• News
  • Blogs
  • Gurukulam
English हिंदी
  • About Us
    • Mission Vision
    • Patron Founder
    • Gayatri Teerth Shantikunj
    • Present Mentor
    • Blogs & Regional sites
    • DSVV
    • Organization
    • Dr. Chinmay Pandya - Our pioneering youthful representative
    • Our Establishments
  • Initiatives
    • Spiritual
    • Environment Protection
    • Social Development
    • Education with Wisdom
    • Health
    • Corporate Excellence
    • Disaster Management
    • Training/Shivir/Camps
    • Research
    • Programs / Events
  • Read
    • Books
    • Akhandjyoti Magazine
    • News
    • E-Books
    • Events
    • Gayatri Panchang
    • Geeta Jayanti 2023
    • Motivational Quotes
    • Lecture Summery
  • Spiritual WIsdom
    • Thought Transformation
    • Revival of Rishi Tradition
    • Change of Era - Satyug
    • Yagya
    • Life Management
    • Foundation of New Era
    • Gayatri
    • Indian Culture
    • Scientific Spirituality
    • Self Realization
    • Sacramental Rites
  • Media
    • Social Media
    • Video Gallery
    • Audio Collection
    • Photos Album
    • Pragya Abhiyan
    • Mobile Application
    • Gurukulam
    • News and activities
    • Blogs Posts
    • Live
    • Yug Pravah Video Magazine
  • Contact Us
    • India Contacts
    • Global Contacts
    • Shantikunj - Headquarter
    • Join us
    • Write to Us
    • Spiritual Guidance FAQ
    • Magazine Subscriptions
    • Shivir @ Shantikunj
    • Contribute Us
  • Login

Media   >   Social Media   >   Daily Update

Thursday 30, April 2026

×

VIDEO
गृहे- गृहे गायत्री यज्ञ सरल कर्मकांड विधि | Grihe- Grihe Gayatri Yagya Saral Karmkand Vidhi

गृहे- गृहे गायत्री यज्ञ सरल कर्मकांड विधि | Grihe- Grihe Gayatri Yagya Saral Karmkand Vidhi

1 likes 15826 views
Like
Share
Comment



VIDEO
अमृत सन्देश:- जहाँ प्रेम नहीं वो परिवार नहीं। True Relationships.

अमृत सन्देश:- जहाँ प्रेम नहीं वो परिवार नहीं। True Relationships.

