• News
  • Blogs
  • Gurukulam
English हिंदी
  • About Us
    • Gayatri Teerth Shantikunj
    • Patron Founder
    • Mission Vision
    • Present Mentor
    • Blogs & Regional sites
    • DSVV
    • Organization
    • Dr. Chinmay Pandya - Our pioneering youthful representative
    • Our Establishments
  • Initiatives of mission
    • Spiritual
    • Environment Protection
    • Social Development
    • Education with Wisdom
    • Health
    • Corporate Excellence
    • Disaster Management
    • Training/Shivir/Camps
    • Research
    • Programs / Events
  • Read
    • Books
    • Akhandjyoti Magazine
    • News
    • E-Books
    • Events
    • Gayatri Panchang
    • Motivational Quotes
    • Lecture Summary
  • Spiritual Wisdom
    • Thought Transformation
    • Revival of Rishi Tradition
    • Change of Era - Satyug
    • Yagya
    • Life Management
    • Foundation of New Era
    • Gayatri
    • Indian Culture
    • Scientific Spirituality
    • Self Realization
    • Sacramental Rites
  • Media
    • Social Media
    • Video Gallery
    • Audio Collection
    • Photos Album
    • Pragya Abhiyan
    • Mobile Application
    • Gurukulam
    • News and activities
    • Blogs Posts
    • Live
    • Downloads
    • Yug Pravah Video Magazine
  • Contact Us
    • India Contacts
    • Global Contacts
    • Shantikunj - Headquarter
    • Join us
    • Write to Us
    • Spiritual Guidance FAQ
    • Magazine Subscriptions
    • Shivir @ Shantikunj
    • Contribute Us
  • Login

Media   >   Social Media   >   Daily Update

Friday 11, September 2026

×

गायत्रीतीर्थ शांतिकुंज, नित्य दर्शन

गायत्री माता
Image गायत्री माता
948 views
Like
Share
Download
Comment
गायत्री माता - अखंड दीपक
Image गायत्री माता - अखंड दीपक
953 views
Like
Share
Download
Comment
चरण पादुका
Image चरण पादुका
949 views
Like
Share
Download
Comment
चरण पादुका
Image चरण पादुका
947 views
Like
Share
Download
Comment
सजल श्रद्धा - प्रखर प्रज्ञा (समाधि स्थल)
Image सजल श्रद्धा - प्रखर प्रज्ञा (समाधि स्थल)
935 views
Like
Share
Download
Comment
प्रज्ञेश्वर महादेव - देव संस्कृति विश्वविद्यालय
Image प्रज्ञेश्वर महादेव - देव संस्कृति विश्वविद्यालय
938 views
Like
Share
Download
Comment
शिव मंदिर - शांतिकुंज
Image शिव मंदिर - शांतिकुंज
934 views
Like
Share
Download
Comment
हनुमान मंदिर - शांतिकुंज
Image हनुमान मंदिर - शांतिकुंज
937 views
Like
Share
Download
Comment

आज का सद्चिंतन (बोर्ड)

Image हिंदी बोर्ड
968 views
Like
Share
Download
Comment
Image हिंदी बोर्ड
957 views
Like
Share
Download
Comment
Image अंग्रेजी बोर्ड
959 views
Like
Share
Download
Comment
Image अंग्रेजी बोर्ड
953 views
Like
Share
Download
Comment

आज का सद्वाक्य

Image हिंदी सद्वाक्य
965 views
Like
Share
Download
Comment
Image हिंदी सद्वाक्य
957 views
Like
Share
Download
Comment
Image अंग्रेजी सद्वाक्य
958 views
Like
Share
Download
Comment
Image अंग्रेजी सद्वाक्य
951 views
Like
Share
Download
Comment



नित्य शांतिकुंज वीडियो दर्शन


!! शांतिकुंज दर्शन 11 September 2026!! गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार !!

