• News
  • Blogs
  • Gurukulam
English हिंदी
AWGP Logo
  • About Us
    • Gayatri Teerth Shantikunj
    • Mission Vision
    • Patron Founder
    • Present Mentor
    • Blogs & Regional sites
    • DSVV
    • Organization
    • Dr. Chinmay Pandya - Our pioneering youthful representative
    • Our Establishments
  • Initiatives of Mission
    • Spiritual
    • Environment Protection
    • Social Development
    • Education with Wisdom
    • Health
    • Corporate Excellence
    • Disaster Management
    • Training/Shivir/Camps
    • Research
    • Programs / Events
  • Read
    • Books
    • Akhand Jyoti Magazine
    • News
    • Events
    • Gayatri Panchang
    • Motivational Quotes
    • Lecture Summary
  • Spiritual Wisdom
    • Thought Transformation
    • Revival of Rishi Tradition
    • Change of Era - Satyug
    • Yagya
    • Life Management
    • Foundation of New Era
    • Gayatri
    • Indian Culture
    • Scientific Spirituality
    • Self Realization
    • Sacramental Rites
  • Media
    • Social Media
    • Video Gallery
    • Audio Collection
    • Photos Album
    • Pragya Abhiyan
    • Mobile Application
    • Gurukulam
    • News and activities
    • Blogs Posts
    • Live
    • Downloads
    • Yug Pravah Video Magazine
  • Contact Us
    • India Contacts
    • Global Contacts
    • Shantikunj - Headquarters
    • Join us
    • Write to Us
    • Spiritual Guidance FAQ
    • Magazine Subscriptions
    • Shivir @ Shantikunj
    • Contribute Us
  • Login

Media   >   Social Media   >   Daily Update

Tuesday 22, September 2026

×

IMAGE
Image अपडेट
4 likes 97964 views 8 shares
Like
Share
Download
Comment

गायत्रीतीर्थ शांतिकुंज, नित्य दर्शन

गायत्री माता
Image गायत्री माता
7 likes 97969 views 6 shares
Like
Share
Download
Comment
गायत्री माता - अखंड दीपक
Image गायत्री माता - अखंड दीपक
7 likes 98008 views 1 shares
Like
Share
Download
Comment
चरण पादुका
Image चरण पादुका
6 likes 97747 views 2 shares
Like
Share
Download
Comment
चरण पादुका
Image चरण पादुका
6 likes 97463 views 1 shares
Like
Share
Download
Comment
सजल श्रद्धा - प्रखर प्रज्ञा (समाधि स्थल)
Image सजल श्रद्धा - प्रखर प्रज्ञा (समाधि स्थल)
7 likes 97169 views
Like
Share
Download
Comment
शिव मंदिर - शांतिकुंज
Image शिव मंदिर - शांतिकुंज
6 likes 96912 views 2 shares
Like
Share
Download
Comment
हनुमान मंदिर - शांतिकुंज
Image हनुमान मंदिर - शांतिकुंज
6 likes 96656 views 4 shares
Like
Share
Download
Comment

आज का सद्चिंतन (बोर्ड)

Image हिंदी बोर्ड
2 likes 97887 views 2 shares
Like
Share
Download
Comment
Image हिंदी बोर्ड
3 likes 98077 views 4 shares
Like
Share
Download
Comment
Image अंग्रेजी बोर्ड
3 likes 97452 views
Like
Share
Download
Comment
Image अंग्रेजी बोर्ड
3 likes 97397 views
Like
Share
Download
Comment

आज का सद्वाक्य

Image हिंदी सद्वाक्य
2 likes 97868 views 2 shares
Like
Share
Download
Comment
Image हिंदी सद्वाक्य
2 likes 98105 views 2 shares
Like
Share
Download
Comment
Image अंग्रेजी सद्वाक्य
2 likes 97460 views
Like
Share
Download
Comment
Image अंग्रेजी सद्वाक्य
2 likes 97393 views
Like
Share
Download
Comment



नित्य शांतिकुंज वीडियो दर्शन


अमृतवाणी:- क्या आप जानते हैं आपका जन्म क्यों हुआ है -पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य

2 likes 96641 views
Like
Share
Comment



!! शांतिकुंज दर्शन 22 September 2026 !! गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार !!

