• News
  • Blogs
  • Gurukulam
English हिंदी
  • About Us
    • Patron Founder
    • Gayatri Teerth Shantikunj
    • Mission Vision
    • Present Mentor
    • Blogs & Regional sites
    • DSVV
    • Organization
    • Our Establishments
    • Dr. Chinmay Pandya - Our pioneering youthful representative
  • Initiatives
    • Spiritual
    • Environment Protection
    • Social Development
    • Education with Wisdom
    • Health
    • Corporate Excellence
    • Disaster Management
    • Training/Shivir/Camps
    • Research
    • Programs / Events
  • Read
    • Books
    • Akhandjyoti Magazine
    • News
    • E-Books
    • Events
    • Gayatri Panchang
    • Geeta Jayanti 2023
    • Motivational Quotes
    • Lecture Summary
  • Spiritual Wisdom
    • Thought Transformation
    • Revival of Rishi Tradition
    • Change of Era - Satyug
    • Yagya
    • Life Management
    • Foundation of New Era
    • Gayatri
    • Indian Culture
    • Scientific Spirituality
    • Self Realization
    • Sacramental Rites
  • Media
    • Social Media
    • Video Gallery
    • Audio Collection
    • Photos Album
    • Pragya Abhiyan
    • Mobile Application
    • Gurukulam
    • News and activities
    • Blogs Posts
    • Live
    • Downloads
    • Yug Pravah Video Magazine
  • Contact Us
    • India Contacts
    • Global Contacts
    • Shantikunj - Headquarter
    • Join us
    • Write to Us
    • Spiritual Guidance FAQ
    • Magazine Subscriptions
    • Shivir @ Shantikunj
    • Contribute Us
  • Login

Media   >   Social Media   >   Daily Update

Sunday 19, July 2026

×

VIDEO
 कर्मफल का सिद्धांत | Karmphal Ka Siddhant | Dr Chinmay Pandya

कर्मफल का सिद्धांत | Karmphal Ka Siddhant | Dr Chinmay Pandya

1 likes 11490 views 1 comments
Like
Share
Comment



VIDEO
क्या हम शैतान के बहकावे में जी रहे हैं? Kya Hum Shaitaan Ke Behkaave Mein Jee Rahe Hain? अमृत सन्देश:- पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी

क्या हम शैतान के बहकावे में जी रहे हैं? Kya Hum Shaitaan Ke Behkaave Mein Jee Rahe Hain? अमृत सन्देश:- पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी

1 likes 11396 views 1 comments
Like
Share
Comment



IMAGE
Image अपडेट
1 likes 13018 views 1 comments 4 shares
Like
Share
Download
Comment

गायत्रीतीर्थ शांतिकुंज, नित्य दर्शन

गायत्री माता
Image गायत्री माता
3 likes 12999 views 1 comments 4 shares
Like
Share
Download
Comment
गायत्री माता - अखंड दीपक
Image गायत्री माता - अखंड दीपक
2 likes 13253 views 1 comments 1 shares
Like
Share
Download
Comment
चरण पादुका
Image चरण पादुका
2 likes 13214 views 1 comments 1 shares
Like
Share
Download
Comment
गुरुजी माताजी
Image गुरुजी माताजी
2 likes 13177 views 1 comments 5 shares
Like
Share
Download
Comment
सजल श्रद्धा - प्रखर प्रज्ञा (समाधि स्थल)
Image सजल श्रद्धा - प्रखर प्रज्ञा (समाधि स्थल)
2 likes 13139 views 1 comments 2 shares
Like
Share
Download
Comment
परम् पूज्य गुरुदेव व वंदनीय माताजी कक्ष
Image परम् पूज्य गुरुदेव व वंदनीय माताजी कक्ष
2 likes 13118 views 1 comments 2 shares
Like
Share
Download
Comment
परम् पूज्य गुरुदेव व वंदनीय माताजी कक्ष
Image परम् पूज्य गुरुदेव व वंदनीय माताजी कक्ष
2 likes 13100 views 1 comments 1 shares
Like
Share
Download
Comment
परम् पूज्य गुरुदेव व वंदनीय माताजी कक्ष
Image परम् पूज्य गुरुदेव व वंदनीय माताजी कक्ष
2 likes 13077 views 1 comments 2 shares
Like
Share
Download
Comment
परम् पूज्य गुरुदेव व वंदनीय माताजी कक्ष
Image परम् पूज्य गुरुदेव व वंदनीय माताजी कक्ष
2 likes 13048 views 1 comments 1 shares
Like
Share
Download
Comment
परम् पूज्य गुरुदेव व वंदनीय माताजी कक्ष
Image परम् पूज्य गुरुदेव व वंदनीय माताजी कक्ष
2 likes 13026 views 1 comments 1 shares
Like
Share
Download
Comment
शिव मंदिर - शांतिकुंज
Image शिव मंदिर - शांतिकुंज
2 likes 13007 views 1 comments 1 shares
Like
Share
Download
Comment
हनुमान मंदिर - शांतिकुंज
Image हनुमान मंदिर - शांतिकुंज
2 likes 12989 views 1 comments 1 shares
Like
Share
Download
Comment