1 likes 15743 views 1 shares
Like
Share
Comment



VIDEO
अमृत सन्देश:- हर सुबह नया जन्म हर रात नई मौत : संध्या वंदन

अमृत सन्देश:- हर सुबह नया जन्म हर रात नई मौत : संध्या वंदन

1 likes 15693 views
Like
Share
Comment



गायत्रीतीर्थ शांतिकुंज, नित्य दर्शन

गायत्री माता
Image गायत्री माता
1 likes 16201 views 1 comments 1 shares
Like
Share
Download
Comment
गायत्री माता - अखंड दीपक
Image गायत्री माता - अखंड दीपक
1 likes 16230 views 1 comments
Like
Share
Download
Comment
गुरुजी माताजी
Image गुरुजी माताजी
1 likes 16171 views 1 comments
Like
Share
Download
Comment
चरण पादुका
Image चरण पादुका
1 likes 16120 views 1 comments
Like
Share
Download
Comment
सजल श्रद्धा - प्रखर प्रज्ञा (समाधि स्थल)
Image सजल श्रद्धा - प्रखर प्रज्ञा (समाधि स्थल)
1 likes 16067 views
Like
Share
Download
Comment
परम् पूज्य गुरुदेव व वंदनीय माताजी कक्ष
Image परम् पूज्य गुरुदेव व वंदनीय माताजी कक्ष
1 likes 16037 views
Like
Share
Download
Comment
परम् पूज्य गुरुदेव व वंदनीय माताजी कक्ष
Image परम् पूज्य गुरुदेव व वंदनीय माताजी कक्ष
1 likes 16009 views
Like
Share
Download
Comment
परम् पूज्य गुरुदेव व वंदनीय माताजी कक्ष
Image परम् पूज्य गुरुदेव व वंदनीय माताजी कक्ष
1 likes 15978 views
Like
Share
Download
Comment
परम् पूज्य गुरुदेव व वंदनीय माताजी कक्ष
Image परम् पूज्य गुरुदेव व वंदनीय माताजी कक्ष
1 likes 15950 views
Like
Share
Download
Comment
परम् पूज्य गुरुदेव व वंदनीय माताजी कक्ष
Image परम् पूज्य गुरुदेव व वंदनीय माताजी कक्ष
1 likes 15938 views
Like
Share
Download
Comment
प्रज्ञेश्वर महादेव - देव संस्कृति विश्वविद्यालय
Image प्रज्ञेश्वर महादेव - देव संस्कृति विश्वविद्यालय
1 likes 15898 views 1 comments
Like
Share
Download
Comment
शिव मंदिर - शांतिकुंज
Image शिव मंदिर - शांतिकुंज
1 likes 15868 views
Like
Share
Download
Comment
हनुमान मंदिर - शांतिकुंज
Image हनुमान मंदिर - शांतिकुंज
1 likes 15852 views
Like
Share
Download
Comment

आज का सद्चिंतन (बोर्ड)

Image हिंदी बोर्ड
1 likes 16270 views 2 shares
Like
Share
Download
Comment
Image हिंदी बोर्ड
1 likes 16200 views 3 shares
Like
Share
Download
Comment
Image अंग्रेजी बोर्ड
1 likes 16142 views 2 shares
Like
Share
Download
Comment
Image अंग्रेजी बोर्ड
1 likes 16108 views 2 shares
Like
Share
Download
Comment

आज का सद्वाक्य

Image हिंदी सद्वाक्य
1 likes 16226 views 1 shares
Like
Share
Download
Comment
Image हिंदी सद्वाक्य
1 likes 16275 views 2 shares
Like
Share
Download
Comment
Image अंग्रेजी सद्वाक्य
1 likes 16163 views 1 shares
Like
Share
Download
Comment
Image अंग्रेजी सद्वाक्य
1 likes 16113 views 2 shares
Like
Share
Download
Comment



नित्य शांतिकुंज वीडियो दर्शन


!! अखण्ड दीपक Akhand_Deepak (1926 से प्रज्ज्वलित) चरण पादुका गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार 30 April 2026!

1 likes 15842 views
Like
Share
Comment



!! शांतिकुंज दर्शन 30 April 2026!! गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार !!

1 likes 15718 views
Like
Share
Comment



!! परम पूज्य गुरुदेव का कक्ष गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार 30 April 2026!

