Sunday 13, September 2026
गायत्रीतीर्थ शांतिकुंज, नित्य दर्शन
आज का सद्चिंतन (बोर्ड)
आज का सद्वाक्य
नित्य शांतिकुंज वीडियो दर्शन
!! प्रज्ञेश्वर महादेव मंदिर देव संस्कृति विश्वविद्यालय-महादेव शिव पार्वती मंदिर शांतिकुञ्ज हरिद्वार 13 September 2026
!! परम पूज्य गुरुदेव का कक्ष गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार 13 September 2026
!! शांतिकुंज दर्शन 13 September 2026!! गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार !!
!! देवात्मा हिमालय मंदिर Devatma Himalaya Mandir गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार 13 September 2026
!! सप्त ऋषि मंदिर गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार 13 September 2026
शिव पार्वती मंदिर शांतिकुञ्ज हरिद्वार 13 September 2026
!! गायत्री_माता_मंदिर Gayatri_Mata_Mandir गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार 13 September 2026
!! अखण्ड दीपक Akhand_Deepak (1926 से प्रज्ज्वलित) चरण पादुका गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार 13 Septembert 2026
अमृतवाणी:- तीर्थ बनते नहीं, बनाए जाते हैं -पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य
परम् पूज्य गुरुदेव का अमृत संदेश
भगवान राम ने 10 अश्वमेघ यज्ञ जिस स्थान पर किए थे उस स्थान का नाम काशी में दशास्तेज घाट पड़ गया। काशी में सबसे बड़ा स्थान है उसका नाम है दशास्ते मेज घाट। गंगा किनारे गंगा किनारे छोटे-छोटे स्थान है। जंगल में रहने वाले हिमालय एक का नाम है देवप्रयाग। देवप्रयाग पर जाते लोग दर्शन करते हैं, पंडदान करते हैं। क्यों? पहले तो मामूली किनारा था। हां, भगवान राम ने वहां बैठ के तप किया था। बूढ़े जब हो गए थे तब अपना राजका लव कुश को सौंप करके उपासना करने के लिए चले गए थे और देवप्रयाग में उन्होंने अपना अंतिम जीवन व्यतीत किया था। वो देवप्रयाग रामचंद्र जी ने वहां उपासना की इसलिए स्थान संस्कार हो गया और देवप्रयाग बद्री नारायण की यात्रा में अभी भी एक स्थान है जहां अलकनंदा गंगा का संगम है। लोकल रामचंद्र जी का मंदिर बना हुआ है। मैं तो रहा हूं कई दिन तक। इस तरीके से वो स्थान ऐसा हो गया। लक्ष्मण जी ने लक्ष्मण झूला के पास एक लक्ष्मण धारा है। लोगों ने कभी देखी नहीं है। लक्ष्मण झला वहां चले जाते हैं। जहां काली कमली वाले का है। एक अलग स्थान है। कभी आप जाए तो जो आश्रम से जाती है लक्ष्मण झुला के लिए वहां जो बीच में जंगल पड़ता है उससे नीचे की तरफ निकल जाते हैं। नीचे की तरफ निकल जाते हैं। वहां पानी का एक धारा बहती है। नीचे छोटे वाली गंगा सड़क के बीच में वो लक्ष्मण जी की उपासना का स्थान है। भरत जी की उपासना का स्थान ये हुन की ऋषि को बताया जाता है। ऋषिकेश को लक्ष्मण जी का वो स्थान हो गया। भरत और शत्रु में से एक का मुनि की देती है। एक का दूसरी वो है क्या नाम है? ऋषिकेश है। इन चारों के चार स्थान है। ये स्थान गंगा जी किनारे बिलकुल सामान्य थे। इसलिए महापुरुषों ने लगातार बहुत दिन तक उच्च कोटि की उपासना की। इसलिए ये स्थान संस्कार हो गए और ये तीर्थ कहलाये |
पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य
अखण्ड-ज्योति से
ईश्वर ने मनुष्य को एक साथ इकट्ठा जीवन न देकर उसे अलग-अलग क्षणों में टुकड़े-टुकड़े करके दिया है। नया क्षण देने से पूर्व वह पुराना वापस ले लेता है और देखता है कि उसका किस प्रकार उपयोग किया गया।
इस कसौटी पर हमारी पात्रता कसने के बाद ही वह हमें अधिक मूल्यवान क्षणों का उपहार प्रदान करता है।
समय ही जीवन है। उसका प्रत्येक क्षण बहुमूल्य है। वे क्षण हमारे सामने ऐसे ही खाली हाथ नहीं आते वरन् अपनी पीठ पर कीमती उपहार लादे होते हैं। यदि उनकी उपेक्षा की जाय तो निराश होकर वापिस लौट जाते है किन्तु यदि उनका स्वागत किया जाय तो उन मूल्यवान संपदाओं को देकर ही जाते है जो ईश्वर ने अपने परम प्रिय राजकुमार के लिए भेजी है।
जीवन का हर प्रभात सच्चे मित्र की तरह नित नये अनुदान लेकर आता है। वह चाहता है उस दिन का शृंगार करने में इस अनुदान के किये गये सदुपयोग को देख कर प्रसन्नता व्यक्त की जाये।
उपेक्षा और तिरस्कारपूर्वक लौटा दिए गए जीवन के क्षण-घटक दुखी होकर वापस लौटते हैं। आलस्य और प्रमाद में पड़ा हुआ मनुष्य यह देख ही नहीं पाता कि उसके सौभाग्य का सूर्य दरवाजे प्रति पर दिन आता है और कपाट बन्द देख कर निराश वापिस लौट जाता है।
अखण्ड ज्योति अप्रैल (1974)
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