• News
  • Blogs
  • Gurukulam
English हिंदी
  • About Us
    • Patron Founder
    • Gayatri Teerth Shantikunj
    • Mission Vision
    • Present Mentor
    • Blogs & Regional sites
    • DSVV
    • Organization
    • Our Establishments
    • Dr. Chinmay Pandya - Our pioneering youthful representative
  • Initiatives
    • Spiritual
    • Environment Protection
    • Social Development
    • Education with Wisdom
    • Health
    • Corporate Excellence
    • Disaster Management
    • Training/Shivir/Camps
    • Research
    • Programs / Events
  • Read
    • Books
    • Akhandjyoti Magazine
    • News
    • E-Books
    • Events
    • Gayatri Panchang
    • Geeta Jayanti 2023
    • Motivational Quotes
    • Lecture Summary
  • Spiritual Wisdom
    • Thought Transformation
    • Revival of Rishi Tradition
    • Change of Era - Satyug
    • Yagya
    • Life Management
    • Foundation of New Era
    • Gayatri
    • Indian Culture
    • Scientific Spirituality
    • Self Realization
    • Sacramental Rites
  • Media
    • Social Media
    • Video Gallery
    • Audio Collection
    • Photos Album
    • Pragya Abhiyan
    • Mobile Application
    • Gurukulam
    • News and activities
    • Blogs Posts
    • Live
    • Downloads
    • Yug Pravah Video Magazine
  • Contact Us
    • India Contacts
    • Global Contacts
    • Shantikunj - Headquarter
    • Join us
    • Write to Us
    • Spiritual Guidance FAQ
    • Magazine Subscriptions
    • Shivir @ Shantikunj
    • Contribute Us
  • Login

Media   >   Social Media   >   Daily Update

Wednesday 29, July 2026

×

VIDEO
अमृतवाणी:- गुरु कृपा पाने का रहस्य क्या है? Guru Kripa Paane Ka Rahasya kya Hain ? परम पूज्य गुरुदेव पं श्रीराम शर्मा आचार्य जी

अमृतवाणी:- गुरु कृपा पाने का रहस्य क्या है? Guru Kripa Paane Ka Rahasya kya Hain ? परम पूज्य गुरुदेव पं श्रीराम शर्मा आचार्य जी

4172 views
Like
Share
Comment



VIDEO
क्या हम कर्मकांड का अर्थ गलत समझ बैठे हैं? Kya Hum Karmkaand ka Arth Galat Samajh Baithe Hain? अमृत सन्देश:- परम पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी

क्या हम कर्मकांड का अर्थ गलत समझ बैठे हैं? Kya Hum Karmkaand ka Arth Galat Samajh Baithe Hain? अमृत सन्देश:- परम पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी

4165 views
Like
Share
Comment



IMAGE
Image वीडियो अपडेट
1 likes 4844 views 6 shares
Like
Share
Download
Comment
IMAGE
Image अपडेट
1 likes 4842 views
Like
Share
Download
Comment

गायत्रीतीर्थ शांतिकुंज, नित्य दर्शन

गायत्री माता
Image गायत्री माता
4 likes 4872 views 3 shares
Like
Share
Download
Comment
गुरुजी माताजी
Image गुरुजी माताजी
3 likes 4877 views 1 shares
Like
Share
Download
Comment
चरण पादुका
Image चरण पादुका
3 likes 4869 views
Like
Share
Download
Comment
सजल श्रद्धा - प्रखर प्रज्ञा (समाधि स्थल)
Image सजल श्रद्धा - प्रखर प्रज्ञा (समाधि स्थल)
3 likes 4860 views 5 shares
Like
Share
Download
Comment
शिव मंदिर - शांतिकुंज
Image शिव मंदिर - शांतिकुंज
3 likes 4853 views
Like
Share
Download
Comment
हनुमान मंदिर - शांतिकुंज
Image हनुमान मंदिर - शांतिकुंज
3 likes 4850 views
Like
Share
Download
Comment

आज का सद्चिंतन (बोर्ड)

Image हिंदी बोर्ड
2 likes 4880 views 7 shares
Like
Share
Download
Comment
Image हिंदी बोर्ड
2 likes 4868 views 3 shares
Like
Share
Download
Comment
Image अंग्रेजी बोर्ड
2 likes 4865 views
Like
Share
Download
Comment
Image अंग्रेजी बोर्ड
2 likes 4861 views
Like
Share
Download
Comment

आज का सद्वाक्य

Image हिंदी सद्वाक्य
2 likes 4883 views 2 shares
Like
Share
Download
Comment
Image हिंदी सद्वाक्य
2 likes 4874 views 3 shares
Like
Share
Download
Comment
Image अंग्रेजी सद्वाक्य
2 likes 4868 views
Like
Share
Download
Comment
Image अंग्रेजी सद्वाक्य
2 likes 4865 views
Like
Share
Download
Comment



नित्य शांतिकुंज वीडियो दर्शन


!! शांतिकुंज दर्शन 29 July 2026!! गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार !!