1 likes 15689 views
Like
Share
Comment



अमृतवाणी:- मुसीबतों से लड़ने वाले ही महान बनते हैं

1 likes 15890 views
Like
Share
Comment







परम् पूज्य गुरुदेव का अमृत संदेश



सफलताएं आध्यात्मिक सफलताएं और आध्यात्मिक महत्तायें हर कोई धारण नहीं कर सकता उसके धारण करने के लिए प्रखर और प्रबुद्ध व्यक्तित्वों की जरूरत है उन्हीं प्रखर और प्रबुद्ध व्यक्तित्वों का निर्माण करना उद्देश्य है उपासना का साधना का आध्यात्मिकता का  शिवाजी शिवाजी को समर्थ गुरु रामदास तलवार देने वाले थे परख करनी थी उनको उन्होंने कहा शिवाजी मेरी आंख फूटी जा रही है और कोई उपाय किया जाना चाहिए क्या उपाय किया जाए उन्होंने कहा एक ही उपाय किया जाए कि इसमें सिंहिनी का दूध डाला जाए सिंहिनी सिंहिनी का दूध लेने के लिए कौन जाएगा खा जाएगी मार डालेगी जिंदा छोड़ेगी नहीं सिंहिनी का दूध पा लेना हंसी खेल है क्या सिंहिनी के पास चले जाना जबकि छोटे-छोटे बच्चे उसके पास हों जबकि दूध देने वाली सिंहिनी हो उसके पास जा सके ना किसी की सामर्थ है क्या समर्थ गुरु ने कहा यह सामर्थ्य किसी की भी है तो आध्यात्मिकता को धारण करने की सामर्थ भी उसमें है आध्यात्मिकता की शक्ति और क्षमताओं को धारण नहीं किया करते कमजोर और भिखमंगे धारण नहीं किया करते भगवान का गर्व जहां तक धारण नहीं किया जा सकता भगवान का भर्ग भर्ग माने गर्व गर्व माने भर्ग भर्ग माने गर्व गर्व माने भर्ग हर कोई धारण नहीं कर सकता इसको धारण करने के लिए प्राणवान वीर शूर और साहसी मनुष्यों की जरूरत है और मित्रों वही हमारी उपासना का उद्देश्य है शिवाजी गया और शिवाजी ने सिंहिनी से कहा मां मुझे दूध की जरूरत है और इसकी कीमत पर यदि यदि मेरा शरीर खाया जा सकता है तो खा लिया जाना चाहिए जो इसके लिए तैयार है मौत से लड़ने के लिए तैयार है मौत डरती रहती है जो आदमी मौत से भागता रहता है मौत भागती रहती है उसके पीछे और जो आदमी संघर्षों से मुसीबतों के लिए सीना तान के खड़ा हो जाता है मुसीबतें भाग जाती है उसके सामने से मुसीबतों का कायदा बंदर के समान है बंदर जितने हैं हमारे घरों पर आजकल पुराना हमारा घीयामंडी बंदरों का घर है और बंदरों से रोज निपटना पड़ता है हमको निपटना पड़ता है छोटे बच्चों को कभी देखते हैं रोटी होती है और रोटी लेकर के भागने को होता है तो रोटी लेने बंदर आता है बच्चा जरा भी भागने लगा बस काट भी खाता है और रोटी भी ले जाता है और जहां बंदर की तरफ हाथ में ईंट या कुछ और हो कागज भी क्यों ना हो अखबार ही क्यों ना हो बस कई बंदर आएंगे घोघो करते रहेंगे लेकिन मजाल नहीं है कि आपके पास तक आ जाएं जहां आपने अखबार फेंका और पीछे की तरफ भागना शुरू किया धोती भी पढ़ लेंगे रोटी भी छीन ले जाएंगे और कुर्ता भी भाग लेंगे और कान भी काट खाएंगे मुसीबतों का यही क्रम है भयों का यही क्रम है भय से आप भागेंगे भय आएंगे आपके ऊपर भय का महत्व कीजिए मुसीबतों का मुकाबला कीजिए कठिनाइयों का मुकाबला कीजिए गरीबी का मुकाबला कीजिए संघर्षों का मुकाबला कीजिए बीमारियों का मुकाबला कीजिए हर एक आप से भागती हुई चली जाएगी डरती हुई चली जाएगी 

15146 views
Like
Share
Comment




अखण्ड-ज्योति से



“हर दिन नया जन्म, हर रात नयी मौत” की मान्यता लेकर जीवनक्रम बनाकर चला जाए तो वर्तमान स्तर से क्रमशः ऊँचे उठते चलना सरल पड़ेगा। मस्तिष्क और शरीर की हलचलें अन्तःकरण में जड़ जमाकर बैठने वाली आस्थाओं की प्रेरणा पर अवलंबित रहती हैं। आध्यात्मिक साधनाओं का उद्देश्य इस संस्थान को प्रभावित एवं परिष्कृत करना ही होता है। इस उद्देश्य की पूर्ति में वह साधना बहुत ही उपयोगी सिद्ध होती है, जिसमें उठते ही नये जन्म की और सोते ही नई मृत्यु की मान्यता को जीवन्त बनाया जाता है।

