• News
  • Blogs
  • Gurukulam
English हिंदी
×

My Notes


  • TOC
    • अन्ध-विश्वास का अभिशाप
    • हमारे समाज का कलंक अन्ध-विश्वास
    • अन्ध-विश्वास का अज्ञान
    • अन्ध-विश्वास का इन्द्रजाल
    • यह भ्रम जंजाल कब तक चलेगा?
    • अन्ध-विश्वास और ठगी की व्याधि
    • अन्ध-विश्वास जो भी अनर्थ कर गुजरे कम है
    • धोबी ने बालक की बलि दी
    • साधु बाबाओं के कुचक्र में पिसी अबोध महिला
    • ज्योतिष पर विश्वास ले डूबा
    • धूर्त कापालिक पकड़ा गया
    • अन्ध-विश्वास के कारण फांसी की नौवत
    • नर-बलि की यह घृणित घटनाएं
    • हम तो लुट गये लोभ में
    • सन्तान के लालची ठगों के शिकार
    • अन्ध-विश्वास शत्रुता का कारण बना
    • जन्तर-मन्तर के चक्कर में बालक की हत्या की गई
    • मुर्दा जीवित न हुआ, पैसा भी गया
    • संतान के लिए शिशु-हत्या
    • सन्तान के लिए बारह बार ग्राम—दाह
    • काली मां के दर्शन कराने वाले जेल में
    • गन्दा गड्ढा देवी का कुण्ड बन गया
    • झाड़ फूंक में लड़की गायब
    • सिद्धि की इस मूढ़ता से कोरे भले
    • अन्ध-विश्वास ने अनेकों की जान ली
    • समाधि का चमत्कार
    • गढ़े खजाने का लोभ ले डूबा
    • साधु बाबा के वेष में ठग?
    • पुत्र पाने के चक्कर में जान चली गई
    • अन्ध-विश्वासिनी ने बालिका को मार डाला
    • सिर पर देवता आने का ढोंग
    • अन्ध-विश्वास से हानि ही हानि
    • अन्ध-विश्वास से बचने में ही भलाई
    • सजीव गुड़िया का विवाह
    • यह बुद्धि रचनात्मक कार्यों में लगती तो
    • चोर—‘जिन्न’ बन बैठा
    • इन मूढ़ताओं का अन्त होना ही चाहिए
    • अन्ध-विश्वास के प्रेरित मूर्खतापूर्ण कृत्य
    • ज्योतिष के नाम पर ठगबाजी और षड़यंत्र
    • अज्ञान और अन्ध-विश्वास
    • ढोंगियों का बढ़ा हुआ मायाजाल
    • यह अन्धविश्वास न जाने कब तक जिएगा?
    • अन्धविश्वास—भारत की एक भयानक बीमारी
    • भला इस मूर्खता का भी कुछ ठिकाना है
    • साहस द्वारा अन्धविश्वास का भण्डाफोड़
    • आप ऐसे अन्ध-विश्वासों से बच कर रहें
    • अन्धविश्वासों की उलझन अहित ही करेगी
    • इन अन्ध-विश्वासों का अन्त किया जाय
    • मिथ्या मान्यताओं, भ्रान्त धारणाओं से क्या लाभ?
  • My Note
  • Books
    • SPIRITUALITY
    • Meditation
    • EMOTIONS
    • AMRITVANI
    • PERSONAL TRANSFORMATION
    • SOCIAL IMPROVEMENT
    • SELF HELP
    • INDIAN CULTURE
    • SCIENCE AND SPIRITUALITY
    • GAYATRI
    • LIFE MANAGEMENT
    • PERSONALITY REFINEMENT
    • UPASANA SADHANA
    • CONSTRUCTING ERA
    • STRESS MANAGEMENT
    • HEALTH AND FITNESS
    • FAMILY RELATIONSHIPS
    • TEEN AND STUDENTS
    • ART OF LIVING
    • INDIAN CULTURE PHILOSOPHY
    • THOUGHT REVOLUTION
    • TRANSFORMING ERA
    • PEACE AND HAPPINESS
    • INNER POTENTIALS
    • STUDENT LIFE
    • SCIENTIFIC SPIRITUALITY
    • HUMAN DIGNITY
    • WILL POWER MIND POWER
    • SCIENCE AND RELIGION
    • WOMEN EMPOWERMENT
  • Akhandjyoti
  • Login





