• News
  • Blogs
  • Gurukulam
English हिंदी
  • हमारे बारे में
    • लक्ष्य और उद्देश्य
    • शांतिकुंज आश्रम
    • संरक्षक - संस्थापक
    • वर्तमान संरक्षक
    • ब्लोग्स एवं क्षेत्रीय साइट्स
    • देव संस्कृति विश्वविद्यालय
    • संगठन
    • Dr. Chinmay Pandya - Our pioneering youthful representative
    • हमारे प्रतिष्ठान
  • हमारे प्रयास
    • Spiritual
    • पर्यावरण संरक्षण
    • समाज निर्माण
    • शिक्षा और विद्या
    • Health
    • Corporate Excellence
    • Disaster Management
    • Training/Shivir/Camps
    • Research
    • Programs / Events
  • साहित्य
    • पुस्तकें
    • अखंडज्योति पत्रिका
    • News
    • E-Books
    • Events
    • Gayatri Panchang
    • Geeta Jayanti 2023
    • Motivational Quotes
    • Lecture Summery
  • आध्यात्मिक आधार
    • Thought Transformation
    • Revival of Rishi Tradition
    • नया युग आ रहा है
    • Yagya
    • Life Management
    • Foundation of New Era
    • Indian Culture
    • Scientific Spirituality
    • Gayatri
    • Self Realization
    • सात्विक संस्कार
  • मीडिया संग्रह
    • Social Media
    • Video Gallery
    • Audio Collection
    • Photos Album
    • Pragya Abhiyan
    • Mobile Application
    • Gurukulam
    • News and activities
    • Blogs Posts
    • Live
    • YUG PRAVAH VIDEO MAGAZINE
  • सम्पर्क सूत्र
    • India Contacts
    • Global Contacts
    • शांतिकुंज - मुख्यालय
    • हम से जुड़ें
    • हमें लिखें
    • Spiritual Guidance
    • Magazine Subscriptions
    • Shivir @ Shantikunj
    • Contribute Us
  • Login

मीडिया संग्रह   >   Social Media   >   Daily Update

Monday 18, May 2026

×

VIDEO
अमृतवाणी:- भावी महाभारत | Bhavi Mahabharat | Pt Shriram Sharma Acharya, Rishi Chintan

अमृतवाणी:- भावी महाभारत | Bhavi Mahabharat | Pt Shriram Sharma Acharya, Rishi Chintan

3 likes 11721 views 1 comments
Like
Share
Comment



VIDEO
मोह और प्रेम में फर्क क्या है? Moh Aur Prem Mein Fark Kya Hai? अमृत सन्देश:-  पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य

मोह और प्रेम में फर्क क्या है? Moh Aur Prem Mein Fark Kya Hai? अमृत सन्देश:- पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य

3 likes 11665 views 1 comments
Like
Share
Comment



गायत्रीतीर्थ शांतिकुंज, नित्य दर्शन

गायत्री माता
Image गायत्री माता
5 likes 12301 views 2 comments 4 shares
Like
Share
Download
Comment
गायत्री माता - अखंड दीपक
Image गायत्री माता - अखंड दीपक
5 likes 12356 views 2 comments 2 shares
Like
Share
Download
Comment
गुरुजी माताजी
Image गुरुजी माताजी
4 likes 12264 views 2 comments 2 shares
Like
Share
Download
Comment
चरण पादुका
Image चरण पादुका
4 likes 12218 views 2 comments 2 shares
Like
Share
Download
Comment
सजल श्रद्धा - प्रखर प्रज्ञा (समाधि स्थल)
Image सजल श्रद्धा - प्रखर प्रज्ञा (समाधि स्थल)
4 likes 12181 views 1 comments 2 shares
Like
Share
Download
Comment
प्रज्ञेश्वर महादेव - देव संस्कृति विश्वविद्यालय
Image प्रज्ञेश्वर महादेव - देव संस्कृति विश्वविद्यालय
4 likes 12159 views 2 comments 3 shares
Like
Share
Download
Comment
शिव मंदिर - शांतिकुंज
Image शिव मंदिर - शांतिकुंज
3 likes 12138 views 1 comments 2 shares
Like
Share
Download
Comment
हनुमान मंदिर - शांतिकुंज
Image हनुमान मंदिर - शांतिकुंज
3 likes 12124 views 1 comments 2 shares
Like
Share
Download
Comment

