• News
  • Blogs
  • Gurukulam
English हिंदी
  • About Us
    • Mission Vision
    • Patron Founder
    • Gayatri Teerth Shantikunj
    • Present Mentor
    • Blogs & Regional sites
    • DSVV
    • Organization
    • Dr. Chinmay Pandya - Our pioneering youthful representative
    • Our Establishments
  • Initiatives
    • Spiritual
    • Environment Protection
    • Social Development
    • Education with Wisdom
    • Health
    • Corporate Excellence
    • Disaster Management
    • Training/Shivir/Camps
    • Research
    • Programs / Events
  • Read
    • Books
    • Akhandjyoti Magazine
    • News
    • E-Books
    • Events
    • Gayatri Panchang
    • Geeta Jayanti 2023
    • Motivational Quotes
    • Lecture Summery
  • Spiritual WIsdom
    • Thought Transformation
    • Revival of Rishi Tradition
    • Change of Era - Satyug
    • Yagya
    • Life Management
    • Foundation of New Era
    • Gayatri
    • Indian Culture
    • Scientific Spirituality
    • Self Realization
    • Sacramental Rites
  • Media
    • Social Media
    • Video Gallery
    • Audio Collection
    • Photos Album
    • Pragya Abhiyan
    • Mobile Application
    • Gurukulam
    • News and activities
    • Blogs Posts
    • Live
    • Yug Pravah Video Magazine
  • Contact Us
    • India Contacts
    • Global Contacts
    • Shantikunj - Headquarter
    • Join us
    • Write to Us
    • Spiritual Guidance FAQ
    • Magazine Subscriptions
    • Shivir @ Shantikunj
    • Contribute Us
  • Login

Media   >   Social Media   >   Daily Update

Wednesday 01, January 2025

×

POST

प्रिय दर्शन मनुष्य का श्रेष्ठ सद्गुण है। औरों में अच्छाइयाँ देखने से अपने सद्गुणों का विकास होता है। वह कहना कि दूसरे ही निरे दोषी हैं, अनुचित बात है। संसार में हर किसी में कोई न कोई सद्गुण अवश्य होता है। किसी में सफाई अधिक है, कोई ईमानदार है, कोई नेक-चलन, कोई अच्छा वक्ता है, कोई संगीतज्ञ है। आत्मीयता, उदारता, साहस, नैतिकता, श्रमशीलता जैसे सदाचारों में से कोई न कोई संपत्ति हर किसी के पास मिलेगी।*

*इन्हें ढूँढ़ने का प्रयास करें, उनके सत्परिणामों पर ध्यान दें तो अपना भी जी करता है कि हम भी वैसा ही करें। आत्म विकास का क्रम यही है। दूसरों की अच्छाइयों का अनुकरण करना मनुष्य को आगे बढ़ाता और ऊँचा उठाता है। मानव से महामानव बनने की पद्धति यही है कि छिद्रान्वेषण के स्वभाव को त्याग कर प्रत्येक व्यक्ति में जो भी अच्छाइयाँ दिखाई दें उनकी प्रशंसा करें और स्वयं भी वैसा ही बनने का प्रयत्न 
जिस प्रकार हम दूसरे व्यक्तियों के सत्कर्मों से प्रेरणा लेते हैं,

 उसी प्रकार अपने दोष दुर्गुणों को ढूँढ़ने और निकाल कर बाहर कर देने से आत्म-शोषण की प्रक्रिया और भी तीव्र होती है। प्रत्येक व्यक्ति की अपनी भिन्न-भिन्न कठिनाइयाँ होती हैं। हो सकता है कोई अमीर हो, कोई चिड़चिड़ा हो, कोई ईर्ष्यालु अथवा अर्थलोलुप हो। जब इन कठिनाइयों, विकारों की खोजबीन कर लें तो उन पर शान्तिपूर्वक नियन्त्रण का प्रयास करना चाहिये।*
 