आज का सद्चिंतन (बोर्ड)

Image हिंदी बोर्ड
2 likes 13285 views 1 comments 5 shares
Like
Share
Download
Comment
Image हिंदी बोर्ड
2 likes 13252 views 1 comments 4 shares
Like
Share
Download
Comment
Image अंग्रेजी बोर्ड
3 likes 13221 views 1 comments
Like
Share
Download
Comment
Image अंग्रेजी बोर्ड
3 likes 13179 views 1 comments
Like
Share
Download
Comment

आज का सद्वाक्य

Image हिंदी सद्वाक्य
3 likes 13288 views 1 comments 5 shares
Like
Share
Download
Comment
Image हिंदी सद्वाक्य
3 likes 13254 views 1 comments 4 shares
Like
Share
Download
Comment
Image अंग्रेजी सद्वाक्य
3 likes 13221 views 1 comments 1 shares
Like
Share
Download
Comment
Image अंग्रेजी सद्वाक्य
3 likes 13195 views 1 comments 1 shares
Like
Share
Download
Comment
लेख
Image लेख
3 likes 13283 views 1 comments 1 shares
Like
Share
Download
Comment



नित्य शांतिकुंज वीडियो दर्शन


!! देवात्मा हिमालय मंदिर Devatma Himalaya Mandir गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार 19 July 2026

2 likes 11544 views 1 comments
Like
Share
Comment



!! शांतिकुंज दर्शन 19 July 2026!! गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार !!

1 likes 11390 views 1 comments
Like
Share
Comment



!! परम पूज्य गुरुदेव का कक्ष गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार 19 July 2026

1 likes 11358 views 1 comments
Like
Share
Comment



!! सप्त ऋषि मंदिर गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार 19 July 2026

1 likes 11351 views 1 comments
Like
Share
Comment



!! महाकाल महादेव मंदिर शांतिकुञ्ज हरिद्वार 19 July 2026

1 likes 11310 views 1 comments
Like
Share
Comment



!!गायत्री_माता_मंदिर Gayatri_Mata_Mandir गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार 19 July 2026!

1 likes 11249 views 1 comments
Like
Share
Comment



!! अखण्ड दीपक Akhand_Deepak (1926 से प्रज्ज्वलित) चरण पादुका गायत्री तीर्थ शांतिकुञ्ज हरिद्वार 19 July 2026

1 likes 11247 views 1 comments
Like
Share
Comment



संघर्ष से निखरता इंसान अमृत सन्देश:- परम पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी

