मन को भगवान के साथ जोड़िए
गायत्री मंत्र हमारे साथ-साथ—
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्।
देवियो, भाइयो! क्रिया और विचार इन दोनों बातों का समन्वय अगर आप कर डालें, तो चमत्कार पैदा हो जाएगा। बया नाम का एक पक्षी होता है। जब वह अपना घोंसला बनाता है, तो कैसी तबियत से बनाता है, कैसे मन से बनाता है कि छोटे-छोटे तिनकों को एक-एक चुनकर के लाता है। उन्हें गूँथकर ऐसा बढ़िया घोंसला बना देता है कि क्या मजाल है कि अंडा हवा के झोंके से तबाह हो जाए? क्या मजाल है कि कौआ उसमें झपट्टा मार दे? उसमें उसके बच्चे मौज के साथ बैठे देखते रहते हैं। कोई आदमी सड़क पर से जब निकलता है, तो उस घोंसले को देखता रह जाता है कि यह बया का घोंसला है। कितना शानदार घोंसला है। हर जगह से उसकी प्रशंसा होती है। बया स्वयं प्रसन्न रहती हैं और देखने वालों की तो तबियत बाग बाग हो जाती है।
मित्रो! क्या विशेषता है बया में? कोई विशेषता नहीं है बेटे, मन लगाकर कोई भी काम करो, तो शानदार होता हैं। मन लगाकर काम नहीं किया (जाए तो बेटे उसका सत्यानाश हो जाता है। एक पक्षी का नाम है -कबूतर। कबूतर बया की तुलना में चार पाँच गुना बड़ा होता है। इतना बड़ा होता है, पर घोंसला कैसे बनाता है? बया का घोंसला जग आप देखना और कबूतर का भी घोंसला देखना। वह बड़ी-बड़ी लकड़ी बीनकर ले आता है जोर एक इधर रख दी, एक उधर रख दी और एक किधर को रख लेता है और उसमें ही अपने अंडे देने लगता है। उस पर ही बैठा रहता है। हवा क। झोंका आता है बस घोंसला गिरता है नीचे और कबूतर गिरता है ऊपर। अंडे फूटकर अलग हो जाते हैं बच्चे मरकर जहन्नुम चले जाते हैं। उसकी सारी की सारी व्यवस्था गड़बड़ा जाती है और देखने वाले कहते हैं कि यह कबूतर कैसा बेअकल है, कैसा बेवकूफ है?
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्।
देवियो, भाइयो! क्रिया और विचार इन दोनों बातों का समन्वय अगर आप कर डालें, तो चमत्कार पैदा हो जाएगा। बया नाम का एक पक्षी होता है। जब वह अपना घोंसला बनाता है, तो कैसी तबियत से बनाता है, कैसे मन से बनाता है कि छोटे-छोटे तिनकों को एक-एक चुनकर के लाता है। उन्हें गूँथकर ऐसा बढ़िया घोंसला बना देता है कि क्या मजाल है कि अंडा हवा के झोंके से तबाह हो जाए? क्या मजाल है कि कौआ उसमें झपट्टा मार दे? उसमें उसके बच्चे मौज के साथ बैठे देखते रहते हैं। कोई आदमी सड़क पर से जब निकलता है, तो उस घोंसले को देखता रह जाता है कि यह बया का घोंसला है। कितना शानदार घोंसला है। हर जगह से उसकी प्रशंसा होती है। बया स्वयं प्रसन्न रहती हैं और देखने वालों की तो तबियत बाग बाग हो जाती है।
मित्रो! क्या विशेषता है बया में? कोई विशेषता नहीं है बेटे, मन लगाकर कोई भी काम करो, तो शानदार होता हैं। मन लगाकर काम नहीं किया (जाए तो बेटे उसका सत्यानाश हो जाता है। एक पक्षी का नाम है -कबूतर। कबूतर बया की तुलना में चार पाँच गुना बड़ा होता है। इतना बड़ा होता है, पर घोंसला कैसे बनाता है? बया का घोंसला जग आप देखना और कबूतर का भी घोंसला देखना। वह बड़ी-बड़ी लकड़ी बीनकर ले आता है जोर एक इधर रख दी, एक उधर रख दी और एक किधर को रख लेता है और उसमें ही अपने अंडे देने लगता है। उस पर ही बैठा रहता है। हवा क। झोंका आता है बस घोंसला गिरता है नीचे और कबूतर गिरता है ऊपर। अंडे फूटकर अलग हो जाते हैं बच्चे मरकर जहन्नुम चले जाते हैं। उसकी सारी की सारी व्यवस्था गड़बड़ा जाती है और देखने वाले कहते हैं कि यह कबूतर कैसा बेअकल है, कैसा बेवकूफ है?

