Tuesday 16, June 2026
कर्मो का प्रयाश्चित | Karmo Ka Prayaschit | Dr Chinmay Pandya
फर्ज से मुंह मोड़ना क्यों गलत है? Farz Se Munh Modna Kyon Galat Hai? अमृत सन्देश:- पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य
गायत्रीतीर्थ शांतिकुंज, नित्य दर्शन
आज का सद्चिंतन (बोर्ड)
आज का सद्वाक्य
नित्य शांतिकुंज वीडियो दर्शन
!! शांतिकुंज दर्शन 16 June 2026!! गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार !!
भगवान की भक्ति का उल्लास अमृत सन्देश:- पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य
परम् पूज्य गुरुदेव का अमृत संदेश
आरती में सबको मालूम है कि शंख घड़ियाल और मंजीरे और थाप वगैरह बजाये जाते है ये संगीत का समावेश हुआ ये सब कोई जानता है कि जब मंदिरों में आरती होती है तब कोई ना कोई भजन गाए जाते हैं कोई ना कोई कीर्तन गाए जाते हैं आरती गाई जाती है इसका अर्थ ये हुआ कि उस वाद्य ग्रंथों के साथ-साथ में और कोई शिक्षा और प्रेरणा उत्साह भगवान की भक्ति का उल्लास की मिशाल दी जाए मंदिरों में जो कार्य प्रातःकाल की आरती के समय होता है उस कार्य को हमको और भी सुविधाजनक बनाना चाहिए और उस स्वभाव को केवल मंदिरों की चारदीवारी में अथवा उसके समीपवर्ती लोगों तक सीमित ना रहने के लिए बाहर भी फैलाना चाहिए वही कीर्तन और वही घड़ियाल और वही शंख यदि हमने यदि हम मशीनों के माध्यम से घर घर पहुंचा सकते है तो और सुविधाजनक होगा
अखण्ड-ज्योति से
आपको गरीबी ने घेर रखा है पैसे का अभाव रहता है, आवश्यक खर्चों की जरूरतें पूरी नहीं होतीं, आप दुखी रहते हैं, पर हम पूछते हैं कि क्या दुखी रहने से आपकी दरिद्रता दूर हो जाएगी? क्या इससे अधिक आमदनी होने लगेगी? अगर आप समझते हैं कि ‘हाँ हो जायगी’ तो आप भूल करते हैं।
आप कम पढ़े हैं विद्या पास नहीं हैं, बीमारी ने घेर रखा है, शरीर क्षीण होता जाता है, काम बिगड़ जाते हैं, सफलता नहीं मिलती, विघ्न उपस्थित हैं, वियोग सहना पड़ रहा है, कलह रहता है, ठगी और विश्वासघात का सामना करना पड़ता है। अत्याचार और उत्पीड़न के शिकार हैं या ऐसे ही किसी कारण वश आप खिन्न हो रहे हैं, चित्त उदास रहता है, चिन्ता सताती है, संसार त्यागने की इच्छा होती है, आँखों से आँसुओं की धारा बहती है। हम पूछते हैं कि क्या यही मार्ग इन दुःखद परिस्थितियों से बचने का है? क्या आप शोक संताप में डूबे रहकर इन कष्टों को हटाना चाहते हैं? क्या खिन्न रहने से दुखों का अन्त हो जाएगा?
बीते कल की अप्रिय घटनाओं पर आँसू बहाना, आने वाले कल को ठीक वैसा ही बनाना है। भूत कालीन कठिनाइयों के त्रास से इस समय भी संतप्त रहना, इसका अर्थ तो यह है कि भविष्य में भी उन्हीं बातों की पुनरावृत्ति आप चाहते हैं, इसलिए उठिये खिन्नता और उदासीनता को दूर भगा दीजिए। बीते पर रोना इससे क्या लाभ? चलिये! आने वाले कल का नये ढंग से निर्माण कीजिये। शोक, सन्ताप, चिन्ता, निराशा और उदासीनता को परित्याग करके प्रसन्नता को ग्रहण कीजिए।
उठिये, खड़े हूजिए और एक कदम आगे बढ़ाइए। प्रभु ने आपको रोने के लिए नहीं प्रसन्न रहने के उद्देश्य से यहाँ भेजा है। रूखी रोटी खाकर हँसिये और कल चुपड़ी खाने का प्रयत्न कीजिए। आज की परिस्थिति पर संतुष्ट रहिये और कल के लिये नया आयोजन कीजिए। खिन्न मत मत हूजिए, क्योंकि हम आपको एक दुख हरण गुप्त मन्त्र की दीक्षा दे रहे हैं। सुनिये! विचारिये और गाँठ बाँध लीजिए कि ‘हँसता हुआ भविष्य, हँसते हुए चेहरे का पुत्र है। जो प्रसन्न रहेगा उसे प्रसन्न रखने वाली परिस्थितियाँ भी मिलेंगी।
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