प्रयागराज महाकुम्भ में 13 जनवरी से प्रारंभ हो रहा है गायत्री परिवार का शिविर
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 13 जनवरी 2025 से प्रारंभ हो रहे विश्व के सबसे बड़े आध्यात्मिक आयोजन महाकुंभ में गायत्री परिवार द्वारा शिविर 13 जनवरी से प्रारंभ होकर 26 फरवरी 2025 तक रहेगा। महाकुम्भ क्षेत्र में सेक्टर 10 में गदा माधव मार्ग पर गायत्री परिवार का शिविर लगाया गया है। शिविर में मिशन से जुड़ी अनेक गतिविधियां लगातार 45 दिनों तक संचालित रहेंगी। अनेक जनपदों से गायत्री परिजनों को समयदान के लिए आमंत्रित किया गया है। गायत्री परिवार शिविर में प्रतिदिन सुबह 9 बजे से 12 बजे तक 51 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ किया जाएगा। सायं कालीन प्रतिदिन प्रज्ञा पुराण कथा का आयोजन होगा।
देव संस्कृति दिग्दर्शन की प्रदर्शनी भी शिविर में देखने को मिलेगी साथ ही मिशन का व्यसन मुक्ति अभियान व निर्मल गंगा जन अभियान, पर्यावरण संरक्षण को वृहद रूप से मेला क्षेत्र में जन जन तक पहुंचाया जाएगा।
शिविर में मिशन के साहित्यों का पुस्तक मेला भी लगाया जाएगा। शिविर में आदरणीय डॉ चिन्मय पांड्या जी का आगमन भी 26 जनवरी की शाम को होना प्रस्तावित है तदोपरांत 27 जनवरी को सुबह नव निर्मित गायत्री चेतना केंद्र शिवकुटी प्रयागराज में प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में भी प्रमुख रूप से रहेंगे।
देश भर सभी गायत्री परिजनों को आमंत्रित किया जा रहा है कि आप इस आध्यात्मिक आयोजन में आवश्य प्रतिभाग करें और शिविर में भी जरूर पधारें आप सभी का हार्दिक स्वागत है।
शिविर की प्रमुख विशेषताएं -
● विराट पुस्तक मेला
● देव संस्कृति दिग्दर्शन प्रदर्शनी
● 51 कुण्डीय यज्ञ एवं संस्कार (सुबह 9 से 12)
● निशुल्क संस्कार शाला का आयोजन
● प्रज्ञा पुराण कथा (सायं 3 से 6)
● व्यसन मुक्त भारत का महाअभियान
● निर्मल गंगा एवं पर्यावरण संरक्षण का महाअभियान
● समयदानी परिजनों की आवासीय व्यवस्था
Recent Post
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 157):आत्मीयजनों से अनुरोध एवं उन्हें आश्वासन
कहने को गायत्री परिवार, प्रज्ञा परिवार आदि नाम रखे गए हैं और उनकी सदस्यता का रजिस्टर तथा समयदान-अंशदान का अनुबंध भी है, पर वास्तविकता दूसरी ही है, जिसे हम सब भली भाँति अनुभव भी करते हैं। वह है&mdas...
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 156):आत्मीयजनों से अनुरोध एवं उन्हें आश्वासन
साधना से उपलब्ध अतिरिक्त सामर्थ्य को विश्व के मूर्द्धन्य वर्गों को हिलाने-उलटने में लगाने का हमारा मन है। अच्छा होता सुई और धागे को आपस में पिरो देने वाले कोई सूत्र मिल जाते; अन्यथा सर्वथा अपरिचित ...
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 155):तीन संकल्पों की महान् पूर्णाहुति
हमने जैसा कि इस पुस्तक में समय-समय पर संकेत किया है। जैसे हमारे बॉस के आदेश मिलते रहे हैं, वैसे ही हमारे संकल्प बनते, पकते व फलित होते गए हैं। सन् 1986 वर्ष का उत्तरार्द्ध हमारे जीवन का महत्त्वपूर्...
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 154): जीवन के उत्तरार्द्ध के कुछ महत्त्वपूर्ण निर्धारण
परिवर्तन और निर्माण दोनों ही कष्टसाध्य हैं। भ्रूण जब शिशुरूप में धरती पर आता है, तो प्रसवपीड़ा के साथ होने वाला खून-खच्चर दिल दहला देता है। प्रस्तुत परिस्थितियों के दृश्य और अदृश्य दोनों ही पक्ष ऐसे...
विशिष्ट सामायिक चिंतन: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (ए.आई.) एवं शिक्षा
आज जीवन के हर क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता अर्थात ए०आई० (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) का बोलबाला है। ए०आई० समाचार की सुर्खियों से आगे जीवन के हर पक्ष का हिस्सा बनती जा रही है। स्वास्थ्य, कृषि, बैंकिं...
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 153): जीवन के उत्तरार्द्ध के कुछ महत्त्वपूर्ण निर्धारण
कार्यक्रमों में प्रचारात्मक, रचनात्मक और सुधारात्मक अनेक कार्य हैं, जिन्हें घर से बाहर रहते हुए परिस्थितियों के अनुरूप कार्यान्वित किया जा सकता है। प्रचारात्मक स्तर के कार्य— 1. झोला पुस्तकाल...
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 152): जीवन के उत्तरार्द्ध के कुछ महत्त्वपूर्ण निर्धारण
माना कि आज स्वार्थपरता, संकीर्णता और क्षुद्रता ने मनुष्य को बुरी तरह घेर रखा है, तो भी इस धरती को वीर विहीन नहीं कहा जा सकता। 60 लाख साधु-बाबा यदि धर्म के नाम पर घर-बार छोड़कर मारे-मारे फिर सकते हैं...
विज्ञान को शैतान बनने से रोकें:अनियंत्रित प्रगति अर्थात महामरण की तैयारी
सामान्य व्यक्ति का मस्तिष्क विकृत हो तो वह थोड़े ही व्यक्तियों का अहित कर सकता है। उसी तरह की दुर्बुद्धि वाले लोगों का एक समूह निकल पड़े, तो हानि की सँभावनाएँ निश्चित बढ़ती हैं। किंतु यदि यही रोग र...
होली
होली विशेषांक— 4
पुराणकालीन, आदर्शसत्याग्रही, भक्त प्रह्लाद के दमन के लिए हिरण्यकश्यप के छल-प्रपंच सफल न हो सके। उसे भस्म करने के प्रयास में होलिका जल मरी और प्रहलाद तपे कंचन बन गए। ख...
अपनों से अपनी बात- होली का संदेश
होली विशेषांक— 3
मातृभूमि की धूलि मस्तक पर लगाकर देशभक्ति की प्रतिज्ञा लेने का महापर्व है— होली। यह असमानता के अभिशाप को जला देने का पर्व भी है। यह पर्व यह संदेश देता है कि आर्थिक...