मान लीजिये किसी में चिड़चिड़ापन अधिक है, बात-बात में 
उत्तेजित हो जाता है। अपनी भूल समझता भी है पर यह मान बैठता है, कि यह दोष उसके स्वभाव का अंग है। यह उससे छूटना सम्भव नहीं। ऐसी निराशा सर्वथा अनुपयुक्त है। मनुष्य चाहे तो अपने स्वभाव को थोड़ा प्रयत्न करके आसानी से सुधार सकता है। हमें अपना स्वभाव और दृष्टिकोण संघर्षमय न बनाकर रचनात्मक बनाना चाहिए। सड़क पर चलते हैं तो कंकड़ चुभेंगे ही किन्तु पैरों में जूते पहन लेते हैं तो चलते रहने की क्रिया में अन्तर भी नहीं पड़ता और आत्म-रक्षा भी हो जाती है।*

*.....क्रमशः जारी*
पं श्रीराम शर्मा आचार्य*
 अखण्ड ज्योति जुलाई 1964 पृष्ठ 41*

17130 views 1 shares
Like
Share
Comment



VIDEO
डॉ. चिन्मय पंड्या जी का राजस्थान प्रवास (22-28 दिसंबर 2024): आध्यात्मिक प्रेरणा का संचार*

डॉ. चिन्मय पंड्या जी का राजस्थान प्रवास (22-28 दिसंबर 2024): आध्यात्मिक प्रेरणा का संचार*

1 likes 17400 views
Like
Share
Comment



VIDEO
VID-20250101-WA0201.mp4

VID-20250101-WA0201.mp4

17605 views 1 shares
Like
Share
Comment



VIDEO
VID-20250101-WA0202.mp4

VID-20250101-WA0202.mp4

17553 views 1 shares
Like
Share
Comment



IMAGE
Image अपडेट
15 likes 43297 views 26 shares
Like
Share
Download
Comment
VIDEO
कैलेंडर नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं

कैलेंडर नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं

12 likes 44301 views 5 shares
Like
Share
Comment



VIDEO
युगतीर्थ शांतिकुंज हरिद्वार की ओर से कैलेंडर नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं

युगतीर्थ शांतिकुंज हरिद्वार की ओर से कैलेंडर नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं

15 likes 44131 views 1 shares
Like
Share
Comment



VIDEO
Heartiest greetings of New Year from Gayatritirth Shantikunj Haridwar

Heartiest greetings of New Year from Gayatritirth Shantikunj Haridwar

16 likes 43981 views 1 comments 6 shares
Like
Share
Comment



VIDEO
 आध्यात्मिक उपासना का लाभ | Adhyatmik Upasana Ke Labh |

आध्यात्मिक उपासना का लाभ | Adhyatmik Upasana Ke Labh |

12 likes 43837 views 2 shares
Like
Share
Comment



VIDEO
समय की बर्बादी और उसके खतरनाक परिणाम | Samay Ki Barbadi Aur Uske Khtarknak Parinam

समय की बर्बादी और उसके खतरनाक परिणाम | Samay Ki Barbadi Aur Uske Khtarknak Parinam

9 likes 43696 views 3 shares
Like
Share
Comment



गायत्रीतीर्थ शांतिकुंज, नित्य दर्शन

गायत्री माता
Image गायत्री माता
29 likes 45428 views 1 comments 68 shares
Like
Share
Download
Comment
गायत्री माता - अखंड दीपक
Image गायत्री माता - अखंड दीपक
19 likes 45291 views 1 comments 23 shares
Like
Share
Download
Comment
चरण पादुका
Image चरण पादुका
20 likes 45119 views 1 comments 7 shares
Like
Share
Download
Comment
चरण पादुका
Image चरण पादुका
17 likes 44684 views 1 comments 9 shares
Like
Share
Download
Comment
सजल श्रद्धा - प्रखर प्रज्ञा (समाधि स्थल)
Image सजल श्रद्धा - प्रखर प्रज्ञा (समाधि स्थल)
19 likes 44894 views 14 shares
Like
Share
Download
Comment
प्रज्ञेश्वर महादेव - देव संस्कृति विश्वविद्यालय
Image प्रज्ञेश्वर महादेव - देव संस्कृति विश्वविद्यालय
19 likes 44672 views 22 shares
Like
Share
Download
Comment
शिव मंदिर - शांतिकुंज
Image शिव मंदिर - शांतिकुंज
16 likes 44710 views 7 shares
Like
Share
Download
Comment
हनुमान मंदिर - शांतिकुंज
Image हनुमान मंदिर - शांतिकुंज
16 likes 44510 views 12 shares
Like
Share
Download
Comment

