• News
  • Blogs
  • Gurukulam
English हिंदी
  • About Us
    • Gayatri Teerth Shantikunj
    • Mission Vision
    • Patron Founder
    • Present Mentor
    • Blogs & Regional sites
    • DSVV
    • Organization
    • Our Establishments
    • Dr. Chinmay Pandya - Our pioneering youthful representative
  • Initiatives
    • Spiritual
    • Environment Protection
    • Social Development
    • Education with Wisdom
    • Health
    • Corporate Excellence
    • Disaster Management
    • Training/Shivir/Camps
    • Research
    • Programs / Events
  • Read
    • Akhandjyoti Magazine
    • Books
    • News
    • E-Books
    • Events
    • Gayatri Panchang
    • Geeta Jayanti 2023
    • Motivational Quotes
    • Lecture Summery
  • Spiritual WIsdom
    • Thought Transformation
    • Revival of Rishi Tradition
    • Change of Era - Satyug
    • Yagya
    • Life Management
    • Foundation of New Era
    • Gayatri
    • Indian Culture
    • Scientific Spirituality
    • Self Realization
    • Sacramental Rites
  • Media
    • Social Media
    • Video Gallery
    • Audio Collection
    • Photos Album
    • Pragya Abhiyan
    • Mobile Application
    • Gurukulam
    • News and activities
    • Blogs Posts
    • Live
    • Yug Pravah Video Magazine
  • Contact Us
    • India Contacts
    • Global Contacts
    • Shantikunj - Headquarter
    • Join us
    • Write to Us
    • Spiritual Guidance FAQ
    • Magazine Subscriptions
    • Shivir @ Shantikunj
    • Contribute Us
  • Login

Media   >   Social Media   >   Daily Update

Saturday 30, May 2026

×

VIDEO
सच्चे साधक का जीवन कैसा हो? Sacche saadhak ka jeevan kaisa ho? अमृत सन्देश:-  पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य

सच्चे साधक का जीवन कैसा हो? Sacche saadhak ka jeevan kaisa ho? अमृत सन्देश:- पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य

2 likes 58392 views 1 comments
Like
Share
Comment



VIDEO
अहंकार नाश ही करता है | Ahankar Nash Hi Karta Hai | Dr Chinmay Pandya, Rishi Chintan

अहंकार नाश ही करता है | Ahankar Nash Hi Karta Hai | Dr Chinmay Pandya, Rishi Chintan

2 likes 58211 views 1 comments
Like
Share
Comment



गायत्रीतीर्थ शांतिकुंज, नित्य दर्शन

गायत्री माता
Image गायत्री माता
3 likes 60108 views 1 comments 4 shares
Like
Share
Download
Comment
गायत्री माता - अखंड दीपक
Image गायत्री माता - अखंड दीपक
2 likes 60178 views 1 comments 2 shares
Like
Share
Download
Comment
गुरुजी माताजी
Image गुरुजी माताजी
3 likes 60059 views 1 comments 1 shares
Like
Share
Download
Comment
चरण पादुका
Image चरण पादुका
4 likes 59953 views 1 comments 1 shares
Like
Share
Download
Comment
सजल श्रद्धा - प्रखर प्रज्ञा (समाधि स्थल)
Image सजल श्रद्धा - प्रखर प्रज्ञा (समाधि स्थल)
2 likes 59871 views 1 comments 1 shares
Like
Share
Download
Comment
प्रज्ञेश्वर महादेव - देव संस्कृति विश्वविद्यालय
Image प्रज्ञेश्वर महादेव - देव संस्कृति विश्वविद्यालय
2 likes 59786 views 1 comments 1 shares
Like
Share
Download
Comment
शिव मंदिर - शांतिकुंज
Image शिव मंदिर - शांतिकुंज
2 likes 59737 views 1 comments 1 shares
Like
Share
Download
Comment
हनुमान मंदिर - शांतिकुंज
Image हनुमान मंदिर - शांतिकुंज
3 likes 59670 views 1 comments 1 shares
Like
Share
Download
Comment

आज का सद्चिंतन (बोर्ड)

