• News
  • Blogs
  • Gurukulam
English हिंदी
  • About Us
    • Gayatri Teerth Shantikunj
    • Mission Vision
    • Patron Founder
    • Present Mentor
    • Blogs & Regional sites
    • DSVV
    • Organization
    • Our Establishments
    • Dr. Chinmay Pandya - Our pioneering youthful representative
  • Initiatives
    • Spiritual
    • Environment Protection
    • Social Development
    • Education with Wisdom
    • Health
    • Corporate Excellence
    • Disaster Management
    • Training/Shivir/Camps
    • Research
    • Programs / Events
  • Read
    • Akhandjyoti Magazine
    • Books
    • News
    • E-Books
    • Events
    • Gayatri Panchang
    • Geeta Jayanti 2023
    • Motivational Quotes
    • Lecture Summery
  • Spiritual WIsdom
    • Thought Transformation
    • Revival of Rishi Tradition
    • Change of Era - Satyug
    • Yagya
    • Life Management
    • Foundation of New Era
    • Gayatri
    • Indian Culture
    • Scientific Spirituality
    • Self Realization
    • Sacramental Rites
  • Media
    • Social Media
    • Video Gallery
    • Audio Collection
    • Photos Album
    • Pragya Abhiyan
    • Mobile Application
    • Gurukulam
    • News and activities
    • Blogs Posts
    • Live
    • Yug Pravah Video Magazine
  • Contact Us
    • India Contacts
    • Global Contacts
    • Shantikunj - Headquarter
    • Join us
    • Write to Us
    • Spiritual Guidance FAQ
    • Magazine Subscriptions
    • Shivir @ Shantikunj
    • Contribute Us
  • Login

Media   >   Social Media   >   Daily Update

Saturday 27, June 2026

×

IMAGE
Image वीडियो अपडेट
6 likes 55565 views 2 shares
Like
Share
Download
Comment

गायत्रीतीर्थ शांतिकुंज, नित्य दर्शन

गायत्री माता
Image गायत्री माता
6 likes 55576 views 1 comments 6 shares
Like
Share
Download
Comment
गायत्री माता - अखंड दीपक
Image गायत्री माता - अखंड दीपक
3 likes 55756 views 1 comments 3 shares
Like
Share
Download
Comment
गुरुजी माताजी
Image गुरुजी माताजी
3 likes 55393 views 1 comments 1 shares
Like
Share
Download
Comment
चरण पादुका
Image चरण पादुका
4 likes 55172 views 1 comments 1 shares
Like
Share
Download
Comment
सजल श्रद्धा - प्रखर प्रज्ञा (समाधि स्थल)
Image सजल श्रद्धा - प्रखर प्रज्ञा (समाधि स्थल)
4 likes 55009 views 2 shares
Like
Share
Download
Comment
प्रज्ञेश्वर महादेव - देव संस्कृति विश्वविद्यालय
Image प्रज्ञेश्वर महादेव - देव संस्कृति विश्वविद्यालय
4 likes 54856 views 1 comments 1 shares
Like
Share
Download
Comment
शिव मंदिर - शांतिकुंज
Image शिव मंदिर - शांतिकुंज
3 likes 54717 views 1 shares
Like
Share
Download
Comment
हनुमान मंदिर - शांतिकुंज
Image हनुमान मंदिर - शांतिकुंज
3 likes 54621 views 1 shares
Like
Share
Download
Comment

आज का सद्चिंतन (बोर्ड)

Image हिंदी बोर्ड
4 likes 55924 views 10 shares
Like
Share
Download
Comment
Image हिंदी बोर्ड
3 likes 55591 views 5 shares
Like
Share
Download
Comment
Image अंग्रेजी बोर्ड
1 likes 55337 views 1 shares
Like
Share
Download
Comment
Image अंग्रेजी बोर्ड
55145 views 2 shares
Like
Share
Download
Comment

