Monday 05, October 2026
गायत्रीतीर्थ शांतिकुंज, नित्य दर्शन
आज का सद्चिंतन (बोर्ड)
आज का सद्वाक्य
नित्य शांतिकुंज वीडियो दर्शन
!! शांतिकुंज दर्शन 05 October 2026 !! गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार !!
अमृतवाणी:- गुरुदेव ने मुफ्तखोरी पर क्यों दी चेतावनी -पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य
परम् पूज्य गुरुदेव का अमृत संदेश
मुझे वह छोटी कहानी याद आई मुझे वह छोटी कहानी याद आई कि जब एक छोटा सा था मच्छर एक छोटा मच्छर था एक मच्छर था और शहर की मक्खियों के पास गया और शहद की मक्खियों से कहने लगा शहद की मक्खियों हां मैं संगीताचार्य हूं उन्होंने कहा अच्छा मैं तुम्हारे बच्चों को संगीत सिखाऊंगा और मैं तुम्हारे बच्चों को दादरा सिखाऊंगा ठुमरी सिखाऊंगा कव्वाली सिखाऊंगा गजल सिखाऊंगा और तुम्हारे बच्चों को शंभू कव्वाल बना दूंगा कहने लगा मच्छर मक्खियों ने शहद की मक्खियों ने कहा भाई क्या बात है हमारे बच्चों को शंभू कव्वाल काहे के लिए बनाते हो तुम लता मंगेशकर तुम्हारी लड़कियों को सबको बना दूंगा कहने लगा मच्छर उन्होंने कहा भाई लता मंगेशकर हमारी लड़कियों को बनता है शंभू कव्वाल लड़कों को बनता है आखिर क्या किस्सा क्या है नहीं मैं तो सिखाऊंगा मैं तो सिखाने आपको आया हूं सिखाने आपको आया हूं वह रानी मक्खी के पास मक्खियाँ गई की भाई वह एक मच्छर बैठा हुआ है तो क्या कहता है यह कहता है कि मैं तो सब तुम्हारे शहद की मक्खियों को संगीत की विद्यार्थी बनाऊंगा और संगीत में एमए कराऊंगा और हर लड़की को लता मंगेशकर बनाऊंगा और हर एक हर एक मक्खे को अशोक कुमार बनाऊंगा अशोक कुमार बनाऊंगा रानी मक्खी थोड़ा गंभीर हो गई उन्होंने कहा अच्छा एक बात यह पूछ करके आओ कि वह क्यों कहता है क्या मांगता है क्यों हमको सिखाता है क्या वजह क्या है उसकी नियत पूछ करके आओ मक्खियाँ गई उन्होंने कहा हमारी रानी मक्खी ने यह पूछा कि आप क्यों हमको सिखाने आए हैं मच्छर ने कहा मैं इसलिए सिखाने आया हूं की बात यह है कि मुझे बहुत मेहनत करनी पड़ती है बहुत भाग दौड़ करनी पड़ती है और तब मैं अपना खाना खुराक इकट्ठी करता हूं और कीचड़ में बैठा रहता हूं तो मुझे गंदगी खानी पड़ती है और यह तो ठीक नहीं है और मैं तो चाहता था तुम्हारे यहां शहद पैदा होता है तुम मुझे शहद खिला दिया करो और मैं तुम्हें गाना सिखाया इसीलिए आये हो यहाँ मैं तो इसीलिए आया हूं रानी मक्खी ने अपनी नौकरानियों से कहा अच्छा यह ऐसे कहो संगीताचार्य महोदय से विष्णु दिगंबर से मने कर दो चुपचाप यहां से चले जाएं तो वह बेचारे रानी मक्खियों ने कह दिया कि आपसे नहीं सीखना चाहती तो उसने पूछा क्यों क्या बात है क्यों नहीं सीखना चाहती उन्होंने कहा हमारी रानी मक्खी ने यह कहा है कि जिस संगीत को सीख करके सीख करके और और यह मच्छर हमारे दरवाजे पर भीख मांगने के लिए आया और हमारी मक्खियाँ उस संगीत को सीखेंगी तो दरवाजे दरवाजे पर भीख मांगने जाएंगी और यह परिश्रम नहीं करेंगे और यह उद्योग नहीं करेंगी और यह मेहनत नहीं करेंगी यह मेहनत करना बंद कर देगी और पुरुसार्थ करना बंद कर देगी जो मशक्कत में दिन रात लगी रहती हैं बंद कर देंगी बस यह भी कोई ऐसा सस्ता तरीका ढूंढेंगी कहीं संगीत सिखाया होगा खट से फोकट का माल ले आवें फोकट का माल पाने की इच्छा फोकट का माल पाने की इच्छा मित्रों हजारों लोगों में पाई जाती है जब ऐसी इच्छा पाई जाए तब यह मान लीजिए कि यहां आध्यात्मिकता की निशानियां नहीं हैं और यहां से आध्यात्मिकता बहुत दूर है
पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य
अखण्ड-ज्योति से
| Newer Post | Home | Older Post |