Thursday 21, May 2026
वह शक्ति हमें दो दयानिधे, कर्त्तव्य मार्ग पर डट जावें | Vah Shakti Hame Do Dayanidhe
अमृत सन्देश:- क्या सेवा से जीवन बदल सकता है? Power of Service
जो चाहोगे सो पाओगे, प्रेरणादायक कहानी | Jo Chahoge So Paaoge, Motivational Story | Rishi Chintan
गायत्रीतीर्थ शांतिकुंज, नित्य दर्शन
आज का सद्चिंतन (बोर्ड)
आज का सद्वाक्य
नित्य शांतिकुंज वीडियो दर्शन
!! परम पूज्य गुरुदेव का कक्ष गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार 21 May 2026!
!! शांतिकुंज दर्शन 21 May 2026!! गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार !!
!! अखण्ड दीपक Akhand_Deepak (1926 से प्रज्ज्वलित) चरण पादुका गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार 21 May 2026!
कर्तव्य से भागना सबसे बड़ी हार हैं। Kartavya Se Bhaagna Sabse Badi Haar Hai अमृत सन्देश:- परम पूज्य गुरुदेव पं श्रीराम शर्मा आचार्य
परम् पूज्य गुरुदेव का अमृत संदेश
जोधपुर के महाराज एक लड़ाई पर लड़ने के लिए गए थे वहां गए हार हार करके भागे हार करके भागे सेना तो मारी गई राजा अपनी जान बचा कर के जोधपुर के किले में आया किले में आया उसने फाटक के बाहर आवाज लगाई आवाज लगाई कि दरवाजा खोलिए दरवाजा खोलिए क्योंकि उन दिनों लड़ाई झगड़े की बहुत बात थी रानी मालकिन थी रानी के रानी को हुकुम के बिना चौकीदार और पहरेदार फाटक खोल नहीं सकते थे क्योंकि उन दिनों हमले का डर था चौकीदारों ने पहरेदारों ने यह पूछा रानी साहब कोई आवाज आती है राजा साहब की सी मालूम पड़ती है राजा साहब कह रहे हैं हम राजा साहब हैं क्या हम खोल दें किवाड़ें ठहर जाओ जरा भाई साहब अकेले कैसे आ गए आना चाहिए तो जीत के आना चाहिए था राजा साहब आते तो सेना समेत आते जीत कराते बिल्कुल बजाते हुए आते ऐसे कैसे आ गए ऐसी राजा साहब नहीं हो सकते राजा साहब नहीं हो सकते रानी ऊपर चली गई छत पर छत पर चढ़कर के उन्होंने आवाज लगाई आप कौन हैं और क्यों दरवाजा खुलवाना चाहते हैं राजा साहब ने कहा अरे हम राजा साहब हैं यहां के जोधपुर के तुम्हारे पति हैं आप इस तरीके से कैसे आ गए वह कहां गई सेना सेना कहां गई सेना तो गई हमारी हार और आप आपका क्या हुआ हम भाग करके आ गए से ना हार गई सेना मारी गई कप्तान मारे गए और आप जिंदा आ गए नहीं ऐसा नहीं हो सकता जोधपुर का महाराज ऐसा बेहूदा नहीं हो सकता कि आप अकेला भग करके जान छिपाने के लिए आ गए आप हमारे पति नहीं है नहीं हम आपके पति हैं हम कसम खाते हैं आपका मैं विश्वास ही नहीं करती आप जो कोई भी हैं अगर हमारे पति हैं तो आप जाइए वही चाहिए मोर्चे पर जाइए और लड़िए लड़िए अगर आप मारे जाएंगे तो आप की लाश जब आएगी तो मैं फाटक खोलूंगी और आपको गोदी में लेकर के प्यार करूंगी भगोड़े को मैं करूंगी कोई प्यार भगोड़े से भगोड़े से मेरी मोहब्बत हो सकती है हम घर को छोड़कर आ जाएंगे परिवार को छोड़ कर आ जाएंगे गुरु जी आप की शरण में आ जाएंगे आपकी शरण में आ जाएंगे तो फाटक बंद कर दूंगा आप को मारे डंडों के मारे भगा दूंगा चुप बदमाश कहीं का नहीं तो भगोड़े भगोड़ों से क्या करना
अखण्ड-ज्योति से
साधनों का सदुपयोग कर सकने वाली बुद्धिमता को सर्वत्र सराहा जाता है। उसी आधार पर मनुष्य आगे बढ़ते और ऊँचे उठते हैं। हर कोई कुछ न कुछ धन कमाता है और उसके पास पूर्व संचित साधन होते हैं। प्रश्न एक ही रह जाता है कि इसे किसने किस प्रयोजन के लिए, कब, किस प्रकार उपयोग किया? महत्व इस बात का नहीं कि किसने कितना कमाया और कितना उड़ाया। बुद्धिमानी की कसौटी एक ही है कि जो हाथ आया उसे किन प्रयोजनों में किस दृष्टिकोण से खर्चे किया गया। यों तो चोर, उचक्के भी विपुल सम्पत्ति कमाते देखे गये हैं। गरिमा इसी एक बात में है साधनों का सदुपयोग बन पड़ा या नहीं? उन्हें उच्चस्तरीय प्रयोजनों के लिए नियोजित कर सकने का विवेक रहा या नहीं?
वैभव स्व उपार्जित है। पूर्व संचित पुण्य परमार्थ या वर्तमान कौशल पराक्रम के आधार पर उसे अर्जित किया जाता है। इस अपनी कमाई के अतिरिक्त ईश्वर प्रदत्त अनुदान भी मनुष्य के पास कम नहीं हैं। श्रम, समय, मस्तिष्क जैसे साधन हर किसी को प्रायः समान रूप से उपलब्ध हुए हैं। इस उच्च स्तरीय वैभव का सदुपयोग कर सकना और भी बढ़े-चढ़े कौशल का काम है। ऐसे ही कौशल को दूरदर्शी विवेक कहा जाता है। श्रद्धा, प्रज्ञा, निष्ठा उसी के नाम है। ‘ऋतम्भरा मेधा’ के नाम से उसी का अर्चन, अभिवर्धन किया जाता है।
मनुष्य न तो सम्पदाओं की दृष्टि से दरिद्र है न विभूतियों की दृष्टि से असमर्थ। प्रश्न इतना है। कि जो हस्तगत हुआ, उसका उपयोग किस प्रकार बन पड़ा। जो इस कसौटी पर खरा सिद्ध हो सका, समझना चाहिए कि उसका मनुष्य जन्म सार्थक हो गया।
परम पूज्य गुरुदेव पं श्रीराम शर्मा आचार्य
अखण्ड ज्योति 1983 जनवरी
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