2 likes 4186 views 1 shares
Like
Share
Comment



भगवान से जुड़ने का सही मार्ग ? Bhagwan Se Judne ka Sahi Maarg परम पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य

1 likes 4174 views
Like
Share
Comment







परम् पूज्य गुरुदेव का अमृत संदेश





अखण्ड-ज्योति से



तपश्चर्या और योगाभ्यास दोनों की जोड़ी है तपश्चर्या का अर्थ है निखार देना और योग योग का अर्थ योग का अर्थ है किसी के साथ में जोड़ देना भगवान के साथ जोड़ देना उपासना उसी का नाम है उपासना उसी का नाम है उपासना का अर्थ छोड़ देना होता है हम किसी के साथ में जोड़ देते हैं अपने नल को टंकी के साथ में जोड़ देते हैं अपने बल्ब को बिजली घर के साथ में जोड़ देते हैं यह जोड़ देना इसी का नाम योग है अपने आप को अपने संयम को तपा देने का नाम गला देने और झुका देने और मिटा देने का नाम तप है तप और योग इन दोनों की जोड़ी है इन दोनों की जोड़ी है अध्यात्मिक प्रगति के मार्ग पर दोनों कदम साथ साथ बढ़ाने पड़ते हैं लेफ्ट राइट की तरीके से एक पैर से आप चलें तब तब लंबा लंबा सफर पूरा नहीं कर सकेंगे एक पहिए की गाड़ी पर चलें तब तब आप सर्कस में एक चक्कर तो काट भी सकते हैं लेकिन आप लंबा सफर नहीं कर पाएंगे एक पहिए की गाड़ी किस तरीके से चलेगी एक पहिए की गाड़ी नहीं चलती एक हाथ से ताली बजती नहीं है दोनों की जरूरत पड़ती है

1 likes 4060 views
Like
Share
Comment


पूर्व मीमाँसा में भगवान जैमिनी मुनि ने धर्म का लक्षण निम्न प्रकार किया है:-
वोदना लक्षणों धर्मः॥ पू.मी. 1। 2

धर्म का लक्षण प्रेरणा है। ‘अर्थात् अपनी अवस्था उच्चतर करने के लिए जो आँतरिक स्फूर्ति होती है, वह प्रेरणा है। जब यह प्रेरणा मन में उत्पन्न हो जाती है, तब मनुष्य कर्म के लिए प्रवृत्त होता है, पश्चात कर्म करता है और अपनी उन्नति की सिद्धि प्राप्त करता है। यह सब जिस प्रेरणा से होता है, वह धर्म की प्रेरणा है। अपनी स्थिति सुधारने का पुरुषार्थ करने की ओर प्रबल प्रवृत्ति होना ही धार्मिक प्रवृत्ति का लक्षण है। धार्मिक वाङ्मय में ‘स्वर्ग और नरक’ इन दो कल्पनाओं से मनुष्य की दो अवस्थाएं बतायी हैं। साधारण लोग समझते हैं कि स्वर्ग ऊपर है, नरक नीचे और हम बीच में हैं। अर्थात् तीन मंजिल का यह मकान है, बीच की मंजिल पर भूलोक है, ऊपर का मंजिल स्वर्गलोक है और निचला मंजिल नरक के समान परन्तु यह वास्तविक कल्पना नहीं है, स्वर्ग और नरक की वास्तविक कल्पना होने से ही धर्म की वास्तविक बात जानी जा सकती है।

“नर” शब्द मनुष्य वाचक है और उसको अल्पार्थक ‘क’ प्रत्यय लग कर ‘नर-क’ शब्द हुआ है, इसका मूल अर्थ ‘अल्प मनुष्य, छोटा आदमी, नीच मानव’ है। इसके पर्याय शब्द ये हैं।
‘नारकस्तु नर को निरयों दुर्गति॥ प्रमर 1।9।1

