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Magazine - Year 1941 - Version 2

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गरीब की हाय

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(श्री मंगलचंद भीण्डारी “मंगल” अजमेर)

एक राजा ने किसी विद्वान से पूछा कि “दुष्ट लोग जल्दी क्यों मर जाते हैं? और सज्जन पुरुष चिरकाल तक क्यों जीवित रहते हैं”? विद्वान इसका उत्तर तो अच्छी तरह जानता था, लेकिन फिर भी उसने उत्तर राजा को उस समय न बतला कर तीन माह की अवधि माँगी ! राजा ने तीन माह की अवधि दे दी।

बड़ी उत्सुकता और प्रतिक्षा के बाद तीन माह पूरे हुये। सारी प्रजा भी इस विचित्र प्रश्न का उत्तर सुनने को उत्सुक थी ! नियत समय पर विद्वान भी उपस्थित हुआ। वहाँ आकर उसने एक लम्बी साँस ली, बड़े दुःख के साथ कहा श्रीमान् ! मैं आप के इस प्रश्न का उत्तर किसी जंगल में दूँगा ! अतः आपको 500 सैनिक साथ ले चलना होगा? राजा तो प्रश्न का उत्तर चाहता था, इसलिये विद्वान के कथानुसार जाने की भी तैयारी प्रारम्भ कर दी।

राजा ने बाहर जाने के लिये विशेष रूप से प्रबन्ध किया। 500 सिपाहियों को शस्त्र सहित तैयार होने की आज्ञा दे दी। मन्त्री को खास तौर से हिदायत कर दी की जब तक लौट कर मैं वापिस न आऊं, तब तक राजकाज बड़ी सावधानी से चलाना ! प्रजा की भलाई का सदैव खयाल रखना प्रजा को तकलीफ न हो! आदि प्रजा के हित की अनेक बातें समझा-बुझा कर राजा ने प्रस्थान किया।

सारे दिन चलते-चलते एक घने जंगल में पहुँचे, जहाँ आदमी का नाम निशान तक न था। पक्षियों की बोली भी कम ही सुनाई पड़ती थी ! ऐसी जगह पहुँच कर विद्वान् ने राजा से कहा-श्रीमान यहीं पर ठहरना ठीक होगा राजा ने सैनिकों को वहीं ठहरने की आज्ञा दी सैनिक लोग वहीं ठहर गये। कुछ ही देर में 500 सैनिकों की सहायता से वहाँ पर तम्बू बंध गये ! भोजन करने के पश्चात् दिन भर के थके सैनिक विश्राम करने लगे ! सोते ही सब को नींद आ गई।

सबेरे नित्य कर्म से निवृत्त हो सबने फिर भोजन किया और पश्चात् महाराज के आदेश की प्रतीक्षा करने लगे। विद्वान ने बड़ी गम्भीरता पूर्वक दुःख प्रकट करते हुए कहा श्रीमान् ! मैंने सोचा था कि बाहर आकर मैं आपके प्रश्न का उत्तर सुगमतापूर्वक दे सकूँगा, लेकिन यहाँ पर फिर एक विघ्न उपस्थित हो गया है? यह सामने वाला बरगद का पेड़ इस विघ्न का खास कारण है ! अतः यह पेड़ जब तक जड़-सहित अपने आप न गिर जाय तब तक मैं अपना उत्तर नहीं बता सकता ! इसलिये अच्छा हो आप अपने 500 सैनिकों को उस बरगद की देख-रेख में तैनात कर दें।

राजा की पहले तो ऐसा करने के लिये इच्छा न हुई, लेकिन फिर कुछ सोचने के पश्चात् उन्होंने इस कठिन कार्य को भी करना मंजूर कर लिया ! राजा ने जब यह प्रस्ताव मंजूर कर लिया तब विद्वान ने कहा महाराज सैनिकों को तैनात करने के पूर्व उनसे आप यह भी सख्ती कर दीजिये कि जब तक वह पेड़ न सूख जाय तब तक कोई भी वहाँ से न हटे ! और एक बात की हिदायत यह भी कर दीजिये कि कोई सैनिक भूल कर भी उस पेड़ को नष्ट करने के लिये, उस पर शस्त्र का प्रयोग न करे ! महाराज ने विद्वान के कथनानुसार सब करवा दिया ! 500 सैनिक उस पेड़ की देख-रेख में लग गये ! महाराज स्वयम् भी उस पेड़ के सूखने की राह देखने लगे।

एक दो दिन तो जैसे-तैसे बीत गये! लेकिन फिर सैनिकों का हाल बुरा हो गया ! ज्येष्ठ की लू से सब घबरा गये! पीने को पानी भी बड़ी कठिनता से प्राप्त होता था ! सारे दिन धूप में चने की भाँति सिक जाते थे। 500 जवान केवल घबरा ही न गये थे, बल्कि बड़े व्याकुल हो गये थे ! लेकिन करते क्या?

हाय! हाय पेड़ कब सूखेगा? कब हम अपने घर जाकर अपने बाल बच्चों को संभालेंगे? बस सोते, जागते, खाते, पीते, उठते, बैठते, बोलते उनके मुँह से यही हाय ! के शब्द निकलते थे ! इस तरह 500 जवान उस पेड़ के लिये हृदय से दुखी थे।

किसे विश्वास था कि यह सैकड़ों वर्षों में गिरने वाला पेड़ जल्दी ही सूख कर गिर जायेगा, लेकिन यह क्या? तीन मास भी न हुए और पेड़ के तमाम पत्ते एक-एक करके झड़ गये! अब था तो सिर्फ पत्तों रहित पेड़। सब को कुछ आशा बंधी ! पूरे 6 माह भी समाप्त न हुए कि वह पेड़ जड़ सहित जमीन पर गिर गया।

सबकी खुशी का पार न रहा ! घर जाने के लिये कई दिनों से लालायित सिपाहियों की इच्छा पूर्ण हुई। खुशी के मारे उछलते कूदते एक सिपाही ने यह सन्देश राजा को भी सुना दिया कि-श्रीमान बरगद का पेड़ अपने आप जड़ सहित गिर पड़ा है? राजा और विद्वान बड़ी उत्सुकता पूर्वक देखने आये ! यह सब देख कर विद्वान ने सैनिकों से पूछा-तुमने इस हजारों वर्ष में नष्ट होने वाले पेड़ को कैसे गिरा दिया है? क्या तुमने किसी शस्त्र की सहायता से ऐसा किया है। वे सब डरते-डरते बोले, महाराज यह तो अपने आप गिर पड़ा है। हमने कोई शस्त्र का प्रयोग नहीं किया है। हमने सोते जागते इतनी विनती प्रभु से अवश्य की है कि हाय! यह पेड़ कब सूखे? और कब हम अपने घर जाएं?

तब विद्वान ने कहा राजन् ! जिस प्रकार यह हजारों वर्ष में नष्ट होने वाला पेड़ 500 जवानों की ‘हाय’ खाकर अपने आप ही जड़ सहित गिर पड़ा है, उसी तरह आदमी भी अनेकों की हाय खाकर अपने आप ही मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं ! राजा ने कभी भी इस प्रश्न पर विचार न किया था कि “हाय क्या है?” आज यह अच्छी तरह समझ गया कि हाय से कौन सी चीज नाश को प्राप्त नहीं हो सकती?

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