Friday 22, May 2026
24 बार गायत्री महामंत्र गुरुदेव पं श्रीराम शर्मा आचार्य जी के स्वर में | 24 Time Gayatri Mantra
रात्रि सोने से पूर्व प्रार्थना | विधाता तू हमारा है, तू ही विज्ञान दाता है | Vidhata Tu Hamara Hai
अमृत सन्देश:- संघर्ष से निखरता इंसान। Rise Through Struggle
अमृतवाणी:- युग निर्माण आन्दोलन का उद्देश्य | Yug Nirmaan Andolan Ka Uddeshay
गायत्रीतीर्थ शांतिकुंज, नित्य दर्शन
आज का सद्चिंतन (बोर्ड)
आज का सद्वाक्य
नित्य शांतिकुंज वीडियो दर्शन
!! शांतिकुंज दर्शन 22 May 2026!! गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार !!
कर्तव्यों से भागना नहीं, निभाना ही आध्यात्मिकता है। Kartavyaon Se Bhaagna Nahi, Nibhaana Hi Adhyatmikta Hai अमृत सन्देश:- परम पूज्य गुरुदेव पं श्रीराम शर्मा आचार्य
परम् पूज्य गुरुदेव का अमृत संदेश
48 हमारे जीवन की अंतिम सांस हमारे जीवन की सांस लड़ाई लड़ते-लड़ते मरेंगे आप भागेंगे कोई निवृत्त हो जाएंगे कर्तव्यों से आप निवृत हो जाएंगे जिम्मेदारियों से आप निवृत्त हो जाएं हम निवृत हो जाएंगे किस से निवृत हो जाएंगे लड़की की शादी से निवृत हो जाएंगे तो लड़की की शादी है कोई काम आपकी जिम्मे समाज नहीं है कहीं देश नहीं है कोई जी साहब हम निवृत हो जाएंगे लड़की का ब्याह कर दे तो इसका अर्थ है कि लड़की के ब्याह के लिए आप पैदा हुए थे लड़की का ब्याह ही आपके लिए काम है लड़की का ब्याह ही आपको पाना था बदमाश कहीं का नहीं तो मित्रों क्या करना चाहिए पारिवारिकता पारिवारिकता बड़ी विशाल चीज है आध्यात्मिकता के सिद्धांतों को भी आप समझते हैं कुछ आध्यात्मिकता की प्रैक्टिस ही करते रहता है नाक में से हवा ही निकालते रहते हैं प्राणायाम ही करते रहते हैं माला ही घूम आते रहते हैं कि अध्यात्म की फिलॉसफी थी कभी सुनी है आपने आध्यात्मिकता की फिलासफी सुनिए जरा आध्यात्मिकता के सिद्धांतों को सुनिए नहीं साहब हम प्रैक्टिस करते हैं और प्राणायाम करते हैं चामुण्डाय विच्चै का जप करते हैं किसी का जप नहीं करते आप किसी का जप नहीं करते आप अज्ञान में भटकते रहते हैं सिद्धांतों को जाने बिना आदर्शों को जाने बिना इनसे क्या कर लेंगे आप नहीं साहब हम तो ऐसे करेंगे और हमको सिद्धि मिलेगी आपको तीन जन्म में सिद्धि नहीं मिल सकती सिद्धि मिलेगी बड़े सिद्धि वाले आए
नहीं साहब देवता पकड़ में आ जाएंगे देवता का साक्षात्कार करेंगे देवता हमको दर्शन देने आएंगे आपको और देवता दर्शन देने आएंगे हां साहब ऐसा कुछ कर दीजिए कि हमारे यहां से ज्योति चमक जाए कैसी ज्योति चमक जाए देवता की कौन से देवता की बताइए आप हमको कौन से देवता की ज्योति चमका दें महादेव जी की महादेव जी की ज्योति चमका दें महादेव जी आपके पास आए मतलब यह है ना आपका आप तो नहीं जाएंगे महादेव जी के गांव में आप महादेव जी के गांव में जाएंगे नहीं साहब हम तो नहीं जाना चाहते आप जाना चाहे तो हम भिजवा दें आपको कहां रहते हैं शंकर शिवलोक में रहते हैं शिवलोक में रहते हैं बहुत दूर है यहां से कितना दूर होगा मैं सोचता हूं पचास करोड़ मील तो होना चाहिए नहीं साहब यह तो यही है आप कैलाश पहाड़ पर चले जाइए हम भिजवा देंगे आपको