• News
  • Blogs
  • Gurukulam
English हिंदी
  • About Us
    • Gayatri Teerth Shantikunj
    • Patron Founder
    • Mission Vision
    • Present Mentor
    • Blogs & Regional sites
    • DSVV
    • Organization
    • Dr. Chinmay Pandya - Our pioneering youthful representative
    • Our Establishments
  • Initiatives of Mission
    • Spiritual
    • Environment Protection
    • Social Development
    • Education with Wisdom
    • Health
    • Corporate Excellence
    • Disaster Management
    • Training/Shivir/Camps
    • Research
    • Programs / Events
  • Read
    • Books
    • Akhandjyoti Magazine
    • News
    • E-Books
    • Events
    • Gayatri Panchang
    • Motivational Quotes
    • Lecture Summary
  • Spiritual Wisdom
    • Thought Transformation
    • Revival of Rishi Tradition
    • Change of Era - Satyug
    • Yagya
    • Life Management
    • Foundation of New Era
    • Gayatri
    • Indian Culture
    • Scientific Spirituality
    • Self Realization
    • Sacramental Rites
  • Media
    • Social Media
    • Video Gallery
    • Audio Collection
    • Photos Album
    • Pragya Abhiyan
    • Mobile Application
    • Gurukulam
    • News and activities
    • Blogs Posts
    • Live
    • Downloads
    • Yug Pravah Video Magazine
  • Contact Us
    • India Contacts
    • Global Contacts
    • Shantikunj - Headquarters
    • Join us
    • Write to Us
    • Spiritual Guidance FAQ
    • Magazine Subscriptions
    • Shivir @ Shantikunj
    • Contribute Us
  • Login

Media   >   Social Media   >   Daily Update

Wednesday 16, September 2026

×

IMAGE
Image अपडेट
4 likes 55978 views 1 shares
Like
Share
Download
Comment

गायत्रीतीर्थ शांतिकुंज, नित्य दर्शन

गायत्री माता
Image गायत्री माता
10 likes 55953 views 12 shares
Like
Share
Download
Comment
गायत्री माता - अखंड दीपक
Image गायत्री माता - अखंड दीपक
7 likes 55955 views 2 shares
Like
Share
Download
Comment
चरण पादुका
Image चरण पादुका
6 likes 55829 views 1 shares
Like
Share
Download
Comment
चरण पादुका
Image चरण पादुका
6 likes 55681 views 1 shares
Like
Share
Download
Comment
सजल श्रद्धा - प्रखर प्रज्ञा (समाधि स्थल)
Image सजल श्रद्धा - प्रखर प्रज्ञा (समाधि स्थल)
7 likes 55546 views 3 shares
Like
Share
Download
Comment
प्रज्ञेश्वर महादेव - देव संस्कृति विश्वविद्यालय
Image प्रज्ञेश्वर महादेव - देव संस्कृति विश्वविद्यालय
7 likes 55426 views 1 shares
Like
Share
Download
Comment
शिव मंदिर - शांतिकुंज
Image शिव मंदिर - शांतिकुंज
7 likes 55298 views 1 shares
Like
Share
Download
Comment
हनुमान मंदिर - शांतिकुंज
Image हनुमान मंदिर - शांतिकुंज
7 likes 55186 views 1 shares
Like
Share
Download
Comment

आज का सद्चिंतन (बोर्ड)

Image हिंदी बोर्ड
4 likes 56029 views 5 shares
Like
Share
Download
Comment
Image हिंदी बोर्ड
3 likes 55878 views 2 shares
Like
Share
Download
Comment
Image अंग्रेजी बोर्ड
3 likes 55714 views
Like
Share
Download
Comment
Image अंग्रेजी बोर्ड
3 likes 55674 views
Like
Share
Download
Comment

आज का सद्वाक्य

Image हिंदी सद्वाक्य
2 likes 56042 views 5 shares
Like
Share
Download
Comment
Image हिंदी सद्वाक्य
2 likes 55894 views 8 shares
Like
Share
Download
Comment
Image अंग्रेजी सद्वाक्य
2 likes 55719 views 5 shares
Like
Share
Download
Comment
Image अंग्रेजी सद्वाक्य
2 likes 55672 views 6 shares
Like
Share
Download
Comment



नित्य शांतिकुंज वीडियो दर्शन


!! शांतिकुंज दर्शन 16 September 2026 !! गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार !!

