Thursday 01, October 2026
गायत्रीतीर्थ शांतिकुंज, नित्य दर्शन
आज का सद्चिंतन (बोर्ड)
आज का सद्वाक्य
नित्य शांतिकुंज वीडियो दर्शन
!! परम पूज्य गुरुदेव का कक्ष गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार 01 October 2026
!! शांतिकुंज दर्शन 01 October 2026 !! गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार !!
!! अखण्ड दीपक Akhand_Deepak (1926 से प्रज्ज्वलित) चरण पादुका गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार 01October 2026
परम् पूज्य गुरुदेव का अमृत संदेश
महापुरुष महापुरुष उन्हें कहते हैं जो स्वयं इस संसार की नाव में से अपने आपको को पार कर लेते हैं और अपनी नाव में बिठा करके न जाने कितने कितने छोटे-छोटे बच्चों को और बीमारों को बेकसूरों को जो आदमी इस संसार रूपी जीवन की नाव में सागर में से पार अपने आप को नहीं कर सकते उनको भी अपनी नाव में बिठाकर के पार कर सकते हो जो अपने रास्ते पर दूसरे लोगों के लिए रास्ता दिखा सकते हों वह आदमी महापुरुष कहलाते हैं इसलिए महापुरुष बनने का रास्ता महापुरुष बनने का रास्ता थोड़ा सा मुश्किल है और श्रम साध्य है मेहनत का रास्ता है लेकिन इसलिए लोगों ने लोगों ने उसकी ओर से उपेक्षा करना शुरू कर दिया और लोग उसकी ओर से भूल गए और वह गुमराह हो गए मैं जब कभी भी विचार करता हूं तब मुझे यह विचार आता है की स्वाति की बूंद स्वाति की बूंद जिस घड़ी एक सीप के मुंह में आई और एक पानी का पानी का बूंद में जाकर के सीप के अंदर से कीमती मोती पैदा कर दिया और पानी की बूंद जिस घड़ी आई एक छोटे वाले बांस निकम्मे वाले बांस घने हुए बांस को उसने वंशलोचन से भर दिया और एक स्वाति वाली बूंद स्वाति वाली बूंद जब बरसने के लिए आई तब केला कपूर के रूप में परिणत हो गया और स्वाति वाली बूंद जब आई तब चातक पपीहे की प्यास जो कि मुद्दतों से पूरी नहीं हो पा रही थी और वह प्यास पपीहा चिल्ला रहा था पर जब वह बूंद उसके अंदर आई तो पपीहा को शांति मिल गई उसकी प्यास दूर हो गई और चैन के साथ में घोसले में सो गया वह दिन स्वाति और सीप के संपर्क के दिन क्या मैं भूल जाऊंगा क्या नहीं मैं भुला नहीं सकता इसी तरीके से मैं चाहता हूं जो मुझे पहले दिन मेरे गुरु से मेरी मुलाकात हुई उसने जो बातें मुझे बताई बहुत गौर करने के लायक हैं गुरुदेव ने मुझे बताया कि हमको यह मजबूत आदमी बनाना चाहते हैं और तुझे बड़ा आदमी महापुरुष बनाना चाहते हैं बड़ा आदमी नहीं मजबूत और महापुरुष बनने के लिए मैं क्यों करता रहा मैंने कहा आपसे बहुत अनुग्रह और मैं आपकी इस कृपा के लिए अनुग्रहीत हूं उन्होंने कहा बच्चे कृपा के लिए अनुग्रहीत तो है पर तुझे यह मालूम है क्या कि हर चीज दुनिया में कीमत से पाई जाती है बिना कीमत के नहीं कीमत बस इसी का तो झगड़ा है कीमत देकर के खरीदना और फोकट में चीजों को प्राप्त करना बस यही से भूल शुरू हो जाती है और वह भूल मुझे भी हो गई होती अगर मेरा समर्थ गुरु मेरे पास न आया होता |
पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य
अखण्ड-ज्योति से
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