से उबारा जाय
  • नीर- क्षीर की विवेक-बुद्धि अपनायें
  • जितना उचित है उतना अंगीकार करें
  • धर्म को व्यावहारिक-युगानुकूल
  • सर्वधर्म समन्वय क्यों और कैसे?
  • सब धर्मों में मौलिक एकता
  • सब धमों का एक ही मर्म -उच्च आदर्शों का परिपालन
  • एकता और समता
  • विश्व-वसुधा एकत्व के सूत्र में बँधे
  • विश्व-शांति का एकमेव आधार- अपनत्व का विस्तार
  • हम पुरखों से हर क्षेत्र में पिछड़े ही नहीं रहें
  • विस्तार को नहीं, स्तर को महत्व दिया जाय
  • शक्ति-संचय के पथ पर
  • अंधी दौड़ धर्म की ओर मुड़े
  • परम्पराओं में घुसी हुई अवांछनीयता
  • बिना सद्ज्ञान के अधूरा है भौतिक ज्ञान
  • विज्ञान की अपूर्णताएँ और उनका विकल्प
  • विज्ञान का अधूरापन दूर किया जाय
  • समझदारी विभाजन में नहीं, एकीकरण में
  • दर्शन बदलता है युग की परिस्थितियों को
  • वेदान्त पलायनवादी दर्शन नहीं है
  • समस्त विचारधाराओं का सार-वेदान्त
  • उच्चतम ज्ञान का उद्गम स्रोत वेदान्त
  • सम दर्शन और व्यवहार-कौशल
  • दर्शन को भ्रष्ट न किया जाय
  • आदेश बनाम विवेक
  • धर्म और दर्शन को अलग- अलग रखिए
  • जीवन-दर्शन के तीन स्वर्णिम सूत्र
  • यह अकथ कथा है, कहता कही न जाई
  • प्रतिपादन और उसका प्रभाव
  • तस्य वाचक : प्रणव
  • सत्कार्यों के लिए साधन-सहयोग
  • पुरातन गरिमा को भुलाएँ नहीं
  • मानवी गरिमा की दो मूलभूत कसौटियाँ
  • हम माया-मूढ़ होकर भ्रम जंजाल में भटक रहे है
  • समय और चेतना से उठकर आत्म-चेतना के दर्शन
  • भ्रम-जंजाल में उलझे हुए हम सब
  • क्या सत्य, क्या असत्य?
  • सत्य- असत्य की विवेचना
  • सत्य की स्वीकृति
  • सत्य के प्रकाश को हृदयंगम करें
  • सत्य में हजार हाथियों का बल
  • गरिमा सत्य-वचन की नहीं सत्य-निष्ठा की है
  • सत्य हमारे आचरण में उतरे
  • सत्य को विवेक की कसौटी पर कसा जाय
  • अन्तत : सत्य ही जीतता है
  • सत्य और अहिंसा के परिपालन की सीमा
  • सुखद और सरल तो सत्य ही है
  • आस्था कीं ज्योति बुझने न पाये
  • मानवी तत्त्वदर्शन का शिलान्यास हो
  • इन्द्रो: मायाभि : पुरुरूप ईयते
  • आत्मकल्याण की समग्र साधना और उसका स्वरूप
  • वैराग्य और जीवन-लक्ष्य
  • बुद्धि क्षेत्र से परे अपरोक्षानुभूति
  • अमृत और उसकी प्राप्ति
  • धर्म- धारणा द्वारा ईश्वर का साक्षात्कार
  • स्वर्ग की प्राप्ति और बन्धन-मुक्ति
  • भौतिक ही नहीं, आत्मिक उन्नति का भी ध्यान रहे
  • समग्रता धर्मतन्त्र और राजतन्त्र के समन्वय से
  • धर्मतन्त्र को वर्तमान विकृतियों से उबारा जाय
  • संसार की सर्वोपरि शक्ति- धर्म
  • सतवृत्तियों की स्थापना
  • धर्मतन्त्र की शक्ति पंगु न बने
  • राष्ट्रीय चरित्र-निर्माण का दायित्व जनता पर
About Shantikunj

Shantikunj has emerged over the years as a unique center and fountain-head of a global movement of Yug Nirman Yojna (Movement for the Reconstruction of the Era) for moral-spiritual regeneration in the light of hoary Indian heritage.

Navigation Links
  • Home
  • Literature
  • News and Activities
  • Quotes and Thoughts
  • Videos and more
  • Audio
  • Join Us
  • Contact
Write to us

Click below and write to us your commenct and input.

Go

Copyright © SRI VEDMATA GAYATRI TRUST (TMD). All rights reserved. | Design by IT Cell Shantikunj