• News
  • Blogs
  • Gurukulam
English हिंदी
  • About Us
    • Patron Founder
    • Gayatri Teerth Shantikunj
    • Mission Vision
    • Present Mentor
    • Blogs & Regional sites
    • DSVV
    • Organization
    • Dr. Chinmay Pandya - Our pioneering youthful representative
    • Our Establishments
  • Initiatives
    • Spiritual
    • Environment Protection
    • Social Development
    • Education with Wisdom
    • Health
    • Corporate Excellence
    • Disaster Management
    • Training/Shivir/Camps
    • Research
    • Programs / Events
  • Read
    • Akhandjyoti Magazine
    • Books
    • News
    • E-Books
    • Events
    • Gayatri Panchang
    • Geeta Jayanti 2023
    • Motivational Quotes
    • Lecture Summary
  • Spiritual Wisdom
    • Thought Transformation
    • Revival of Rishi Tradition
    • Change of Era - Satyug
    • Yagya
    • Life Management
    • Foundation of New Era
    • Gayatri
    • Indian Culture
    • Scientific Spirituality
    • Self Realization
    • Sacramental Rites
  • Media
    • Social Media
    • Video Gallery
    • Audio Collection
    • Photos Album
    • Pragya Abhiyan
    • Mobile Application
    • Gurukulam
    • News and activities
    • Blogs Posts
    • Live
    • Yug Pravah Video Magazine
  • Contact Us
    • India Contacts
    • Global Contacts
    • Shantikunj - Headquarter
    • Join us
    • Write to Us
    • Spiritual Guidance FAQ
    • Magazine Subscriptions
    • Shivir @ Shantikunj
    • Contribute Us
  • Login

Media   >   Social Media   >   Daily Update

Thursday 09, July 2026

×

POST

सद्गुरू भक्तों के लिए सहज- सुलभ यह अनुभूति बुद्धिप्रवण जनों के लिए परम दुर्लभ है। ऐसे लोग अपनी तर्क- बुद्धि से देहधारी गुरूसत्ता को सामान्य मानव समझने की भूल करते रहते हैं वे सोचते हैं- हमारी ही तरह दिखने वाला यह व्यक्ति हमसे इतना अलग और असाधारण किस भाँति हो सकता है? जो ठीक हमारी तरह खाता- पीता व सोता है, वह भला किस तरह ईश्वरीय तत्त्व की सघन प्रतिमूर्ति हो सकता है? अनेकों शंकाएँ- कुशंकाएँ उनके मन- अन्तःकरण को घेरे रहती हैं। अनगिनत संदेह- भ्रम उन्हें परेशान करते रहते हैं। मूढ़ताओं का यह कुहासा इतना गहरा होता है कि सूर्य की भाँति प्रकाशित सद्गुरू चेतना उन्हें नजर ही नहीं आती। अपनी तर्कप्रवण बुद्धि में उलझकर वे यह भूल जाते हैं कि गुरूदेव तो तर्क से अतीत हैं। वे महामहेश्वर गुरूदेव बुद्धिगम्य नहीं ,भावगम्य हैं। उन भावगम्य भगवान् को तर्क से नहीं, श्रद्धा से समझा जा सकता है। उन्हें नमन एवं समर्पण से ही इस सत्य का बोध होता है कि वे कौन हैं? गुरूदेव ब्राह्यी चेतना से सर्वथा अभिन्न होने के कारण इस जगत् के परम स्त्रोत हैं। यह जगत् भी उन्हीं का विराट् रूप है। वे एक साथ महाबीज भी हैं और महावट भी। ऊपरी तौर पर हर कहीं- सब कहीं कितना भी भेद क्यों न दिखाई दे, पर गुरूदेव की परम पावन चेतना सभी कुछ अभिन्न और अभेद है। उनके चरण कमलों में आश्रय पाने से शिष्यों के सभी दुःख, द्वन्द्व और तापों का निवारण हो जाता है। उनका प्रभाव और प्रताप कुछ ऐसा है कि महारूद्र यदि क्रुद्ध हो जायें ,, तो गुरू कृपा से शिष्य का त्राण हो जाता है; परन्तु सद्गुरू के रूष्ट होने से स्वयं महारूद्र भी रक्षा नहीं कर पाते हैं। सद्गुरू चरण युगल शिव- शक्ति का ही रूप हैं। उनकी बार- बार वन्दना करने से शिष्यों का सब भाँति कल्याण होता है। गुरू नमन की यह महिमा गुरूतत्त्व के विस्तार की ही भाँति असीम और अनन्त है। गुरू से भिन्न तीनों लोकों में कुछ नहीं है। जो इसे जान लेता है, उसे सब कुछ अपने- आप मिल जाता है। क्योंकि सद्गुरू केवल मार्ग दिखाने वाले नहीं, बल्कि स्वयं उस दिव्य चेतना के स्रोत हैं, जिनकी कृपा से साधक अज्ञान के अंधकार से निकलकर आत्मज्ञान के प्रकाश को प्राप्त करता है। गुरू कृपा ही जीवन की सर्वोच्च उपलब्धि है। पुस्तक - गुरुगीता के लेख से ...

