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विश्व योग दिवस पर गायत्री शक्तिपीठ जमालपुर में योग शिविर का आयोजन जमालपुर, 21 जून। विश्व योग दिवस के अवसर पर गायत्री परिवार ट्रस्ट एवं प्रज्ञा युवा प्रकोष्ठ, जमालपुर के संयुक्त तत्वावधान में गायत्री शक्तिपीठ, जमालपुर परिसर में भव्य योग शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य जनसामान्य को योग,...
उनसे प्यार करो, जिन्हें लोग पतित, गर्हित और हेय समझते हैं। जिन्हें केवल निंदा और भर्त्सना ही मिलती है। जो अपने ऊपर लदे हुए पिछड़ेपन के कारण न किसी के मित्र बन पाते हैं और न जिन्हें कोई प्यार करता है। प्यार करने योग्य वही लोग हैं, जिन्हें स्नेह-सद्भाव देकर तुम अपने को गौरवान्वित करोगे। माँगो मत। चाहो...
प्रौढ़ता को प्राप्त करता हुआ विज्ञान अब उन्हीं निष्कर्षों पर पहुँच रहा है, जिन पर सदियों पूर्व भारतीय तत्त्ववेत्ता ज्योतिर्विद् पहुँच चुके थे। समूचा ब्रह्मांड एक चैतन्य शरीर है, जिसका प्रत्येक स्पंदन हर घटक को प्रभावित करता है, जिसमें पृथ्वी और संबंधित वातावरण, वनस्पति एवं जीवधारी भी सम्मिलित हैं। प...
ज्ञान के दो पक्ष हैं— एक विचारणा, दूसरा संवेदना। विचार मस्तिष्क की देन हैं। वे बाहर से होते हैं; प्रशिक्षण एवं अनुभव के सहारे। भाव भीतर से उठते हैं। वे अंतःकरण के उत्पादन हैं। विचारों से जानकारी तो बढ़ती है और बुद्धि में परिपक्वता आती है, पर उनका प्रभाव अंतस् पर नहीं के बराबर पड़ता है। बहुत पढ़ने और ब...
अध्यात्म और विज्ञान को पिछले दिनों परस्पर विरोधी माना जाता रहा है। नवीनतम शोधें उन्हें पूरक ही नहीं, एकीभूत भी सिद्ध कर रही हैं। चेतना के क्षेत्र में वैज्ञानिक चिंतन का योग अगले दिनों शोध के नए आधार प्रस्तुत करेगा। यह विश्वास किया जाना चाहिए, विज्ञान के बढ़ते हुए चरण पदार्थ की मूलसत्ता की नवीन व्याख्...
“धरती पर जीवनोपयोगी परिस्थितियों का आधार जिन रासायनिक हलचलों और आणविक गतिविधियों पर निर्भर है, वे अंतरिक्ष से आने वाले रेडियो-तरंगों पर अवलंबित हैं। शक्ति के स्रोत उन्हीं में हैं। विविध विधि हलचलों की अधिष्ठात्री इन्हीं को कहना चाहिए। हमारा परिवार— हमारा शरीर— हमारा अस्तित्व सब कुछ प्रकारांतर से इन ...
जमालपुर, 5 जून 2026। विश्व पर्यावरण दिवस के पावन अवसर पर प्रज्ञा युवा प्रकोष्ठ, जमालपुर द्वारा महिला मंडल के सहयोग से काली पहाड़ी, छठ पूजा घाट (नहर परिसर) में एक विशाल वृक्षारोपण अभियान का आयोजन किया गया। पर्यावरण संरक्षण एवं हरित भविष्य के संकल्प के साथ आयोजित इस अभियान में कुल 101 पौधों का रोपण कि...
घर घर में में हम यज्ञ रचाएं, आओ भारत सबल बनाएं इसी कामना से आज बुद्ध पूर्णिमा के पावन पर्व पर अखिल विश्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज (हरिद्वार) के दिशा निर्देश पर जनपद बलरामपुर के पचपेड़वा, गैंसड़ी और तुलसीपुर क्षेत्र में मानव में देवत्व का उदय, धरती पर स्वर्ग का अवतरण और विश्वव्यापी संकट निवारण हेतु...
विज्ञान का तात्पर्य— “प्रकृति के कुछ रहस्यों का उद्घाटन अथवा कुछ उपकरणों का निर्माण कर लेना मात्र नहीं है, वरन् उसकी व्यापकता मानवी दृष्टिकोण को अधिक सुविस्तृत, तथ्यपूर्ण एवं सत्यनिष्ठ बनाने तक चली जाती है।” विज्ञान का उपयोग भौतिक सुख-सुविधाओं के संवर्द्धन अथवा जानकारियों का क्षेत्र बढ़ाने तक सीमित ...