रास्ता बता देंगे और आप जाते चलते चले जाना यहां पहाड़ में ना वहां खाने को है ना पीने को है यहां बैठे रहना नहीं साहब वह तो नहीं जाएंगे आप महादेव जी के यहां नहीं जाना चाहते नहीं साहब हम तो नहीं जाना चाहते आप क्या चाहते चाहते क्या हैं फिर महादेव जी को यहां बुला दीजिए महादेव जी को बुला दें अच्छा हम महादेव जी को बुला देंगे महादेव जी को बुला देंगे तो तरीका क्या है तरीका भाई साहब यह है कहीं लोग उसको बुलाते हैं इसको स्वामी जी को बुलाते हैं स्वामी जी को बुलाया आपने किस स्वामी जी को स्वामी जी को बुलाया है तो फर्स्ट क्लास का किराया दिया है कि नहीं दान दक्षिणा दी है कि नहीं हमको आप बुलाएंगे गुरुजी आइए तो भाई साहब हम कैसे करें संस्था के पास पैसे नहीं है गुरु जी हम तो खर्च दे देंगे आपका आप खर्च देंगे ना आप हमारी मोटर का पेट्रोल देंगे ना हां साहब हम गुरुजी तैयार हैं हां बेटे तो इससे कम में क्या अपना पेट्रोल जलाएं और आपके यहां मारे मारे फिरें हमसे तो नहीं बनेगा तो क्या करेंगे पेट्रोल देंगे ना हां पेट्रोल देंगे पक्की बात रही हां पक्की बात रही तो आप लाइए महादेव जी का पेट्रोल निकालिए लक्ष्मी नारायण को बुलाना चाहते हैं हां साहब लक्ष्मी नारायण को दोनों को ही कह देंगे हम जाएंगे तो उनसे टेलीफोन से बातचीत कर लेंगे कोई न कोई बुला देंगे लाइए किराया निकालिए कहां है लक्ष्मी नारायण लक्ष्मीनारायण यहां से जो शिवलोक है वह नब्बे करोड़ नब्बे हजार करोड़ मील दूर है लाइए पैसा दीजिए नब्बे करोड़ मील का चुप रे जाहिल कहीं के सारे दिन बकवास करता रहता है बक बक बक बक बकबक ही करते रहते हैं देवता का दर्शन करा दीजिए दर्शन करा दे तुम्हारा सिर दर्शन करा दे दर्शन करा दे दर्शन करा दे दिमाग खराब है तेरा दिमाग खराब है दर्शन करा दे मित्रों क्या करना चाहिए आप आध्यात्मिकता के सिद्धांतों को समझ जाइए
अखण्ड-ज्योति से
ईश्वर ने मनुष्य को एक साथ इकट्ठा जीवन न देकर उसे अलग−अलग क्षणों में टुकड़े−टुकड़े करके दिया है। नया क्षण देने से पूर्व वह पुराना वापिस ले लेता है और देखता है कि उसका किस प्रकार उपयोग किया गया। इस कसौटी पर हमारी पात्रता कसने के बाद ही वह हमें अधिक मूल्यवान क्षणों का उपहार प्रदान करता है।
समय ही जीवन है। उसका प्रत्येक क्षण बहुमूल्य है। वे हमारे सामने ऐसे ही खाली हाथ नहीं आते वरन् अपनी पीठ कीमती उपहार लादे होते हैं। यदि उनकी उपेक्षा की जाय तो निराश होकर वापिस लौट जाते है किन्तु यदि उनका स्वागत किया जाय तो उन मूल्यवान संपदाओं को देकर ही जाते है किन्तु यदि ईश्वर ने अपने परम प्रिय राजकुमार के लिए भेजी है।
जीवन का हर प्रभात सच्चे मित्र की तरह नित नये अनुदान लेकर आता है। वह चाहता है उस दिन का शृंगार करने में इस अनुदान के किये गये सदुपयोग को देख कर प्रसन्नता व्यक्त करें।
उपेक्षा और तिरस्कार पूर्वक लौटा दिये गये जीवन के क्षण−घटक दुखी होकर वापिस लौटते हैं। आलस्य और प्रमाद में पड़ा हुआ मनुष्य यह देख ही नहीं पाता कि उसके सौभाग्य का सूर्य दरवाजे पर दिन आता है और कपाट बन्द देख कर निराश वापिस लौट जाता है।
रवीन्द्रनाथ टैगोर
अखण्ड ज्योति 1974 अप्रैल
| Newer Post | Home | Older Post |
