Saturday 25, July 2026
अमृतवाणी: ब्रह्म मुहूर्त का महत्व | Brahma Muhurta Ka Mahatva | गुरुदेव पं श्रीराम शर्मा आचार्य
गायत्री गुरुदेव हैं और परिवार माताजी हैं जन्मशताब्दी संदेश 2026 आद डॉ. चिन्मय पण्ड्या जी
मानवता को बचाने का एकमात्र मार्ग है? | Resp. Dr. Chinmay Pandya Ji
फिर पार हो सकोगे । प्रेरक विचार :- स्वामी रामकृष्ण परमहंस
क्यों अधूरी है नारी की लड़ाई? Kyon Adhoori Hai Naari Ki Ladaai? पुस्तक:- न्याय नारी को भी मिलना चाहिए (भाग-2) लेखिका:- माता भगवती देवी शर्मा
क्या आज की तीर्थ यात्रा वास्तव में तीर्थ यात्रा है? Kya Aaj Ki Teerth Yatra Vaastav Mein Teerth Yatra Hai? प्रेरणादायक संदेश :- Dr Chinmay Pandya Ji
स्वस्थ रहें—मजबूत बनें भाग - 01 पुस्तक:- सफल जीवन की दिशा धारा
सोशल मीडिया के दौर में कैसे खोते संस्कार ? Social Media Ke Daur Mein Kaise Khote Sanskar ? प्रेरणादायक संदेश :- Dr Chinmay Pandya Ji
भक्ति के तीन पथ | Bhakti Ke Teen Path | Dr Chinmay Pandya
गुरुदेव ने मुफ्तखोरी पर क्यों दी चेतावनी? Gurudev Ne Muftkhori Par Kyon Di Chetavni? अमृत सन्देश:- परम पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी
गायत्रीतीर्थ शांतिकुंज, नित्य दर्शन
आज का सद्चिंतन (बोर्ड)
आज का सद्वाक्य
नित्य शांतिकुंज वीडियो दर्शन
!! शांतिकुंज दर्शन 25 July 2026!! गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार !!
अपने भीतर के दुर्गुणों से लड़ो परम पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य
परम् पूज्य गुरुदेव का अमृत संदेश
आपको अपनी अपेक्षा व्यक्ति से लड़ना पड़ेगा अपने भीतर बार बार निराशा जो आप को दबोच लेती है उसके विरुद्ध लड़ना पड़ेगा चिंतन में जो चिंताएं तरह-तरह की और आशंकाएं भय छाए रहते हैं इनसे आप आपको अपने मन को सुधारना पड़ेगा इन चीजों को खत्म करना पड़ेगा अभ्यस्त ढर्रा कैसा अभ्यस्त ढर्रा जो जिंदगी हम जीते हैं वह ऐसी जिंदगी है कि हम क्या कहें आपसे ऐसी जिंदगी ढर्रे की जिंदगी जिसमें न बुराइयों से नाराजगी है न अच्छाइयों से मोहब्बत है ऐसी घिसी पिटी जिंदगी वाहयात सी जिंदगी फूहड़ सी जिंदगी हम जी रहे हैं इस जिंदगी की जो वर्तमान परिस्थितियां है इससे आप को लड़ना पड़ेगा और इसको तोड़ मरोड़ के एक ओर फेंकना पड़ेगा और इसके स्थान पर नई विचारधाराएं नई योजनाएं कार्यान्वित करनी पड़ेंगी अगर आप नहीं किए तो तो ढर्रे पर घूमते रहेंगे और ढर्रे पर घूमते हुए कोल्हू के बैल की तरीके से जहां के तहां बने रहेंगे संघर्ष नहीं करेंगे तो कैसे काम बनेगा अनीति से लड़ने के लिए आपको आपको प्रत्यारपण करना ही चाहिए कांटे को कांटे से ही निकाला जाता है विष को विष से ही मारा जाता है घूंसे का जवाब घूँसा हो सकता है इसीलिए क्या करना चाहिए अनीति के विरुद्ध आप अगर तन के नहीं खड़ेंगे तो अनीति दिन दिन बढ़ती चली जाएगी और आपको ही नहीं बल्कि आपके सारे समाज को धीरे-धीरे करके निगलती चली जाएगी फिर आप ऐसी परिस्थिति में आ जाएंगे अपने समाज को सबको हैरानी में डाल देंगे इसलिए तपश्चर्या जिसका अर्थ होता है अपने आपको तपा डालना मजबूत बना देना लड़ाकू बना देना संघर्षशील बना देना साहसी बना देना यह गुण अपने भीतर तो आप पैदा कीजिए
अखण्ड-ज्योति से
हिन्दू उसे कहते हैं जो भारत वर्ष को अपनी मातृभूमि, पितृभूमि और धर्म भूमि मानता है।
(1) मातृ भूमि अर्थात् जन्म भूमि। जो अपनी जन्म दाता-माता-भारत भूमि को मानता हो।
(2) पितृभूमि-अर्थात् पूर्वजों की भूमि। जो भारतवर्ष को अपने प्रयत्नों की भूमि मानता हो।
(3) धर्मभूमि-अर्थात् अपने धर्म की उत्पत्ति भूमि तीर्थ भूमि मानता हो वह हिन्दू है।
जिस व्यक्ति की उपरोक्त तीन मान्यताएं हैं वह भारत माता का सच्चा पुत्र कहलाने का अधिकारी है। उसे हिन्दू कहा जा सकता है। इस दृष्टि से भारत वर्ष के सनातन धर्मी, आर्य समाजी जैन, बौद्ध, सिख, शैव, शाक्त, वैष्णव, कबीर पंथी, दादूपंथी तथा अन्यान्य मत मतान्तरों को मानने वाले सभी हिन्दू हैं। चोटी इस हिन्दुत्व का प्रतीक है। गौ माता का सम्मान हर हिन्दू के हृदय में होता है।
हिन्दुओं में विचार स्वातंत्र्य की प्रतिष्ठा है अनेकों मत, सिद्धान्त, विश्वास उनमें प्रचलित हैं। पर उनका दर्शन और संस्कृति एक है देवभाषा और भावनाओं का पथ-प्रदर्शन होता है एक एकता के केन्द्र पर वे सभी केन्द्रित होते हैं।
हिन्दुओं का संसार को एक विशेष संदेश है वह है भौतिक वाद की तुच्छता अनुभव करते हुए आत्मिक गुणों की प्रतिष्ठा करना इस संदेश में ही विश्व शान्ति का स्थायित्व छिपा हुआ है। आज संसार को उसी संदेश की तलाश है।
आज संसार पूछता है कि हिन्दुस्तान तो मौजूद है पर हिन्दू कौन है? भारत माता को अपनी मातृभूमि, पितृभूमि और धर्म भूमि समझने वाले हिन्दुओं अपनी अमृतमयी संस्कृति से अशान्त विश्व को शान्त करो और अपने आदर्शों को चरितार्थ करके बताओ कि हिन्दू कैसा है? हिन्दू कौन है?
अखण्ड ज्योति नवम्बर 1947
| Newer Post | Home | Older Post |