380 views
Like
Share
Comment







परम् पूज्य गुरुदेव का अमृत संदेश



 

गायत्री मंत्र की माला में ऐसा नियम है एक तीन पांच सात 10 पांच सात नौ ऐसे की जाती है दो छ आठ 12 ऐसे नहीं की जाती इस तरीके से 15 मिनट की उपासना यदि कर सकते हो आप तो आपको कुछ लाभ मालूम पड़ सकता है इससे कम मैं नहीं मालूम   एक स्थान होना चाहिए स्थान होना चाहिए हमारे जीवन में हमारे जीवन में थोड़े स्थानों का परिवर्तन हुआ है तीन स्थान ही मैंने परिवर्तित किए हैं। सबसे पहला स्थान मेरी मातृभूमि में था जहां के गुरुदेव का साक्षात्कार मुझे हुआ। वहां जहां मैंने दीपक जलाया। एक स्थान एक स्थान था। मैं बहुत दिनों तक वहां अपने घर पर रहता रहा। दूसरा स्थान जो मैंने प्रवर्त किया आगरा आगरा शहर में किया। आगरा शहर में मुझे थोड़े दिनों साहित्यिक काम करने पड़े। सैनिक एक वैज्ञानिक हवा निकलता था। उसका मुझे उसका संपादन करना पड़ा। और दूसरे और कई पत्र थे। उनका मुझे आगरा में रह के संपादन कार्य करना पड़ा। वहां भी मैंने एक मकान लिया और वहां कुछ वहां भी अपना दीपक उठा लाया और वहां रहना पड़ा दो और अंतिम 28 वर्ष करीब होने को आए 28 वर्ष हो गए यहां 28 वर्ष से में इस स्थान पर तीन स्थानों का परिवर्तन किया है स्थान का भी एक बड़ा महत्व होता है स्थान की अपनी विशेषता होती स्थान संस्कारवान हो जाता है आपको मालूम नहीं और जगह है आपको अचंभ होगा कि एक मेरी जरासी कोठरी है आठ फुट चौड़ी और आठ फुट लड़ी जरासी कोठी है जरासी कोठी है और मैं वहां लेख लिखता हूं सवेरे सवेरे का लेख वही बैठ के लिखता हूं छ और सात का एक घंटा नियत एक और वो मेरा तखत नियत है कौन सा वाला आप कभी मेरे घर गए हो तो एक तखत लिखा हुआ होगा एक जरा सी इमेज रखी तखत में बैठ के जब मैं अपने लेख लिखना शुरू करता हूं मेरे दिमाग की दौड़ इतनी तेजी से चलती है कि मैं लिखता हुआ चला जाता हूं और एक घंटे में एक पूरा लेख लिख के खत्म करता हूं 7:00 बजे में यहां आया 7:00 बजे में यहां आ जाता हूं और वो एक लेख मेरा एक घंटे में पूरा हो जाता है अगर मैंने ये जो बनाया है यहां मेरा मन था यहां आ के रहूंगा कहां तब में तब में रहूंगा और यहां आ के अपना काम किया करूंगा तो ये कमरा जो बनाया है ये कमरा बन गया मेरे लिए और ये मेरे लिए बनाया गया और मैंने विचार किया था कि यहां आ करके अपने लेख लिखा करूंगा और यहां करके काम किया करूंगा और यहां करके ग्रंथों के अनुवाद किया करूंगा अब आपको विश्वास नहीं होगा यहां आ के मैंने कभी लेख लिखा है तब मेरे वो लेख गड़बड़ हो जाती है और उतनी स्पीड हो पाती है और तखत जब बैठा बस आपने बस्ती से कहा कहानी सुनिए राजा और उनका एक हिस्सा है एक जंगल में एक था टीला उस टीले पर एक गरिए का छुकरा चला जाता था और टीले पर बैठ जाता बैठ जाता तो बड़ी-बड़ी न्याय की बात कहता फिर लोगों ने कहा अरे गरिए का छोकरा इतनी बात कहता है इतनी कानून की और धर्म की बात उसमें क्या हो गया उन्होंने कहा ये टीले पर बैठता है तभी कहता है जमीन पर गरिया जाता है टीले में करामात होनी चाहिए टीले की खुदाई कराई गई टीले एक सिंहासन निकला। सिंहासन में सोने की 32 पुतलियां उसके 32 पाए थे और 32 पुतलियां थी। राजा भोज उनको ले गए। राजा भोज ने सिंहासन को धोया और उस पर बैठने को हुए। बैठने को हुए राजा अभिषेक होने वाला था। विक्रमादित्य का सिंहासन था और एक बत्ती एक पुतली बोली उसमें से कि राजा भोज है। यदि विक्रमादित्य के गुण तेरे पास हो तो उसमें से बैठ। उन्होंने कहा वो कौन से ऐसे गुण? एक कहानी उसने सुनाई राजा विक्रमादित्य ऐसा था ऐसा था तेरे पास वो गुण है तो उसने कहा भाई ये तो गुण है और दूसरे दिन फिर वो उस दिन की खत्म हो गई दूसरे दिन राजा भोज ने कहा फिर बैठना चाहिए उतनी बच्ची रहती है फिर वो सिंहासन में बैठने के लिए गया और पुतली ने दूसरी ने कहा राजा भोज कहा रुक क्यों तेरे अंदर विक्रमादित्य के गुण हो तो इस बैठ क्या गुण थे एक कहानी इसने सुनाई ऐसे विक्रमादित्य की कथाएं 32 कहानियां 32 पुत्रियों ने सुनाई और राजा भोई ने कहा ये गुण मेरे पास नहीं है तो सिंहासन जड़ा हुआ आकाश में उड़ा उड़ता हुआ चला गया राजा भोज रह गया मर नहीं कहानी कहां तक है कहां तक है हो सकता है मनोरंजन के लिए लिख दी हो सकता है ऐसा हुआ हो मैं नहीं कह सकता क्या बात है लेकिन वो सिंहासन बत्ती का एक तख्त मेरे पास है जब मैं बैठता हूं जब मैं बैठता हूं भैया वाले मेरे पास विचारों की धारा नहीं जाने कहां से कहां होती चली जाती है ऐसे बढ़िया ले लेता हूं मैं कि आपको अचंभ होगा |

पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य  
 

430 views
Like
Share
Comment




अखण्ड-ज्योति से



मृत्यु को यदि हर क्षण याद रखा जाए तो पाप कर्मों से छुटकारा स्वतः ही मिल जाता है। संत एकनाथ की यही शिक्षा थी। एक बार एक साधक उनके पास पहुँचा। उनकी प्रशंसा और गुणगान करने लगा और अपने दुर्गुणों का प्रायश्चित करने लगा। संत एकनाथ ने उस साधक की बात सुनकर बड़े विनम्र शब्दों में कहा की आप मेरी चर्चा अधिक न करें। मुझे ऐसा आभास होता है कि मृत्यु आज से सात दिन पश्चात हो जाएगी। संतों की वाणी कभी मिथ्या नहीं हो सकती। घर पहुँचते पहुँचते वह साधक बीमार पड़ गया। 6 दिन इसी स्थिति में रहा। सातवें दिन संत एकनाथ उसके घर जा गए ॥ महाराज के दर्शन करते ही साधक भावविभोर हो उठा। एकनाथ ने मुस्कुराते हुए कहा कि इन 6 दिनों में आपने कितने पाप कर्म किए हैं? साधक ने उत्तर दिया कि कोई नहीं, क्योंकि मेरे ऊपर तो हर क्षण मरण रूपी शेर सवार रहा। जिसकी भयग्रस्तता के परिणामस्वरूप पापकर्मों का चिंतन मस्तिष्क में पनप नहीं पाया।

महाराजा भोग के इस सवाल पर सभासदों की अलग-अलग राय थी कि सज्जनता बड़ी है या ईश्वर भक्ति। अनेक दिन विचार मंथन चलता रहा, परन्तु निर्णय के नाम पर शून्यता छाई रही।

