चैत्र नवरात्रि की मंगलकामनाएँ
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आत्मीय परिजनो ,,
नये विक्रम संवत् के शुभारम्भ पर आप सभी को बहुत- बहुत मंगल कामनाएँ ।।
आप सभी अपने जीवन के सभी क्षेत्रों में सफल हों और नित नई ऊँचाइयों को छूते हुए अपने चरम लक्ष्य को प्राप्त करें, ऐसी हमारी गुरुसत्ता से प्रार्थना है ।।
परम पूज्य गुरुदेव के अनुसार सफलता चाहे भौतिक क्षेत्र की हो या आध्यात्मिक क्षेत्र की , उसके पीछे अपनी आत्मशक्ति का जागरण ही मुख्य भूमिका निभाता है ।। जिसकी यह आत्मशक्ति जितनी बढ़ी- चढ़ी होगी, वह उतने ही अर्थों में सफल होता चला जायेगा ।।
इसी आत्मशक्ति को जाग्रत करने का विशिष्ट मुहूर्त चैत्र शुक्ल नवरात्रि, हमारे समक्ष आ गया है ।। नवरात्रि के इन नौ दिनों की अपनी विशिष्टता एवं महत्ता है ।। संधिकाल के इन नौ दिनों में ब्रह्मांडीय चेतना का प्रवाह सघन होता है और इस तथ्य से परिचित परिजन उस चैतन्य प्रवाह को विशिष्ट साधना के द्वारा आकर्षित कर अपने व्यक्तित्व को प्रतिभा सम्पन्न बनाते हैं ।।
हमें विश्वास है कि आप भी इस महत्त्वपूर्ण अवसर का लाभ उठाकर किसी न किसी रूप में आध्यात्मिक उपचारों के माध्यम से इस चेतन प्रवाह से सम्पर्क बनाये रखेंगे ।। हमारी गुरुसत्ता ने इन विशिष्ट दिनों में 24 हजार गायत्री मंत्र के अनुष्ठान का विशेष क्रम बताया है ।।
इस ब्रह्मांडीय ऊर्जा को धारण एवं ग्रहण करने के लिए उपवास ब्रह्मचर्य, विलासिता का त्याग जैसे अनुशासन व संयम के पालन की भी अनिवार्य आवश्यकताएँ हैं ताकि वह ऊर्जा अनायास ही न बिखर जाये और हमारी चेतना उससे परिष्कृत, परिमार्जित एवं परिवर्धित हो सके ।।
संकल्प एवं श्रद्धा के साथ की गई आपकी यह साधना गायत्री महाशक्ति एवं गुरुसत्ता के अजस्र अनुदानों को बरसाने वाली सिद्ध हो, ऐसी मंगल कामनाएँ ।।
आपका भाई आपकी बहिन
( डा. प्रणव पण्ड्या ) ( शैलबाला पण्ड्या )
नये विक्रम संवत् के शुभारम्भ पर आप सभी को बहुत- बहुत मंगल कामनाएँ ।।
आप सभी अपने जीवन के सभी क्षेत्रों में सफल हों और नित नई ऊँचाइयों को छूते हुए अपने चरम लक्ष्य को प्राप्त करें, ऐसी हमारी गुरुसत्ता से प्रार्थना है ।।
परम पूज्य गुरुदेव के अनुसार सफलता चाहे भौतिक क्षेत्र की हो या आध्यात्मिक क्षेत्र की , उसके पीछे अपनी आत्मशक्ति का जागरण ही मुख्य भूमिका निभाता है ।। जिसकी यह आत्मशक्ति जितनी बढ़ी- चढ़ी होगी, वह उतने ही अर्थों में सफल होता चला जायेगा ।।
इसी आत्मशक्ति को जाग्रत करने का विशिष्ट मुहूर्त चैत्र शुक्ल नवरात्रि, हमारे समक्ष आ गया है ।। नवरात्रि के इन नौ दिनों की अपनी विशिष्टता एवं महत्ता है ।। संधिकाल के इन नौ दिनों में ब्रह्मांडीय चेतना का प्रवाह सघन होता है और इस तथ्य से परिचित परिजन उस चैतन्य प्रवाह को विशिष्ट साधना के द्वारा आकर्षित कर अपने व्यक्तित्व को प्रतिभा सम्पन्न बनाते हैं ।।
हमें विश्वास है कि आप भी इस महत्त्वपूर्ण अवसर का लाभ उठाकर किसी न किसी रूप में आध्यात्मिक उपचारों के माध्यम से इस चेतन प्रवाह से सम्पर्क बनाये रखेंगे ।। हमारी गुरुसत्ता ने इन विशिष्ट दिनों में 24 हजार गायत्री मंत्र के अनुष्ठान का विशेष क्रम बताया है ।।
इस ब्रह्मांडीय ऊर्जा को धारण एवं ग्रहण करने के लिए उपवास ब्रह्मचर्य, विलासिता का त्याग जैसे अनुशासन व संयम के पालन की भी अनिवार्य आवश्यकताएँ हैं ताकि वह ऊर्जा अनायास ही न बिखर जाये और हमारी चेतना उससे परिष्कृत, परिमार्जित एवं परिवर्धित हो सके ।।
संकल्प एवं श्रद्धा के साथ की गई आपकी यह साधना गायत्री महाशक्ति एवं गुरुसत्ता के अजस्र अनुदानों को बरसाने वाली सिद्ध हो, ऐसी मंगल कामनाएँ ।।
आपका भाई आपकी बहिन
( डा. प्रणव पण्ड्या ) ( शैलबाला पण्ड्या )