Books - अंधविश्वास को उखाड़ फेंकिये

Media: TEXT
Language: HINDI
TEXT


अन्ध-विश्वास का अभिशाप

Listen online

View page note

Please go to your device settings and ensure that the Text-to-Speech engine is configured properly. Download the language data for Hindi or any other languages you prefer for the best experience.
×

Add Note


2 Last
हिन्दू समाज की बीमारियों में अन्ध-विश्वास की बीमारी बहुत भयानक है। अन्य बीमारियां तो मनुष्य के शरीर तक ही सीमित रहती हैं और सावधानी पूर्वक उपचार किए जाने पर पीछा छोड़ देती हैं। किन्तु अन्ध-विश्वास की बीमारी मनुष्य के मन, बुद्धि और आत्मा तक को ग्रास कर इतना जड़ बना देती है कि समझाना तो क्या उसके मिथ्यापन और हानियों को प्रत्यक्ष देखकर और अनुभव करके भी उसे छोड़ने की हिम्मत नहीं होती। दुर्भाग्य तो यह है कि प्रत्यक्ष हानि उठाकर भी लोग अपने अन्धविश्वास को दोषी न मानकर अपनी ही किसी भूलचूक की कल्पना कर लेते हैं और उसे छोड़ने में किसी नये तथा बड़े अनिष्ट की आशंका करने लगते हैं। सोचने लगते हैं कि जब मानते हैं तब तो इतनी हानि हुई, न मानेंगे तो न जाने क्या हो जायेगा।
मनुष्य अपने विश्वासों का गुलाम होता है और उनकी प्रेरणा पर चलकर खाई-खन्दक तक में गिरने को तैयार हो जाता है। इसका कारण यह है कि किसी बात पर विश्वास करता हुआ मनुष्य जब एक ही दिशा में सोचता रहता है तब वह विश्वास उसका संस्कार बन जाता है, जिसके प्रतिकूल सोचने में पीड़ा और अनुकूल सोचने में सुख मिलता है।
ऐसा भी नहीं कि केवल अशिक्षित जनसाधारण ही इसके शिकार बनते हों और शिक्षित जन विशिष्ट इसके अपवाद हों। अति विश्वासी होने पर किसी का ऊंचा विश्वास भी अन्ध-विश्वास का रूप धारण कर लेता है। इसका एक बड़ा प्रमाण उस समय के इतिहास में मिलता है जब मोहम्मद गजनवी ने गुजरात के सोमनाथ मन्दिर पर आक्रमण किया था।
उस समय सोमनाथ के मन्दिर के मुख्य अधिष्ठाता और पुजारी ‘गंग सर्वज्ञ’ थे। गंग सर्वज्ञ कोई औपन्यासिक पात्र नहीं ऐतिहासिक व्यक्तित्व हैं और उस समय के प्रकाण्ड विद्वानों में से थे। सम्पूर्ण भारत का जनसाधारण ही नहीं अन्य विद्वानों समेत सारे राज महाराजा उन्हें साक्षात् शंकर के रूप में मानकर पूजते थे। उनके व्यक्तित्व की महान् महिमा था और उनके वाक्य वेदवाक्य माने जाते थे, जैसा कि उनकी सर्वज्ञ उपाधि से विदित है।
किन्तु वे गजनवी के हमले की सूचना से लेकर मन्दिर लुट जाने और भगवान् सोमनाथ की मूर्ति के खण्ड-खण्ड हो जाने तक यही कहते रहे और विश्वास दिलाते रहे कि युद्ध और रक्तपात की आवश्यकता ही न पड़ेगी। समय आने पर भगवान् शंकर स्वयं प्रकट होंगे और अपना तीसरा नेत्र खोल कर म्लेच्छों को भस्म कर देंगे। जिसके फलस्वरूप प्रतिरोध का प्रयत्न शिथिल पड़ गया और लोग उस चमत्कार को देखने के लिए प्रतीक्षा करने लगे। गजनवी आया और गाजी बनकर चला गया। किन्तु भगवान् शंकर न प्रकट हुए और न उन्होंने अपनी नेत्र-वह्नि से म्लेक्षों को भस्म किया।
यह बात सही है कि अपने इस कथन से गंग सर्वज्ञ का उद्देश्य देश के पथ-भ्रान्त करने का नहीं था। यह उनका अति विश्वास था, जो अन्धविश्वास बनकर बोला था और वह लोगों का अन्धविश्वास था जो वे उनके कथनानुसार चमत्कार देखने की प्रतीक्षा में शिथिल उद्योग हो बैठे।
ऐसे न जाने कितने अन्धविश्वास और उनसे उत्पन्न अपशकुन इतिहास में पाये जाते हैं जिनके कारण न जाने कितने धीर-वीर योद्धा और राजा शिथिल साहस होकर हारे हैं। तलवार खुल पड़ना, कटार निकल पड़ना, जीन खिसक जाना, धनुष उतर जाना, पगड़ी बिगड़ जाना, मुकुट मुड़ जाना जैसी नगण्य बातें पराजय की सूचक बनकर विकृत विश्वासी राजा और योद्धाओं के आत्म-विश्वास में दरार का कारण बनी हैं, जिससे इतिहास की धारायें ही मुड़ गई हैं। यह सब उनके अन्धविश्वास के सिवाय और क्या था?
मोहम्मद गोरी की सेना के सामने गायों की पंक्ति देखकर पृथ्वीराज का किंकर्तव्य-विमूढ़ होकर वार-विरत हो जाना एक आदर्श अन्धविश्वास ही था जिसने भारत का भाग्य ही अन्धकारपूर्ण बना दिया।
