Tuesday 15, September 2026
गायत्रीतीर्थ शांतिकुंज, नित्य दर्शन
आज का सद्चिंतन (बोर्ड)
आज का सद्वाक्य
नित्य शांतिकुंज वीडियो दर्शन
!! शांतिकुंज दर्शन 15 September 2026 !! गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार !!
अमृतवाणी:- सच्चा यज्ञ क्या है -पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य
परम् पूज्य गुरुदेव का अमृत संदेश
यज्ञ मित्रों इसे कहते हैं , गरीब लोग भी कर सकते हैं, बड़े आदमी करे कोई बहुत जरूरी नहीं , लोग हवन करें बहुत लोग आरतियां लेले बहुत जरूरी नहीं आप अपनी बहन को बेटी को भांजी को उनका ऑपरेशन कराने के लिए अपनी 1 महीने की रोटी में से घी बचा कर के यदि उसकी आंख का ऑपरेशन करा देते हैं ₹50 दे देते हैं और 2 महीने बिना घी की रोटी खा लेते हैं आप यज्ञ करने वाले हैं मैं आपको हवन करने वाला कहूंगा बेशक आपकी मुझसे लड़ाई हुई है रोज कहते रहिए आपने हवन करा दिया बेकार खर्च कर दिया मैं आपका स्वागत करता रहूंगा यदि आपने 1 महीने तक अपने घी के पैसे बचा कर के उस अंधी बुढ़िया को उसकी मोतियाबिंद के कारण से ऑपरेशन कराना था उसकी आंखों से दिखना बंद हो गया था यदि आपने ₹40 खर्च कर देते हैं मैं आपको याज्ञिक कहूंगा होता कहूंगा पुरोहित कहूँगा यजमान कहूँगा मैं आपको बहुत कुछ कहूंगा मुझसे आप रोज लड़ाई लड़ते रहना लड़ाई लड़ते रहना कहते रहना आप मेरा यज्ञ करा देते हैं आपका मैं गुनहगार हूं मैं झूठा हवन कराने वाला हूं तुम सत्य हवं करनेवाले हो हमारी संस्कृति है हमारी सभ्यता है और यह हमारी शिक्षा है इंसान इस तरीके से जिए जिससे कि दूसरे आदमी के दुख और दर्द का ख्याल बना रहे दूसरे आदमी के दुख और दर्द का ख्याल रख कर के हम जिंदा रह सकते हों क्या हमारे समाज में समस्याएं रहेंगी आपराधों की समस्याएं रहेंगी समाधान करेंगे पराया दूसरे आदमी का मैं कैसे काटूँगा जेब जो बेचारा दियावान जंगल में चल रहा है रेलगाड़ी में बैठा हुआ है टिकट मैं काट रहा हूं पीटीआई पकड़ लेगा कैसी मुसीबत आएगी कहां से मांगेगा गरीब ने जिंदगी भर मांगी किसी मुसीबत में फंस जाएगा आज हम फंस जाएंगे तब कैसे काटूँगा किसी के जेब मेरे हाथ टूट जाएंगे मेरे हाथ गल जाएंगे मैं कैसे जेब काट पाऊंगा अपराध दुनिया में कैसे रह पाएंगे यदि मनुष्य मनुष्यता का दिल भी भीतर लगा ले हमारे हमारे लिए यह सब लोग है इंसान के और हैवान के हैं हमारे दिल यदि हमारे दिल भी इंसान के रहे होते दुनिया में स्वार्थ कैसे रह जाता |
पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य
अखण्ड-ज्योति से
उस दिन जब श्री शरत् चन्द्र बोस यहाँ आये तब मैंने उनसे पूछा, क्या आप सेगाँव गये थे? उन्होंने बतलाया कि हाँ, गया था और गाँधी जी से देर तक बात चीत भी की थी, लेकिन गाँधी जी ने अखबारी रैपर के एक टुकड़े पर यह लिखने के सिवा और कुछ नहीं कहा कि “परिवार के सब लोगों को मेरा प्रेम पहुँचा देना।” इसके बाद उन्होंने बतलाया कि “मैंने महात्मा जी से पूछा कि क्या दिल्ली में भी वे अपना मौन जारी रखेंगे। इस पर उन्होंने हाँ का संकेत किया। क्या यह अचरज की बात नहीं है?”
मौन जारी रहेगा या नहीं, यह तो मुझे मालूम नहीं, लेकिन यह मुझे इत्मीनान है कि मौन को अनिश्चित काल तक जारी रखने की उन्हें बड़ी ख्वाहिश है। इस मौन के दर्म्यान कई बार उन्होंने लिखा है कि “ईश्वर की यह कितनी अनुकम्पा हैं कि मैं मौन हूँ!” यह तो निस्सन्देह है कि मौन से उन्हें अपार आनन्द मिला है और बहुत सी बातों से से बच गये हैं, जो शायद क्रोधवेश से उनके मुँह से निकल जाती।
जब इस बात का ख्याल आता है तब यह महसूस किये बिना नहीं रहा जाता कि हम बकवासी लोग अगर मौन के गुण को समझ जायें तो दुनिया का लगभग आधा दुःख तो दूर हो ही जायगा। आधुनिक सभ्यता के फेर में पड़ने से पहले दिन-रात के चौबीस घंटों में से कम से कम 6 से 8 घन्टे तो हम खामोश रहते ही थे। लेकिन इस आधुनिक सभ्यता ने हमें रात को दिन में और निस्तब्धता को हल्ले गुल्ले में तब्दील करना सिखला दिया है।
रोज के अपने काम-काज के बीच अगर हम कुछ घंटे ध्यान में भी लगायें और अपने मन को मौन द्वारा ईश्वर की आवाज सुनने के लिये तैयार करें तो क्या ही अच्छा हो! वह तो ऐसा दैवी रेडियो है जो हमेशा गाता रहता है। जरूरत सिर्फ यह है कि हम उसे सुनने के लिए तैयार हों। लेकिन यह तब तक संभव नहीं है जब तक मौनाबलम्बन द्वारा शांति के साथ उसे न सुना जाए।
अखण्ड ज्योति जनवरी (1988)
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