आज का सद्चिंतन (बोर्ड)

Image हिंदी बोर्ड
11 likes 45192 views 28 shares
Like
Share
Download
Comment
Image हिंदी बोर्ड
13 likes 45018 views 21 shares
Like
Share
Download
Comment
Image अंग्रेजी बोर्ड
5 likes 44880 views 8 shares
Like
Share
Download
Comment
Image अंग्रेजी बोर्ड
4 likes 44810 views 11 shares
Like
Share
Download
Comment

आज का सद्वाक्य

Image हिंदी सद्वाक्य
11 likes 44986 views 26 shares
Like
Share
Download
Comment
Image हिंदी सद्वाक्य
9 likes 44819 views 15 shares
Like
Share
Download
Comment
Image अंग्रेजी सद्वाक्य
5 likes 44700 views 12 shares
Like
Share
Download
Comment
Image अंग्रेजी सद्वाक्य
5 likes 44592 views 14 shares
Like
Share
Download
Comment



नित्य शांतिकुंज वीडियो दर्शन


!! आज के दिव्य दर्शन 01 January 2025 !! !! गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार !!

11 likes 44819 views 10 shares
Like
Share
Comment



!! परम पूज्य गुरुदेव पं श्रीराम शर्मा आचार्य जी का अमृत सन्देश !!

7 likes 44780 views 4 shares
Like
Share
Comment







परम् पूज्य गुरुदेव का अमृत संदेश



आज आदमी इतना दुखी है किसकी वजह से ज्ञान के अभाव की वजह से उस ज्ञान के अभाव की आवश्यकता को आपको पूरा करना है तो हम कैसे करेंगे विद्वान नहीं है आप विद्वान तो नहीं है पर हम तो विद्वान हैं हमारी आवाज नहीं है हम तो अंधे और पंगे की तरीके से हमारे साथ मिल मिल जाइए ना पंगे की टांगे नहीं थी और अंधे की आंखें नहीं थी दोनों ने एक दूसरे का सहयोग मिला लिया और सहयोग मिला करके नदी पार कर ली हमारा गुरु हमारा गुरु पंगा है चल नहीं सकता है हिमालय रहता है और उसके ऊपर बंधन लगे हुए हैं हिमालय की सीमा पर है बाहर नहीं जाने पावें सूक्ष्म शरीर क्तही धारण करके रहे धारण करने पावें उसके अंदर जो अभाव थे वह हमने पूरे किए अपना शरीर अपनी वाणी अपना मन हमने दिया है प्रत्यक्ष स्थूल हम हैं और सूक्ष्म हमारा गुरु है सूक्ष्मा हमको बनने दीजिए और स्थूल आप बन जाइए आप लाउडस्पीकर बन जाइए व्याख्यान हम देंगे 

पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य 

9 likes 44375 views 3 shares
Like
Share
Comment




अखण्ड-ज्योति से



तादात्म्य अर्थात् भक्त और इष्ट की अंतःस्थिति का समन्वय एकीकरण। दूसरे शब्दों में ईश्वरीय अनुशासन के अनुरूप जीवनचर्या का निर्धारण। परब्रह्म तो अचिन्त्य है पर उपासना जिस परमात्मा की की जाती है वह आत्मा का ही परिष्कृत रूप है। वेदान्त दर्शन से सोऽहम्, शिवोऽहम्, तत्त्वमसि, अयमात्मा, ब्रह्म आदि शब्दों में अन्तःचेतना के उच्चस्तरीय विशिष्टताओं से भरे- पूरे उत्कृष्टताओं के समुच्चय को ही परमात्मा कहा गया है, उसके साथ ही मिलन का, तादात्म्य का स्वरूप तभी बनता है जब दोनों के मध्य एकता एकात्मता स्थापित हो।

