Sunday 21, June 2026
वेद से जीवन तक का ज्ञान ✨ अमृत सन्देश:- पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य
भाग्य का निर्माण अपने हाथ में है | Bhagya Ka Nirman Apne Hath Me Hai | Motivational Story
बच्चों के प्रति माता-पिता का कर्तव्य क्या है ? Bachchon Ke Prati Mata-Pita Ka Kartavya Kya Hai? अमृत सन्देश:- पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य
गायत्रीतीर्थ शांतिकुंज, नित्य दर्शन
आज का सद्चिंतन (बोर्ड)
आज का सद्वाक्य
नित्य शांतिकुंज वीडियो दर्शन
!! महाकाल महादेव मंदिर शांतिकुञ्ज हरिद्वार 21 June 2026
!! सप्त ऋषि मंदिर गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार 21 June 2026!
!! गायत्री_माता_मंदिर Gayatri_Mata_Mandir गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार 21 June 2026!
!! परम पूज्य गुरुदेव का कक्ष गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार 21 June 2026!
!! शांतिकुंज दर्शन 21 June 2026!! गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार !!
!! अखण्ड दीपक Akhand_Deepak (1926 से प्रज्ज्वलित) चरण पादुका गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार 21 June 2026!
वेद से जीवन तक का ज्ञान ✨ अमृत सन्देश:- पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य
परम् पूज्य गुरुदेव का अमृत संदेश
वेद हमारी संस्कृति के मूलभूत आधार हैं। वेदों की व्याख्या अन्य ग्रंथों में हुई है। सब ग्रंथ उसी से बनते चले जा रहे हैं ब्राह्मण ग्रंथ बने हैं, आरण्यक बने हैं, और उपनिषदें बनी हैं, दर्शन बने हैं, स्मृतियां बनी हैं, पुराण बने हैं, सब उसी से बने हैं गायत्री मंत्र का ज्ञान वाला भाग और विज्ञान वाला भाग अंतरंग और बहिरंग वाला भाग किस तरीके से काम में लाया जा सकता है यह राम चरित्र और कृष्ण चरित्र के माध्यम से समझाया जाय। बाल्मीकि रामायण में 24000 श्लोक हैं और 1000 श्लोकों के बाद एक अक्षर का संपुट लगाकर के बाल्मीकि रामायण बनाई गई है और रामचरित्र जैसा भी कुछ है गायत्री मंत्र के आंतरिक जीवन का मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप का मर्यादाएं किस तरीके से पालन करनी चाहिए उसका सारे का सारा शिक्षण रामचरित्र के माध्यम से दिया गया है। अध्यात्म रामायण अपने लोगों में से पढ़ी होगी किसी ने। संस्कृत की पुस्तक है भीतर बताया है यह हमारे अध्यात्म ही भीतर ही हमारी रामा हैं भीतर ही हमारा भरत है भीतर ही हमारी कौशल्या हैं कौन-कौन हैं सब इसमें रूपक बना के दिखाया गया है। यह सारे का सारा आंतरिक जीवन का शिक्षण रामायण के माध्यम से बना है
अखण्ड-ज्योति से
किस के भाग्य में समृद्धि, प्रगति और प्रतिष्ठा बढ़ी है इसे जानने के लिए किसी के गृह नक्षत्र देखने की आवश्यकता नहीं है और न किसी पंडित ज्योतिष से पूछने की आवश्यकता है। किसी का भी भला-बुरा भविष्य जानने के लिए इतनी जानकारी पर्याप्त है कि कौन अपने को अधिक सुयोग्य, सक्षम एवं सुसंस्कृत बनाने के लिए किस सीमा तक प्रयत्न कर रहा है।
आज का प्रयास ही कल परिणति बनकर सामने आता है। दूसरा कोई किसी को न ऊँचा उठाता है और न नीचे गिराता है। मनुष्य अपनी विचारणा और क्रिया पद्धति के सहारे ही अपने को उत्कृष्ट और निकृष्ट बनाता है। तदनुरूप ही उसके सामने परिस्थितियाँ विनिर्मित होती और सामने आ खड़ी होती है।
दूसरों के दिए हुए अनुदान सुरक्षित रखने तथा उनका सदुपयोग कर सकने की क्षमता अपने भीतर से उत्पन्न होती है। जिन्होंने अपने को शालीनता के ढाँचे में ढाला है वे समर्थों और सज्जनों से सम्मान तथा सहयोग प्राप्त करते हैं और अपने क्रिया-कलाप के आधार पर ऊंचे उठते चले जाते हैं।
अनपढ़ व्यक्तियों की वाणी में कर्कशता, क्रिया कलाप में अस्तव्यस्तता, चिन्तन में निकृष्टता का समावेश होने से उनकी प्रकृति ऐसी बन जाती है जिससे भविष्य हर दृष्टि से अन्धकारमय ही बनता चला जाता है।
अखण्ड ज्योति मार्च 1988
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