लाट झुक जाने, मीनार मुड़ जाने, कंगूरा उखड़ जाने और गुम्बद दरक जाने को हुकूमत उखड़ जाने का संकेत मानना बादशाहों का अन्धविश्वास ही था जिसने उन्हें बड़ी-बड़ी राजनीतिक हानियां पहुंचाई हैं।
इस प्रकार अन्धविश्वास के विषय में जब ऐसी उच्च स्थिति के लोगों का यह हाल रहा है तब अशिक्षित जनसाधारण के विषय में क्या कहा जाये। हवा का रुख, बादलों का रंग, वर्षा की बूंदें, फूलों का खिलना, पौधों का मुरझाना, पक्षियों का बोलना, श्वांस की गति, अंगों का स्फुरण, जूतों का उलटना, वस्त्रों का पलटना, पानी का लुढ़कना, ग्रास का गिरना, आग का चिटखना, लकड़ी का फुरफुराना, वैदी का गिरना, चूड़ी का फूटना, जूड़े का खुलना, बालों का टूटना अन्धविश्वास पूर्ण शुभ शुभ का द्योतक बना हुआ जन-जीवन का एक-एक क्षण घेरे हुए हैं।
हिन्दू–समाज का छोटे से लेकर बड़े तक शायद ही कोई ऐसा काम अथवा क्रिया हो जिसमें शुभ अशुभ का विचार न जुड़ा हो और जिसके साथ किसी अन्ध-विश्वास का सम्बन्ध न हो। उठने से लेकर सोने तक का सारा क्रिया-कलाप अन्ध-विश्वासों एवं शुभा-शुभ की श्रृंखला बनी हुई है। कौन पैर पहले जमीन पर रखें, जगते ही हथेली देखना, रेखायें चूमना, और को देखने से पहले दर्पण देखना आदि सब किसी न किसी अन्धविश्वास पर आधारित हैं। घर-घाट, हाट-बाट, उठने-बैठने, चलने-फिरने और यात्रा आदि करने में अन्धविश्वास पूर्ण शुभा-शुभ विचार भरे पड़े हैं। आदमियों का मिलना, पशुओं का दीखना, उनका खांसना, छींकना और आवाज करना, सूंघना, मुंह उठाना, रास्ता काटना, दिशा बदलना, दांयें-बांयें अथवा आगे-पीछे चलना न जाने कितने प्रकार के अन्धविश्वासों के जननी जनक है।
घरों में बहू, बेटियों का एक-एक कदम अन्धविश्वासों का बन्दी हुआ है। कहां पर बैठें, किस ओर पैर करें, किस ओर सिर करें यह सब अन्धविश्वासों से भरे पड़े हैं।
दुकान का कौन-सा किवाड़ पहले खोला जाये, कौन-सा पैर पहले रखा जाये, किस ग्राहक के साथ कौन सी चीज पहले बेचकर ‘बोहनी’ की जाये, कितने पैसों की बेची जाय, कौन-सी तराजू के किस पलड़े में रखकर तोली जाये आदि नाचीज बातें और पलड़े का उलट जाना, जोत का चढ़ जाना, डोरी का टूट जाना, बांट का गिर जाना, डन्डी का टूट जाना आदि न जाने कितनी क्या कोई भी तो ऐसी बात नहीं है जिसके साथ कोई  न कोई अन्धविश्वास न जुड़ा हो।
इस प्रकार यदि ध्यान से देखा और भारतीय जनता का गहराई से अध्ययन किया जाय तो पता चलेगा कि आवाल-वृद्ध स्त्री-पुरुषों की प्रत्येक साधारण से साधारण क्रिया तक में कोई न कोई अन्धविश्वास निहित है। इसके अतिरिक्त न जाने कितने टोने-टोटके, भूत-प्रेत, रोग-दोष अन्धविश्वास के आधार बने हुए हैं। इतना ही नहीं कि यह मूढ़ता पूर्ण बातें केवल कहने-सुनने तक ही सीमित हों बल्कि इनके आधार पर हानि-लाभ की बड़ी-बड़ी सम्भावनायें निश्चित करके उनके अनुसार जीवन चलाया जाता है।
यह सब कुछ और कुछ नहीं केवल अशिक्षा एवं अविद्यापूर्ण मूर्खता है। यद्यपि इन कल्पित अन्धविश्वासों के आधार पर मनुष्य को हानि-लाभ, सुख-दुःख, सफलता असफलता मिलती नहीं, वह मिलती है यथार्थ परिस्थितियों और परिश्रम, पुरुषार्थ एवं प्रयत्न के आधार पर, तभी भी यह देखते, सुनते और अनुभव करते हुए भारतवासी और हिन्दू समाज अपने अन्धविश्वासों के वशीभूत हुए बिना रहता ही नहीं। उसकी यह समझ में न जाने क्यों नहीं आता कि इन बातों के घटने से ही यदि हानि-लाभ अथवा सफलता असफलता मिलती तो प्रयत्न एवं पुरुषार्थ, कर्म और कर्तव्य का कोई मूल्य महत्व ही नहीं रह जाता।
समाज से इस मूढ़ता को दूर करने का केवल एक ही उपाय है शिक्षा और इन अन्धविश्वासों के विरुद्ध प्रचार। जो भी समझदार शिक्षित जिस अन्धविश्वास को जहां देखे उसके विरुद्ध अपने आचरण का उदाहरण प्रस्तुत करे। आज हम सब क्या वैयक्तिक और क्या सामूहिक रूप में दोनों तरह से अन्धविश्वासों का भण्डा-फोड़ करने और यह अन्धकार फैलाने वालों के विरुद्ध अभियान करने में जरा भी न हिचकिचायें।
अन्धविश्वासों का धर्म से दूर का भी कोई सम्बन्ध नहीं है। इन्हें हर प्रकार से उखाड़ फेंकने में ही समाज और राष्ट्र का हित है।
2 Last