प्रातः बिस्तर पर जब आँख खुलती है तो कुछ समय आलस को दूर करके शैया से नीचे उतरने में लग जाता है। प्रस्तुत उपासना के लिए यही सर्वोत्तम समय है। मुख से कुछ भी कहने की आवश्यकता नहीं पर यह मान्यता−चित्र मस्तिष्क में अधिकाधिक स्पष्टता के साथ जमाना चाहिए कि “आज का एक दिन एक पूरे जीवन की तरह है; इसका श्रेष्ठतम, सदुपयोग किया जाना चाहिए। समय का एक भी क्षण न तो व्यर्थ गँवाया जाना चाहिए और न अनर्थ कार्यों में लगाना चाहिए।” सोचा जाना चाहिए कि “ईश्वर ने अन्य किसी जीवधारी को वे सुविधाएँ नहीं दीं जो मनुष्य को प्राप्त हैं। यह पक्षपात या उपहार नहीं; वरन् विशुद्ध अमानत है। जिसे उत्कृष्ट आदर्शवादी रीति−नीति अपनाकर पूर्णता प्राप्त करने—स्वर्ग और मुक्ति का आनन्द इसी जन्म में लेने के लिए दिया गया है। यह प्रयोजन तभी पूरा होता है जब ईश्वर की इस सृष्टि को अधिक सुन्दर, समुन्नत एवं सुसंस्कृत बनाने के लिए उपलब्ध जीवन सम्पदा का उपयोग किया जाय। उपयोग के लिए यह सुर−दुर्लभ अवसर मिला है। यह योजनाबद्ध सदुपयोग करने में ईश्वर की प्रसन्नता और जीवन की सार्थकता है।”

मंत्र जाप की तरह इन शब्दों को दुहराने की जरूरत नहीं है वरन् अत्यंत गम्भीरतापूर्वक इस तथ्य को हृदयंगम किया जाना चाहिए। कल्पना चित्र सिनेमा फिल्म की तरह स्पष्ट उभरने चाहिएँ और उनके साथ इतनी गहरी आस्था का पुट देना चाहिए कि यह चिन्तन, वस्तु स्थिति बनकर मस्तिष्क को पूरी तरह आच्छादित कर ले।

*शौच जाने की आवश्यकता अनुभव हो तो विलम्ब नहीं करना चाहिए और शय्या त्याग कर नित्य कर्म में लग जाना चाहिए। थोड़ी गुंजाइश हो तो उठने से लेकर सोने के समय तक की दिन−चर्या इसी समय बना लेनी चाहिए। यों नित्य कर्म करते हुए भी दिन भर का समय विभाजन कर लेना कुछ कठिन नहीं है। फुर्ती और चुस्ती से काम निपटाये जायं तो कम समय में अधिक काम हो सकता है। सुस्ती और उदासी में ही समय का तो भारी अपव्यय होता है, योजनाबद्ध दिन−चर्या बनाई जाय और उसका मुस्तैदी से पालन किया जाय तो ढेरों समय बच सकता है। एक काम के साथ दो काम हो सकते हैं। जैसे आजीविका उपार्जन के बीच खाली समय में स्वाध्याय तथा मित्रों में परामर्श हो सकता है। 
परिवार, व्यवस्था में मनोरंजन का पुट रह सकता है। निद्रा, नित्य कर्म, आजीविका उपार्जन, स्वाध्याय, उपासना, परिवार व्यवस्था, लोक−मंगल आदि कार्यों में, कौन, कब, किस प्रकार कितना समय देगा यह हर व्यक्ति की अपनी परिस्थिति पर निर्भर है, पर समन्वय इन सब बातों का रहना चाहिए। दृष्टिकोण यह रहना चाहिए कि आलस्य प्रमाद में एक क्षण भी नष्ट न हो और सारी गतिविधियाँ इस प्रकार चलती रहें जिनमें आत्मकल्याण परिवार निर्माण एवं लोक−मंगल के तीनों तथ्यों का समुचित समावेश बना रहे। इन सारे क्रिया−कलापों में आदर्शवादी दृष्टिकोण अपनाया जाय। दुष्प्रवृत्तियों को दुर्भावनाओं को स्थान न मिलने दिया जाय। जहाँ भी जब भी गड़बड़ दिखाई पड़े तब वहीं उसकी रोकथाम की जाय और गिरते कदमों को संभाल लिया जाय। समय, श्रम, चिन्तन एवं धन का तनिक−सा अंश भी अवाँछनीय प्रयोजन में नष्ट न होने दिया जाये इन चारों ही सम्पदाओं का एक−एक कण सदुपयोग में लगता रहे, इस तथ्य पर तीखी दृष्टि रखी जाय, भूलों को तत्काल सुधारते रहा जाय तो उस दिन के —उस जीवन को संतोषजनक रीति से जिया जा सकता है।*