1 likes 11584 views 1 comments 1 shares
Like
Share
Comment







परम् पूज्य गुरुदेव का अमृत संदेश



जो कुछ भी आप क्रिया करते हैं यह सारे के सारे तपश्चर्या से संबंधित हैं तपश्चर्या से संबंधित हैं आपको खान पान के बारे में तपश्चर्या सवेरे उठने के बारे में तपश्चर्या पालथी में बैठने के बारे में तपश्चर्या बाहर कहीं घर से बाहर न जाने के बारे में तपश्चर्या पूरे के पूरे बंधन आपको यहां ऐसा अनुशासन लगाया गया है जिसको आप सोच सकते हैं कि आपको तपश्चर्या कराई जा रही है तप का बड़ा महत्व है आपको इसलिए नहीं कराया जा रहा है कि आप को हैरान किया जाए बल्कि इसलिए कराया जा रहा है कि आप को मजबूत बना दिया जाए तपश्चर्या की आग में तपे बिना आप मजबूत नहीं हो सकते कोई भी आदमी कोई भी आदमी जिसने कठिनाइयों का सामना नहीं किया है सिद्धांतों के लिए और आदर्शों के लिए कष्ट नहीं सहा है वह आदमी मजबूत कैसे हो पाएगा फिर वह बिल्कुल कच्चा रहेगा समय आते ही जब मुसीबत आ जाएगी तो वह भाग खड़ा होगा और अपने संकल्पों सिद्धांतों को छोड़ देगा आपको इस तपश्चर्या में यही कराया जा रहा है आप जानते हैं ना कच्ची धातुओं को कच्ची धातुओं को परिशोधन करने के लिए भट्टी हमें तपाते हैं भट्टी में नहीं तपाएं तब तब कच्ची धातुयें पक्की धातु शुद्ध धातु नहीं बन सकती जमीन में से लोहा निकलता है मिट्टी मिला हुआ लोहा निकलता है आप जैसा लोहा देखते हैं वैसा थोड़ी निकलता है इसको भट्टी में डालना पड़ता है तपाना पड़ता है मिट्टी जल जाती है और साफ सुथरा लोहा बाहर निकल के आ जाता है तब उसमें से और चीजें बनती हैं काम की चीजें अगर ना अगर न तपाएं तब तब फिर लोहा कच्चा रहेगा कोई चीज नहीं बन सकेगी इंटे आप देखते हैं न यह ईंटें क्या हैं मामूली मिट्टी है जो पानी बरसते ही बह जाती है लेकिन जब उसको तपा देते हैं आग में तो ईंट कैसी मजबूत बन जाती है इमारतें बनाते हैं मुद्दतों तक टिकी रहती है पानी यही होता है न जो आप लोग पीते हैं लेकिन अगर इसको आग के ऊपर तपा दें तक तब फिर स्टीम बन जाती है भाप बन जाती है भाप से प्रेशर कुकर चल जाते हैं भाप से रेलगाड़ियां चल जाती है भाप से क्या नहीं हो जाता यह क्या है यह है तपाने का परिणाम रस और भस्में बनती हैं इसमें क्या करना पड़ता है अभ्रक भस्म लोहा भस्म सोना भस्म चांदी भस्म मकरध्वज वगैरह यह सब क्या चीज है यह रासायनिक पदार्थों को जलाकर के गर्म करके तपाने के बाद में उनकी शक्ति को उछाला जाता है और उभारा जाता है यह तपाने की बात हुई सोने को तपाये नहीं तब सोना कच्चा रहेगा कोई कीमत ही नहीं मिले कोई मना करे साहब नहीं तपाने नहीं देंगे तो बाजार में अब जाइए कोई लेगा ही नहीं सोने को तपा देने के बाद में न केवल उसकी चमक बढ़ जाती है बल्कि उसकी मलिनताएं दूर भी हो जाती हैं न केवल दूर हो जाती हैं बल्कि उसकी साख बढ़ जाती है और तपाए हुए सोने का नगद पैसा मिल जाता है बिना तपाए बिना संभव नहीं है आप भी यह आपका व्यक्तित्व भी ऐसा है जो तपाने की अपेक्षा करता है आपको तपना चाहिए और आपको तपाया जाना चाहिए

1 likes 11347 views 1 comments 1 shares
Like
Share
Comment




अखण्ड-ज्योति से



यदि जीवन यापन ठीक तरह किया जाय तथा जीवन-तत्वों को ह्रास से बचाया जाय, तो मनुष्य दीर्घकाल तक जीवन का सुख लूट सकता है। प्रत्येक व्यक्ति को उन खतरों से सावधान रहना चाहिए, जिनसे जीवन शक्ति का ह्रास होता है, सर्वप्रथम मनुष्य की शक्ति का हास करने वाली बात अधिक भोग-विलास है। संसार के समस्त पशु-पक्षियों की प्रजनन शक्ति अत्यन्त परिमित है। वे केवल आनन्द, क्षणिक वासना के वशीभूत होकर रमण नहीं करते, विशेष ऋतुओं में ही प्रजनन कार्य होता है। प्रकृति उन्हें विवश करती है, तब उनका गर्भाधान होता है। आज के मानव समाज ने नारी को केवल वासना तृप्ति का साधन मात्र समझ लिया है। पति-पत्नि के संयोग की मात्रा अनियमित हो रही है। हम संतानोत्पत्ति का उद्देश्य, आदर्श तथा प्रकृति का आदेश नहीं मान रहे हैं। फलतः समाज में आयुष्यहीन, अकर्मण्य, निकम्मे बच्चे बढ़ रहे हैं। इन्द्रियों की चपलता, कामुकता बढ़ रही है। अधिक भोगविलास से मनुष्य निर्बल होते जा रहे हैं। कामुक और कामुकता में लगे रहने वाले जीव या व्यक्तियों के बच्चे कभी बलवान्, आचारवान, संयमी, धीमान, विचारवान् नहीं हो सकते। प्रत्येक वीर्य का बिन्दु शक्ति का बिन्दु है। एक बिन्दु का भी ह्रास शक्ति को नष्ट करना है। यदि शक्ति, जीवन तथा आरोग्य की रक्षा करना चाहते हैं तो भोगविलास से दूर रहिए।

