Sunday 26, July 2026
संस्कार स्कूल में नहीं माँ की गोद में मिलते हैं। Sanskar School Mein Nahi, Maa ki God Mein Milte Hain परम वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा जी |
मेरा जीवन माताजी का दिया हुआ जीवन हैं | माता जी जन्मशताब्दी 2026
प्रकृति का अनुसरण | Prakrati Ka Anusaran | Complete Book
क्या आज की तीर्थ यात्रा वास्तव में तीर्थ यात्रा है? Kya Aaj Ki Teerth Yatra Vaastav Mein Teerth Yatra Hai? प्रेरणादायक संदेश :- Dr Chinmay Pandya Ji
क्या आपकी पूजा भी बेअसर हो रही है? Kya Aapki Pooja Bhi Beasar Ho Rahi Hai? अमृत सन्देश:- परम पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी
स्वयं सुधरेंगे तो युग बनेगा | Swayam Sudhrenge To Yug Banega परम वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा जी
भगवान को कैसे पायें | Bhagwan Ko Kaise Payen | Pt Shriram Sharma Acharya
26 जुलाई | कारगिल विजय दिवस
क्या आपकी आध्यात्मिकता सिर्फ दिखावा है? Kya Aapki Aadhyatmikta Sirf Dikhawa Hai? अमृत सन्देश:- परम पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी
साधना से सिद्धि | Sadhna Se Siddhi | Dr Chinmay Pandya, Rishi Chintan
गायत्रीतीर्थ शांतिकुंज, नित्य दर्शन
आज का सद्चिंतन (बोर्ड)
आज का सद्वाक्य
नित्य शांतिकुंज वीडियो दर्शन
!!महादेव शिव पार्वती मंदिर शांतिकुञ्ज हरिद्वार 26 July 2026
!! गायत्री_माता_मंदिर Gayatri_Mata_Mandir गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार 26 July 2026
!! देवात्मा हिमालय मंदिर Devatma Himalaya Mandir गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार 26 July 2026
!! परम पूज्य गुरुदेव का कक्ष गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार 26 July 2026
!! अखण्ड दीपक Akhand_Deepak (1926 से प्रज्ज्वलित) चरण पादुका गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार 26 July 2026
!! शांतिकुंज दर्शन 26 July 2026!! गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार !!
!! सप्त ऋषि मंदिर गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार 26 July 2026
!! प्रज्ञेश्वर महादेव मंदिर देव संस्कृति विश्वविद्यालय 26 July 2026
Reel_08 तपस्वी जीवन ही सच्ची साधना है_1.mp4
परम् पूज्य गुरुदेव का अमृत संदेश
प्राचीन काल में तपश्चर्या को बहुत महत्व दिया जाता था विद्यार्थियों के लिए गुरुकुल खुले हुए थे गुरुकुलों में केवल पढ़ाई नहीं होती थी आप यह सोचते हैं केवल पढ़ते रहते थे नहीं वहां तपस्वी जीवन का आरंभ से अभ्यास कराते थे कठिन जीवन का कठोर जीवन का बच्चे गौवें चराते थे बच्चे लकड़ी लाद कर लाते थे बच्चे सब मिलजुल कर के अपने गुरु के आश्रम के खेतों को और बगीचों को रखवाली करते थे उगाते थे इसमें उनकी मेहनत भी लगती थी यह क्या है यह तपश्चर्या है प्राचीन काल में प्रत्येक बच्चे के लिए यही था और आध्यात्मिक जीवन में आध्यात्मिक जीवन में प्रवेश करने वाले को भी यही करना पड़ता था आरण्यक जितने बने हुए थे वह ढलती अवस्था में अपनी आध्यात्मिक उन्नति के लिए निवास करने के लिए आरण्यक बने हुए थे और इन आरण्यकों में क्या होता था आरण्यकों में तपस्वी जीवन जीना पड़ता था निग्रहीत जीवन अनुशासित जीवन अनुशासित अगर आप न जियें तब तब आरण्यक की तप साधना आपके लिए राम नाम और मंत्र और जप सब में काम आ सकती है लेकिन अगर आपने तपस्वी जीवन नहीं जिया विलासिता का जीवन जिया मौज मजे का जीवन जिया और ऐसा जीवन जिया जैसे कि बड़े आदमी और संपन्न और स्वार्थी निष्ठुर जीते रहते हैं फिर आप एक बात यकीन रखिए फिर आप यह ख्याल निकाल दीजिए कि हमको यह पूजा करने से यह लाभ मिल जाएगा भजन करने से यह लाभ मिल जाएगा और ध्यान करने से यह लाभ मिल जाएगा और हमारी कुंडलिनी जग जाएगी आपकी कुछ नहीं जगेगी
अखण्ड-ज्योति से
परमात्मा के अमर पुत्र मनुष्य को असीम अधिकार प्राप्त है। सम्राटों के सम्राट परमात्मा का युवराज मनुष्य ऐसे देवी अधिकारों से सुसम्पन्न बनाया गया है, जिनके द्वारा उसे सृष्टि का मुकुट मणि होने का गौरव प्राप्त है। इन अधिकारों के फलस्वरूप उसे आत्मिक और भौतिक सम्पदाओं एवं समृद्धियों से भरा पूरा होना चाहिए। अनन्त, अखण्ड सुख शान्ति का भोगी होना चाहिए।
परन्तु आज विचित्र दशा है- शैतानी, आसुरी शक्तियों ने मनुष्य को उसके दैवी स्वभाव जन्म सिद्ध अधिकारों से वंचित कर दिया है। अज्ञान, अविवेक, प्रलोभन, भय, नैराश्य एवं संकीर्णता ने उसकी दिव्य दृष्टि का अपहरण करके उसे क्रूर, कुकर्मी, हिंसक, हत्यारा, धूर्त, मूर्ख, पाखंडी एवं मोहग्रस्त बना दिया है। सृष्टि का मुकुट मणि- धर्म को धारण करने वाला, महामानव आज निरीह एवं असहाय की तरह दुख, दरिद्र की असहनीय पीड़ाओं में जकड़ा हुआ तड़प रहा है।
अब हम इस स्थिति में रहने के लिए तैयार नहीं, इस शैतानी षड़यंत्र के विरुद्ध अब हम बगावत का झण्डा उठाते हैं। दुनिया अधिकारों की लड़ाई लड़ रही है, हम भी अपने अधिकारों की आवाज बुलंद करते हैं। जिसने हमें इस प्रकार पराधीन, लुँज पुँज, बना रखा है उसके विरुद्ध समस्त साधनों से लड़ेंगे और अब हम प्रण करते हैं कि अपने जन्मसिद्ध अधिकारों को दैवी गुणों को प्राप्त करके रहेंगे।
अखण्ड ज्योति दिसम्बर 1947
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