जल्दी सोने और जल्दी उठने का नियम जीवन साधना में रुचि रखने वाले प्रत्येक व्यक्ति को बनाना ही चाहिए। ब्रह्ममुहूर्त का समय अमृतोपम है, उस समय किया गया हर कार्य बहुत ही सफलतापूर्वक संपन्न होता है। अस्तु जो भी अधिक महत्वपूर्ण कार्य प्रतीत होता हो उसे उसी समय में करना चाहिए। सवेरे जल्दी उठना उन्हीं के लिए सम्भव है जो रात्रि को जल्दी सोते हैं। इस मार्ग में जो अड़चने हों उन्हें बुद्धिमतापूर्वक हल करना चाहिए; किन्तु जल्दी सोने और जल्दी उठने की परम्परा तो अपने लिए ही नहीं पूरे परिवार के लिए बना ही लेनी चाहिए।

रात्रि को सोते समय वैराग्य एवं संन्यास जैसी स्थिति बनानी चाहिए। बिस्तर पर जाते ही यह सोचना चाहिए कि निद्रा काल एक प्रकार की मृत्यु विश्राम है। आज का नाटक समाप्त कल दूसरा खेल खेलना है। परिवार ईश्वर का उद्यान है उसमें अपने को कर्तव्य−निष्ठ माली की भूमिका निभानी थी। शरीर, मन, ईश्वरीय प्रयोजनों को पूरा करने के लिए मिले जीवन रथ के दो पहिये हैं, इन्हें सही राह पर चलाना था। धन, प्रभाव, पद यह विशुद्ध धरोहर है उन्हें सत्प्रयोजनों में ही लगाना था। देखना चाहिए कि वैसा ही हुआ या नहीं? जहाँ गड़बड़ी हुई दिखाई दे वहाँ पश्चाताप करना चाहिए और अगले दिन वैसी भूल न होने देने में कड़ी सतर्कता बरतने की अपने आपको चेतावनी देनी चाहिए।

संन्यासी अपना सब कुछ ईश्वर अर्पण करके परमार्थ प्रयोजन में लगता है। सोते समय साधक की वैसी ही मनःस्थिति होनी चाहिए। मिली हुई अमानतें और सौंपी हुई जिम्मेदारियाँ आज ईमानदारी के साथ संभाली गईं। यदि कल वे फिर मिलीं तो फिर उन्हें ईश्वरीय आदेश मान कर संभाला जायगा। अपना स्वामित्व किसी भी व्यक्ति या पदार्थ पर नहीं। यहाँ जो कुछ है सो सब ईश्वर का है। अपना तो केवल कर्तव्य एवं उत्तरदायित्व भर है। उसे पूरी ईमानदारी और पूरी तत्परता से निवाहते भर रहना अपने लिये पर्याप्त है। परिणाम क्या होते हैं, क्या नहीं—यह परिस्थितियों पर निर्भर है अस्तु सफलता असफलता की चिन्ता न करते हुए हमें आदर्शवादी कर्तव्य परायणता अपनाये रहने मात्र में पूरा−पूरा संतोष अनुभव करना चाहिए।