Other Version of this book



अंधविश्वास को उखाड़ फेंकिये
Type: TEXT
Language: HINDI
...


Releted Books



बाल विवाह की भयंकरता से समाज को बचाया जाय
Type: SCAN
Language: HINDI
...

मूढ़ मान्यताओं की भूलभुलैयों में भटकें नहीं
Type: SCAN
Language: HINDI
...

मृतक भोज की क्या आवश्यकता ?
Type: SCAN
Language: HINDI
...

अनाचार से कैसे निपटे ?
Type: SCAN
Language: HINDI
...

anachar se kaise nipte
Type: TEXT
Language: HINDI
...

अवांछनीय प्रचलनों को उलटने की आवश्यकता
Type: SCAN
Language: HINDI
...

अन्धविश्वास से लाभ कुछ नहीं हानि अपार हैं
Type: SCAN
Language: HINDI
...

અંધવિશ્વાસુ નહી વિવેકશીલ બનો
Type: SCAN
Language: GUJRATI
...

आमची सात आंदोलने
Type: SCAN
Language: EN
...

અમારા સાત આંદોલન
Type: SCAN
Language: GUJRATI
...

हमारे सप्त आंदोलन
Type: SCAN
Language: EN
...

दहेज दानव से सामाजिक लड़ाई लड़ी जाय
Type: SCAN
Language: HINDI
...

हरिजन उत्कर्ष के लिए बड़े कदम उठे
Type: SCAN
Language: HINDI
...

आमची सात आंदोलने
Type: SCAN
Language: EN
...

અમારા સાત આંદોલન
Type: SCAN
Language: GUJRATI
...

हमारे सप्त आंदोलन
Type: SCAN
Language: EN
...

पशुबलि-हिन्दू धर्म एवं विश्व मानवता पर एक कलंक
Type: SCAN
Language: HINDI
...