आज का सद्वाक्य

Image हिंदी सद्वाक्य
55939 views 6 shares
Like
Share
Download
Comment
Image हिंदी सद्वाक्य
1 likes 55617 views 3 shares
Like
Share
Download
Comment
Image अंग्रेजी सद्वाक्य
2 likes 55368 views 2 shares
Like
Share
Download
Comment
Image अंग्रेजी सद्वाक्य
1 likes 55183 views 2 shares
Like
Share
Download
Comment
लेख
Image लेख
3 likes 56028 views 2 shares
Like
Share
Download
Comment



नित्य शांतिकुंज वीडियो दर्शन






परम् पूज्य गुरुदेव का अमृत संदेश



उन्नति के लिए, विकास करने के लिए और अपने आपको महत्त्वपूर्ण और बड़ा बनाने के लिए बीज के तरीके से हर आदमी को गलना चाहिए। गलने का यह मतलब नहीं है कि अपनी आत्महत्या कर डालें, स्वयं को तबाह कर डालें। गलने का मतलब यह है कि समाज की सेवा के लिए अपने आप को गलाते जाइए, अपने आपको खत्म करते जाइए अपने आपको त्याग करते जाइए, फिर आप देखेंगे; आपकी आराधना कैसा चमत्कार लाती है! प्राचीनकाल के ऋषियों में से हर आदमी ने, भक्तों ने, सबने समाज-सेवा की है। यह ख्याल ठीक नहीं है कि केवल भजन करने से भगवान प्रसन्न हो जाते हैं। भगवान को प्राप्त करने के लिए अपना मन और अपना जीवन सुधार करने के लिए, साबुन के तरीके से अपने आपको धोना तो चाहिए राम के नाम से; लेकिन राम का नाम लेने भर से भगवान् प्रसन्न क्यों होने लगें? भगवान को क्या चापलूसी पसन्द है? भगवान् कोई रिश्वतखोर है कि आपकी चापलूसी सुनते रहें और आप पर अनुग्रह कर दें? नहीं, भगवान् के यहाँ कसौटी एक ही है, वह यह कि आप कितने उदार है?

2 likes 55344 views 2 shares
Like
Share
Comment




अखण्ड-ज्योति से



सत्यं शिवं के साथ परमात्मा की तीसरी विशेषता बतायी गई है सुंदरम् की। वह सुन्दरता ही उसे प्रिय है। उसका अंशी होने के नाते जीवात्मा भी हर सुंदर वस्तु को देखकर आकृष्ट होती है। प्रकृति के मनोरम दृश्य, हरियाली, पुष्पों से लदे उद्यान को देखकर किसका मन नहीं पुलकित होता है। सुन्दर पुरुष, स्त्रियों में भी अपना एक विशेष आकर्षण होता है जिनकी ओर हर कोई सहज ही आकर्षित हो जाता है। सौंदर्य की ओर आकर्षण अन्तरतम की अभिव्यक्ति है। जो शाश्वत सौंदर्य की खोज सर्वत्र करती है। तथा उसे प्राप्त करने की सतत् प्रेरणा देती है।

शास्त्रों में वर्णन है कि बाह्य स्वरूप की दृष्टि से प्रतीत होने वाला संसार मिथ्या है। अर्थात् जिन बाहरी वस्तुओं में सौंदर्य दिखायी पड़ता है यह एक भ्रम मात्र है। फिर ऐसा बोध क्यों होता है? इसका उत्तर ऋषि देते हैं कि अपना आपा ही आकर्षित होकर विविध वस्तुओं एवं संसार को सुन्दर बनाता है। सौंदर्य का दिग्दर्शन इस आरोपण की प्रतिक्रिया मात्र है। जो जड़ वस्तुओं को भी सौंदर्य युक्त बना देता है। तथ्य तो यह है कि शाश्वत सौंदर्य का केन्द्र बिन्दु अंतरात्मा है। सौंदर्य की धाराएं यहीं से प्रस्फुटित होतीं तथा गोमुख से निकलने वाली गंगा की भाँति समस्त जड़-चेतन में सौंदर्य का अभिसिंचन करती हैं। यह मूल स्त्रोत अपने प्रवाह को रोक दे, तो सर्वत्र कुरूपता ही दिखायी पड़ने लगे।

