Friday 17, July 2026
नारी को न्याय कब मिलेगा? Naari Ko Nyay Kab Milega? पुस्तक:- न्याय नारी को भी मिलना चाहिए (भाग-1) लेखिका:- माता भगवती देवी शर्मा
Book: 12, A06 धार्मिक उपवास और आत्मा की पवित्रता | Dharmik Upvaas Aur Aatma ki Pavitrata Gayatri Ke 24 Akshar Ki Vyakhya
संबंधों को मधुर बनाने का मंत्र।
माँ का ऋण हजार जन्म में भी नहीं चुकाया जा सकता। Maa ka Rin Hazaar Janm Mein Bhi Nahin Chukaya Ja Sakta अमृत संदेश :- परम वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा जी |
सिद्धियाँ कहाँ है और कैसे प्राप्त करें | Siddhiyan Kahan Aur Kaise Prapt Karen | Dr Chinmay Pandya
लक्ष्मण को रावण का शिष्य क्यों बनना पड़ा? Lakshman Ko Ravan Ka Shishya Kyon Banna Pada? अमृत सन्देश:- पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी
गायत्रीतीर्थ शांतिकुंज, नित्य दर्शन
आज का सद्चिंतन (बोर्ड)
आज का सद्वाक्य
नित्य शांतिकुंज वीडियो दर्शन
!! शांतिकुंज दर्शन 17 July 2026!! गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार !!
बुराई से लड़ो, इंसान से नहीं। Burai Se Lado, Insaan Se Nahi. अमृत सन्देश:- परम पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी
परम् पूज्य गुरुदेव का अमृत संदेश
अगर आप सच्चे अर्थों में भगवान के भक्त हैं तो फिर आप ध्यान रखिए आपको क्या फायदा होगा क्या फायदा नहीं होगा मुक्ति में आप जाएंगे कि नहीं जाएंगे बाद की बात है लेकिन आपको अपने चारों ओर ऐसा नजारा दिखाई पड़ेगा जिसको स्वर्ग कहते हैं आंखों में आपको स्वर्ग तैरता हुआ दिखाई पड़ेगा सारे अपने ही दिखाई पड़ेंगे बुरे आदमी हां बुरे आदमी भी रोगी होता है रोगी होता है तो उसकी बीमारी का इलाज करते हैं पर रोगी को कितनी मोहब्बत करते हैं रोगी की जान बचाने की कोशिश करते हैं बीमारी को मारते हैं बीमार को कौन मारता है बुरे आदमी है ठीक है बुरे आदमी मान लें बच्चा टट्टी करता है तो बच्चे को कौन फेंक देता है बच्चे की टट्टी की सफाई करते हैं बच्चे को धोते हैं बच्चे को साफ करते हैं साफ करने के बाद में फिर गोदी से ले लेते हैं बुरे आदमी भी दुनिया में इसलिए नहीं हैं कि आप उनके प्रति घृणा करें बुराइयों के प्रति घृणा कीजिए बुराइयों को ठीक कीजिए बुराइयों से लड़िये बुराइयों से जद्दोजहद कीजिए अपने बच्चे में भी कोई बुरी आदत है तो आप यह कोशिश कीजिए कि बुरी आदत से हमको छुटकारा दिलाएं ना कि उस बच्चे को ही मार डालने की कोशिश करें आप चारों ओर से घृणा और नफरत की इस दुनिया में कोई गुंजाइश नहीं आप प्यार के आधार पर भी लोगों को सुधार कर सकते हैं आप यह मत सोचिए कि प्यार का हथियार कमजोर है प्यार का हथियार भी कमजोर है प्रहलाद की बात आपको मालूम नहीं है प्रह्लाद ने अपने पिता को प्यार ज्यों का त्यों रखा और अपने पिता की भक्ति में कोई कमी नहीं आने दी लेकिन उनका कहना नहीं माना और उनसे बराबर जद्दोजहद करता रहा क्योंकि पिता जो गलती करते थे उसको सुधारने में उनका हित समझा इसलिए पिता का हित समझ करके उन्होंने उनकी अवज्ञा करना शुरू कर दी आप इस मामले में किसी से भी लड़ाई झगड़ा शुरू कर सकते हैं लेकिन उसके पीछे मोहब्बत का माद्दा होना चाहिए प्यार का माद्दा होना चाहिए
अखण्ड-ज्योति से
घंटों निरर्थक बकवास करने से एक छोटे से तत्व या उपदेश पर अमल करना, अपनी आत्मा का विकास करना, सामाजिक तथा आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ना अधिक कल्याण कर है। बहुत सी बातें बनाना बड़ा सरल है, दूसरों को उपदेश देने में बहुत तेरे कुशल होते हैं किंतु वास्तविक तथ्य तो यह है कि जो बात अन्तरात्मा को लगे, उसे कार्य रूप में परिणत कर प्रत्यक्ष किया जाय। कर्म ही संसार में मुख्य तत्व है। सफलता के लिए यदि कोई आवश्यक चीज है, तो वह कठोर कर्म ही है। केवल बातें बनाना, शेखचिल्लियों तथा ढपोरशंखों का काम है। असली मनुष्य वही हैं, जो बात कम करता है किन्तु काम बहुत अधिक करता है।
उन्नति करना अपने आप पर अपने कार्यों पर ही निर्भर है, जो मनुष्य केवल दूसरों का मुँह ताकता और बातें बनाता है, वह भीतरी आत्म शक्ति को व्यर्थ बरबाद करता है।
विचार दो प्रकार के होते हैं-केवल कल्पना ही कल्पना मनुष्य के लिए अहितकर हैं। हमारे विचारों में क्रिया का समन्वय अवश्य होना चाहिये। जो व्यक्ति उत्साहपूर्वक कार्य में प्रविष्ट होता है, वही विजयी भी होता हैं। जो केवल माला जपने में रहेगा, स्वयं परिश्रम न करेगा उसे कुछ भी प्राप्त न होगा। हम मानते हैं कि विचार में प्रबल शक्ति है, किन्तु विचार में शक्ति तब ही है, जब उसे अंकुरित होने का सुअवसर प्राप्त हो। जो विचारों के प्रवाह को अवरुद्ध करता है, वह अपनी उन्नति को पीछे ढकेलता है। जो विचारों में क्रिया का योग नहीं देता, वह विचारों के अंकुरों को पल्लवित होने से, उन्हें फलित होने से रोकता है। कार्य तथा उन्नति का नित्य संबंध है।
अखण्ड ज्योति सितम्बर 1947
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