इसके लिए साधक अपने आपको कठपुतली की स्थिति में रखता है और अपने अवयवों में बंधे धागों को बाजीगर के हाथों सौंप देता है। दर्शकों को मन्त्र मुग्ध कर देने वाला खेल इस स्थापना के बिना बनता ही नहीं। आत्मा को परमात्मा की उच्चस्तरीय प्रेरणाएँ अपनाने और तदनुरूप जीवनचर्या बनाने पर ही उपासना का समग्र लाभ मिलता है।

लकड़ी और अग्नि की समीपता का प्रतिफल प्रत्यक्ष है। गीली लकड़ी आग के समीप पहुँचते- पहुँचते अपनी नमी गँवाती और उस ऊर्जा से अनुप्राणित होती चली जाती है। जब वह अति निकट पहुँचती है तो फिर आग और लकड़ी एक स्वरूप जैसे हो जाते हैं। साधक को भी ऐसा ही भाव समर्पण करके ईश्वरीय अनुशासन के साथ अपने आपको एक रूप बनाना पड़ता है। चन्दन के समीप वाली झाड़ियों का सुगन्धित हो जाना, स्वाति बूँद के संयोग से सीप में मोती पैदा होना, पारस छूकर लोहे का स्वर्ण बनना, नाले का गंगा में मिलकर गंगाजल बनना, पानी का दूध में मिलकर उसी भाव बिकना, बूँद का समुद्र में मिलकर सुविस्तृत हो जाना जैसे अगणित उदाहरण हैं, जिनके आधार पर यह जाना जा सकता है कि भक्त और भगवान की एकता उपासना का स्तर क्या होना चाहिए। सृष्टि के आदि से अद्यावधि सच्चे भक्तों में से प्रत्येक को ईश्वर के शरणागत होना पड़ा है। आत्म समर्पण का साहस जुटाना पड़ा है।

इसका व्यावहारिक स्वरूप है ईश्वरीय अनुशासन को, उत्कृष्ट चिन्तन एवं आदर्श कर्तृत्व को अपनी विचारणा एवं कार्यपद्धति से अनुप्राणित करना। जो इस तत्व दर्शन को जानते, मानते और व्यवहार में उतारते रहे हैं उन सच्चे ईश्वर भक्तों को सुनिश्चित रूप से वे लाभ मिले हैं, जिन्हें उपासना की फल श्रुतियों के रूप में कहा जाता रहा है। पत्नी- पति को आत्म समर्पण करती है। अर्थात उसकी मर्जी पर चलने के लिए अपनी मनोभूमि एवं क्रिया पद्धति को मोड़ती चली जाती है। इस आत्म समर्पण के बदले वह पति के वंश, गोत्र, यश, वैभव की उत्तराधिकारिणी ही नहीं अर्धांगिनी भी बन जाती है। समर्पण विहीन कर्मकाण्ड तो एक प्रकार का वेश्या व्यवसाय या चिन्ह पूजा जैसा निर्जीव ढकोसला ही माना जाएगा। भक्त भगवान के अनुरूप चलता चला जाता है और अन्ततः नर नारायण, पुरुष- पुरुषोत्तम, भक्त भगवान की एक रूपता का स्वयं प्रमाण बनता है। देवात्माओं में परमात्मा स्तर की क्षमतायें ही उत्पन्न हो जाती हैं। इन्हें ही ऋद्धि- सिद्धियाँ कहते हैं।

.... क्रमशः जारी
पं श्रीराम शर्मा आचार्य

6 likes 44599 views 2 shares
Like
Share
Comment



×
Popup Image
❮ ❯
Like Share Link Share Download
Newer Post Home Older Post


View count

182858664



Archive

About Shantikunj

Shantikunj has emerged over the years as a unique center and fountain-head of a global movement of Yug Nirman Yojna (Movement for the Reconstruction of the Era) for moral-spiritual regeneration in the light of hoary Indian heritage.

Navigation Links
  • Home
  • Literature
  • News and Activities
  • Quotes and Thoughts
  • Videos and more
  • Audio
  • Join Us
  • Contact
Write to us

Click below and write to us your commenct and input.

Go

Copyright © SRI VEDMATA GAYATRI TRUST (TMD). All rights reserved. | Design by IT Cell Shantikunj