Monday 21, September 2026
गायत्रीतीर्थ शांतिकुंज, नित्य दर्शन
आज का सद्चिंतन (बोर्ड)
आज का सद्वाक्य
नित्य शांतिकुंज वीडियो दर्शन
!! शांतिकुंज दर्शन 21 September 2026 !! गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार !!
अमृतवाणी:- एक अनुभव ने मुझे भगवान से मिला दिया! -पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य
परम् पूज्य गुरुदेव का अमृत संदेश
मित्रों, मैंने अपनी आंखों से खोल करके देखा। एक बार मेरी अज्ञान की आंखें थी। जब मुझे भेड़ और बकरियों के तरीके से गंदे और नाज मनुष्य स्वार्थी और संकीर्ण मनुष्य दिखाई पड़ा करते थे। लेकिन जब मुझे आत्मज्ञान का एक निशा और एक खुार आया। तो मैंने सारे विश्व को देखा और मैंने देखा ये सारे के सारे प्राणी सारे का सारा ये विश्व भगवान का विशुद्ध स्वरूप है। और इसका हर रोम और हर रोम। हर रोम ये वृक्षों के तरीके से हर इसका अंग प्रत्यंग प्राणियों की तरीके से दिखाई पड़ता रहता है। मेरी आंख से विराट ब्रह्म दिखाई पड़ने लगा और मैंने देखा यही मेरा प्रियतम है और और यही मेरा आराध्य और यही मेरा इष्ट देव है। इष्ट देव है। बहुत दिन पहले जी आता था कि दुनिया में ऐसे खूब लोगों की हयामत बनानी चाहिए और अपनी जेब भर लेनी चाहिए। मैंने कहा नहीं अपने प्रियतम की मैं हयामत नहीं बना सकता और और प्रियतम को दुखी रख कर के मैं सुखी नहीं रह सकता। भला कोई औरत ऐसी भी दुनिया में होती है जो अब जो अपने पति के खाने की चीज़ों को चुरा लिया करें। पति का खाने में से घी चुरा लिया करें। तो पति के खाने में साग चुरा लिया करें। रोटी खा लिया करें और पति भूखा रह जाए और खुद जलेबी खाया करे। ऐसी कोई बात देखी आपने? ऐसी वेश्या हो सकती है और नहीं। और वो भगवान का भक्त कैसा होगा? जो जो उसका अपने इतना उसका इसलिए दुखों में डूबा हुआ पड़ा रहे। अज्ञान में डूबा हुआ पड़ा रहे। और स्वयं अपनी सुविधाओं के अवर्धन करने के लिए अपनी ख्वाहिशों और तमन्ना और इच्छा और वासना को बढ़ाने के लिए काम करता है। ऐसी कोई वफादार औरत नहीं हो सकती। मेरे मन में आया और मेरी आंखें कपाट की तरीके से खुल गई। खुल गई ये सारा विश्व मानव मुझे भगवान दिखाई पड़ने लगा और रामायण की वो चौपाई का मुझे साक्षात्कार हो गया जो मैंने हजारों बार पढ़ी थी। लेकिन जिसका मतलब जरा भी मैं नहीं समझ सका था। रामायण का रहस्य और रामायण का सार तुलसीदास जी ने एक छोटी चौपाई में जमा करके रखा है। और वो चौपाई है सिया राममय सब जग जा। करो प्रणाम जोर युग पानी सियाराम मय सब जग जानी करो प्रणाम जोर युग पानी भगवान के साक्षात्कार का असली स्वरूप अगर किसी को भगवान देखने का हो तो इसी एक चौपाई के अंदर वो सारा का सारा चाबी और हस्त भरा हुआ पड़ा है जहां कोई आदमी चाहे तो भगवान को देख सकता है ये सारा का सारा विश्व इसमें पीड़ित मानवता के रूप में कला आती हुई अंता प्रेरणा और ये इस विश्व में फैली हुई कुरूपता और इस विश्व में फैली हुई गरीबी ने मुझे बुलाकर के कहा भगवान उससे मांगता है और मैं भगवान को देने के लिए तैयार हो गया। भगवान को मैंने देखा और मुझे भगवान का साक्षात्कार हो गया। पहले दिन का पहला चरण मुझे सिखाया गया। और मित्रों आत्म साक्षात्कार मुझे हो गया।
पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य
अखण्ड-ज्योति से
| Newer Post | Home | Older Post |