कई दिन बीतने पर एक दिन महाराजा भोज वन भ्रमण के लिए निकले। दुर्भाग्य से मार्ग में वन्य जातियों ने उन पर आक्रमण कर दिया। आक्रमण के कारण उनके शेष सहयोगियों से संबंध टूट गया। वे घने जंगल में भटक गए। जंगल में प्यास के कारण उनका दम घुटने लगा। लेकिन दूर-दूर तक कहीं पानी दिखाई नहीं दे रहा था। किसी तरह वह एक साधु की पर्णकुटी तक पहुँचे। साधु ध्यानस्थ थे। पहुँचते पहुँचते महाराज मूर्छित होकर गिर पड़े। गिरते-गिरते उन्होंने पानी के लिए पुकार लगाई।

कुछ समय बाद मूर्छा टूटने पर वही संत उनका मुंह धो रहे हैं, पंखा झल रहे हैं और पानी पिला रहे हैं। आश्चर्यचकित होकर राजा ने पूछा, "आपने मेरे लिए अपना ध्यान क्यों भंग किया? परमात्मा की इच्छा है कि उनके संसार में कोई दीन दुःखी न हों। उनकी इच्छापूर्ति का महत्व अधिक है। सेवा और सज्जनता ईश्वर भक्ति का का ही श्रेष्ठतम रूप है। भोज को समाधान मिल चुका था।

तब भारत परतंत्रता की बेड़ियों से जकड़ा हुआ था। उन दिनों पंजाब भर में उर्दू और फारसी का जोर था, हिंदी की ओर किसी का ध्यान भी न था। हिंदी की उपेक्षा गो. गणेशदत्त जी से सही न गई और उन्होंने हिंदी प्रचार वृत लिया कि - वे नियमित रूप से लोगों को मातृभाषा हिंदी पढ़ायेंगे।

यह काम जितना बड़ा था, उतना ही कठिन भी, कोई पढ़ने को तैयार न होता था। निदान उन्होंने एक टूटा कनस्तर हाथ में लेकर लायलपुर के सारे शहर में स्वयँ यह मुनादी की कि जो भी भाई हिंदी पढ़ना चाहे निःशुल्क पढ़ाई जायेगी। मुश्किल से कुछ छात्र मिले तो उनको पढ़ाने के लिए जगह का प्रबंध न हुआ। इस पर उन्होंने एक खुले स्थान पर बैठकर मिट्टी के तेल की कुप्पी के प्रकाश में अपनी हिंदी की पाठशाला आरंभ की। उनकी यह पाठशाला कुछ ही समय पश्चात हाईस्कूल बन गयी। संकल्प के धनी गोस्वामी जी ने भारत विभाजन होने से पूर्व पंजाब में 60 डिग्री कॉलेज, 150 इण्टर कॉलेज, 100 कन्या पाठशालाएँ, 100 मिडिल स्कूल और 4 ब्रह्मचर्य आश्रम स्थापित किये। आज उनकी अनेकों शाखाएँ देश भर में विद्यादान कर रही है।

अखण्ड ज्योति अगस्त   (1993)

649 views
Like
Share
Comment



×
Popup Image
❮ ❯
Like Share Link Share Download
Newer Post Home Older Post


View count

None



Archive

Shantikunj, Haridwar

About Shantikunj

Shantikunj has emerged over the years as a unique centre and fountain-head of the global Yug Nirman Yojna—a movement for moral and spiritual regeneration inspired by India’s timeless heritage.

Discover Shantikunj
Discover

Mission

  • Home
  • News & Activities
  • Join Us
  • Contact
Knowledge

Resources

  • Literature
  • Videos & More
  • Audio
  • Quotes & Thoughts

Report website issues at -
websupport@awgp.org

Copyright © 2026 SRI VEDMATA GAYATRI TRUST (TMD). All rights reserved.

Designed by IT Cell Shantikunj