गायत्री के चौबीस अक्षर।
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गायत्री मंत्र के 24 अक्षरों के साथ अनेक कारण जुड़े हुए है। इसके साथ कई चौबीस रहस्यों का सम्मिलन है। नीचे कुछ ऐसे ही चौबीस अक्षरों के हेतु बताये जाते है−
(1) संसार की समस्त विद्याओं के भण्डार 24 महाग्रन्थ है। 4 वेद, 4 उपवेद 4 ब्राह्मण 6 दर्शन और 6 वेदांग इस प्रकार चौबीस हुए। तत्वज्ञों का ऐसा भी मत है कि गायत्री के एक 2 अक्षर से यह एक एक ग्रन्थ बना है। गायत्री के गर्भ में इन 24 ग्रंथों का मर्म छिपा हुआ है। गायत्री का मर्म इन 24 ग्रंथों में वर्णित है जो गायत्री का विस्तृत रहस्य जानना चाहे वे इन 24 महाग्रन्थों को पढ़कर उकसा मर्म समझ सकते है।
(2) हृदय जीवन का और ब्रह्मरंध्र ईश्वर का स्थान है। हृदय से ब्रह्मरंध्र 24 अंगुल देर है। एक एक अखर से एक एक अंगुल की दूरी को करके जीव गायत्री द्वारा ब्रह्म में लीन हो सकता है ऐसा योगी लोग कहते है। गायत्री के 24 अक्षर यह देते है संकेत करते है कि ईश्वर जीव से, हृदय मस्तिष्क से 24 अंगुल दूर है। हृदय में ईश्वर रहता है और मस्तिष्क में मन। अपने मन को ईश्वर के अर्पण कर दो तो कल्याण की प्राप्ति हो जाएगी।
(3) गायत्री के तीन विराम होते है, शरीर के भी तीन भाग है/प्रत्येक भाग के अंतर्गत आठ अंग होते है इस प्रकार शरीर रूपी गायत्री के 24 अक्षर हो जाते है। (अ) शिर, नेत्र, कर्ण प्राण =8 अक्षर (अ) मुख, हाथ, पैर, नाक =8 अक्षर (स) कण्ठ, त्वचा, गुदा, शिश्न =8 अक्षर। यह सब मिलकर 24 हुए गायत्री 1 के दो दो अक्षरों से इन बारह प्रमुख अंगों की रचना हुई है। यह स्वभावतः पवित्र है इन्हें सदा पवित्र ही रखने का प्रयत्न करना चाहिए।
(4) शरीर की सुषुम्ना नाड़ी में 24 कशेरुकाएं है (ग्रीवा में 7, पीठ में 12, कमर में 5=2) से कशेरुकाएं प्राणों का, मातृकाओं का ग्रन्थियों का और चक्रों का पोषण करने वाली है। यह पोषण गायत्री कहा जाता है और इन 24 कशेरुकाओं को 24 अक्षर कहते है।
(5) शरीर में प्राण सूत्र 24 है गायत्री में 24 अक्षर है। गायत्री का एक एक अक्षर सूक्ष्म शरीर के लिए उतना ही महत्व पूर्ण है जितना कि स्थूल शरीर के लिए ये 24 प्राण सूत्र है।
(6) शरीर में 5 ज्ञानेन्द्रियाँ 5 कर्मेंद्रियां 5 प्राण, 5 तत्व और 4 अन्तःकरण है। इन 24 के द्वारा ही शरीर जीवित रहता है। हमारे आध्यात्मिक शरीर में गायत्री की 24 शक्तियाँ इसी प्रकार ओत प्रोत है।
(7) गायत्री साधना से अष्ट सिद्धि, नव निद्धि और सात शुभ गतियों की प्राप्ति होती है यह 24 महीन लाभ गायत्री के अंतर्गत है।
(8) इस मंत्र में 24 ऋषियों और 24 देवताओं की शक्तियों की शक्तियाँ सन्निहित है (देखिए−गायत्री तंत्र)
(9) साँख्य दर्शन में वर्णित 24 तत्वों से सृष्टि का क्रम चलता है। उन 24 का प्रतिनिधित्व गायत्री के 24 अक्षर करते है।
(1) शरीर में प्रधानतः 24 अंग है। उसके प्रत्येक तृतीयाँश में भी 24−24 टुकड़े है। शरीर के तीन भाग है। शिर, धड़ और पैर। इन तीनों भागों में से प्रत्येक में 24−24 अवयव है। इसी प्रकार सूक्ष्म शरीर में 24 तत्व है। इन दोनों शरीर के अवयवों की सृष्टि 24 अक्षर वाली गायत्री से होती है। ब्रह्म पुरुष के शरीर के 24 भाग गायत्री के 24 अक्षर है।
इस प्रकार के और भी अनेकों कारण है जो गायत्री के 24 अक्षरों का हेतु है। प्रत्येक अक्षर के पीछे बड़े बड़े महान् तत्व है जिसका विस्तृत वर्णन अन्यत्र करेंगे।
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