भावी पीढ़ी को मानसिक दिग्भ्रांति से बचाने के लिए यह प्रश्न सुलझाना आवश्यक है। धर्म के गिरते हुए मूल्य को देखकर ऐसा लगता है कि कहीं आने वाली पीढ़ियाँ पूर्णतया पदार्थवादी होकर अपनी आध्यात्मिक शक्तियाँ नष्ट न कर डालें। हमारी तरह से ऐसे विचार दुनिया के अनेक मनीषियों के मस्तिष्क में आए और उन्होंने अपनी-अ...
जिनेवा (स्विट्ज़रलैंड) | 09 जुलाई, 2026 स्विट्ज़रलैंड के जिनेवा में आयोजित AI for Good Global Summit 2026* के अंतर्गत कृत्रिम बुद्धिमत्ता के सुरक्षित, उत्तरदायी एवं मानव-केंद्रित विकास को वैश्विक स्तर पर नई दिशा प्रदान करने हेतु आयोजित *उच्चस्तरीय वैश्विक AI नीति (High-Level AI Policy) के शुभारंभ सम...
जिनेवा (स्विट्ज़रलैंड) | 08 जुलाई, 2026 स्विट्ज़रलैंड के जिनेवा स्थित Octagon में Globethics एवं अखिल विश्व गायत्री परिवार के संयुक्त तत्वावधान में Global Dialogue on AI Governance एवं AI for Good Global Summit 2026 के परिप्रेक्ष्य में आयोजित विशेष Networking Reception में देव संस्कृति विश्वविद्यालय...
जिनेवा (स्विट्ज़रलैंड) | 08 जुलाई, 2026 देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति तथा अखिल विश्व गायत्री परिवार के युवा आइकॉन आदरणीय डॉ. चिन्मय पण्ड्या जी ने इस अंतरराष्ट्रीय पैनल चर्चा में विश्व के प्रतिष्ठित धार्मिक, औद्योगिक एवं प्रौद्योगिकी नेतृत्वकर्ताओं के साथ सहभागिता की। कार्यक्रम का संचालन ...
जिनेवा (स्विट्ज़रलैंड) | 08 जुलाई, 2026 स्विट्ज़रलैंड के जिनेवा स्थित Palexpo Auditorium में आयोजित AI for Good Global Summit 2026 के अंतर्गत “AI as a Global Common Good: What Do Religious and Industry Leaders Think?” विषयक उच्चस्तरीय वैश्विक सत्र में देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति तथा अख...
देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रति-कुलपति एवं अखिल विश्व गायत्री परिवार के युवा प्रतिनिधि आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी ने इंटर-पार्लियामेंटरी यूनियन (IPU) की सेक्रेटरी जनरल सुश्री आंडा फिलिप से सौहार्दपूर्ण भेंट एवं विस्तृत विचार-विमर्श किया। इस दौरान अखिल विश्व गायत्री परिवार के वैश्विक उद्देश्यों,...
सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति आदरणीय डॉ. चिन्मय पण्ड्या जी ने विश्वभर से आए विशेषज्ञों एवं नीति-निर्माताओं के साथ विचार-विमर्श में सहभागिता की। इस अवसर पर International Federation of Red Cross and Red Crescent Societies (IFRC) के महासचिव जगन चपागेन, Geneva C...
जिनेवा (स्विट्ज़रलैंड) | 02 जुलाई, 2026 वैश्विक AI सुरक्षा एवं उत्तरदायी गवर्नेंस पर आयोजित उच्चस्तरीय सम्मेलन में देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति आदरणीय डॉ. चिन्मय पण्ड्या जी की सहभागिता स्विट्ज़रलैंड के जिनेवा स्थित Geneva Centre for Security Policy (GCSP) में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेल...
देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति तथा अखिल विश्व गायत्री परिवार के युवा आइकॉन आदरणीय डॉ. चिन्मय पण्ड्या जी ने इस अंतरराष्ट्रीय पैनल चर्चा में विश्व के प्रतिष्ठित धार्मिक, औद्योगिक एवं प्रौद्योगिकी नेतृत्वकर्ताओं के साथ सहभागिता की। कार्यक्रम का संचालन Globethics के कार्यकारी निदेशक फादी दाऊ ...
जिनेवा (स्विट्ज़रलैंड) | 08 जुलाई, 2026 नैतिक एवं समावेशी कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर वैश्विक सहयोग को सशक्त बनाने हेतु आयोजित नेटवर्किंग संवाद में आदरणीय डॉ. चिन्मय पण्ड्या जी की सहभागिता स्विट्ज़रलैंड के जिनेवा स्थित Octagon में Globethics एवं अखिल विश्व गायत्री परिवार के संयुक्त तत्वावधान में Global D...
जिनेवा (स्विट्ज़रलैंड) | 08 जुलाई, 2026 स्विट्ज़रलैंड के जिनेवा स्थित Palexpo Auditorium में आयोजित AI for Good Global Summit 2026 के अंतर्गत “AI as a Global Common Good: What Do Religious and Industry Leaders Think?” विषयक उच्चस्तरीय वैश्विक सत्र में देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति तथा अख...