5 likes 96651 views 1 shares
Like
Share
Comment







परम् पूज्य गुरुदेव का अमृत संदेश



ब्रह्म साक्षात्कार और आत्म साक्षात्कार आध्यात्मिकता के दो महत्वपूर्ण अध्याय माने जाते हैं और ये दो काम जो आदमी कर लेता है वो सिद्ध पुरुष माना जाता है और परमहंस माना जाता है और पहले दिन गायत्री का पहला क्षण जब मुझे सीखने के लिए मिला तो वो चरण थे जिसको मैंने जब पूरी तरीके से प्राप्त कर लिया तो मैं सिद्ध पुरुष हो गया और परमहंस हो गया। शुद्ध पुरुष और परमहंस होने के दो ही तरीके हैं। आत्मा का ज्ञान और परमात्मा का ज्ञान। परमात्मा का ज्ञान विश्व मानव में फैला हुआ है भगवान और और धर्म और संस्कृति सराचरण और शिष्य का के बीच बीच में विद्यमान मानो ये विचार जब मेरे समझ में आया तब मुझे ऐसा मालूम पड़ने लगा भगवान मेरे पास है और मैं भगवान के पास हूं और जब मैंने अपने आप का स्वरूप देखा तो मेरे जीवन की समस्याओं में अमूल परिवर्तन हो गया। पहले पहले मेरा ये ख्याल था कि मैं दुनिया में बड़ा आदमी बनने के लिए पैदा हुआ हूं। मैं मजा उड़ाने के लिए पैदा हुआ हूं। मैं अपना अहंकार और बड़प्पन की छाप दूसरों पर डालने के के लिए पैदा हुआ हूं। लेकिन मेरा सारे का सारा मजा गायब हो गया और मुझे जब आत्म साक्षात्कार हुआ तो मुझे यह मालूम पड़ा कि मैं भगवान का नन्ना मुन्ना बच्चा और भगवान ने सारी की सारी कला और सारी की सारी अपनी विभूति को समेट करके मुझ जैसे ना प्राणी को बनाया और मैं उसका सहायक और मैं उसका शिल्पक और मैं उसका आशीष उसकी इस खूबसूर इसकी इस दुनिया में ज्यादा खूबसूरती लाने के लिए और खुशबू पैदा करने के लिए मेरा जीवन का लक्ष्य और जीवन के लिए उद्देश्य पैदा हुआ |

पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य 

2 likes 97467 views
Like
Share
Comment




अखण्ड-ज्योति से



आज साधु तो बहुत हैं, पर साधना नहीं है। साधन के बिना साधुता कागज के फूलों की तरह है। जिनमें बहुरंगी आकर्षण तो भरपूर है, लेकिन सुगंध का एकदम अभाव है। सब तरफ आज ऐसे ही कागज के फूल दिखाई देते हैं। इसी वजह से धर्म की प्रखरता-तेजस्विता मंद पड़ गई है। साधनों के अभाव में धर्म असंभव है।

धर्म की जड़े साधना में हैं। साधना के अभाव में साधु का जीवन या तो मात्र अभिनय हो सकता है या फिर दमन हो सकता है। ये दोनों ही बातें शुभ नहीं हैं। तप-साधना का मिथ्या अभिनय पाखंड है। जबकि कोरा दमन और भी महाघातक है। उसमें संघर्ष की यातना तो है, पर उपलब्धि कुछ भी नहीं। जिसे दबाया जाता है, मरता नहीं, बल्कि और गहरी परतों में सरक जाता है। साधनाविहीन साधु को एक ओर वासना की पीड़ाएँ सताती है; उनकी ज्वालाओं में उसका जीवन तपता-झुलसता रहता है; तृष्णा की दुष्पूर दौड़ उसे हर पल दुःख देती रहती है; दूसरी ओर उसे दमन और आत्म उत्पीड़न की अग्निशिखाएँ जलाती है। एक ओर कुआं है तो दूसरी ओर खाई। सच्चे साधन के बिना इन दोनों में से किसी एक में गिरना ही पड़ता है।

सच्ची साधना न तो भोग में है और न दमन में। यह तो आत्मजागरण में है। इन दोनों अतिओं के द्वंद्व से उबरने और परमेश्वर में स्वयं को विसर्जित करने में है। साधना वेश-विन्यास की विविधता या कौतुक भरे प्रदर्शन का नाम नहीं है। यह नर से नारायण बनने की अंतर्यात्रा है, जो पशु-भाव का दमन करके नहीं, उसे सर्वथा छोड़कर परमात्मा-भाव में प्रतिष्ठित होने में ही संपन्न होती है।

सच्ची साधना का अर्थ किसी को पकड़ना नहीं है, वरन् सारी पकड़ को एक साथ छोड़ना है। सारी अतियों से, सभी द्वंद्वों से ऊपर उठना-उबरना है। इस सच्ची साधना से जो अपनी चेतना की लौ को द्वंद्वों की आँधियों से मुक्त कर लेते हैं, वे उस कुँजी को पा लेते हैं, जिससे सत्य का द्वार खुलता है और तभी वह साधुता प्रकट होती है, जिसकी अलौकिक सुगंध से अनेकों दूसरी सुप्त और मुरझाई आत्माएँ भी जाग्रत होकर मुस्कराने लगती है।

अखण्ड ज्योति जुलाई  (2000)

2 likes 96697 views
Like
Share
Comment



×
Popup Image
❮ ❯
Like Share Link Share Download
Newer Post Home Older Post


View count

None



Archive

Shantikunj, Haridwar

About Shantikunj

Shantikunj has emerged over the years as a unique centre and fountain-head of the global Yug Nirman Yojna—a movement for moral and spiritual regeneration inspired by India’s timeless heritage.

Discover Shantikunj
Discover

Mission

  • Home
  • News & Activities
  • Join Us
  • Contact
Knowledge

Resources

  • Literature
  • Videos & More
  • Audio
  • Quotes & Thoughts

Report website issues at -
websupport@awgp.org

Copyright © 2026 SRI VEDMATA GAYATRI TRUST (TMD). All rights reserved.

Designed by IT Cell Shantikunj