38849 views
Like
Share
Comment



VIDEO
उपासना क्या है | Upasana Kya Hai | Pt Shriram Sharma Acharya | Rishi Chintan, Gayatri Pariwar

उपासना क्या है | Upasana Kya Hai | Pt Shriram Sharma Acharya | Rishi Chintan, Gayatri Pariwar

38831 views
Like
Share
Comment



VIDEO
जब हर प्राणी में राम दिखाई दें। Jab har Praani Mein Ram Dikhai Dein अमृत सन्देश:- पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य

जब हर प्राणी में राम दिखाई दें। Jab har Praani Mein Ram Dikhai Dein अमृत सन्देश:- पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य

38583 views
Like
Share
Comment



IMAGE
Image वीडियो अपडेट
49524 views 1 shares
Like
Share
Download
Comment

गायत्रीतीर्थ शांतिकुंज, नित्य दर्शन

गायत्री माता
Image गायत्री माता
51438 views
Like
Share
Download
Comment
गायत्री माता - अखंड दीपक
Image गायत्री माता - अखंड दीपक
51843 views
Like
Share
Download
Comment
गुरुजी माताजी
Image गुरुजी माताजी
51049 views 1 shares
Like
Share
Download
Comment
चरण पादुका
Image चरण पादुका
50530 views
Like
Share
Download
Comment
सजल श्रद्धा - प्रखर प्रज्ञा (समाधि स्थल)
Image सजल श्रद्धा - प्रखर प्रज्ञा (समाधि स्थल)
50172 views
Like
Share
Download
Comment
परम् पूज्य गुरुदेव व वंदनीय माताजी कक्ष
Image परम् पूज्य गुरुदेव व वंदनीय माताजी कक्ष
49854 views
Like
Share
Download
Comment
परम् पूज्य गुरुदेव व वंदनीय माताजी कक्ष
Image परम् पूज्य गुरुदेव व वंदनीय माताजी कक्ष
49659 views
Like
Share
Download
Comment
परम् पूज्य गुरुदेव व वंदनीय माताजी कक्ष
Image परम् पूज्य गुरुदेव व वंदनीय माताजी कक्ष
49491 views
Like
Share
Download
Comment
परम् पूज्य गुरुदेव व वंदनीय माताजी कक्ष
Image परम् पूज्य गुरुदेव व वंदनीय माताजी कक्ष
49338 views
Like
Share
Download
Comment
परम् पूज्य गुरुदेव व वंदनीय माताजी कक्ष
Image परम् पूज्य गुरुदेव व वंदनीय माताजी कक्ष
49426 views
Like
Share
Download
Comment
प्रज्ञेश्वर महादेव - देव संस्कृति विश्वविद्यालय
Image प्रज्ञेश्वर महादेव - देव संस्कृति विश्वविद्यालय
49146 views
Like
Share
Download
Comment
हनुमान मंदिर - शांतिकुंज
Image हनुमान मंदिर - शांतिकुंज
49075 views
Like
Share
Download
Comment

आज का सद्चिंतन (बोर्ड)

Image हिंदी बोर्ड
52147 views
Like
Share
Download
Comment
Image हिंदी बोर्ड
51632 views 1 shares
Like
Share
Download
Comment
Image अंग्रेजी बोर्ड
50478 views
Like
Share
Download
Comment
Image अंग्रेजी बोर्ड
50767 views
Like
Share
Download
Comment

आज का सद्वाक्य

Image हिंदी सद्वाक्य
51791 views 1 shares
Like
Share
Download
Comment
Image हिंदी सद्वाक्य
52162 views 2 shares
Like
Share
Download
Comment
Image अंग्रेजी सद्वाक्य
50678 views
Like
Share
Download
Comment
Image अंग्रेजी सद्वाक्य
50781 views
Like
Share
Download
Comment
लेख
Image लेख
52587 views
Like
Share
Download
Comment



नित्य शांतिकुंज वीडियो दर्शन


!! परम पूज्य गुरुदेव का कक्ष गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार 09 July 2026

40050 views
Like
Share
Comment



!! शांतिकुंज दर्शन 09 July 2026!! गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार !!