विचार क्रांति अभियान
चेतना के उच्च स्तर पर दिव्य उत्कर्ष की ओर प्रेरित करने वाले सामाजिक परिवर्तन, समय की धारा में व्यापक परिवर्तन करके
एक बेहतर विश्व का निर्माण कर रहा है।
नवयुग की गंगोत्री
वेदमूर्ति तपोनिष्ठ पं. श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा लिखित।
एक व्यक्ति द्वारा रचित 3200 पुस्तकें
क्रांतिकारी पुस्तकें आपके जीवन में परिवर्तन लाएंगी।
आपके सम्बन्धों में कायाकल्प स्तर का परिवर्तन
आत्म निर्माण एवं परिवार निर्माण
नये संस्कारों के कर्मकाण्ड द्वारा शिक्षण
जन्म दिवस, विवाह दिवस एवं दीप यज्ञ
सादा जीवन - उच्च विचार . दूसरों के लिए अधिक अपने लिए कम, यही भारतीय संस्कृति की विशेषता रही है.
शान्तिकुंज समयदान और प्रतिभादान की अवधारणा का आदर्श मॉडल है.
समग्र स्वास्थ्य प्रबन्धन पद्धतियाँ
वैकल्पिक चिकित्सा प्राकृतिक आरोग्य प्रदान करती हैं.
स्वस्थ जीवन के वैदिक सूत्र
समग्र स्वास्थ्य - शारीरिक, मानसिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक स्वास्थ्य
गायत्री जप एवं ध्यान के प्रारंभिक चरण द्वारा शुरुआत
गायत्री साधना की ऊर्जा आत्मसात करना
आत्म अनुभूति के लक्ष्य तक पहुँचना
जीवन का परिष्कार - चार अनुशासन आत्मसात करना
साधना (उपासना - जीवन साधना), स्वाध्याय, संयम और सेवा
सामान्य किन्तु प्रभावी 5 चरण
दुष्प्रवृत्तियों के उन्मूलन हेतु और उत्थान के सही चरण (भौतिक एवं आध्यात्मिक उत्थान)
व्यक्तित्व परिष्कार हेतु विभिन्न साधना तथा शिविर
अन्तर्निहित प्रवृत्तियों का शुद्धिकरण। शांतिकुंज में वैज्ञानिक तरीके से प्रदर्शन और व्याख्या की गई।
आध्यात्मिक विकास और आत्मशोधन के लिए व्यक्तिगत मार्गदर्शन। अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न देखें
वैदिक ऋषियों की जीवन परिवर्तनकारी परंपराएँ यहाँ पुनर्जीवित हैं।
1926 से अखंड दीपक के साथ निरंतर गायत्री मंत्र जाप। हजारों लोगों द्वारा दैनिक यज्ञ सुबह के समय एक यादगार दृश्य प्रस्तुत करता है।
गायत्री मंत्र एवं यज्ञ के वैज्ञानिक प्रभावों पर उच्च स्तरीय शोध।
एक स्वतंत्र आध्यात्मिक पत्रिका 1940 से लाखों लोगों के दिमाग को रोशन कर रहा हूँ
DIYA - डिवाइन इंडिया यूथ एसोसिएशन युवा और कॉर्पोरेट कार्यक्रमों के लिए
अपने विचार/टिप्पणियाँ साझा करें आध्यात्मिक चर्चा आरंभ करें

15 वर्ष की आयु में— बसंत पंचमी पर्व सन् 1926 को स्वगृह— आँवलखेड़ा (आगरा, उत्तर प्रदेश, भारत) में पूजास्थल में ही दादागुरु स्वामी सर्वेश्वरानन्द जी के दर्शन एवं मार्गदर्शन के साथ-ही-साथ आत्मसाक्षात्कार हुआ।

सन् 1926 से निरंतर प्रज्वलित दीपक, जिसके सान्निध्य में परम पूज्य गुरुदेव श्रीराम शर्मा आचार्य जी ने 24-24 लक्ष के चौबीस गायत्री महापुरश्चरण संपन्न किए, आज भी इसके बस एक झलक भर प्राप्त कर लेने से ही लोगों को दैवीय प्रेरणा और आंतरिक शक्ति प्राप्त होती है। इसके सान्निध्य में अब तक 2400 करोड़ से भी अधिक गायत्री मंत्र का जप किया जा चुका है।

इसका आरंभ सन् 1938 में पं. श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा किया गया था। पत्रिका का मुख्य उद्देश्य— वैज्ञानिक आध्यात्मिकता और 21वीं शताब्दी के धर्म, अर्थात वैज्ञानिक धर्म को बढ़ावा देना है।

दृढ़ निष्ठा से सतत गायत्री साधना करने से मन (अंतःकरण) तीव्र गति और चामत्कारिक प्रकार से पवित्र, निर्मल, व्यवस्थित और स्थिर होता है, जिससे साधक अपने बाह्य भौतिक जीवन की गंभीर परीक्षाओं एवं समस्याओं से जूझते हुए भी अटल आतंरिक शांति और आनंद की अनुभूति करता है।