आज का सद्चिंतन (बोर्ड)

Image हिंदी बोर्ड
3 likes 12395 views 1 comments 4 shares
Like
Share
Download
Comment
Image हिंदी बोर्ड
3 likes 12302 views 1 comments 3 shares
Like
Share
Download
Comment
Image अंग्रेजी बोर्ड
2 likes 12251 views 1 comments 1 shares
Like
Share
Download
Comment
Image अंग्रेजी बोर्ड
3 likes 12211 views 1 comments 1 shares
Like
Share
Download
Comment

आज का सद्वाक्य

Image हिंदी सद्वाक्य
2 likes 12422 views 1 comments 7 shares
Like
Share
Download
Comment
Image हिंदी सद्वाक्य
2 likes 12324 views 1 comments 2 shares
Like
Share
Download
Comment
Image अंग्रेजी सद्वाक्य
2 likes 12280 views 1 comments
Like
Share
Download
Comment
Image अंग्रेजी सद्वाक्य
2 likes 12225 views 1 comments
Like
Share
Download
Comment
लेख
Image लेख
4 likes 12413 views 1 comments
Like
Share
Download
Comment



नित्य शांतिकुंज वीडियो दर्शन


!! शांतिकुंज दर्शन 18 May 2026!! गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार !!

4 likes 11812 views 2 comments
Like
Share
Comment



कमाओ, पर अकेले मत खाओ। Kamao, Par Akele Mat Khao. अमृतवाणी: परम पूज्य गुरुदेव पं श्रीराम शर्मा आचार्य

3 likes 11805 views 1 comments
Like
Share
Comment







परम् पूज्य गुरुदेव का अमृत संदेश



जो आप अपने कुटुंब में छोटे से दायरे में इस्तेमाल करते हैं वह बातें वही बातें आपको बड़े दायरे में इस्तेमाल करनी पड़ेगी छोटे दायरे में इस्तेमाल करते हैं ना आपको साढ़े साढ़े आठ सौ रुपये तनख्वाह मिलती है ना तो आप क्या करते हैं आपका कुछ बीवी का खर्च चलता है कुछ बच्चों की पढ़ाई में खर्च होता है कुछ बुड्ढे बाप बीमार है तो उसमें खर्च होता है कुछ छोटा भाई स्कूल में जाता है उसको स्कूल में खर्च होता है कुछ हमारी बहन का शादी में खर्च हो गया था उसका कर्जा झुकाते हैं तो अपने लिए तो खर्च नहीं करते हैं अरे साहब इतना बड़ा अपने लिए क्या खर्च करेंगे साढ़े आठ सौ रुपया अपने लिए खर्च करते हैं नहीं साहब अपने लिए हम कैसे खर्च करेंगे सारे का सारा कुटुंब लिए बैठे हैं हमारी बहन विधवा हो गई है उसको पैसा भेजना पड़ता है और हमारे साले की लड़की का ब्याह है हमारी बीवी कह रही थी इस साले की लड़की में कुछ देना ही पड़ेगा तो उसके लिए एक अंगूठी बनवाने का एक साड़ी साड़ी खरीदने के लिए हमने बचत करना शुरू कर दी है तो आप अकेले नहीं खाते साढ़े आठ सौ अरे हम क्या खाएंगे साढ़े आठ सौ आप कमाते तो हैं आप कमाते हैं तो मुबारक लेकिन खर्च कैसे करेंगे आप खर्च कैसे करेंगे आप अपने लिए कैसे खर्च करेंगे जो आप कुटुंब में जिन सिद्धांतों को लागू करते हैं वही सिद्धांत आपको सारे समाज में लागू करने पड़ेंगे जो आदमी समर्थ हैं जो आदमी योग्य हैं जो आदमी प्रतिभाशाली हैं जो आदमी संपन्न है ठीक है उनकी संपन्नता उनको मुबारक संपन्नता से उनको श्रेय मिलेगा संपन्नता से उनको यश मिलेगा संपन्नता से उनको कीर्ति मिलेगी लेकिन संपन्नता का मतलब कोई यह थोड़ी हो जाएगा कौन सा वाला आप संपन्नता से जो कम आएंगे आप स्वयं खाते रहेंगे आप ऐसे करेंगे क्या आप ऐसे करेंगे जो संपन्नता से कमाते हैं वह स्वयं खाएंगे आपका गला दबोच कर के उल्टी करा ली जाएगी नहीं साहब हम खा जाएंगे अच्छा खा कर दिखा दीजिए अभी तो हम कुछ नहीं कहते आपसे लेकिन अध्यात्म युग आएगा तो उसी तरह का आएगा और साम्यवाद का युग आएगा तभी वही आएगा कैसा आएगा कि आपकी गर्दन दबोच ली जाएगी गर्दन दबोच जाएगी जो अनावश्यक काम में खाया है उसको उलटिए उलटिए उलटिए खाते चले जा रहे हैं पेट में भरते चले जा रहे हैं पेट भरने के लिए जितनी गुंजाइश है उतना भरिए बाकी निकाल दीजिए