मदिरापान के अभिशाप
Type: SCAN
Language: HINDI
...

દહેજ એક કુરિવાજ
Type: SCAN
Language: GUJRATI
...

દહેજ સમાજ નું ગાંડપણ
Type: SCAN
Language: EN
...

शिष्ट बनें सज्जन कहलायें
Type: SCAN
Language: HINDI
...

शिष्ट बनें सज्जन कहलायें
Type: TEXT
Language: HINDI
...

તમાકુ: એક ભયાનક વ્યસન
Type: SCAN
Language: GUJRATI
...

दहेज दानव से सामाजिक लड़ाई लड़ी जाय
Type: SCAN
Language: HINDI
...

Articles of Books

  • अन्ध-विश्वास का अभिशाप
  • हमारे समाज का कलंक अन्ध-विश्वास
  • अन्ध-विश्वास का अज्ञान
  • अन्ध-विश्वास का इन्द्रजाल
  • यह भ्रम जंजाल कब तक चलेगा?
  • अन्ध-विश्वास और ठगी की व्याधि
  • अन्ध-विश्वास जो भी अनर्थ कर गुजरे कम है
  • धोबी ने बालक की बलि दी
  • साधु बाबाओं के कुचक्र में पिसी अबोध महिला
  • ज्योतिष पर विश्वास ले डूबा
  • धूर्त कापालिक पकड़ा गया
  • अन्ध-विश्वास के कारण फांसी की नौवत
  • नर-बलि की यह घृणित घटनाएं
  • हम तो लुट गये लोभ में
  • सन्तान के लालची ठगों के शिकार
  • अन्ध-विश्वास शत्रुता का कारण बना
  • जन्तर-मन्तर के चक्कर में बालक की हत्या की गई
  • मुर्दा जीवित न हुआ, पैसा भी गया
  • संतान के लिए शिशु-हत्या
  • सन्तान के लिए बारह बार ग्राम—दाह
  • काली मां के दर्शन कराने वाले जेल में
  • गन्दा गड्ढा देवी का कुण्ड बन गया
  • झाड़ फूंक में लड़की गायब
  • सिद्धि की इस मूढ़ता से कोरे भले
  • अन्ध-विश्वास ने अनेकों की जान ली
  • समाधि का चमत्कार
  • गढ़े खजाने का लोभ ले डूबा
  • साधु बाबा के वेष में ठग?
  • पुत्र पाने के चक्कर में जान चली गई
  • अन्ध-विश्वासिनी ने बालिका को मार डाला
  • सिर पर देवता आने का ढोंग
  • अन्ध-विश्वास से हानि ही हानि
  • अन्ध-विश्वास से बचने में ही भलाई
  • सजीव गुड़िया का विवाह
  • यह बुद्धि रचनात्मक कार्यों में लगती तो
  • चोर—‘जिन्न’ बन बैठा
  • इन मूढ़ताओं का अन्त होना ही चाहिए
  • अन्ध-विश्वास के प्रेरित मूर्खतापूर्ण कृत्य
  • ज्योतिष के नाम पर ठगबाजी और षड़यंत्र
  • अज्ञान और अन्ध-विश्वास
  • ढोंगियों का बढ़ा हुआ मायाजाल
  • यह अन्धविश्वास न जाने कब तक जिएगा?
  • अन्धविश्वास—भारत की एक भयानक बीमारी
  • भला इस मूर्खता का भी कुछ ठिकाना है
  • साहस द्वारा अन्धविश्वास का भण्डाफोड़
  • आप ऐसे अन्ध-विश्वासों से बच कर रहें
  • अन्धविश्वासों की उलझन अहित ही करेगी
  • इन अन्ध-विश्वासों का अन्त किया जाय
  • मिथ्या मान्यताओं, भ्रान्त धारणाओं से क्या लाभ?
About Shantikunj

Shantikunj has emerged over the years as a unique center and fountain-head of a global movement of Yug Nirman Yojna (Movement for the Reconstruction of the Era) for moral-spiritual regeneration in the light of hoary Indian heritage.

Navigation Links
  • Home
  • Literature
  • News and Activities
  • Quotes and Thoughts
  • Videos and more
  • Audio
  • Join Us
  • Contact
Write to us

Click below and write to us your commenct and input.

Go

Copyright © SRI VEDMATA GAYATRI TRUST (TMD). All rights reserved. | Design by IT Cell Shantikunj