सोते समय ईश्वर की अमानतें ईश्वर को सौंपने और स्वयं खाली हाथ प्रसन्न चित्त विदा होने की—निद्रा देवी की गोद में जाने की बात सोचनी चाहिए। हलके मन से शाँति पूर्वक गहरी नींद में सो जाना चाहिए। चिन्ता, आशंका, खीज, क्रोध जैसी किसी भी उद्विग्नता को मन पर लाद कर नहीं सोना चाहिए। यह प्रयास शाँत निद्रा लाने की दृष्टि से भी उपयोगी है। साथ ही आत्म-परिष्कार की दृष्टि से भी अति−महत्वपूर्ण है।

मृत्यु को भूलने से ही जीवन संपदा को निरर्थक कामों में गँवाते रहने की चूक होती है, दुष्कर्म बन पड़ते हैं और वासना तृष्णा अहंता की क्षुद्रताओं में समय गुजरता है। यदि यह ध्यान बना रहेगा कि मृत्यु का निमंत्रण कभी भी सामने आ सकता है तो यह ध्यान बना रहेगा कि इस महान अवसर का सही उपयोग किया जाय और पूरा लाभ उठाया जाय। निद्रा की तुलना मृत्यु से करते रहने पर मौत का भय मन से निकल जाता है और अलभ्य अवसर के सदुपयोग की बात चित्त पर छाई रहती है।

प्रातः उठते समय नये दिन की मान्यता—जीवनोद्देश्य की स्पष्टता तथा सुव्यवस्थित दिनचर्या बनाने का कार्य संपन्न करना चाहिए। रात्रि को सोते समय मृत्यु का चिन्तन, आत्म, निरीक्षण, पश्चाताप और कल के लिए सतर्कता—वैरागी एवं संन्यासी जैसी मालिकी त्यागने की हलकी फुलकी मनः स्थिति लेकर शयन किया जाय। दिन भर हर घड़ी चुस्ती फुर्ती मुस्तैदी और दिलचस्पी के साथ प्रस्तुत कार्यों को निपटाया जाय। भीतर दुर्भावनाओं और बाहरी दुष्प्रवृत्तियों के उभरने का अवसर आते ही उनसे जूझ पड़ा जाय और निरस्त करके ही दम लिया जाय। यह है वह जीवन साधना जिसमें चौबीसों घन्टे निमग्न रह कर और इसी जीवन में स्वर्ग जैसे उल्लास आनन्द और मुक्ति जैसे आनन्द का हर घड़ी अनुभव करते रहा जा सकता है।

 परम पूज्य गुरुदेव पं श्रीराम शर्मा आचार्य 
 अखण्ड ज्योति 1976 जनवरी

15454 views
Like
Share
Comment



×
Popup Image
❮ ❯
Like Share Link Share Download
Newer Post Home Older Post


View count

185380290



Archive

About Shantikunj

Shantikunj has emerged over the years as a unique center and fountain-head of a global movement of Yug Nirman Yojna (Movement for the Reconstruction of the Era) for moral-spiritual regeneration in the light of hoary Indian heritage.

Navigation Links
  • Home
  • Literature
  • News and Activities
  • Quotes and Thoughts
  • Videos and more
  • Audio
  • Join Us
  • Contact
Write to us

Click below and write to us your commenct and input.

Go

Copyright © SRI VEDMATA GAYATRI TRUST (TMD). All rights reserved. | Design by IT Cell Shantikunj