39123 views
Like
Share
Comment



ध्यान से मन का बोझ हटाएँ। Dhyaan Se Man ka Bojh Hataayen प्रेरणादायक संदेश :- Shraddheya Dr Pranav Pandya Ji

38818 views
Like
Share
Comment



!! अखण्ड दीपक Akhand_Deepak (1926 से प्रज्ज्वलित) चरण पादुका गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार 09 July 2026

38411 views
Like
Share
Comment



अमृत सन्देश:- सच्चा आनंद वस्तुओं में नहीं, प्रेम में है। अमृत सन्देश:- पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य

40367 views
Like
Share
Comment







परम् पूज्य गुरुदेव का अमृत संदेश



प्यार के बराबर आनंद कहीं है ही नहीं आनंद की तलाश में जीवात्मा इधर-उधर घूमता रहता है इसके पास जाता है वहां जाता है कहीं हमको आनंद मिल जाए कहीं सुख मिल जाए फिर आनंद कहां मिलता है वस्तुओं में लोग समझते हैं कि वस्तुओं में आनंद होता है जैसे खाने पीने की चीजों में लोग समझते हैं बड़ा आनंद आया आज तो साहब मिठाई मिली आज तो नमकीन मिला कचौड़ी मिली यह जो है यह आनंद है नहीं यह आनंद नहीं है यह तो संवेदना है आदमी की जीभ का जायका है और यह स्थाई नहीं हो सकता जितनी देर तक आपका पेट नहीं भरा है उतने समय तक तो आपके लिए यह भी हो सकता है कि आपको खाने पीने की जायकेदार चीजें मिले लेकिन वह तो क्षणिक हुई न दूसरी तरह की चीजें जैसे आंखों से कोई दृश्य देखना है तो आप थोड़े समय ही तो देखेंगे सिनेमा कितने समय तक देखेंगे बताइए दो ढाई घंटे में सिर घूमने लगेगा और आंखें आपकी खराब होने लगेंगी कितनी देर बैठेंगे सिनेमा में ज्यादा देर तक नहीं बैठ सकते कामवासना है कामवासना है कितनी देर का सुख होता है कुछ मिनटों का और कुछ सेकंडों का सुख होता है उसके बाद में बाद में तो वही बातें बड़ी बुरी मालूम होने लगती है मालूम होने लगती हैं आनंद उस चीज का नाम है जो इंद्रियों से ताल्लुक नहीं रखता बल्कि जीवात्मा से ताल्लुक रखता है जीवात्मा का आनंद किस तरीके से मिल सकता है इसका एक ही उत्तर है और एक ही जवाब है क्या उत्तर है आदमी के भीतर मोहब्बत मोहब्बत का एक दूसरा नाम आनंद है उसी का नाम प्यार है उसी का नाम प्रसन्नता है उसी का नाम उत्साह है उसी का नाम उल्लास है उसी का नाम उसी का नाम भाव संवेदना है यह सब प्यार के ऊपर टिका हुआ है आपने देखा न आप प्यार जिस चीज को खूब करते हैं किसको करते हैं प्यार आप बताइए अपनी को प्यार करते हैं आप की साइकिल है आप प्यार करते हैं न उसी साइकिल के स्टैंड पर इतनी सारी साइकिले रखी हुई है किसी में छेद हो गया है कोई धूप में पड़ी हुई है आप अपनी साइकिल की फिक्र है कि हम को लेकर चलना चाहिए जब तक कोई मोटर आपकी है तब तक तो आप ख्याल है उसकी मरम्मत होनी चाहिए कोई बच्चा उसको छूने लगता है आप भगा देते हैं लेकिन पड़ोसियों की मोटरें खड़ी हों तब गैरेज में मोटरें खड़ी हो तब बस स्टैंड पर मोटरें खड़ी हो तब तब आपको क्या लेना देना जो चीज अपनी है केवल वही प्यारी लगती है और प्यार जहां होता है वही खुशी का वायरस होता है

39722 views
Like
Share
Comment




अखण्ड-ज्योति से




आज साधन और संपत्ति को देखकर किसी मनुष्य की महत्ता का अनुमान लगाया जाता है। परन्तु अनुमान लगाने की यह प्रणाली गलत है। धन स्थूल वस्तु है-कालचक्र का एक ही झटका लगने पर, जरा सी देर में वह नष्ट हो सकता है। अग्निकाण्ड, बाढ़, चोरी, घाटा, अकाल, उपद्रव, आक्रमण या किसी अन्य दुर्घटना के आने पर बड़े बड़े लखपति, करोड़पति भिखारी बन जाते हैं। ऐसी अस्थिर चीज का कुछ अधिक संग्रह हो जाना कोई ऐसी बात नहीं है जिस पर कोई आदमी अभिमान करे या उसको महत्व दिया जाय।
ऐसा भी हो सकता है कि कोई आदमी चोरी से, जुए से, सट्टे से, लाटरी से, बेईमानी से, दान से, उत्तराधिकार या किसी अन्य आकस्मिक घटना से धनी हो जाय। क्या ऐसे धनवान को केवल इसीलिए महापुरुष समझा जा सकता है? कि उसके पास अधिक मात्रा में धन जमा है?