3 likes 11316 views 1 comments 1 shares
Like
Share
Comment




अखण्ड-ज्योति से




युगान्तरीय चेतना से परिचित, प्रभावित, प्रशंसक, समर्थक, प्रज्ञा-परिवार को एक कदम आगे बढ़कर अब सघन सहयोग की भूमिका में प्रवेश करना होगा। उन्हें अपना एक विशिष्ट स्तर एवं स्वरूप विनिर्मित करना होगा। समय के परिवर्तन में उनकी भावभरी भूमिका होनी चाहिए। ऐसे भाव-भरी जो उन्हें महामानवों की-युग पुरुषों की-पंक्ति में खड़ा कर दे। ऐसी भावभरी जिसमें त्याग, बलिदान और सेवा साधना का गहरा पुट हो। जो विचार समर्थन से आगे बढ़कर कर्मभूमि में उतरे और एक कुछ करे जिससे समूचे संपर्क क्षेत्र को नव जीवन मिले। ऐसा नव जीवन जिसे उपलब्ध करने वाले कृत-कृत्य होकर रहें और कृतज्ञतापूर्वक अगणित पीढ़ियों तक स्मरण, नमन, वन्दन करते रहें।

बात दूसरे स्तर के साहस भर की है। मानव जीवन दुस्साहसियों से भरा है। इसमें पग-पग पर जोखिम है। त्याग और संयम की विवशता भी बनी ही रहती हैं। इच्छा से नहीं, अनिच्छा से प्रकृति प्रेरणा से करना तो वही पड़ता है। प्रश्न इतना भर है कि क्या वह सब ढर्रे से बाधित होकर करने की अपेक्षा विवेकपूर्वक, अन्तः प्रेरणा से, आदर्शों के निमित्त किया जा सकता है क्या? बाधित होकर या स्वेच्छा पूर्वक-व्यामोह के दबाव से या विवेक भरे उत्साह से चयन इन्हीं दो में से एक का काम करना पड़ता है। जोखिम दोनों में समान है। न चाहने पर भी जो करने के लिए प्रकृति बाधित करती है उसी को यदि अन्तः प्रेरणा से आपत्तिकालीन युग धर्म की पुकार पूरी करने के लिए किया जा सके तो एक शब्द में उसे विवेक भरी साहसिकता और मानवी गरिमा को गौरवान्वित करने वाली साहसिकता ही कहा जाएगा। समय आ गया कि इस परीक्षा की घड़ी में अपने चयन चुनाव में राजहंसों जैसी उत्कृष्टता का परिचय देना होगा। इस विषम बेला में उन्हें प्रेय का नहीं श्रेय का वरण करना चाहिए।

