Thursday 11, June 2026
वह शक्ति हमें दो दयानिधे, कर्त्तव्य मार्ग पर डट जावें | Vah Shakti Hame Do Dayanidhe
फिजूलखर्ची चरित्र को कैसे बिगाड़ती है ? Fizoolkharchi Charitra ko Kaise Bigaadti Hai? अमृत सन्देश:- पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य
विश्वास की परीक्षा संकट में होती है | Vishwas Ki Pariksha Sankat Me Hoti Hai | Dr Chinmay Pandya
गायत्रीतीर्थ शांतिकुंज, नित्य दर्शन
आज का सद्चिंतन (बोर्ड)
आज का सद्वाक्य
नित्य शांतिकुंज वीडियो दर्शन
!! शांतिकुंज दर्शन 11 June 2026!! गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार !!
!! परम पूज्य गुरुदेव का कक्ष गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार 11 June 2026!
!! अखण्ड दीपक Akhand_Deepak (1926 से प्रज्ज्वलित) चरण पादुका गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार 11 June 2026!
अमृतवाणी:-साहस और शक्ति मुझे प्रातःकाल के द्वारा मिली है -परम पूज्य गुरुदेव पं श्रीराम शर्मा आचार्य
परम् पूज्य गुरुदेव का अमृत संदेश
जो तपश्चर्या मुझे शक्ति दे करके गई है और जिसकी वजह से जो मैं यह हिम्मत कर सका येे मानव जाति के भाग्य और संसार के भविष्य के निर्माण करने में योगदान देने का जो साहस और वह शक्ति वह शक्ति भी मुझे प्रातःकाल के द्वारा से ही मिली अगर मुझे मेरी बुरी आदत दूसरे लोगों की तरीके से भी रही होती और मैं देर से सोया होता और देर से उठा होता तो मेरे लिए ना यह संभव होता कि मैं साहित्य लिखूं और ना मेरे लिए यह संभव होता चैबीस पुरश्चरण करूं ना मेरे पास समय बचता जिससे कि मैं समाज सेवा के नए काम करू इसलिए स्वयं मेरा ये काम ही ऐसा है जिसको देख करके यह माना जा सकता है प्रातःकाल का उठना और जल्दी सोना कितना महत्वपूर्ण और कितना आवश्यक है स्वास्थ्य की दृष्टि से भी विद्या वृद्धि की दृष्टि से भी आध्यात्मिक उन्नति की दृष्टि से भी बहुत ही दिव्य समय है अगर हम इस स्वभाव और आदत को दूसरे लोगों में फैला सके और यह स्वभाव दूसरे लोगों का भी बना सके तो मैं समझता हूं कि आप दुनिया की बहुत बड़ी सेवा कर सकते हैं
अखण्ड-ज्योति से
ईश्वर ने हमें अपनी सर्वोत्कृष्ट कृति के रूप से विनिर्मित किया है। वह अविश्वस्त एवं अप्रमाणिक नहीं हो सकता, इसलिए हमें अपने ऊपर विश्वास करना चाहिये। ईश्वर हमारे भीतर निवास करता है। जहाँ ईश्वर निवास करे, वहाँ दुर्बलता की बात क्यों सोची जानी चाहिए? जब छोटा-सा शस्त्र या पुलिस कर्मचारी साथ होता है, तो विश्वासपूर्वक निश्चिन्त रह सकना सम्भव हो जाता है, फिर जब कि असंख्य वज्रों से बढ़ कर शस्त्र और असंख्य सेनापतियों से भी अधिक सामर्थ्यवान् ईश्वर हमारे साथ है, तब किसी से डरने या आतंकित होने की आवश्यकता ही क्यों होनी चाहिए।
जो अपने ऊपर भरोसा करता है, उसी का दूसरे लोग भी भरोसा करते हैं। जो अपनी सहायता आप करता है, उसी की ईश्वर भी सहायता करता है। जिसने अपने हाथ पैर चलाना बन्द कर दिया, उसका डूबना निश्चित है। हो सकता है कि किसी निष्ठावान को भी कभी असफल होना पड़ा है पर संसार में आज तक जितने सफल हुए हैं, उनमें से प्रत्येक को आत्म विश्वासी बनकर ही आगे बढ़ना पड़ा है। हो सकता है किसी किसान की फसल मारी जाय, पर जिसे धान काटने का सौभाग्य मिला है, उनमें से प्रत्येक को बोने और सींचने की कठोर प्रक्रिया को अपनाना ही पड़ता है।
आत्म-विश्वास शक्ति का स्रोत है। उसी के सहारे किसी के लिए आगे बढ़ना सम्भव हो सकता है। भाग्य का निर्माण ईश्वर नहीं, आत्म-विश्वास करता है। जो निष्ठापूर्वक पुरुषार्थ में संलग्न है और हार-जीत की चिन्ता न करते हुए आगे ही बढ़ता जाता है, उस आत्म-विश्वासी के लिए पर्वतों को भी रास्ता देना पड़ता है।
अखण्ड ज्योति दिसम्बर 1969
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