दूर से देखने वालों को ऐसा प्रतीत होता है कि जिनके पास धन जमा है वे जरूर सुखी रहते होंगे, पर वस्तु स्थिति ऐसी नहीं है। अधिकाँश धनी ऐसे हैं जो निर्धनों की अपेक्षा अधिक चिन्तित, भयभीत, दुखी, बेचैन, उद्विग्न एवं अशान्त रहते हैं उनका शारीरिक तथा मानसिक स्वास्थ्य जर्जर हो जाता है। चमकदार कागज के घोड़े को देखकर बालक बड़े प्रसन्न होते हैं, उसे असली घोड़े से ज्यादा सुन्दर, मूल्यवान और आकर्षक समझते हैं, पर बुद्धिमान लोग जानते हैं कि यह आकर्षण बे मतलब हैं। कागज का घोड़ा जगह घेरे खड़ा है पर इससे कोई लाभदायक कार्य सिद्ध नहीं हो सकता, कोई प्रयोजन हल नहीं हो सकता। यही बात धन के संबंध में है। अधिक वस्तुएं, साधन, जायदाद सम्पत्ति होने मात्र से कोई व्यक्ति सुखी नहीं हो सकता, चाहे बाहर से देखने वालों को वह कितना ही अमीर क्यों न दिखाई पड़ता हो। रेशमी कपड़े, स्वादिष्ट भोजन, आलीशान कोठी, बढ़िया मोटर होते हुए भी उनके आन्तरिक सुख से वृद्धि नहीं हो सकती।

सुख धन के ऊपर निर्भर नहीं, वरन् सद्ज्ञान के ऊपर, आत्म निर्माण के ऊपर निर्भर है जिसने आत्मज्ञान से अपने दृष्टिकोण को सुसंस्कृत कर लिया है वह चाहे साधन सम्पन्न हो चाहे न हो, हर हालत में सुखी रहेगा। परिस्थितियाँ चाहे कितनी ही प्रतिकूल क्यों न हों वह प्रतिकूलता में अनुकूलता का निर्माण कर लेगा। उत्तम गुण और उत्तम स्वभाव वाले मनुष्य बुरे लोगों के बीच रहकर भी अच्छे अवसर प्राप्त कर लेते हैं। महात्मा इमरसन कहा करते थे कि मुझे नरक में भेज दिया जाय तो मैं वहाँ भी अपने लिए स्वर्ग बना लूँगा। विचारवान् मनुष्यों के लिए सचमुच ही इस संसार में कहीं कोई कठिनाई नहीं है, शोक, दुख, चिन्ता और भय का एक कण भी उन तक नहीं पहुँच पाता। प्रत्येक दशा में वे प्रसन्नता, सन्तोष और सौभाग्य अनुभव करते रहते हैं।

सद्ज्ञान द्वारा, आत्म निर्माण करने का लाभ धन जमा करने के लाभ की अपेक्षा अनेक गुना महत्वपूर्ण है। महात्मा सुकरात के पास एक बार एक धनी गया और पूछा कि मैं अपने धन का सबसे अच्छा उपयोग क्या कर सकता हूँ सुकरात ने कहा- “मेरा कहना माने तो तू अपनी थैलियों को अपनी खोपड़ी के अन्दर उड़ेल ले। उनके कहने का तात्पर्य यह था कि इस धन के बजाय तू सद्ज्ञान के संचय लिए प्रयत्न कर। सचमुच जो जितना ही ज्ञानवान है वह उतना ही बड़ा धनी है। यही कारण है कि निर्धन ब्राह्मण को अन्य सम्पन्न वर्णों की अपेक्षा अधिक सम्मान दिया जाता है।

मनुष्य की सबसे बड़ी पूँजी ज्ञान है। इसलिए अखण्ड-ज्योति के पाठको! वास्तविकता को समझो धन के पीछे दिन-रात पागल रहने की अपेक्षा सद्ज्ञान का संचय करो। आत्मनिर्माण की ओर अपनी अभिरुचि को मोड़ो।

अखण्ड ज्योति जुलाई 1947

40068 views
Like
Share
Comment



×
Popup Image
❮ ❯
Like Share Link Share Download
Newer Post Home Older Post


View count

226619509



Archive

About Shantikunj

Shantikunj has emerged over the years as a unique center and fountain-head of a global movement of Yug Nirman Yojna (Movement for the Reconstruction of the Era) for moral-spiritual regeneration in the light of hoary Indian heritage.

Navigation Links
  • Home
  • Literature
  • News and Activities
  • Quotes and Thoughts
  • Videos and more
  • Audio
  • Join Us
  • Contact
Write to us

Click below and write to us your comment and input.

Go

Copyright © SRI VEDMATA GAYATRI TRUST (TMD). All rights reserved. | Design by IT Cell Shantikunj