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Sunday 27, September 2026

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गायत्रीतीर्थ शांतिकुंज, नित्य दर्शन

गायत्री माता
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गायत्री माता - अखंड दीपक
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चरण पादुका
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चरण पादुका
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सजल श्रद्धा - प्रखर प्रज्ञा (समाधि स्थल)
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परम् पूज्य गुरुदेव व वंदनीय माताजी कक्ष
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परम् पूज्य गुरुदेव व वंदनीय माताजी कक्ष
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प्रज्ञेश्वर महादेव - देव संस्कृति विश्वविद्यालय
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शिव मंदिर - शांतिकुंज
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हनुमान मंदिर - शांतिकुंज
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आज का सद्चिंतन (बोर्ड)

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आज का सद्वाक्य

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नित्य शांतिकुंज वीडियो दर्शन


अमृतवाणी:- क्या हम शैतान के बहकावे में जी रहे हैं -पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य

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परम् पूज्य गुरुदेव का अमृत संदेश



शैतान और भगवान की दो शक्तियां इस दुनिया में है शैतान की शक्ति वह है जो जो आदमी को लुभावने रास्ते पर घसीट करके ले जाती है शैतान उस आदमी का नाम है शैतान उस सत्ता का नाम है शैतान उस शक्ति का नाम है जो जो मनुष्यों को इंद्रियों को मिलने वाले सुखों की ओर खींचती रहती है और यह कहती रहती है सारे के सारे फायदे और सारे के सारे लाभ इसमें हैं जो इंद्रियों के द्वारा लाभ उठाते हैं और जो सुख पाते हैं और शैतान की सत्ता हमको यह कहती रहती है कि आदमी को अपना घमंड और अहंकार बढ़ाना चाहिए और दूसरे लोगों की आंखों में बड़ा बन जाना चाहिए दूसरी आंखों दूसरे लोगों की आंखों में बड़ा बन जाने का असली तरीका लोगों को नहीं मालूम शैतान यह कहता है अपनी दौलत ज्यादा बढ़ा लो ताकि आदमी अपने अंदाज से यह लगाएंगे कि यह बड़ा आदमी है और यह मालदार आदमी है और यह अमीर आदमी है और और यह बड़े महल में रहता है और यह बड़ा खाना खाता है इसीलिए वह हमारे बड़प्पन को मान लेंगे और उसकी जरूरत के द्वारा यह शैतान सिखाता है भगवान नहीं सिखाता भगवान महानताएं सिखाता है भगवान गुणों की विशेषताएं सिखाता है गुणों की विशेषताएं सिखाता है इसीलिए शैतान के बहकाए हुए लोग शैतान के बहकाए हुए लोग इंद्रियों की गुलामी करते रहते हैं और सुख की तलाश इंद्रियों के छेदों में खो करके करते रहते हैं इंद्रियों के छेदों में से हमको सुख मिल जाए जबान में से हमको सुख मिल जाए काम इंद्रिय मे से हमको सुख मिल जाए काम इंद्रियों द्वारा सुख मिल जाए ताकि सिनेमा देख करके आएं अच्छा गाना सुनकर के आएं इस तरीके से इंद्रियों के छेदों में से उनको अपने सुखों की तलाश रहती है शैतान की बहकाए हुए लोग शैतान के बहकावे हुए लोग शैतान के लोग वह आदमी हैं जो अपने शरीर के बड़प्पन को अपना बड़प्पन मान लेते हैं 
पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य 

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अखण्ड-ज्योति से



दो इतिहास वेत्ताओं में विवाद चल रहा था कि रामायण का घटनाक्रम प्रामाणित है या नहीं? वह इतिहास है या काव्य?

तीसरे मध्यस्थ की सम्मति पूछी गई तो बोला, कि न तो मैं राम के समय में मौजूद था और न उसे लिखने वालों के साथ रहा हूँ। इसलिए उसकी ऐतिहासिक प्रामाणिकता के संबंध में तो कुछ नहीं कह सकता, पर इतना अपने अनुभव से कह सकता हूँ कि रामायण पढ़ने से मेरे जीवन पर भारी प्रभाव पड़ा है और उसके कारण सुधार परिवर्तन में भारी योगदान मिला है। इस दृष्टि से तो रामायण को प्रामाणिक ही मानता है।

एक राज कुमार बड़े दुष्ट स्वभाव का था। एक दिन वह बाढ़ के पानी में बहने लगा। किसी ने उसे बचाया नहीं।

नदी में एक लट्ठा बहता जा रहा है। बाढ़ में पड़े हुए एक साँप और चूहे ने उस लट्ठे पर सवारी गाँव ली थी वह लट्ठा राज कुमार के हाथ भी पड़ गया वह भी उसे पकड़ कर तैरने लगा।

नदी के तट पर साधु रहता था। उसने लट्ठे पर सवार तीन प्राणियों को बहते देखा तो दया वश वह नदी में कूद पड़ा और लट्ठे को घसीट कर किनारे पर ले आया। उन्हें अपनी झोपड़ी में ले गया। वे सर्दी से काँप रहे थे। उनकी ठंड छुड़ाने के लिए उसने आग जलाई जो पास में था वह भोजन कराया और उनके स्वस्थ हो जाने पर विदा किया। साँप ने कृतज्ञता व्यक्त की और कहा, "मैं पड़ोस में ही रहूँगा, आपके दर्शन करता रहूँगा। मेरे पास कुछ धन है, जब आपको जितनी आवश्यकता पड़ेगी, उतना देता रहूँगा।

चूहे ने कहा आपने मेरे प्राण बचाये है। मैं आपके लिए ईधन जुटाता रहूँगा। पेड़ की टहनियाँ काट काट कर झोपड़ी के क्षेत्र में ढेर लगाता रहूँगा।

राजकुमार कृतघ्न था उस को इस बात का बहुत बुरा लगा कि उसका उचित सम्मान सत्कार नहीं मिला उसने पत्थर फैंक कर साधु की झोपड़ी उखाड़ कर फिंकवा दी।

उपकार भी हर किसी के साथ में नहीं करा चाहिए।
अखण्ड ज्योति मार्च   (1989)

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