Image हिंदी बोर्ड
3 likes 60212 views 1 comments 5 shares
Like
Share
Download
Comment
Image हिंदी बोर्ड
1 likes 60102 views 1 comments 2 shares
Like
Share
Download
Comment
Image अंग्रेजी बोर्ड
1 likes 59993 views 1 comments
Like
Share
Download
Comment
Image अंग्रेजी बोर्ड
1 likes 59911 views 1 comments
Like
Share
Download
Comment

आज का सद्वाक्य

Image हिंदी सद्वाक्य
1 likes 60234 views 1 comments 4 shares
Like
Share
Download
Comment
Image हिंदी सद्वाक्य
1 likes 60111 views 1 comments 2 shares
Like
Share
Download
Comment
Image अंग्रेजी सद्वाक्य
2 likes 60010 views 1 comments
Like
Share
Download
Comment
Image अंग्रेजी सद्वाक्य
1 likes 59928 views 1 comments
Like
Share
Download
Comment
लेख
Image लेख
1 likes 60240 views 1 comments 1 shares
Like
Share
Download
Comment



नित्य शांतिकुंज वीडियो दर्शन


!! शांतिकुंज दर्शन 30 May 2026!! गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार !!

2 likes 58505 views 1 comments
Like
Share
Comment



आत्मीयता सिर्फ परिवार में ही क्यों मिलती है। अमृत सन्देश:- परम पूज्य गुरुदेव पं श्रीराम शर्मा आचार्य

2 likes 58518 views 1 comments
Like
Share
Comment







परम् पूज्य गुरुदेव का अमृत संदेश



परिवार के अलावा ना आप प्यार दे पाते हैं ना आप प्यार ले पाते हैं आपके सारे के सारे आप बाजार में जाइए औरतों के बीच में जाइए सब आर्टिफिशियल सब जाइए आर्टिफिशियल सब जाइए शिष्टाचार सब दुनिया में शिष्टाचार के अलावा आपको कहां क्या मिलेगा आत्मीयता आत्मा जिसके सामने नंगी हो जाती है आत्मा जिसको खोल करके अपने मन की बात कह सकती है यह कहां मिलती है आप बताइए ना मुझे यह सिर्फ एक ही एक ही फैक्ट्री में मिलती है एक ही कारखाने में मिलती है एक ही उद्यान में मिलती है और एक ही बगीचे में मिलती है उस बगीचे का नाम है कुटुंब इस कुटुंब में आपने इस कुटुंब ने सब कुछ दिया इस कुटुंब के लिए आपने जिंदगी खर्च कर डाली जानता हूं इसके लिए आपने लड़की लड़कों के शादी के लिए क्या नहीं किया मैं जानता हूं और आपने सारी जिंदगी भर अपने आपको हड्डियों को निचोड़ करके अपने ईमान को निचोड़ करके अपने भविष्य को निचोड़ करके सब कुछ जो भी कमाया उसमें क्या किया सिवाय इन्हीं के लिए तो दे गए इतना त्याग कर सकते हैं इतना तप कर सकते हैं इतना आप योगी हो सकते हैं इतने महात्मा हो सकते हैं इतने उदार हो सकते हैं इतने दानी हो सकते हैं और कौन-कौन से नाम लूं आपके लिए आपके लिए अभी मुझे और नाम लेना चाहिए था मैं क्या करूं मुझे ना मिला ही नहीं 1 दिन मेरा मन आया प्यार आया कि मैं राजा कर्ण कहूं आपको राजा कर्ण कहूं राजा कर्ण क्यों कह रहे थे राजा कर्ण जो कुछ भी कमाता था सब धर्म के लिए दान कर देता था आप बिल्कुल राजा कर्ण हैं जो कुछ भी जिंदगी भर कमाया है आपने आपने खाया क्या अरे साहब हम तो सूखी रोटी खा रहे हैं सब आपने उन्हीं के लिए उन्हीं के लिए खर्च कर दिया ना जिनको आप कुटुंबी कहते हैं साहब कुटुंबियों से नाराज हैं कुटुंबियों से नाराज क्यों होने लगा मैं तो कुटुंबियों को प्यार करता हूं मैं मैं मुझे तो कुटुंब कुटुंब शब्द प्राणों से प्यारा है यहां भी मैंने कुटुंब बसा दिया जंगल में आते थे वहां भी कुटुंब बसा दिया आप ने हमारी एक पुस्तक देखी नहीं है कौन सी हमारी एक पुस्तक है सुनसान के सहचर जब मुझे हिमालय पर जाना पड़ा जहां मुझे ऐसे स्थान पर रखा गया जहां की सब ओर एकांत सब ओर एकांत सब ओर एकांत शिवाय पहाड़ के अलावा और सिवाय मेरे अलावा सिवाय हवा के अलावा सिवाय घास पात के अलावा दूसरा कोई था ही नहीं चारों और सुनसान चारों और सुनसान मैंने कहा सुनसान की जिंदगी किस तरीके से जी जा सकेगी सुनसान में कैसे रहा जा सकेगा सुनसान में आदमी का गुजारा कैसे हो सकता है सुनसान में सुनसान में आदमी नहीं रह सकता आदमी नहीं रह सकता आदमी सुनसान का हिमायती नहीं है आदमी की बनावट सुनसान में रहने की नहीं है तो फिर मैं कैसे जिऊंगा सुनसान मैं मित्रों मैंने अपने आप को कितने लोगों को साथी बना लिया कैसा एक कुटुंब खड़ा कर लिया ख्वाबों का कुटुंब ख्यालातों का कुटुंब मित्रों का कुटुंब प्राणियों का कुटुंब आप उसको पढ़ना जरा किताब को बड़ी मजेदार किताब है

