अखिल विश्व गायत्री परिवार के आवाहन पर घर घर किया गया यज्ञ
घर घर में में हम यज्ञ रचाएं, आओ भारत सबल बनाएं इसी कामना से आज बुद्ध पूर्णिमा के पावन पर्व पर अखिल विश्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज (हरिद्वार) के दिशा निर्देश पर जनपद बलरामपुर के पचपेड़वा, गैंसड़ी और तुलसीपुर क्षेत्र में मानव में देवत्व का उदय, धरती पर स्वर्ग का अवतरण और विश्वव्यापी संकट निवारण हेतु हजारों घरों में एक साथ गायत्री यज्ञ किया गया. ज्ञातव्य है कि गायत्री परिवार द्वारा प्रत्येक वर्ष बुद्ध पूर्णिमा को एक समय एक साथ करोड़ों घरों में यज्ञ की श्रृंखला 2018 से अनवरत चल रही है.
तुलसीपुर से भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के जनपद बलरामपुर के प्रभारी श्री गुलाबचंद भारती, प्रदीप गोयल,जिला समन्वयक आद. सत्यप्रकाश शुक्ला, शक्तिपीठ व्यवस्थापक श्रीराम भारती, अशरफी लाल , श्रीमती मंजू जायसवाल लखनऊ से प्रज्ञा जायसवाल, ए .के.त्रिपाठी, बलरामपुर से गायत्री परिवार के ट्रस्टी आद. बिजलेश्वरी जी, डॉ.के. के. राना,श्रीमती रीता जायसवाल, एल. बी. सिंह, अवधेश जायसवाल अयोध्या से उमेश मिश्रा, गैंसडी से ब्लॉक प्रभारी राधे गोविंद गुप्ता, जनपद युवा प्रभारी संदीप जायसवाल, माता प्रसाद गुप्ता, सचिन सोनी,गोंडा से कवियत्री सुश्री ज्योतिमा शुक्ला, सिद्धार्थनगर से श्रीमती सविता सिंह, राणा प्रताप सिंह, नौतनवां से श्रीमती निर्मला/भोला जायसवाल, इटवा से श्री द्वारपाल चौरसिया पचपेड़वा से गायत्री परिवार पचपेड़वा के ट्रस्टी संजय कुमार जायसवाल, महिला मंडल पचपेड़वा की प्रभारी श्रीमती मीना श्रीवास्तव,आनंद जायसवाल, कृष्ण कुमार पांडे, श्रीमती सीमा अग्रवाल, श्रीमती कृष्णावती जायसवाल, श्रीमती मंजू/मनोज, शशांक, ऋतिक जायसवाल, श्रीमती सुनीता जायसवाल, दुर्गेश गुप्ता (राजू),श्रीमती आरती जायसवाल,जगदंबा अग्रवाल,नीलू जायसवाल, श्रीमती माया वर्मा श्रीमती सरोज जायसवाल सहित सैकड़ो लोगों ने अपने-अपने घरों मे यज्ञ किया और गायत्री मंत्र तथा महा मृत्युंजय मंत्रो से आहुतियाँ डालीं और वैश्विक संकट निवारण के लिए प्रार्थना की.
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अब दर्शन की बारी है, उसे कुछ करने दिया जाए
विज्ञान का तात्पर्य— “प्रकृति के कुछ रहस्यों का उद्घाटन अथवा कुछ उपकरणों का निर्माण कर लेना मात्र नहीं है, वरन् उसकी व्यापकता मानवी दृष्टिकोण को अधिक सुविस्तृत, तथ्यपूर्ण एवं सत्यनिष्ठ ...
धर्म और दर्शन की उत्क्रांति भी आवश्यक
भावी पीढ़ी को मानसिक दिग्भ्रांति से बचाने के लिए यह प्रश्न सुलझाना आवश्यक है। धर्म के गिरते हुए मूल्य को देखकर ऐसा लगता है कि कहीं आने वाली पीढ़ियाँ पूर्णतया पदार्थवादी होकर अपनी आध्यात्मिक शक्तिया...
धर्म और विज्ञान जुड़वाँ भाई
पिछले दिनों धर्म और विज्ञान को विरोधी माना जाता रहा है। दोनों के तर्क, प्रतिपादन और आधार एकदूसरे से भिन्न समझे जाते रहे हैं। एक को प्रत्यक्षवादी और दूसरे को परोक्षवादी कहकर उन्हें असंबद्ध कहा जाता ...
विज्ञान और धर्म में समन्वय अनिवार्य
पदार्थ के रूप में विज्ञान भी आंतरिक सत्ता का ही तो उद्घाटन करता है। धर्म के क्षेत्र में परमात्मा एक विश्वव्यापक शक्ति है और पदार्थ भी शक्ति के ही कण हैं। सच तो यह है कि शक्ति के अतिरिक्त संसार में ...
धर्म की उपेक्षा से पछतावा ही हाथ लगेगा
जीवन उतना जटिल नहीं है, जितना कि बन गया है या बना दिया गया है। हँसी-खुशी की संभावनाओं से वह भरा-पूरा है। शरीर और मन की संरचना इस प्रकार हुई है कि वह बाहर के तनिक से साधनों की सुविधा प्राप्त हो जाने...
धर्म और विज्ञान को मिलकर चलना होगा
धर्म को पूजा-प्रक्रिया तक और विज्ञान को शिल्प व्यवसाय तक सीमित रखा जाए, तो दोनों की गरिमा बढ़ेगी नहीं, गिरेगी ही। दोनों अपंग-अधूरे रह जाएँगे। इन दोनों का परस्पर पूरक होकर रहना उचित ही नहीं, आवश्यक ...
धर्म और विज्ञान के समन्वय में ही कल्याण है
नर और नारी का कार्यक्षेत्र भिन्न है। नारी गृह-व्यवस्था में संलग्न रहती है। गर्भधारण और शिशुपालन यह दोनों काम उसी को करने होते हैं। नर का कार्यक्षेत्र भिन्न है। वह खेत, दफ्तर, कारखाने आदि में ...
ज्ञान ही नहीं, मनुष्य को धर्म भी चाहिए
आत्मा है या नहीं? इसका उत्तर हाँ और ना में दोनों ही तरह दिया जा सकता है। हाँ, उनके लिए ठीक है, जो ज्ञान के आधार पर सूक्ष्म विषयों पर विचार कर सकने और निष्कर्ष निकाल सकने में समर्थ हैं। ना, उनके लिए...
बुद्धि पर धर्म का अंकुश रखा जाए
चेतना के क्षेत्र में मन और बुद्धि का एक क्षेत्र है और श्रद्धा एवं सुसंस्कारिता का दूसरा। मन भौतिक साधनों के सहारे इंद्रियतृप्ति तथा अहंता की पूर्ति चाहता है। अर्थसंचय तथा बड़प्पन प्रदर्शित करने वाल...