नारक, नरक, निरय, दुर्गति ये चार शब्द नरक वाचक हैं। इन शब्दों में ‘दुर्गति’ शब्द दुष्ट अवस्था का वाचक स्पष्ट है। ‘निरय’ शब्द भी नीच अवस्था का द्योतक है। ‘नरक’ शब्द का अर्थ ‘नीच मनुष्य’ ऊपर दिया ही है। इसी प्रकार ‘नार-क’ शब्द का अर्थ ‘नीच मनुष्य समाज’ है, क्यों कि (नराणाँ समूहों नारं) मनुष्य संघ का ही नाम ‘तार’ है नरक वाचक ये शब्द मनुष्य की पतित अवस्था ही बता रहे हैं। मनुष्य की दुर्गति हीन अवस्था, पतित अवस्था, नीच स्थिति, सामाजिक अधोगति, राष्ट्रीय कष्टमय अवस्था आदि भाव ‘नरक’ शब्द में है। तात्पर्य पृथ्वी की निचली मंजिल का नाम नरक नहीं है और भूमि के नीचे कोई मंजिल है भी नहीं, परंतु मनुष्यों की पतित अवस्था का नाम ही नरक है, जिस अवस्था में रहने से मनुष्य हीन समझा जाता है, वह अथवा नरक शब्द बता रहा है। धर्म प्रेरणा लक्षण होने से धर्म मनुष्य को ऐसी उच्च प्रेरणा करता है कि मनुष्य का पतन न हो और मनुष्य नरक की दुर्गति में न गिरे। धर्म का यही कार्य है कि वह मनुष्य के सामने उच्च आदर्श सदा रखे और कभी उसको गिरने न दे !

उक्त प्रकार नरक की ठीक कल्पना हो गई, तो स्वर्ग की कल्पना होने में देरी नहीं लगेगी। ब्रह्माण्ड ग्रंथों में इसका निर्वचन निम्न प्रकार आता है-
स्वः, स्वर, सु-वर, सुवर्ग। (ब्राह्मण निर्वचन)

अर्थात् (सु-वर्ग) उत्तम वर्ग ही स्वर्ग लोक है। वर्ग शब्द समाजवाचक किंवा संधवाचक है। उत्तम झुँड, उत्तम संघ, श्रेष्ठ जमाव, उच्च समाज आदि भाव ‘सु-वर्ग’ शब्द बता रहा है। ‘सु-वर’ शब्द ‘उत्तम उच्च अवस्था’ का आशय व्यक्त करता है। ‘स्व-र’ शब्द ‘अपना प्रकाश’ अथवा अपना प्रभाव बता रहा है, और वही भाव अर्थात् वही आत्मत्व का भाव ‘स्वः’ शब्द में है। इसका तात्पर्य यह है कि ‘अपने उच्च प्रभाव का अनुभव’ स्वर्ग में है और ‘अपनी हीन अवस्था की दुर्गति’ ‘नरक’ अवस्था में है। एक अवस्था मानवी श्रेष्ठता की है और दूसरी अधोगति की है। अर्थात् ये दो नाम दो अवस्थाओं के हैं न कि अन्य स्थानाँतर के। ‘नाक’ शब्द स्वर्गवाची है, उसका अर्थ (न + अ + क) नहीं है, दुःख जिस अवस्था में, वह अवस्था स्वर्ग है। दुःख हीन अवस्था किंवा सुखमय अवस्था का नाम स्वर्ग है। सच्चा सुख अपनी उच्च अवस्था में ही होता है। अस्तु इस प्रकार स्वर्ग की मूल कल्पना है।

धर्म प्रेरणा करके मनुष्य में ऐसा पुरुषार्थ करने की इच्छा उत्पन्न करता है कि जिससे वह मनुष्य उच्च और श्रेष्ठ बनता चला जाता है और पतित नहीं होता। इस प्रकार धर्म से स्वर्ग की प्राप्ति होती है और धर्म का पालन न करने से पतित अवस्था का नरक भोगना पड़ता है।
-वैदिक धर्म

अखण्ड ज्योति दिसम्बर 1947

1 likes 3955 views
Like
Share
Comment



×
Popup Image
❮ ❯
Like Share Link Share Download
Newer Post Home Older Post


View count

237016059



Archive

About Shantikunj

Shantikunj has emerged over the years as a unique center and fountain-head of a global movement of Yug Nirman Yojna (Movement for the Reconstruction of the Era) for moral-spiritual regeneration in the light of hoary Indian heritage.

Navigation Links
  • Home
  • Literature
  • News and Activities
  • Quotes and Thoughts
  • Videos and more
  • Audio
  • Join Us
  • Contact
Write to us

Click below and write to us your comment and input.

Go

Copyright © SRI VEDMATA GAYATRI TRUST (TMD). All rights reserved. | Design by IT Cell Shantikunj