AWAKENING
कृपा कथा : एक शिष्य की कलम से । भक्ति की निर्झरिणी फूटती थी वंदनीया माता जी के गीतों से
"मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई.." — मीराबाई की ये अमर पंक्तियाँ अनन्य कृष्ण-भक्ति, विरह और आत्मविसर्जन का साक्षात प्रतीक हैं। कहा जाता है कि मीरा जब गाती थीं, तो उनके भावों के वशीभूत होकर स्वयं नटवर नागर थिरकने लगते थे। युग बीत गए, आज भी ये भजन गाए जाते हैं, किंतु वह 'मीरा सा अंतस' और वह 'अगाध भाव' दुर्लभ हो गया है।
किंतु, मैं स्वयं को उन विरले सौभाग्यशाली व्यक्तियों में गिनता हूँ, जिन्हें साक्षात एक ऐसी दिव्य चेतना के समक्ष बैठने का अवसर मिला, जिनके हृदय से अपने आराध्य के लिए भक्ति की निर्झरिणी फूटती थी। वे थीं—परम वंदनीया माता जी।
उन दिनों मैं माता जी के 'प्रज्ञा-गीतों' की रिकॉर्डिंग करने वाली टीम का एक सदस्य था। जब माता जी रिकॉर्डिंग के लिए गीत की पंक्तियाँ गुनगुनाती थीं, तो वे केवल गा...