2 likes 57498 views 1 comments 1 shares
Like
Share
Comment




अखण्ड-ज्योति से




श्रावस्ती नगरी में सर्वत्र तपस्वी सुधारक की ही चर्चा थी। लोभ और मोह, वासना और तृष्णा पर उन्होंने विजय पा ली थी। तत्वदर्शियों ने साधना से सिद्धि के तीन सोपान बताये हैं–’मातृवत् परदारेषु पर द्रव्येषु लोष्ठवत् और आत्मवत् सर्वभूतेषु’। साधु−सुधारक रूपी आरम्भिक दो सोपानों पर चढ़ चुके थे। उनके तप और त्याग से–निस्पृह जीवन चर्या से हर कोई प्रभावित था। लोगों की श्रद्धा एवं सम्मान के सुमन उन पर चढ़ रहे थे। उग्र साधन के ताप में इन्द्रियों की वासना विगलित हो चुकी थी। संयम और तितिक्षा की अग्नि में तपने के बाद मन ने वित्तेषणा की निस्सारता सिद्ध कर दी थी, पर अभी भी लोकेषणा मन के एक कोने में अपना अड्डा मजबूती से जमाये हुई थी। जिसके कारण साधना की अहम्यता पोषण पा रही थी। शास्त्रकारों ने लोकेषणा को सबसे सूक्ष्म और प्रबलतम शत्रु माना है जिस पर विजय पाना प्रायः कठिन पड़ता है। यही तपस्वी सुधारक के साथ हुआ। सम्मान और श्रेय प्राप्त कर सुधारक का अहंकार बढ़ता ही गया।

निरासक्त तपस्वी के प्रति उमड़ने वाली श्रद्धा ने वन, सम्पत्ति, वस्त्र आदि उपादानों के अम्बार लगा दिए। यह देखकर सुधारक के मन में वितर्क उठा कि–अब मेरी तपस्या सफल हो गयी। योग सिद्ध हो गया, जीवन मुक्ति का अधिकारी बन गया। अहंकार साधक के पतन का कारण बनता है। अनेकों स्थानों पर परिव्रज्या के निर्मित परिभ्रमण करने के उपरान्त जब वे आश्रम में वापिस लौटे तो वृद्ध गुरु की तीक्ष्ण दृष्टि से उनका अहंभाव छुपा न रह सका। एक दिन गुरु ने उन्हें पास बुलाया और कहा “वत्स! आश्रम में समिधाएँ समाप्त हो चुकी है। जाओ जंगल से समिधाएँ ले आओ। प्रातःकाल के यज्ञ की तैयारी करनी है। सुधारक ने उपेक्षा दर्शाते हुए कहा–”मुझे अब कर्म करने की आवश्यकता नहीं है। मैं अर्हत् मार्ग पर आरुढ़ हो चुका हूँ।” तत्वदर्शी गुरु भावी आशंका से चिन्तित हो उठे। उन्होंने स्नेह मिश्रित स्वर में कहा–”तात! तुम यह काम रहने दो, पर एक काम अवश्य करो। भगवान बुद्ध श्रावस्ती नगरी में पधारे है। उनसे एक बार अवश्य मिल आओ।” सुधारक ने बुद्ध की ख्याति सुन रखी थी। मन में उत्कण्ठा भी थी मिलने की। गुरु के प्रस्ताव को स्वीकार करके वह महाप्राज्ञ से मिलने चल पड़े।