शक्ति का ह्रास अधिक दौड़-धूप से होता है। आधुनिक मनुष्य जल्दी में हैं। उसे हजारों काम हैं। प्रातः से सायंकाल तक वह व्यस्त रहता है। उसका काम ही जैसे समाप्त होने में नहीं आता। बड़े नगरों में तो दौड़-धूप इतनी बढ़ गई है कि दम मारने का अवकाश नहीं मिलता। क्लबों, होटलों में गपशप करता है। आफिस में कार्य करता है, घर के लिए सामान लाता है, बाल-बच्चों को मदरसे भेजता है, अस्पताल से दवाई लाता है। यदि आप व्यापारी हैं तो व्यापार के चक्कर में प्रातः से सायंकाल तक दौड़ धूप करनी है। आज के सभ्य व्यक्ति को शान्ति से बैठकर मन को एकाग्र करने तक का अवसर नहीं मिलता। संसार के कोने-कोने से अशान्ति और उद्विग्नता की चिल्लाहट सुनाई दे रही है। चित्त की चंचलता इतनी बढ़ती जा रही है कि हम क्षुब्ध एवं संवेगशील बन रहे हैं। इस दौड़-धूप में एक क्षण भी शान्ति नहीं? यदि हम इसी उद्विग्न एवं उत्तेजित अवस्था में चलते रहें, तो जीवन में कैसे आनन्द, प्रतिष्ठा एवं शान्ति पा सकते हैं। हमारे चारों ओर का वायुमंडल जब विक्षुब्ध है, तो आत्मा की उच्चतम शक्ति क्योंकर सम्पादन कर सकते हैं। जो व्यक्ति शक्ति संचय करना चाहते हैं, उन्हें चाहिए कि अधिक दौड़−धूप से बचें, केवल अर्थ उत्पादन को ही जीवन का लक्ष्य न समझें, शान्तिदायक विचारों में रमण करें। जिस साधक के हृदय में शान्ति देवी का निवास है, जिसके हृदय में ब्रह्मनिष्ठा एवं संतोष हैं, उसकी मुखाकृति दिव्य आलोक से चमकती है। जो ब्रह्मविचार में लगता है, वह अपने आपको निर्बलता, प्रलोभन, पाप, से बचाता है।

शक्ति के हास का तीसरा कारण हैं अधिक बोलना। जिस प्रकार अधिक चलने से जीवन क्षय होता है, उसी प्रकार अधिक बोलने, बातें बनाने, अधिक भाषण देने, बड़बड़ाने, गाली-गलोज देने, चिढ़कर कांव-कांव करने से लोग फेफड़ों को कमजोर बना लेते हैं। पुनः पुनः तेज आवाज निकालने से फेफड़ों का निर्बल हो जाना स्वभाविक है। यही नहीं, गले में खराश तथा खुश्की से खाँसी उत्पन्न होती है। खाँसी बनी रहने से क्षय रोग होकर मनुष्य मृत्यु को ग्रास होता है। प्रायः देखा गया है कि व्याख्याता, अध्यापक, लेकचरार, पतले-दुबले रहते हैं। यह शक्ति के क्षय का प्रत्यक्ष लक्षण है। अधिक बोलने से शारीरिक शक्ति का हास अवश्यंभावी है। यह अपनी शक्ति का अपव्यय है। अधिक बोलने की आदत से मनुष्य बकवासी बनता है, लोग उसका विश्वास नहीं करते, ढ़पोरशंख कहते हैं। वह प्रायः दूसरों की भली-बुरी-खोटी आलोचना करता है, अनावश्यक बातें बनाता है, निंदा करता है अपनी गंभीरता खो बैठता है, प्रायः ऐसा करने वालों का आदर कम हो जाता है। शक्ति को अपव्यय से बचाने की इच्छा रखने वालों को चाहिए कि मितभाषी बनें मिष्टभाषी बनें। कम बोलें किन्तु जो कुछ बोलें, वह मनोहारी और दूसरों तथा अपने हृदय को प्रसन्न करने वाला हो, सारयुक्त हो, शब्द योजना सुन्दर हो, प्रेम तथा आनन्द का, आदर और स्नेह का परिचायक हो। शक्ति संचय के लिए मितभाषी बनिये। अध्यात्म चिन्तन, पठन-पाठन, अध्ययन, मौन, लिखना, मितभाषी बनने के सुन्दर उपाय हैं।

अखण्ड ज्योति सितम्बर 1947
 

2 likes 11361 views 1 comments
Like
Share
Comment



×
Popup Image
❮ ❯
Like Share Link Share Download
Newer Post Home Older Post


View count

232200028



Archive

About Shantikunj

Shantikunj has emerged over the years as a unique center and fountain-head of a global movement of Yug Nirman Yojna (Movement for the Reconstruction of the Era) for moral-spiritual regeneration in the light of hoary Indian heritage.

Navigation Links
  • Home
  • Literature
  • News and Activities
  • Quotes and Thoughts
  • Videos and more
  • Audio
  • Join Us
  • Contact
Write to us

Click below and write to us your comment and input.

Go

Copyright © SRI VEDMATA GAYATRI TRUST (TMD). All rights reserved. | Design by IT Cell Shantikunj