5 likes 55660 views
Like
Share
Comment



अमृतवाणी:-जब हर प्राणी में राम दिखाई दें -पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य

3 likes 55758 views
Like
Share
Comment







परम् पूज्य गुरुदेव का अमृत संदेश



 हम रामायण को यदि पढ़ पाते रामायण को पढ़ने की फुर्सत नहीं थी आपके पास पर एक चौपाई जो रामायण की आपको याद हो जाती मैं जानता आप रामायण के असली पढ़ने वाले हैं कौन सी चौपाई एक चौपाई आप याद कर ले जाइए काफी है आपके लिए रामायण पढ़ना सियाराम मय सब जग जानी करहु प्रनाम जोर जुग पानी राममय सारा संसार मैं जोड़ सकता हूं राम को मैं कैसे दूध में पानी मिलाकर के आरारोट की मलाई बनाकर के कैसे खिला दूं मेरे राम को पेट में जमूरा हो गया और मेरे पेट राम के पेट में कुछ हो गया तो मेरे राम मिर्च खरीदने के लिए आया है हल्दी मिला कर कैसे खिला दूँ उसको हल्दी लेने आया है पीली मिट्टी मिलाकर कैसे बेच दूं उसको और जीरा खरीदने आया है यहां मैं उसे गधे के लीद बता के जीरा कैसे बेच दूँ उसको अगर कहा जाएगा तो राम का न जाने क्या खराब हो जाएगा कैसे करूंगा मैं पाप कर सकता हूं क्या पाप में नहीं कर सकता जीवन में यदि जी सकते हो आध्यात्मिकता के सिद्धांतों को गायत्री के सिद्धांतों को जीवन में धारण कर सकते हों हम पाप कर सकते हैं क्या नहीं अपराध अपराध नहीं कर सकते अपराध जिस दिन सुनाई देने लगेगा मजा है हिमालय हिमालय पर चला गया लोगों को देखा वहां घरों में अपनी किवाड़ें खोलकर सब सो रहे थे मैंने पूछा तुम्हारी किवाड़ें खुली पड़ी रह जाती हैं इसमें से रस्सी बांध जाते हैं और रस्सी को कोई भी खोल ले जाएगा चोर तो उन्होंने कहा चोर क्यों खोले जाएगा हमने चोर का क्या बिगाड़ा है हमने कहा चोर का बिगाड़ा थोड़ी जाता है चोर तो चोर होता है उठा ले जाता है कि नहीं ऐसा ऐसा क्यों होगा हम नहीं चुराते तो हमारा क्यों चुरायेगा चोर बार-बार कहता रहा चोर को इल्जाम नहीं होता किसी का भी उठा ले जाता है हमारा ईमान है तो चोर का इमान क्यों नहीं होगा आदमी अपनी ही बहस करते रहे कैसे समझाता उसको समझा नहीं सका चुपचाप चला आया चुपचाप चला आया मित्रों इस तरीके से आदमी किवाड़ खोल जाते चीजों को पटक जाते साइकिल को वहीं बैठ जाते मजा आता कैसी खूबसूरत जिंदगी होती आप को डरने को किसने बताया था आपकी बहन बेटियां खुशी-खुशी से स्कूल कालेज चली जाती कोई छोड़ने वाला ना होता कैसा मजा आता दुनिया में कैसी शानदार जिंदगी जी होती गायत्री की फिलासफी जिसको हम उच्च कोटि की विचारणा कहते हैं बुलाते हुए चले आए बुलाते हुए चले आने का परिणाम विनाश हो रहा है हम समझते हैं कि हमने यह फिलासफी सीख ली और हम सभ्य बन गए हम होशियार बन गए आपने क्या सीख ली अपने आप के लिए तबाही खड़ी कर ली और सारे समाज के लिए तबाही खड़ी कर ली यह तबाहियाँ नष्ट कर रही हैं आपको आपकी उद्देश्य और कौम को यदि यह तबाहियाँ आपके जीवन में ना आती मजा आता और वह मोहब्बत जो यज्ञीय जीवन का वास्तविक मकसद है एक दिन उसे स्वयं कर सके होते तब तब दुनिया कैसी खूबसूरत हो जाती |

पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य 

 

2 likes 55572 views
Like
Share
Comment




अखण्ड-ज्योति से



जिन दिनों भगवान बुद्ध श्रावस्ती में जैतवन में विचरण कर रहे थे, उन्हीं दिनों सुप्पारक तीर्थ में साधु बाहिय दारुचीरिय पर लोगों की श्रद्धा और सम्मान के सुमन चढ़ रहे थे। दारुचीरिय वासना पर विजय पा चुके थे। धन से कोई मोह नहीं रहा था। पर सम्मान को पचा पाना उनके लिए कठिन होता जा रहा था। लोकेषणा को प्रबलतम ऐषणा मानना वस्तुतः शास्त्रकारों की सूक्ष्म दृष्टि का ही परिचायक है। मान और अपमान में समान भाव रख सकना सचमुच बहुत दुष्कर है, उसे कोई विरला योगी ही सिद्ध कर सकता है।

दारुचीरिय जहाँ भी जाते, लोग उनके चरणों पर धन, सम्पत्ति, वस्त्र उपादानों का ढेर लगा देते। यह देख कर उनके मन में वितर्क उठा-अब मेरा योग सिद्ध हो गया और मैं स्वर्ग एवं मुक्ति का अधिकारी हो गया।