जैतवन बौद्ध बिहार में बौद्ध भिक्षुकों की मण्डली ठहरी थी। वहाँ पहुँचने पर सुधारक को मालूम हुआ कि बुद्ध भिक्षाटन कि लिए गये है। इतने भिक्षुओं के रहते हुए भी बुद्ध को भिक्षाटन के लिए जाना पड़ता है, यह बात सुधारक की समझ में न आ सकी। खोजते−खोजते एक गृहस्थ के यहाँ भीख मांगते बुद्ध से उनकी भेंट हो गयी। अपना परिचय सुधारक न स्वयं एक तपस्वी के रूप में दिया तथा बन्धन मुक्ति का उपदेश देने का आग्रह किया। महाप्राज्ञ मौन रहे और सुधारक के साथ जैतवन वापिस लौटे। रात्रि विश्राम करने का आदेश देने तथा प्रातः− कान सम्बन्धित विषय पर चर्चा करने के साथ संक्षेप में वार्ता समाप्त की।

दूसरे दिन भगवान बुद्ध के सामने अपनी जिज्ञासा लिए सुधाकर बैठे थे। अंतर्दृष्टा महाप्राज्ञ से सुधारक की स्थिति दर्पण की भाँति स्पष्ट थी। तपस्वी और त्यागी होते हुए भी सुधारक अहंकारी है, यह अपनी सूक्ष्म दृष्टि से, वे देख चुके थे। उनकी मर्मभेदी वाणी फूट पड़ी–”वत्स! जीवन मुक्ति, ईश्वर प्राप्ति के मार्ग में सबसे बड़ा अवरोधक है–अहंकार। यह लोकेषणा की कामना से बढ़त है, पर निरासक्त कर्मयोग–सेवा भावना से भावना से घटता है। लोकसेवा में निरत होकर ही अहंकार पर विजय प्राप्त की जा सकती है। आत्मवत् सर्वभूतेषु की उच्चस्तरीय अनुभूति इस सेवा साधना से ही सम्भव है।”

सुधारक को अपनी भूल ज्ञान हुई। भगवान बुद्ध के चरणों में गिरकर उन्होंने क्षमा माँगी और लोकसेवा में प्रवृत्त होकर अपनी अवरुद्ध आत्मिक प्रगति का मार्ग प्रशस्त करने में लग गये।

 परम पूज्य गुरुदेव पं श्रीराम शर्मा आचार्य
 अखण्ड ज्योति मई 1982 

2 likes 58018 views 1 comments 1 shares
Like
Share
Comment



×
Popup Image
❮ ❯
Like Share Link Share Download
Newer Post Home Older Post


View count

199798857



Archive

About Shantikunj

Shantikunj has emerged over the years as a unique center and fountain-head of a global movement of Yug Nirman Yojna (Movement for the Reconstruction of the Era) for moral-spiritual regeneration in the light of hoary Indian heritage.

Navigation Links
  • Home
  • Literature
  • News and Activities
  • Quotes and Thoughts
  • Videos and more
  • Audio
  • Join Us
  • Contact
Write to us

Click below and write to us your commenct and input.

Go

Copyright © SRI VEDMATA GAYATRI TRUST (TMD). All rights reserved. | Design by IT Cell Shantikunj