Sunday 20, September 2026
गायत्रीतीर्थ शांतिकुंज, नित्य दर्शन
आज का सद्चिंतन (बोर्ड)
आज का सद्वाक्य
नित्य शांतिकुंज वीडियो दर्शन
अमृतवाणी:- क्या हम भगवान को गलत जगह खोज रहे हैं -पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य
परम् पूज्य गुरुदेव का अमृत संदेश
जिस दिन मुझे गायत्री का पहला चरण इस इस रूप में सिखाया गया कि तू भगवान है और भगवान का बच्चा है। तो मैंने अपने भगवान को देखना और समझना शुरू किया। मेरा भगवान कहां है? मेरा बाप कहां है? मेरा प्रियतम कहां है? मैं उस प्रियतम को देखूंगा। उस प्रियतम को खुश की कोशिश करूंगा। उस प्रथम की सेवा करूंगा। उस परम के साथ साथ खड़ा करूंगा। आंख खोल के जब मैंने मित्रों देखा तब तब वो गीता वाले अर्जुन की आंखें मेरे भीतर लगी हुई थी। गीता वाले अर्जुन को भगवान ने कहा था इस चमड़े की आंख से भगवान को नहीं देखा जा सकता। और चमड़े की आंख से देखने के लिए बहुत दिन से मेरे ख्वाब थे वो तहस-नहस हो गए। मेरा ये ख्याल था बद्री नारायण जाऊंगा और भगवान जी को देख करके आऊंगा। और मेरा यह ख्याल था जगन्नाथ जी को जाऊंगा, भगवान जी को देख करके आऊंगा। और मेरा ये ख्याल था कि मैं उज्जैन जाऊंगा और शंकर भगवान को देख कर के आऊंगा। और जब मेरा ये ख्याल था कि मैं वहां बनारस जाऊंगा और शंकर जी के दर्शन करके आऊंगा और मैं वृंदावन जाऊंगा और श्री कृष्ण भगवान के देख करके आऊंगा। मेरे ख्वाब तहस-नहस हो गए। और मेरे दिमाग में से एक ही चीज विकसित होई कि भगवान भगवान चमड़े की आंख से नहीं देखा जा सकता। और मैंने चमड़े की आंखों से देखने वाले भगवान को केवल ध्यान की एकाग्रता का छोटा वाला माध्यम मात्र। मान लिया। असली भगवान जिसको मैं देखना चाहता था वो कौन सा था? वो अर्जुन को दिखाया गया था। अर्जुन को दिखाया गया था। इस्माइली में दिखाया गया था कि सारे का सारा विश्व ब्रह्मांड देख अर्जुन मेरा ही रूप है। और भगवान ने अपनी मां को यशोदा को एक बार मुंह खोल के दिखाया था कि सारे का सारा विश्व ब्रह्मांड देख यशोदा मेरा ही रूप। और एक बार भगवान राम ने अपना स्वरूप अपनी मां कौशल्या को दिखाया था कि देख मैं मनुष्य तो हूं। लेकिन असली भगवान से ये देखने का हो सारा ब्रह्मांड मेरा ही रूप है।
पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य
अखण्ड-ज्योति से
| Newer Post | Home | Older Post |
