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शाश्वत सौन्दर्य का बोध
पूजा का मर्म
अपनी प्रतिभा को यूँ बरबाद तो न करें
समग्र परिवतर्न चेतना-स्तर पर ही सम्भव है
प्रकृति की पाठशाला में ब्रह्म-विद्या का पाठ
संगठित जातियाँ चट्टान की तरह मजबूत होती हैं
पुस्तकों की प्रयोगशाला में महापुरुष
मनुष्य अपने भाग्य का निर्माता आप है
ज्योति-अवतरण की साधना और उसका विज्ञान
श्रद्धा शक्ति है विश्वास शिव
देवसत्ताएँ-चैतन्य ऊर्जाएँ
सूक्ष्म शरीर-प्रकाश शरीर
बनाने वाले के हाथ
स्वप्नों के झरोखे से अन्तःस्थिति की झाँकी
कानून न्याय की आत्मा की हत्या न करे
कलाकार को पहचान
आखिर क्यों प्रकृति कुपित है?
मनुष्य से कहीं अधिक संवेदनशील है वृक्ष-वनस्पति
कैसा है आपका अभ्युदय?
क्रोधित होने से पहले यह भी सोचें
पूर्वाग्रह का दुराग्रह न पालें
विज्ञान भी कहता है ब्रह्म सत्यं जगत्माया
परम पूज्य गुरुदेव की अमृतवाणी- विषय परिस्थितियों में नवयुग की तैयारी
नवरात्रि उपासना से जगेगी सुप्त चेतना
अपनों से अपनी बात- महाकाल के गतिचक्र की एक झलक झाँकी
शान्तिकुंज के इस आँगन में (कविता) -माया वर्मा
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Year 1996 - October
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