Thursday 17, September 2026
गायत्रीतीर्थ शांतिकुंज, नित्य दर्शन
आज का सद्चिंतन (बोर्ड)
नित्य शांतिकुंज वीडियो दर्शन
!! परम पूज्य गुरुदेव का कक्ष गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार 17 September 2026
!! परम पूज्य गुरुदेव का कक्ष गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार 17 September 2026
!! शांतिकुंज दर्शन 17 September 2026 !! गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार !!
परम् पूज्य गुरुदेव का अमृत संदेश
आप मोहब्बत आप अपनी धर्मपत्नी से कर सके होते क्या मजा आता | आप और आपकी धर्मपत्नी एक दूसरे के लिए जान दिया कीजिए एक दूसरे को देख देख कर के जिया कीजिए और आपकी काली कलूटी औरत जिसको कुछ आता भी नहीं है देखा कीजिए और उसकी आंख में आंख डालकर देखा कीजिए कि अपने भाई और बहनों को मां और बाप को छोड़ कर के किस तरीके से चली आई ना प्रोविडेंट फंड मांगती है न कैजुअल लीव मांगती है ड्राफ्ट मांगती है ना वेतन मांगती है न पेंशन मांगती है सारी जिंदगी भर जब आप कहें तो हंस जाती है आप कहे तो रो आती है ऐसी देवी ऐसी देवी दुनिया में हो सकती हैं पत्थर की मूर्ति उठाकर देखेंगे तो बकरे खा जाते हैं टीवी देखनी हो तो आप अपने घर में चले जाइए और और उस देवी को देखिए जो आपके घर में आपके नाम से मौजूद है विचार किया लीजिए क्या करूँ उसको आरती उतारूँ उसकी कैसे उतारूँ मोहल्ले वाले क्या कहेंगे पैर धरूँ उसके कैसे धरूँ क्या कहेंगे घरवाले तरीके से आप मत उतारा कीजिए आरती मत धरा कीजिए पैर पर केवल कृतज्ञता भरी आंखों से उसकी ओर देख लिया कीजिए फिर उसकी आंखों में से देखिए कितनी कृतज्ञता झलकती है दोनों की मोहब्बतें जहां भी जाएंगे छोटे-छोटे मिट्टी के घरों में क्या स्वर्ग उसके मुकाबले में होगा स्वर्ग को इशारों में फेंक दीजिए उस घर के ऊपर स्वर्ग वाले प्यार की जिंदगी जिया करते हैं सारी जिंदगी जिया करते हैं और उनके बच्चे शानदार बच्चे पैदा होते हैं मां बाप नहीं होते मां बाप नहीं होते उनके बालक उनके बालक समर्थवान पैदा होंगे आपको यही शिकायत है हमारा बच्चा कहना नहीं मानता आपका बच्चा कहना नहीं मानेगा आपका बच्चा रोएगा बूढ़े हो जाएंगे अभी तो जवान हैं आप आप इलेक्ट्रिकल काम करते हैं आप अपने बच्चे को कुछ दे सकते हैं गाड़ी दे सकते हैं जब बूढ़े हो जाएंगे बूढ़े होने वाले हैं अभी मेरी बात नहीं है आप भी होने वाले हैं आप यह मत ख्याल कीजिए कि हमारे बाल काले बने रहेंगे आपके भी बाल सफेद हो जाएंगे मेरे जैसे दांत आपके भी उखड़ने वाले हैं मेरे जैसे जब बच्चा आपका बड़ा हो जाएगा तो मजा चखाएगा आपको कि आपने आपने उसकी मां को कैसे तंग किया था वह मां जो बच्चे को दूध पिलाती रहती है और पेट में बैठा हुआ बच्चा मां और मां का क्रोध बाप के प्रति जो मां के भीतर पड़ा हुआ रहता है बच्चा पीता रहता है और घूंटता रहता है लहू के घूंट जब बुड्ढा बाप हो जाता है तो उनके पैसे चुरा चुरा कर भागता है बुरे बुरे शब्द कहता है आप अपने कलेजे पर हाथ रखिए अभी तो आप बूढ़े नहीं हुए हैं वैसे तो बूढ़े नहीं हुए आप तो जवान मालूम पड़ते हैं एक दिन एक आदमी आया था बूढ़ा आदमी और वह ऐसी बात कह रहा था कि आपका बच्चा मजा तक आएगा आपको आप जो मां के साथ में अन्याय बेइंसाफी करते हैं तो देखना बुढ़ापा कैसा व्यतीत होता है आपका और कैसा बीतता है और आपकी स्त्री कैसी खफा होती है आपसे जो गुस्सा भरा हुआ है बुढ़ापे में कैसे निकालती है आप पर और कैसे आपको तंग करती है और घर में से कैसे बाहर निकालती है और आप तंग करेंगे उसको अभी अभी तो बीमारी हुई चीजें हुई होती एक दूसरे के लिए त्याग करना सीखता बलिदान करना सीखता सेवा करना सीखता मजे आते और हमारे घर हमारे घर आनंद और उल्लास से भर जाते आध्यात्मिकता हमारे जीवन में भर जाती हमारे घर में सारे घर में खुशहाली हो जाती |
पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य
अखण्ड-ज्योति से
बूढ़ा आदमी पेड़ के समीप आकर रुका और बोला—अरे! फल नहीं , फूल भी नहीं और पत्ते भी नहीं! क्या हो गया? हर वसंत में तुम्हारी बहार देखते ही बनती थी!
पेड़ ने लंबी आह भरी काश! तुमने अपनी झुर्रियों भरा चेहरा देख लिया होता। वसन्त ऋतु तो सदा आती और जाती रहेगी पर बूढ़ी पीढ़ी और प्रथा-परम्परा को अपना दायित्व पूरा करते हुए नयों के लिए भी तो स्थान खाली करना होता है, अन्यथा यह सृष्टि ही बूढ़ी होकर समाप्त हो जायेगी। बात बूढ़े की समझ में आ गई।
चित्रकार ने बड़ी मेहनत से भूखे गरीब आदमी का बड़ा-सा चित्र बनाया। चित्र ऐसा प्राकृतिक लगता कि आदमी की पीड़ा उभरकर कैनवस पर रख दी हो। दर्द से कराहता, झुर्रियां पड़ी-हुई। कपड़े चिथड़े तार-तार दर्शाये गये थे। चित्र को देखकर लोगों के मन में दुःख के चिन्ह उभरते है। लोग अपनी-अपनी मनोवृत्ति के अनुसार अटकलें लगाते। चित्रकार के एक डॉक्टर मित्र ने चित्र को देखा और बड़ी देर तक देखता ही रहा। अन्त में उसकी प्रशंसा करते हुए बोला-लगता है इस आदमी के पेट में तकलीफ है। वही चित्र में आपने बतायी है दुनिया अपने स्वभाव चिन्तन के अनुरूप ही दिखाई देती है।
अखण्ड ज्योति फ़रवरी (1993)
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