इस प्रकार का अहंकार लिए वह आश्रम लौटे। वृद्ध गुरु की तेज आँखों से उनका यह अहं भाव छिपा नहीं रह सका। दारुचीरिय को पास बुलाकर उन्होंने कहा-वत्स! जाओ, समिधाएँ ले आओ। प्रातःकाल के यज्ञ की तैयारी कर लें।

दारुचीरिय ने उपेक्षा से कहा-भगवन्! अब मुझे कर्म करने की आवश्यकता नहीं रही। मैं अर्हत् मार्ग पर आरुढ़ हो चुका हूँ।

यह तो बड़ी प्रसन्नता की बात है—गुरु ने स्नेह-मीलित स्वर में कहा और पूछा, तात! टाप गौतम बुद्ध को तो जानते हैं?

हाँ-हाँ महात्मन्! मैं उन्हें अच्छी तरह जानता हूँ। वे इन दिनों जैतवन में परिव्राजक हैं। उन्होंने भी, अर्थात मार्ग, सिद्ध कर लिया है। मुझे इस बात का पता है।

तब तो एक बार उनके दर्शन अवश्य कर आयें तपस्वी ने धीरे से कहा-सम्भव है उनके सामीप्य से आपके ज्ञान-चक्षु कोई नवीन प्रकाश प्राप्त कर लें।

दारुचीरिय सुप्पारक से चल पड़े और थोड़े ही समय में श्रावस्ती जा पहुंचे। अनाथ पिण्डक के जैतवन में पहुँचने पर बुद्ध तो नहीं मिले, पर वहाँ उनके अनेक शिष्य-भिक्षुगण विचार कर रहे थे। दारुचीरिय ने पूछा—आप लोग बता सकते हैं कि गौतम बुद्ध कहाँ हैं? इस पर एक भिक्षु ने बताया—महानुभाव! वे भिक्षाटन के लिए गए हुए हैं—तीसरे पहर तक लौटेंगे। आप यहीं विश्राम करें।

दारुचीरिय आश्चर्यचकित रह गए। इतने भिक्षुओं के होते हुए भी भगवान बुद्ध को भिक्षाटन की क्या-आवश्यकता पड़ी। अभी चलकर देखता हूँ बात क्या है? यह सोचकर वे श्रावस्ती की ओर चल पड़े। एक सद्गृहस्थ के घर भीख माँगते हुए उनकी भेंट भगवान बुद्ध से ही हो गई। दारुचीरिय ने देखा—उनके मन में न किसी प्रकार का हर्ष है न शोक। विशुद्ध शान्त मन से बैठे भगवान बुद्ध को उसने प्रणाम किया और कहा—भगवन्! मुझे बन्धन मुक्ति का उपदेश करें।

बुद्ध बोले-तात्! यह उचित समय नहीं है। तुम जैतवन चलो, वहीं आकर बातचीत करेंगे।

किन्तु दारुचीरिय ने वही बात फिर दुहराई-भगवान मुझे अनासक्ति का तत्वज्ञान समझाएँ।

जब तक आप ऐसा नहीं करेंगे, मैं यहाँ से नहीं जाऊँगा।

तब तथागत बोले—तात! जो एक बार में केवल एक ही कर्म में इतना तल्लीन हो जाता है कि उसकी दूसरी इन्द्रियों का भाव ही शेष नहीं रह जाता, ऐसा कर्मयोगी ही सच्चा अनासक्त और अर्हत् आरुढ़ है। जिसकी चित्त-वृत्तियाँ एक ही समय में चारों ओर दौड़ती हैं वही आसक्ति में लीन एवं वही संसारे के दुःखों में भ्रमण करता है।

दारुचीरियों को तब अपनी भूल का पता चल गया। वे वहाँ से लौट पड़े। उनकी समग्र भ्रान्तियाँ जाती रहीं और कर्म को पूर्ण तन्मयता तथा आत्म साधना मानकर करने की शिक्षा लेकर लौटे। यही तो बन्धन मुक्ति का राजमार्ग है, जो उन्हें बुद्ध के कर्मयोग का दर्शन कर स्वतः मिल गया।

अखण्ड ज्योति जनवरी  (1988)

1 likes 54682 views 2 shares
Like
Share
Comment



×
Popup Image
❮ ❯
Like Share Link Share Download
Newer Post Home Older Post


View count

None



Archive

Shantikunj, Haridwar

About Shantikunj

Shantikunj has emerged over the years as a unique centre and fountain-head of the global Yug Nirman Yojna—a movement for moral and spiritual regeneration inspired by India’s timeless heritage.

Discover Shantikunj
Discover

Mission

  • Home
  • News & Activities
  • Join Us
  • Contact
Knowledge

Resources

  • Literature
  • Videos & More
  • Audio
  • Quotes & Thoughts

Report website issues at -
websupport@awgp.org

Copyright © 2026 SRI VEDMATA GAYATRI TRUST (TMD). All rights reserved.

Designed by IT Cell Shantikunj