प्रतिच्छाया पड़ने मात्र से संसार एवं सम्बन्धित वस्तुएं इतनी सुन्दर, इतनी अनुपम प्रतीत हो सकती हैं तो उसका मूल स्वरूप कितना विलक्षण अनिवर्चनीय हो सकता है, इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। कल-कल करती तीव्र वेग से बहती गंगा को देखकर मन को तृप्ति एवं शान्ति मिलती है। गंगा इतनी शान्ति एवं तृप्तिदायक हो सकती है तो उसका मूल स्त्रोत गोमुख का दृश्य कितना दिव्य, अनुपम एवं मनोरम होगा इसकी तो मात्र कल्पना की जा सकती है अथवा वे अनुभव कर सकते हैं जो गोमुख के निकट जाकर दिव्य-दर्शन का लाभ उठा चुके हैं।

सौंदर्य की ओर आकर्षण स्वाभाविक है, पर देखा यह जाता है कि वस्तुओं एवं व्यक्तियों के प्रति यह आकर्षण कुछ ही समय तक रहता है और एक अवधि के बाद विकर्षण में बदल जाता है और फिर मन के रमण करने के लिए नये स्त्रोतों की खोज करता है। व्यक्तियों अथवा वस्तुओं के प्रति आकर्षण समय-समय पर बदलता रहता है। यह इस बात का परिचायक है जो अपने अंतराल में ऐसी कोई सत्ता विद्यमान है जो शाश्वत सौंदर्य की निरन्तर खोज करती रहती है। वस्तुओं एवं व्यक्तियों के श्रमिक आकर्षणों को ही वास्तविक मानकर आनन्द प्राप्त करना चाहती है किन्तु उसके इस प्रयास में निराशा एवं असफलता ही हाथ लगती है।

सौंदर्य का वास्तविक एवं शाश्वत स्त्रोत अपनी आत्मा है जिस दिन इस तथ्य का बोध हो जाता है उस दिन से बाह्य आकर्षण निस्सार जान पड़ते हैं। आत्म सत्ता के प्रकाश से ही वे भी सुन्दर प्रतीत हो रहे थे, यह ज्ञान होते ही दृष्टि बहिर्मुखी नहीं रहती अन्तर्मुखी बन जाती है। आत्मदर्शन के लिए यात्रा अंतर्जगत से आरम्भ होती है। इस अभिनव यात्रा में एक से बढ़कर एक मनोरम दृश्य अंतर्दृष्टि से देखने को मिलते हैं जिनकी तुलना में बाह्य सौंदर्य फीका एवं अवास्तविक जान पड़ता है। इस अविराम अंतर्यात्रा की परिणति दिव्य-दर्शन के रूप में होती है। आत्म-सत्ता के दर्शन से ही शाश्वत सौंदर्य का बोध होता है। जिसकी रसानुभूति दिव्य, अनिवर्चनीय एवं इतनी सुखद होती है कि उसके सामने संसार के समस्त सुख उथले प्रतीत होते हैं।

 अखण्ड ज्योति सितम्बर 1981

55569 views 1 shares
Like
Share
Comment



×
Popup Image
❮ ❯
Like Share Link Share Download
Newer Post Home Older Post


View count

219750981



Archive

About Shantikunj

Shantikunj has emerged over the years as a unique center and fountain-head of a global movement of Yug Nirman Yojna (Movement for the Reconstruction of the Era) for moral-spiritual regeneration in the light of hoary Indian heritage.

Navigation Links
  • Home
  • Literature
  • News and Activities
  • Quotes and Thoughts
  • Videos and more
  • Audio
  • Join Us
  • Contact
Write to us

Click below and write to us your commenct and input.

Go

Copyright © SRI VEDMATA GAYATRI TRUST (TMD). All rights reserved. | Design by IT Cell Shantikunj