मनुष्य कमाता बहुत हैं, पर प्रकृति उसमें से थोड़ा-सा ही खाने की छूट देती है। चार रोटी ही पेट में प्रवेश कर पाती हैं। चाहने पर भी कोई अधिक उदरस्थ नहीं कर सकता। तन ढकने के वस्त्र, सोने का बिस्तर औसत लम्बाई से अधिक के प्रयुक्त नहीं हो सकते। जो खाया खर्चा उसके उपरान्त का बचत भाग किन्हीं दूसरों के लिए छोड़ना ही पड़ता है। मरने के बाद तो सिकन्दर कुछ न ले जा सका और ताबूत से बाहर खुले हाथ निकलवा कर ऐसे ही रोता-कलपता चला गया। प्रश्न इतना भर है कि उस बचत की अनावश्यक रूप से कुटुम्बियों पर ही लादा जाय या उस स्वाति-बूँद की तरह असंख्य प्यासों पर बरसा दिया जाय? चुना किसे गया इसी में अपनी सूझ-बूझ है। स्वयं के लिए तो सीमित उपयोग ही सम्भव है। यह समय साधना यह उदारता, अपनाने के लिए प्रकृति ने हर किसी को बाधित किया हैं बात इतनी भर है कि व्यामोह की जकड़न ही सब कुछ रही, या आदर्शवादी विवेकशीलता अपनाने वाली आत्म प्रेरणा से भी कुछ करते-धरते न बन पड़ा।

यह सोचना मात्र भ्रम है कि आदर्शवादी गतिविधियों में भाग लेने से-परमार्थ प्रयोजनों में सहयोग करने से घाटा पड़ता है और घर वालों की सुविधा में कमी पड़ती है। इस चिन्तन के पीछे मिथ्या और डर मात्र है। महामानवों में से प्रत्येक की जीवनचर्या पर गम्भीरतापूर्वक दृष्टिपात करने से एक ही निष्कर्ष निकलता है कि ढर्रा बदलते समय की थोड़ी-सी असुविधा के अतिरिक्त उनमें से किसी को भी घाटे में नहीं रहना पड़ा। बुद्ध ने क्या खोया? गाँधी को कितना घाटा पड़ा? शंकराचार्य, चाणक्य आदि अन्यान्यों की तरह गोरख धन्धे में उलझे रहने को बुद्धिमानी और आदर्शवादी साहस अपनाने की मूर्खता माने बैठे रहते तो उनकी गणना पेट प्रजनन के कोल्हू में पिलने वाले नर पामरों से अधिक न रही होती। दुनियादार कबीर, नानक दादू, रैदास, ज्ञानेश्वर, चैतन्य, वह न बन सके होते जो कृपणता का परित्याग करने के उपरान्त बन गये।

 परम पूज्य गुरुदेव पं श्रीराम शर्मा आचार्य 
 अखण्ड ज्योति 1982 अक्टूबर

2 likes 11547 views 1 comments
Like
Share
Comment



×
Popup Image
❮ ❯
Like Share Link Share Download
Newer Post Home Older Post


View count

193455980



Archive

About Shantikunj

Shantikunj has emerged over the years as a unique center and fountain-head of a global movement of Yug Nirman Yojna (Movement for the Reconstruction of the Era) for moral-spiritual regeneration in the light of hoary Indian heritage.

Navigation Links
  • Home
  • Literature
  • News and Activities
  • Quotes and Thoughts
  • Videos and more
  • Audio
  • Join Us
  • Contact
Write to us

Click below and write to us your commenct and input.

Go

Copyright © SRI VEDMATA GAYATRI TRUST (TMD). All rights reserved. | Design by IT Cell Shantikunj